<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" version="2.0"><channel><title>Just 36 News Feed</title><link>https://just36news.com</link><description>Just 36 News Feed Description</description><item><title>सेप्टिक टैंक बना मौत का गड्ढा, जहरीली गैस से तीन मजदूरों की मौत, रेस्क्यू से पहले खत्म हुई सांसें</title><link>https://just36news.com/septic-tank-turns-into-death-trap,-three-laborers-die-from-toxic-gas,-breathed-their-last-before-rescue</link><description>नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के मुंडका इंडस्ट्रियल एरिया में शुक्रवार को एक दर्दनाक हादसे में तीन लोगों की जान चली गई। फैक्ट्री परिसर में स्थित सेप्टिक टैंक के भीतर जहरीली गैस की चपेट में आने से तीनों की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, सबसे पहले एक व्यक्ति किसी काम के सिलसिले में सेप्टिक टैंक के अंदर उतरा था। उसके बाहर नहीं आने पर दो अन्य लोग उसे बचाने के लिए टैंक में गए, लेकिन वे भी जहरीली गैस की चपेट में आ गए। देखते ही देखते तीनों बेहोश हो गए और उनकी मौत हो गई।
घटना की सूचना मिलते ही दिल्ली फायर सर्विस (DFS) की टीम मौके पर पहुंची और तत्काल बचाव अभियान शुरू किया। काफी मशक्कत के बाद तीनों को टैंक से बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। मृतकों की पहचान 38 वर्षीय अरुण, 32 वर्षीय संदीप और 42 वर्षीय चांद के रूप में हुई है।
दिल्ली फायर सर्विस के अधिकारियों ने बताया कि दोपहर करीब 12:03 बजे कंट्रोल रूम को सूचना मिली थी कि मुंडका इंडस्ट्रियल एरिया स्थित एक फैक्ट्री के सेप्टिक टैंक में कुछ लोग फंस गए हैं। सूचना मिलते ही दो दमकल वाहनों को रवाना किया गया। हालांकि रास्ते में भारी ट्रैफिक होने के कारण राहत कार्य प्रभावित हुआ, जिसके बाद वैकल्पिक मार्ग से टिकरी की ओर से एक अतिरिक्त टीम भेजी गई।रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा होने के बाद तीनों को बाहर निकाला गया, लेकिन चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। फिलहाल पुलिस और संबंधित एजेंसियां हादसे के कारणों की जांच कर रही हैं। शुरुआती जांच में आशंका जताई जा रही है कि सेप्टिक टैंक के भीतर जहरीली गैस जमा होने के कारण यह हादसा हुआ। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि टैंक में उतरने से पहले आवश्यक सुरक्षा मानकों और उपकरणों का पालन किया गया था या नहीं।

</description><guid>septic-tank-turns-into-death-trap,-three-laborers-die-from-toxic-gas,-breathed-their-last-before-rescue</guid><pubDate>28-Jun-2026 10:39:35 am</pubDate></item><item><title>राम मंदिर चढ़ावा चोरी: बैंक कर्मचारी भी शामिल, बैंक में होता था रकम का बंटवारा, 8 आरोपी गिरफ्तार</title><link>https://just36news.com/ram-temple-offerings-stolen:-bank-employees-involved-in-distribution-of-funds-at-bank-8-arrested</link><description>अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए और चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। अब सूत्रों के हवाले से जानकारी मिली है कि मंदिर के चढ़ावे की रकम को ट्रस्ट कार्यालय से बैंक तक पहुंचाने की प्रक्रिया में शामिल कुछ बैंक कर्मचारियों की भी कथित भूमिका जांच के दायरे में है। बताया जा रहा है कि नोटों के बंडल बैंक में जमा करने से पहले या जमा प्रक्रिया के दौरान उनमें से नकदी निकाल ली जाती थी और बाद में बैंक परिसर में चोरी की गई रकम का आपस में बंटवारा किया जाता था।
जानकारी के मुताबिक, राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए नकद दान की गिनती प्रतिदिन दो शिफ्ट में होती है। पहली शिफ्ट दोपहर 2 बजे और दूसरी रात 8 बजे संचालित होती है। करीब 40 कर्मचारी ट्रस्ट के विश्वासपात्र लोगों की निगरानी में चढ़ावे की गिनती करते हैं। इसके बाद ट्रस्ट के प्रतिनिधि, इंटरनल ऑडिट टीम, आउटसोर्सिंग एजेंसी के कर्मचारी और बैंक कर्मी मिलकर पूरी रकम बैंक तक पहुंचाने की प्रक्रिया पूरी करते हैं। जांच में इसी पूरी व्यवस्था के दौरान कथित अनियमितताओं के संकेत मिले हैं।
सूत्रों का दावा है कि इस कथित हेराफेरी में केवल सेवादार ही नहीं, बल्कि बैंक से जुड़े कुछ कर्मचारी भी शामिल हो सकते हैं। हालांकि, इस संबंध में अभी तक जांच एजेंसियों की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। एसआईटी इस पूरे मामले की हर कड़ी की जांच कर रही है और बैंक से जुड़े दस्तावेजों, सीसीटीवी फुटेज तथा संबंधित कर्मचारियों से पूछताछ भी की जा रही है।
राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से भी मामले को गंभीरता से लिया गया है। ट्रस्ट का कहना है कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि जांच पूरी पारदर्शिता से होगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इस मामले में अब तक चंपत राय के पूर्व ड्राइवर टिन्नू यादव समेत 8 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सभी आरोपियों को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) कोर्ट ने न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। फिलहाल एसआईटी की जांच जारी है और एजेंसियां इस कथित चोरी के मास्टरमाइंड तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं। माना जा रहा है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।









</description><guid>ram-temple-offerings-stolen:-bank-employees-involved-in-distribution-of-funds-at-bank-8-arrested</guid><pubDate>27-Jun-2026 1:41:44 pm</pubDate></item><item><title>ट्रैफिक चालान नियमों में बड़े बदलाव, लोक अदालत जाने से पहले भरना होगा 50% जुर्माना</title><link>https://just36news.com/major-changes-in-traffic-challan-rules,-5-fine-to-be-paid-before-going-to-lok-adalat</link><description>नई दिल्ली। ट्रैफिक चालान से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी की जा रही है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत अब वाहन मालिकों को लोक अदालत में चालान से राहत पाने या जुर्माना कम कराने से पहले निर्धारित चालान राशि का 50 प्रतिशत जमा करना अनिवार्य हो सकता है। इसके बाद ही मामला लोक अदालत में सुनवाई के लिए स्वीकार किया जाएगा।
प्रस्तावित नियमों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति चालान को चुनौती देना चाहता है या लोक अदालत के माध्यम से उसका निपटारा कराना चाहता है, तो उसे पहले संबंधित राज्य के ऑनलाइन पोर्टल पर चालान राशि का आधा भुगतान करना होगा। इसके बिना आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा।

45 दिन के भीतर करनी होगी कार्रवाई
नए प्रावधानों के तहत वाहन मालिक को चालान जारी होने के 45 दिनों के भीतर या तो जुर्माना जमा करना होगा या निर्धारित प्रक्रिया के तहत शिकायत दर्ज करनी होगी। इसके बाद ही लोक अदालत में मामले की सुनवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी। प्रस्तावित नियमों में ड्राइविंग लाइसेंस को लेकर भी सख्त प्रावधान शामिल हैं। यदि 1 जनवरी 2026 से किसी चालक के नाम एक वर्ष के भीतर पांच या उससे अधिक ट्रैफिक चालान दर्ज होते हैं, तो उसका ड्राइविंग लाइसेंस स्वतः निरस्त किया जा सकता है।
लंबित चालान वाले वाहन हो सकते हैं ब्लैकलिस्ट
नए नियम लागू होने पर जिन वाहनों के चालान लंबे समय तक लंबित रहेंगे, उन्हें ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में परिवहन विभाग की ऑनलाइन सेवाओं पर भी प्रतिबंध लग सकता है। वाहन स्वामित्व हस्तांतरण, पता परिवर्तन, परमिट, फिटनेस प्रमाणपत्र, हाइपोथेकेशन हटाने जैसी कई सेवाएं तब तक उपलब्ध नहीं होंगी, जब तक लंबित चालानों का निपटारा नहीं किया जाता।
लाइसेंस की वैधता बढ़ाने पर भी विचार


इसके अलावा ड्राइविंग लाइसेंस की वैधता अवधि बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है। वर्तमान में लाइसेंस की वैधता 20 वर्ष या 40 वर्ष की आयु तक (जो पहले हो) होती है। प्रस्ताव है कि इसे बढ़ाकर 50 वर्ष की आयु तक किया जाए, जिससे लोगों को बार-बार आरटीओ कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ें। साथ ही वाहन ट्रांसफर और परमिट नवीनीकरण जैसी सेवाओं को भी अधिक सरल और डिजिटल बनाने की योजना पर काम किया जा रहा है।


</description><guid>major-changes-in-traffic-challan-rules,-5-fine-to-be-paid-before-going-to-lok-adalat</guid><pubDate>24-Jun-2026 11:21:53 am</pubDate></item><item><title>विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगोल रिफाइनरी परियोजना का दौरा कर निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा की</title><link>https://just36news.com/external-affairs-minister-s-jaishankar-visits-mongol-refinery-project-and-reviews-progress-of-construction-works</link><description>भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर मंगोलिया के दौरे पर हैं। उन्होंने मंगोल रिफाइनरी प्रोजेक्ट के कंस्ट्रक्शन साइट का दौरा किया। इस दौरान मंगोलिया की विदेश मंत्री बत्त्सेत्सेग बटमुंख और इंडस्ट्री और माइनिंग मंत्री गोंगोर दमदिन्न्यम भी मौजूद रहे। वहां उन्होंने चल रहे कामों की स्थिति की समीक्षा की।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, विदेश मंत्री बत्त्सेत्सेग बटमुंख और उद्योग और खनन मंत्री गोंगोर दमदिन्नयम के साथ मंगोल रिफाइनरी प्रोजेक्ट की कंस्ट्रक्शन साइट का दौरा किया। यह लैंडमार्क भारत मंगोलिया फ्रेंडशिप प्रोजेक्ट लगातार आगे बढ़ रहा है। इसमें शामिल अलग-अलग टीमों के साथ चल रहे कामों की स्थिति का समीक्षा की। उन्होंने कहा, प्रोजेक्ट साइट पर भारतीय और मंगोलियन वर्कफोर्स से भी बातचीत की। मुश्किल हालात में इतने बड़े प्रोजेक्ट को पूरा करने में उनके डेडिकेशन और कमिटमेंट के लिए उन्हें धन्यवाद दिया।
मंगोलिया की विदेश मंत्री बत्त्सेत्सेग बटमुंख के साथ मुलाकात के बाद पत्रकारों से बात करते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा, भारत और मंगोलिया रणनीतिक साझेदार हैं। हमारे रिश्ते गहरी सभ्यतागत और आध्यात्मिक जुड़ाव, साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, विकास की इच्छाओं और लोगों के बीच मजबूत संबंधों पर आधारित हैं।
पिछले साल भारत और मंगोलिया ने अपने राजनयिक संबंधों की स्थापना के 70 साल पूरे होने का जश्न मनाया था। विदेश मंत्री ने बताया कि उनकी यात्रा का एक मुख्य उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मंगोलिया के राष्ट्रपति उखनागिन खुरेलसुख के बीच पिछले साल भारत यात्रा के दौरान हुई बातचीत के फैसलों और प्रगति की समीक्षा करना था। डॉ. एस. जयशंकर ने कहा, हमने अपने द्विपक्षीय सहयोग के हर पहलू पर चर्चा की, जिसमें विकास से जुड़ी साझेदारी भी शामिल है। इसमें तेल रिफाइनरी परियोजना सबसे महत्वपूर्ण है।
मंगोलिया के डोर्नोगोवी प्रांत के अल्तानशिरी में एक तेल रिफाइनरी परियोजना बनाई जा रही है। इसके लिए भारत सरकार ने 1.7 अरब अमेरिकी डॉलर की सॉफ्ट लाइन ऑफ क्रेडिट (एलओसी) दी है। यह परियोजना भारत सरकार की दुनियाभर में सबसे बड़ी सॉफ्ट लाइन ऑफ क्रेडिट पहल है।</description><guid>external-affairs-minister-s-jaishankar-visits-mongol-refinery-project-and-reviews-progress-of-construction-works</guid><pubDate>23-Jun-2026 7:26:50 pm</pubDate></item><item><title>विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में युवा सिविल सेवक निभाएं अग्रणी भूमिका: पीएम मोदी</title><link>https://just36news.com/young-civil-servants-should-play-a-leading-role-in-achieving-the-goal-of-a-developed-india-by-2047-pm-modi</link><description>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) 2024 बैच के 183 अधिकारी प्रशिक्षुओं से संवाद करते हुए उन्हें विकसित भारत 2047 के संकल्प को साकार करने के लिए राष्ट्र निर्माण में पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ योगदान देने का आह्वान किया।
प्रधानमंत्री कार्यालय (सेवा तीर्थ) में आयोजित कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा कि दो वर्षों के फील्ड अनुभव और प्रशासनिक प्रशिक्षण के बाद युवा अधिकारी ऐसे महत्वपूर्ण चरण में पहुंचे हैं, जहां उनके फैसले न केवल उनके करियर बल्कि करोड़ों नागरिकों के भविष्य को भी प्रभावित करेंगे। उन्होंने कहा कि लोकसेवा की वास्तविक परीक्षा ईमानदारी, संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ वास्तविक परिस्थितियों का सामना करने में है। प्रधानमंत्री ने अधिकारियों से नवाचार, उद्देश्यपूर्ण कार्यशैली और नागरिक-केंद्रित शासन के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।
पीएम मोदी ने नागरिक देवो भव का मंत्र दिया
पीएम मोदी ने कहा कि प्रशासनिक फाइलों को केवल कागजी प्रक्रिया न समझें, बल्कि यह याद रखें कि हर फाइल के पीछे लाखों लोगों की आकांक्षाएं, समस्याएं और जीवन जुड़े होते हैं। उन्होंने नागरिक देवो भव का मंत्र देते हुए अधिकारियों से हर निर्णय के केंद्र में नागरिकों को रखने और शासन को संवेदनशील, जवाबदेह तथा समावेशी बनाने का आग्रह किया।
बड़े विकासात्मक लक्ष्यों को विभागीय सीमाओं में रहकर हासिल नहीं किया जा सकता
उन्होंने कहा कि बड़े विकासात्मक लक्ष्यों को विभागीय सीमाओं में रहकर हासिल नहीं किया जा सकता। इसके लिए विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है, जिससे स्थायी और प्रभावी परिणाम सुनिश्चित किए जा सकें।
पीएम मोदी ने विकसित भारत 2047 के विजन का उल्लेख किया
प्रधानमंत्री ने विकसित भारत 2047 के विजन का उल्लेख करते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में प्रत्येक नीति और प्रशासनिक निर्णय देश को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में योगदान देने वाला होना चाहिए। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया, विनिर्माण क्षेत्र के विस्तार, ऊर्जा सुरक्षा और युवाओं के लिए रोजगार एवं अवसर सृजन को वर्तमान समय की प्रमुख प्राथमिकताएं बताया।
उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में शासन व्यवस्था प्रक्रिया-आधारित मॉडल से परिणाम-आधारित मॉडल की ओर बढ़ी है। डिजिटल गवर्नेंस, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और तकनीक की मदद से सेवा वितरण अधिक पारदर्शी और सुगम हुआ है।
पीएम मोदी ने डेटा आधारित प्रशासन पर जोर देते हुए कहा
डेटा आधारित प्रशासन पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आंकड़ों को केवल संख्या के रूप में नहीं देखना चाहिए, बल्कि उन्हें करोड़ों लोगों के जीवन, चुनौतियों और आकांक्षाओं का प्रतिबिंब मानना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से नियमित रूप से यह मूल्यांकन करने को कहा कि सरकारी नीतियां जमीनी स्तर पर अपेक्षित परिणाम दे रही हैं या नहीं।
पीएम मोदी ने कहा कि अधिकारियों को अपने पद या अधिकार से नहीं, बल्कि अपने कार्यों के ठोस और मापनीय परिणामों से संतुष्टि प्राप्त करनी चाहिए।उन्होंने राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का भी उल्लेख किया और बताया कि वर्तमान बैच में 40 प्रतिशत से अधिक अधिकारी महिलाएं हैं।
इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री (कार्मिक) डॉ. जितेंद्र सिंह, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी.के. मिश्रा, प्रधान सचिव-2 शक्तिकांत दास, कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) की सचिव रचना शाह, एलबीएसएनएए के निदेशक श्रीराम तरणिकांति सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।</description><guid>young-civil-servants-should-play-a-leading-role-in-achieving-the-goal-of-a-developed-india-by-2047-pm-modi</guid><pubDate>23-Jun-2026 7:24:42 pm</pubDate></item><item><title>विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में निजी निवेश और निर्यात वृद्धि अहम : ईएसी-पीएम चेयरमैन</title><link>https://just36news.com/private-investment-and-export-growth-crucial-to-the-goal-of-a-developed-</link><description>विकसित भारत 2047 का लक्ष्य पाने के लिए देश की अर्थव्यवस्था को 7-8 प्रतिशत की दर से बढ़ना आवश्यक है और इसमें निजी क्षेत्र से बड़ा निवेश और मजबूत निर्यात वृद्धि अहम भूमिका निभाएंगे। यह बयान प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार समिति (ईएसी-पीएम) के चेयरमैन महेंद्र देव ने मंगलवार को दिया। राष्ट्रीय राजधानी में एफआईसीसीआई इंडिया के एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, निजी क्षेत्र से निवेश और निर्यात में बढ़ोतरी, दोनों ही बहुत जरूरी हैं। देव ने आगे कहा कि पिछले कुछ सालों में किए गए ढांचागत सुधारों ने इस दिशा में आगे बढ़ने की नींव रखी है।
सांख्यिकी मंत्रालय के हालिया आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 की जनवरी-मार्च तिमाही में भारत की जीडीपी ग्रोथ 7.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है। कृषि, निर्माण और सेवा क्षेत्रों के शानदार प्रदर्शन की वजह से पूरे वित्त वर्ष के लिए वृद्धि दर 7.7 प्रतिशत रही। सरकारी बयान के अनुसार, इस दौरान द्वितीयक क्षेत्र में 8.8 प्रतिशत की मजबूत ग्रोथ दर्ज की गई, जबकि तृतीयक क्षेत्र में 9.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। हालांकि, प्राथमिक क्षेत्र में 3.2 प्रतिशत की ग्रोथ दर्ज की गई, जो मुख्य रूप से कृषि और मत्स्य पालन क्षेत्रों के प्रदर्शन से प्रेरित थी।
सरकारी बयान के अनुसार, 2025-26 के दौरान मैन्युफैक्चरिंग, व्यापार, मरम्मत, होटल, ट्रांसपोर्ट, कम्युनिकेशन और ब्रॉडकास्टिंग, स्टोरेज, फाइनेंस, रियल एस्टेट और प्रोफेशनल सर्विस सेक्टर से जुड़ी सेवाओं में दोहरे अंकों की ग्रोथ दर्ज की गई है। यह हाईवे, रेलवे, पोर्ट और एयरपोर्ट जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में सरकार द्वारा किए गए भारी निवेश को दिखाता है।
इन निवेशों ने ग्रोथ रेट को बढ़ाने में मदद की है, जबकि ग्लोबल मंदी के बीच भी भारत सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना हुआ है। देव ने कहा कि उन्हें खुशी है कि एफआईसीसीआई फसल पोषण पर यह अहम और इनोवेटिव कॉन्क्लेव आयोजित कर रहा है और किसानों समेत सभी स्टेकहोल्डर्स को एक साझा मंच पर बुला रहा है।</description><guid>private-investment-and-export-growth-crucial-to-the-goal-of-a-developed-</guid><pubDate>23-Jun-2026 7:22:51 pm</pubDate></item><item><title>देशभर में वंदे मातरम शिविरों का आयोजन किया जाएगा, जानें क्यों है खास</title><link>https://just36news.com/vande-mataram-camps-will-be-organised-across-the-country,-know-why-it-is-special</link><description>भारत सरकार के युवा मामले एवं खेल मंत्रालय द्वारा माई भारत अभियान के माध्यम से देश भर में वंदे मातरम शिविरों का आयोजन किया जाएगा। इस संबंध में पहला शिविर पश्चिम बंगाल के कोलकाता में 24 से 30 जून तक बंकिम चंद्र चटर्जी की जयंती के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है। यह राष्ट्रीय एकता, संवैधानिक मूल्यों और युवा नेतृत्व को मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू की गई एक प्रमुख युवा सशक्तिकरण पहल है।
सात दिवसीय आवासीय शिविरों के रूप में परिकल्पित इस पहल का उद्देश्य युवाओं को भारत की संवैधानिक और लोकतांत्रिक परंपराओं की गहरी समझ विकसित करने के अवसर प्रदान करना है, साथ ही सांस्कृतिक आत्मविश्वास और नागरिक जिम्मेदारी को बढ़ावा देना है। ये शिविर विकसित भारत-2047 की परिकल्पना के अनुरूप हैं और इनका उद्देश्य सूचित, जिम्मेदार और राष्ट्र-उन्मुख युवा नेताओं की एक पीढ़ी का पोषण करना है।
वंदे मातरम शिविर वंदे मातरम की भावना से प्रेरित हैं, जो मातृभूमि के प्रति श्रद्धा और क्षेत्रीय, भाषाई और सामाजिक सीमाओं से परे भावनात्मक एकीकरण का प्रतीक है। यह कार्यक्रम नागरिक भागीदारी, नेतृत्व विकास, डिजिटल साक्षरता, सामाजिक उत्तरदायित्व और सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देकर समकालीन युवाओं की चिंताओं का समाधान करना चाहता है।
इस पहल के तहत चिन्हित जिलों में 20 शिविर आयोजित किए जाएंगे, जिनमें से प्रत्येक में 15 से 29 वर्ष की आयु के 150 युवा प्रतिभागी शामिल होंगे। प्रत्येक शिविर में छह राज्यों के प्रतिनिधि होंगे, पूर्वोत्तर से अनिवार्य प्रतिनिधित्व होगा, और महिलाओं तथा सामाजिक रूप से वंचित वर्गों की कम से कम 50 प्रतिशत भागीदारी होगी। इन शिविरों में लगभग 3,000 युवाओं को शामिल किया जाएगा और इनमें संवैधानिक मूल्यों और सांस्कृतिक आदान-प्रदान से लेकर नेतृत्व विकास और प्रमुख योजनाओं तक के विषय शामिल होंगे।
सप्ताह भर चलने वाले इन शिविरों में वंदे मातरम के ऐतिहासिक महत्व और भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में इसकी भूमिका, संविधान और नागरिक कर्तव्यों पर विषयगत सत्र, भाषा, भोजन और खेलों के माध्यम से सांस्कृतिक आदान-प्रदान, ऐतिहासिक महत्व के स्थलों का दौरा, राष्ट्र प्रथम संवाद और तात्कालिक भाषण सत्र, नेतृत्व और सामुदायिक लामबंदी कार्यशालाएं और सरकार की प्रमुख पहलों पर चर्चा शामिल होगी। वंदे मातरम शिविर भारत के युवाओं की ऊर्जा, आदर्शवाद और रचनात्मकता का उपयोग करके एकता, संवैधानिक मूल्यों और राष्ट्र निर्माण के आदर्शों को आगे बढ़ाने के लिए मंत्रालय की प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हैं।</description><guid>vande-mataram-camps-will-be-organised-across-the-country,-know-why-it-is-special</guid><pubDate>23-Jun-2026 7:20:21 pm</pubDate></item><item><title>पद्म पुरस्कार- 2026: राष्ट्रपति मुर्मू ने अलका याग्निक, ममूटी समेत 65 हस्तियों को पद्म पुरस्कार प्रदान किए</title><link>https://just36news.com/padma-awards-2026:-president-murmu-presents-padma-awards-to-</link><description>राष्ट्रपति भवन में मंगलवार को नागरिक अलंकरण समारोह-द्वितीय में पद्म पुरस्कार- 2026 प्रदान किए गए। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विभिन्न क्षेत्रों की हस्तियों को पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया। इस दौरान राष्ट्रपति मुर्मू ने झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन (मरणोपरांत) को पद्म भूषण से सम्मानित किया। उनकी पत्नी रूपी सोरेन ने सम्मान प्राप्त किया। वहीं, टेनिस के दिग्गज विजय अमृतराज को पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। गायिका अलका याग्निक को राष्ट्रपति मुर्मु ने पद्म भूषण से सम्मानित किया।
इस दौरान पी. नारायणन और जस्टिस (रिटायर्ड) केटी थॉमस को साहित्य और शिक्षा तथा जन-कार्य के लिए पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। पद्म भूषण पाने वाले अन्य लोगों में एसकेएम मैलानंदन, ममूटी, वेल्लापल्ली नटेसन और दत्तात्रेयुडु नोरी शामिल हैं। अवॉर्ड पाने वालों की लिस्ट में दो अमेरिकी, एक रूसी और एक जॉर्जियाई नागरिक भी शामिल हैं। राष्ट्रपति मुर्मु ने अलंकरण समारोह में 65 लोगों को पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया। समारोह में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह और कई गणमान्य व्यक्ति भी मौजूद रहे।
दूसरे नागरिक सम्मान समारोह में 65 पद्म पुरस्कार प्रदान किए गए हैं, जिनमें दो पद्म विभूषण, सात पद्म भूषण, और 56 पद्म श्री शामिल हैं। इससे पहले राष्ट्रपति ने 25 मई को आयोजित पहले नागरिक सम्मान समारोह में 65 पद्म पुरस्कार प्रदान किए थे, जिनमें दो पद्म विभूषण, छह पद्म भूषण और 57 पद्म श्री शामिल थे।
देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक पद्म पुरस्कार तीन श्रेणियों में दिए जाते हैं: पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण। पद्म पुरस्कार कला, समाजसेवा, जन-कार्य, विज्ञान और इंजीनियरिंग, व्यापार और उद्योग, चिकित्सा, साहित्य और शिक्षा, खेल और सिविल सेवा जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में दिए जाते हैं। पद्म विभूषण असाधारण और विशिष्ट सेवा के लिए, पद्म भूषण उच्च स्तर की विशिष्ट सेवा के लिए और पद्म श्री किसी भी क्षेत्र में विशिष्ट सेवा के लिए दिया जाता है। इन पुरस्कारों की घोषणा हर साल गणतंत्र दिवस पर की जाती है।</description><guid>padma-awards-2026:-president-murmu-presents-padma-awards-to-</guid><pubDate>23-Jun-2026 7:18:53 pm</pubDate></item><item><title>कौन हैं कुणाल शाह, जिन्हें मिला व्हाट्सएप का बड़ा जिम्मा? कहां से पढ़े-लिखे हैं और कितनी मिलेगी सैलरी? जानकर रह जाएंगे हैरान</title><link>https://just36news.com/who-is-kunal-shah-who-has-been-given-the-big-responsibility-of-whatsapp-where-is-his-education,-and-how</link><description>Whatsapp New CEO: मेटा प्लेटफॉर्म्स ने भारत की फिनटेक कंपनी CRED में करीब 8,500 करोड़ रुपये का बड़ा निवेश करने का फैसला किया है। यह जानकारी दोनों कंपनियों ने 22 जून को साझा की है। इस निवेश को भारत के तेजी से बढ़ते डिजिटल और फिनटेक सेक्टर में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इसमें न सिर्फ कंपनियों की साझेदारी मजबूत होगी, बल्कि देश के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में भी बदलाव आने की उम्मीद है।
कुणाल शाह को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी
इस बड़े समझौते के बाद CRED के संस्थापक कुणाल शाह को एक बड़ी वैश्विक जिम्मेदारी मिलने की चर्चा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, वे WhatsApp के ग्लोबल सीईओ बन सकते हैं और मौजूदा प्रमुख विल कैथकार्ट की जगह ले सकते हैं। हालांकि इस नियुक्ति को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन टेक जगत में यह खबर तेजी से फैल रही है और इसे एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
शिक्षा और शुरुआती करियर की कहानी
कुणाल शाह ने अपनी शुरुआती पढ़ाई मुंबई के विल्सन कॉलेज से की। जहां उन्होंने फिलॉसफी यानी दर्शनशास्त्र में बीए किया। इसके बाद उन्होंने एमबीए की पढ़ाई शुरू की लेकिन उसे पूरा नहीं कर पाए। बाद में उन्होंने NMIMS कॉलेज में पार्ट-टाइम MBA में दाखिला लिया। लेकिन वह कोर्स भी बीच में ही छोड़ दिया। अपने करियर की शुरुआत से ही उन्होंने पढ़ाई के साथ काम करने की आदत डाल ली थी। जिसने आगे चलकर उन्हें एक सफल उद्यमी बनाया।
सैलरी और कमाई का अनुमान
अगर कुणाल शाह WhatsApp के ग्लोबल सीईओ बनते हैं तो उनकी सैलरी को लेकर अभी कोई आधिकारिक आंकड़ा सामने नहीं आया है। लेकिन अनुमान के अनुसार, मेटा जैसी बड़ी टेक कंपनियों में सीईओ को सालाना लगभग 2 करोड़ से 4 करोड़ रुपये तक का पैकेज मिल सकता है। इसके अलावा उन्हें कंपनी के शेयर, बोनस और परफॉर्मेंस आधारित इंसेंटिव भी दिए जाते हैं जो कुल आय को कई गुना बढ़ा सकते हैं।
नेटवर्थ और भारत के लिए इस डील का महत्व
कुणाल शाह की अनुमानित कुल संपत्ति लगभग 15,000 करोड़ रुपये बताई जाती है। जिसका बड़ा हिस्सा उनकी फिनटेक कंपनी CRED में हिस्सेदारी से आता है। हाल ही में मेटा के निवेश के बाद कंपनी का वैल्यूएशन भी बढ़ा है। यह डील भारत के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे डिजिटल पेमेंट, सोशल मीडिया और कॉमर्स को जोड़कर एक बड़ा इकोसिस्टम बन सकता है। साथ ही यह भी संकेत है कि वैश्विक टेक कंपनियां भारत के डिजिटल बाजार में अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहती हैं।</description><guid>who-is-kunal-shah-who-has-been-given-the-big-responsibility-of-whatsapp-where-is-his-education,-and-how</guid><pubDate>23-Jun-2026 4:47:14 pm</pubDate></item><item><title>राष्ट्रपति आज प्रदान करेंगी 65 पद्म सम्मान, रोहित शर्मा, अलका याज्ञनिक और ममूटी समेत कई हस्तियां होंगी सम्मानित</title><link>https://just36news.com/president-to-confer-65-padma-awards-today;-rohit-sharma</link><description>नई दिल्ली। द्रौपदी मुर्मु आज शाम राष्ट्रपति भवन में आयोजित दूसरे नागरिक अलंकरण समारोह में देश के प्रतिष्ठित पद्म पुरस्कार प्रदान करेंगी। समारोह के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले 65 व्यक्तित्वों को पद्म सम्मान से अलंकृत किया जाएगा। इस चरण में कुल दो पद्म विभूषण, सात पद्म भूषण और 56 पद्म पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। सम्मान पाने वालों में प्रसिद्ध टेनिस खिलाड़ी विजय अमृतराज, दिग्गज अभिनेता ममूटी, मशहूर पार्श्व गायिका अलका याज्ञनिक और भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान रोहित शर्मा प्रमुख नामों में शामिल हैं।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर वर्ष 2026 के लिए कुल 131 पद्म पुरस्कारों की घोषणा की थी। इनमें पांच पद्म विभूषण, कई पद्म भूषण और पद्म सम्मान शामिल हैं। शेष पुरस्कार अलग-अलग चरणों में प्रदान किए जा रहे हैं। पद्म पुरस्कार देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में गिने जाते हैं। ये सम्मान कला, साहित्य, शिक्षा, समाज सेवा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, चिकित्सा, व्यापार एवं उद्योग, खेल तथा अन्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय और प्रेरणादायक योगदान देने वाले व्यक्तियों को प्रदान किए जाते हैं।राष्ट्रपति भवन में आयोजित यह समारोह देश के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तित्वों के योगदान को सम्मानित करने का महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है। समारोह में केंद्र सरकार के वरिष्ठ मंत्री, गणमान्य अतिथि और पुरस्कार विजेताओं के परिजन भी मौजूद रहेंगे।</description><guid>president-to-confer-65-padma-awards-today;-rohit-sharma</guid><pubDate>23-Jun-2026 2:04:57 pm</pubDate></item><item><title>TMC में बड़ा बवाल: ममता बनर्जी को चेयरपर्सन पद से हटाने का ऐलान, अभिषेक बनर्जी सस्पेंड</title><link>https://just36news.com/major-uproar-in-tmc:-announcement-of-removal-of-mamata-banerjee</link><description>West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल की राजनीति में सोमवार को बड़ा सियासी भूचाल आ गया, जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी गुट ने पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी को चेयरपर्सन पद से हटाने और सांसद अभिषेक बनर्जी को पार्टी से निलंबित करने की घोषणा कर दी। उलुबेरिया पूर्व के विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने खुद को असली तृणमूल कांग्रेस बताते हुए नई संगठनात्मक समिति का गठन किया और वरिष्ठ विधायक अरूप रॉय को नया चेयरमैन नियुक्त किया।










न्यू टाउन के एक होटल में हुई बैठक में बागी विधायकों, कोलकाता नगर निगम (KMC) समेत तीन जिलों के करीब 70 पार्षदों ने हिस्सा लिया। बैठक में पार्टी के संगठनात्मक ढांचे के पुनर्गठन का प्रस्ताव पारित किया गया। ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया कि पार्टी संविधान के अनुसार हर तीन साल में राष्ट्रीय कार्यकारी समिति का गठन जरूरी है, लेकिन 2022 के बाद ऐसा नहीं किया गया, जिससे संगठनात्मक संकट पैदा हुआ।
ताजा घटनाक्रम के बाद तृणमूल कांग्रेस तीन गुटों में बंटी दिखाई दे रही है। एक गुट ममता बनर्जी के नेतृत्व में है, दूसरा ऋतब्रत बनर्जी का बागी गुट और तीसरा काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व वाला सांसदों का समूह है, जिसने अलग राजनीतिक रास्ता अपनाने का फैसला किया है।
विवाद अब पार्टी के चुनाव चिन्ह और फंड तक पहुंच गया है। बागी नेताओं ने पार्टी के नाम और सिंबल पर दावा ठोकते हुए सुप्रीम कोर्ट जाने के संकेत दिए हैं। वहीं, करीब 1,100 करोड़ रुपये के पार्टी फंड को लेकर भी संघर्ष तेज हो गया है। पुलिस शिकायत के बाद पार्टी के तीन बैंक खातों में जमा लगभग 440 करोड़ रुपये पर डेबिट फ्रीज लगा दिया गया है। बागी विधायकों का आरोप है कि इन खातों में जमा धन के स्रोत की जांच होनी चाहिए और इसमें कथित अनियमितताओं की आशंका है।









</description><guid>major-uproar-in-tmc:-announcement-of-removal-of-mamata-banerjee</guid><pubDate>22-Jun-2026 11:47:59 pm</pubDate></item><item><title>अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर राष्ट्रपति मुर्मू का संदेश: योग से जुड़ेगा विश्व, शांति और सद्भाव का होगा विस्तार</title><link>https://just36news.com/president-murmus-message-on-international-yoga-day:-yoga-will-connect-the-world</link><description>जबलपुर। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मध्य प्रदेश के जबलपुर में आयोजित भव्य सामूहिक योग कार्यक्रम में भाग लिया और देशवासियों को योग के महत्व का संदेश दिया। इस दौरान हजारों लोगों ने उनके साथ योगाभ्यास किया। राष्ट्रपति ने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक समग्र पद्धति है, जो व्यक्ति को स्वयं से जोड़ने के साथ-साथ समाज, प्रकृति और संपूर्ण मानवता के साथ भी गहरा संबंध स्थापित करती है।

राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संबोधन में कहा कि आज दुनिया कई तरह की चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे समय में योग शांति, संतुलन, सद्भाव और सामूहिक कल्याण को बढ़ावा देने का एक प्रभावी माध्यम बन सकता है। उन्होंने कहा कि योग मन, शरीर और आत्मा के बीच सामंजस्य स्थापित कर व्यक्ति को स्वस्थ, सकारात्मक और आत्मविश्वासी बनाता है। यही कारण है कि आज योग की लोकप्रियता भारत की सीमाओं से निकलकर पूरी दुनिया में तेजी से बढ़ी है।
उन्होंने कहा कि योग व्यक्ति को स्वयं से, समाज को प्रकृति से और मानवता को विशाल वैश्विक चेतना से जोड़ने का सशक्त माध्यम है। योग के जरिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाई जा सकती है और मानसिक तनाव से भी राहत मिलती है। राष्ट्रपति ने सभी नागरिकों से अपील की कि वे योग को अपने दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाएं और स्वस्थ भारत के निर्माण में अपनी भागीदारी निभाएं।
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर देशभर में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिनमें लाखों लोगों ने हिस्सा लेकर योग के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई। राष्ट्रपति का यह संदेश योग को जन-जन तक पहुंचाने और स्वस्थ, संतुलित तथा जागरूक समाज के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


</description><guid>president-murmus-message-on-international-yoga-day:-yoga-will-connect-the-world</guid><pubDate>21-Jun-2026 11:01:16 am</pubDate></item><item><title>राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को जन्मदिन पर देशभर से शुभकामनाएं, उपराष्ट्रपति बोले- जनसेवा को समर्पित है उनका जीवन</title><link>https://just36news.com/president-draupadi-murmu-receives-birthday-wishes-from-across-the-country</link><description>राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के जन्मदिन पर देशभर के नेताओं ने उन्हें शुभकामनाएं दीं। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, विदेश मंत्री एस. जयशंकर समेत कई केंद्रीय नेताओं और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने राष्ट्रपति मुर्मु के सादगीपूर्ण जीवन, जनसेवा के प्रति समर्पण और संवैधानिक मूल्यों के प्रति उनकी निष्ठा की सराहना की। सभी नेताओं ने उनके उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और निरंतर राष्ट्रसेवा की कामना की।
उपराष्ट्रपति ने बताया जनसेवा और सामाजिक न्याय की प्रेरणा
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर राष्ट्रपति मुर्मु को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा वंचित वर्गों के हितों की वकालत की है और खुद को राष्ट्रसेवा के लिए समर्पित किया है। उन्होंने कहा कि समावेशी विकास और सामाजिक कल्याण के प्रति राष्ट्रपति की प्रतिबद्धता देशभर के लोगों को प्रेरित करती है। उन्होंने राष्ट्रपति मुर्मु के दीर्घायु, स्वस्थ और सुखमय जीवन की कामना करते हुए कहा कि सादगी, विनम्रता और जनसेवा के प्रति उनका अटूट समर्पण देश के अनगिनत लोगों के लिए प्रेरणास्रोत है।
ओम बिरला ने राष्ट्रपति के नेतृत्व की सराहना की
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने राष्ट्रपति मुर्मु को जन्मदिन की बधाई देते हुए कहा कि साधारण परिवेश से देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक की उनकी यात्रा करोड़ों भारतीयों, विशेषकर महिलाओं, युवाओं और वंचित वर्गों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के रूप में उनका गरिमामय नेतृत्व, संविधान के प्रति अटूट निष्ठा और विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता देशवासियों का मार्गदर्शन करती है।
एस. जयशंकर ने दी जन्मदिन की शुभकामनाएं
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी राष्ट्रपति मुर्मु को जन्मदिन की बधाई देते हुए जनसेवा के प्रति उनके समर्पण की सराहना की और उनके स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना की।
योगी आदित्यनाथ ने जनजातीय समाज के प्रति समर्पण को सराहा
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राष्ट्रपति मुर्मु का सादगीपूर्ण जीवन, जनजातीय समाज के उत्थान के प्रति समर्पण और संवैधानिक मूल्यों के प्रति अटूट निष्ठा देशवासियों के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने भगवान जगन्नाथ से राष्ट्रपति के उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की प्रार्थना की।
रेखा गुप्ता ने बताया नारीशक्ति की प्रतीक
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने राष्ट्रपति मुर्मु को राष्ट्र की प्रेरणा और सेवाभाव की प्रतिमूर्ति बताते हुए कहा कि संघर्ष से शिखर तक की उनकी यात्रा अनुकरणीय है। उन्होंने राष्ट्रपति को नारीशक्ति का प्रतीक बताते हुए उनके स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की।
हिमंता बिस्वा सरमा ने राष्ट्र निर्माण में योगदान को सराहा
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि राष्ट्रपति मुर्मु शालीनता, बुद्धिमत्ता और गरिमा की प्रतिमूर्ति हैं। उनका जीवन-सफर लोकतंत्र, समावेशिता और दृढ़ता का सशक्त उदाहरण है। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय और जनसेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता पूरे राष्ट्र को प्रेरित करती है।
अन्य मुख्यमंत्रियों ने भी दीं शुभकामनाएं
हरियाणा के मुख्यमंत्री, अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, राजस्थान के मुख्यमंत्री तथा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी राष्ट्रपति मुर्मु को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। नेताओं ने उनके समर्पित जीवन, विनम्र व्यक्तित्व, संवेदनशील नेतृत्व और राष्ट्रसेवा के प्रति प्रतिबद्धता की सराहना करते हुए उनके स्वस्थ, सुखी और दीर्घायु जीवन की कामना की।</description><guid>president-draupadi-murmu-receives-birthday-wishes-from-across-the-country</guid><pubDate>20-Jun-2026 12:12:28 pm</pubDate></item><item><title>पीएम मोदी के साथ योग करने को देशभर में उत्साह, 6 लाख से अधिक संगठनों ने कराया पंजीकरण</title><link>https://just36news.com/there-is-enthusiasm-across-the-country-to-do-yoga-with-pm-modi,-more-than</link><description>12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 से पहले देशभर में योग को लेकर अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिल रहा है। आयुष मंत्रालय के योग संगम पोर्टल पर पंजीकृत संगठनों की संख्या 6 लाख के आंकड़े को पार कर गई है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि योग अब केवल एक स्वास्थ्य अभ्यास नहीं, बल्कि जनभागीदारी का एक व्यापक राष्ट्रीय आंदोलन बन चुका है।
21 जून को देशभर में होगा सामूहिक योग आयोजन
21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय योग कार्यक्रम में देशभर के लाखों लोग एक साथ योग करेंगे। योग संगम पहल के तहत पंजीकृत संगठन अपने-अपने स्थानों पर सामूहिक योग सत्र आयोजित करेंगे और कॉमन योग प्रोटोकॉल का पालन करते हुए इस राष्ट्रीय अभियान का हिस्सा बनेंगे।
स्कूलों से लेकर सामाजिक संस्थाओं तक बढ़ी भागीदारी
आयुष मंत्रालय के अनुसार, हाल के दिनों में पोर्टल पर पंजीकरण की रफ्तार तेज हुई है। स्कूल, कॉलेज, सरकारी संस्थान, निजी संगठन, गैर-सरकारी संस्थाएं और सामुदायिक समूह बड़ी संख्या में इस अभियान से जुड़ रहे हैं। योग संगम का उद्देश्य देश के हर कोने में योग को जन-जन तक पहुंचाना और इसे एक साझा राष्ट्रीय स्वास्थ्य आंदोलन के रूप में स्थापित करना है।
डिजिटल मंच से जुड़ रहे हैं लाखों प्रतिभागी
योग संगम पोर्टल इस अभियान की डिजिटल रीढ़ बनकर उभरा है। इसके माध्यम से संगठन अपने कार्यक्रमों का पंजीकरण कर रहे हैं, आयोजन स्थलों की जानकारी साझा कर रहे हैं और प्रतिभागियों को जोड़ रहे हैं। यह मंच देशव्यापी समन्वय और व्यापक सहभागिता सुनिश्चित कर रहा है।
778 जिलों तक पहुंचा योग संगम अभियान
यह पहल देश के सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों तक पहुंच चुकी है और 778 जिलों को कवर कर रही है। आंकड़ों के अनुसार, 3.22 लाख से अधिक सरकारी संस्थानों, लगभग 2 लाख शैक्षणिक संस्थानों, 16 हजार से अधिक निजी संस्थानों, 5 हजार से अधिक गैर-सरकारी संगठनों तथा 44 हजार अन्य संगठनों ने पोर्टल पर पंजीकरण कराया है।
पश्चिम बंगाल और राजस्थान रहे सबसे आगे
राज्यों की बात करें तो पश्चिम बंगाल सबसे आगे है, जहां 2.76 लाख से अधिक संगठनों ने पंजीकरण कराया है। इसके बाद राजस्थान में लगभग 1.5 लाख पंजीकरण दर्ज किए गए हैं। महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, असम, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, ओडिशा और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में भी उल्लेखनीय भागीदारी देखने को मिल रही है।
स्वस्थ आयु के लिए योग है इस वर्ष की थीम
इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की थीम स्वस्थ आयु के लिए योग रखी गई है। यह विषय जीवन के हर चरण में योग की उपयोगिता को रेखांकित करता है और स्वस्थ, सक्रिय तथा संतुलित जीवनशैली को बढ़ावा देने का संदेश देता है।
आयुष मंत्रालय ने किया अधिक से अधिक भागीदारी का आह्वान
आयुष मंत्रालय ने देशभर के संगठनों, संस्थानों और समुदायों से इस अभियान से जुड़ने का आह्वान किया है। मंत्रालय का कहना है कि योग संगम पोर्टल पर बढ़ती भागीदारी भारत की जनभागीदारी की भावना और स्वास्थ्य के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है। यह पहल योग को एक वैश्विक आंदोलन से आगे बढ़ाकर सामुदायिक उत्सव और राष्ट्रीय जनआंदोलन का स्वरूप दे रही है। योग के माध्यम से स्वस्थ भारत और सशक्त भारत के निर्माण की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।</description><guid>there-is-enthusiasm-across-the-country-to-do-yoga-with-pm-modi,-more-than</guid><pubDate>20-Jun-2026 12:06:12 pm</pubDate></item><item><title>आदिवासी अंचल से पीएम मोदी का विकास संदेश, ओडिशा में कई परियोजनाओं का उद्घाटन-शिलान्यास</title><link>https://just36news.com/pm-modi-development-message-from-tribal-areas,-inauguration-and-foundation</link><description>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को ओडिशा के दौरे पर रहेंगे। पीएम मोदी मयूरभंज जिले के रायरंगपुर में एक बड़े कार्यक्रम में शामिल होंगे। यह कार्यक्रम प्रदेश में भाजपा सरकार के दो वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु भी मौजूद रहेंगी।
राष्ट्रपति मुर्मु के पैतृक गांव का करेंगे दौरा
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के साथ पीएम मोदी का सुबह लगभग 11:15 बजे मयूरभंज जिले के पहाड़पुर गांव दौरा करने का कार्यक्रम है। पहाड़पुर राष्ट्रपति मुर्मु का पैतृक गांव है। प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति पवित्र उपवन संथाली जाहेरा एवं हो जाहेरा, कौशल केंद्र तथा पहाड़पुर स्कूल में प्रार्थना करेंगे।
शिक्षा और सशक्तिकरण से जुड़े प्रयासों को मिलेगा बल
यह यात्रा आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में शैक्षिक अवसरों, कौशल विकास और सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण को मजबूत करने के लिए चल रहे प्रयासों के संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
भाजपा सरकार के दो वर्ष पूरे होने पर विशेष कार्यक्रम
दोपहर करीब 1 बजे राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ओडिशा सरकार के दो वर्ष पूरे होने के अवसर पर मयूरभंज जिले के रायरंगपुर में आयोजित कार्यक्रम में भाग लेंगे। कार्यक्रम का विषय विकास रा धरा, ओडिशा सारा रखा गया है।
47,600 करोड़ रुपए से अधिक की परियोजनाओं की सौगात
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, कार्यक्रम के दौरान ऊर्जा, औद्योगिक बुनियादी ढांचे, सड़क संपर्क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन और सिंचाई सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी 47,600 करोड़ रुपए से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया जाएगा।
जनसभा को भी संबोधित करेंगे प्रधानमंत्री
इस अवसर पर प्रधानमंत्री रायरंगपुर में एक विशाल जनसभा को भी संबोधित करेंगे। इन परियोजनाओं से पूरे ओडिशा में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, कनेक्टिविटी में सुधार, ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने और रोजगार के अवसर सृजित होने की उम्मीद है।
ऊर्जा क्षेत्र की बड़ी परियोजनाओं की रखी जाएगी आधारशिला
जिन प्रमुख परियोजनाओं की आधारशिला रखी जाएगी, उनमें 600 मेगावाट की ऊपरी इंद्रावती पंप भंडारण परियोजना और आईबी थर्मल पावर स्टेशन की स्टेज-II विस्तार परियोजना शामिल हैं। इस विस्तार परियोजना में 660 मेगावाट की दो नई इकाइयां स्थापित की जाएंगी।
सड़क, सिंचाई और शिक्षा परियोजनाओं को भी मिलेगी मंजूरी
अन्य परियोजनाओं में 300 टीपीडी स्रोत-पृथक नगरपालिका ठोस अपशिष्ट आधारित संपीड़ित बायोगैस संयंत्र, कटकजोड़ी नदी पर पुल, बौध जिले में ढालपुर-हरभंगा रोड का चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण, नुआपाड़ा-घाटीपाड़ा एनएच-353 खंड का चार लेन निर्माण, कुसुमदिही मेगालिफ्ट सिंचाई परियोजना, इग्नू क्षेत्रीय केंद्र तथा रायरंगपुर में इनडोर बैडमिंटन कॉम्प्लेक्स शामिल हैं।
स्वास्थ्य और सार्वजनिक परिवहन को मिलेगा बढ़ावा
इसके अलावा, ओडिशा के विभिन्न जिलों में 24 अटल बस स्टैंड और नौ स्वचालित परीक्षण स्टेशनों का उद्घाटन किया जाएगा। बौध में 300 बिस्तरों वाले जिला मुख्यालय अस्पताल भवन का भी लोकार्पण होगा। इन परियोजनाओं से राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।</description><guid>pm-modi-development-message-from-tribal-areas,-inauguration-and-foundation</guid><pubDate>20-Jun-2026 11:56:46 am</pubDate></item><item><title>पंजाब दौरे पर भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन, संगठन विस्तार पर रहेगा फोकस</title><link>https://just36news.com/bjp-president-nitin-nabin-on-punjab-tour,-focus-will-be-on-organisational-expansion</link><description>भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन 20 से 22 जून तक पंजाब के तीन दिवसीय संगठनात्मक दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वह अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम में हिस्सा लेने के साथ-साथ विभिन्न संगठनात्मक बैठकों, पार्टी पदाधिकारियों से संवाद, सामाजिक एवं धार्मिक नेताओं से मुलाकात और संगठन को मजबूत करने से जुड़े कार्यक्रमों में भाग लेंगे।
अमृतसर से होगी दौरे की शुरुआत
दौरे के पहले दिन 20 जून को नितिन नबीन अमृतसर स्थित श्री गुरु रामदास जी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचेंगे। आगमन के बाद वह भाजपा की राज्य कोर ग्रुप की बैठक में शामिल होंगे। इसके अलावा वह श्री हरमंदिर साहिब (स्वर्ण मंदिर) में मत्था टेकेंगे, ऐतिहासिक जलियांवाला बाग का दौरा करेंगे, श्री दुर्गियाना मंदिर में दर्शन करेंगे तथा श्री रामतीर्थ (वाल्मीकि मंदिर) में भी श्रद्धा अर्पित करेंगे। शाम को वह जालंधर पहुंचेंगे, जहां रात 7:45 बजे रोड शो का नेतृत्व करेंगे।
योग दिवस कार्यक्रम और संगठनात्मक बैठकें
दौरे के दूसरे दिन 21 जून को नितिन नबीन फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में सुबह 6:30 बजे आयोजित अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम में भाग लेंगे। इसके बाद वह प्रमुख समाचार पत्रों के संपादकों के साथ नाश्ते पर संवाद करेंगे। वह जालंधर में दैनिक सवेरा द्वारा संत समाज की उपस्थिति में आयोजित एक सम्मेलन में भी शामिल होंगे। दोपहर में वह लुधियाना पहुंचेंगे, जहां भाजपा के जिला कार्यालय का उद्घाटन करेंगे। इसके बाद शक्ति केंद्र प्रभारियों और पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ संगठनात्मक बैठक करेंगे। शाम को वह क्षेत्र के उद्योगपतियों के साथ विशेष बैठक कर संवाद करेंगे।
पद्मश्री सरदारा सिंह जौहल से करेंगे मुलाकात
दौरे के अंतिम दिन 22 जून को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लुधियाना में प्रसिद्ध कृषि अर्थशास्त्री और पद्मश्री सम्मानित सरदारा सिंह जौहल से उनके आवास पर मुलाकात करेंगे। भाजपा के अनुसार, इस तीन दिवसीय दौरे का उद्देश्य पंजाब में संगठन को और अधिक मजबूत करना तथा विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक वर्गों के साथ संवाद बढ़ाना है।
तरुण चुघ ने बताया नई शुरुआत का संकेत
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि पंजाब में एक नई शुरुआत होने जा रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन अपने दौरे की शुरुआत श्री हरमंदिर साहिब, दुर्गियाना मंदिर और भगवान वाल्मीकि मंदिर में मत्था टेककर करेंगे। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबका साथ, सबका विकास के विजन को आगे बढ़ाने और पंजाब के सर्वांगीण विकास के संकल्प का प्रतीक है।
पंजाब सरकार पर साधा निशाना
तरुण चुघ ने कहा कि पंजाब आज एक नए जीवन और नई दिशा की उम्मीद कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी की अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार ने राजनीतिक लाभ के लिए राज्य को आर्थिक और सामाजिक नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने दावा किया कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब है और गैंगस्टर गतिविधियों के कारण लोग असुरक्षा के माहौल में जी रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक ओर राज्य की अर्थव्यवस्था कमजोर होकर दिवालियापन जैसी स्थिति की ओर बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर कानून-व्यवस्था भी चरमरा गई है। उनके अनुसार, भाजपा पंजाब में उम्मीद, विकास और नई संभावनाओं का नया दौर लेकर आएगी।</description><guid>bjp-president-nitin-nabin-on-punjab-tour,-focus-will-be-on-organisational-expansion</guid><pubDate>20-Jun-2026 11:51:58 am</pubDate></item><item><title>उपभोक्ता संरक्षण और व्यापार सुगमता के लिए मजबूत परीक्षण अवसंरचना जरूरी: प्रल्हाद जोशी</title><link>https://just36news.com/strong-testing-infrastructure-essential-for-consumer-protection-and-ease-of-doing-business</link><description>केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रल्हाद जोशी ने शुक्रवार को कहा कि उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा, उत्पादों की विश्वसनीयता बढ़ाने और व्यापार सुगमता (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) को प्रोत्साहित करने के लिए मजबूत परीक्षण और प्रमाणन अवसंरचना अत्यंत आवश्यक है। मुंबई स्थित राष्ट्रीय परीक्षण केंद्र (एनटीएच) परिसर में परीक्षण सुविधाओं के विस्तार की आधारशिला रखते हुए प्रल्हाद जोशी ने कहा कि एक सशक्त गुणवत्ता आश्वासन प्रणाली उत्पादों की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने और व्यापार सुगमता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
आत्मनिर्भर भारत के लिए गुणवत्ता प्रणाली को मजबूत करने पर जोर
प्रल्हाद जोशी ने कहा कि विश्व स्तरीय परीक्षण अवसंरचना सरकार के आत्मनिर्भर भारत विजन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। उन्होंने कहा कि भारतीय उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए देश की गुणवत्ता प्रणाली को और मजबूत करना आवश्यक है।
एनटीएच परिसर में विस्तार कार्य की रखी आधारशिला
देश की गुणवत्ता आश्वासन और परीक्षण अवसंरचना के विस्तार में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के अवसर पर मंत्री ने राष्ट्रीय परीक्षण केंद्र, मुंबई परिसर का दौरा किया। कार्यक्रम की शुरुआत भूमि पूजन समारोह और परीक्षण सुविधाओं के भावी विस्तार के लिए आधारशिला रखने के साथ हुई।
परीक्षण सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने की सराहना
मंत्री ने उपभोक्ता मामलों के विभाग और राष्ट्रीय परीक्षण केंद्र द्वारा देशभर में उन्नत परीक्षण क्षमताओं के विस्तार तथा उद्योगों और उपभोक्ताओं के लिए गुणवत्तापूर्ण परीक्षण सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने मुंबई स्थित प्रयोगशालाओं का भी दौरा किया और चल रही आधुनिकीकरण पहलों तथा परीक्षण क्षमताओं की समीक्षा के लिए वैज्ञानिकों, तकनीकी विशेषज्ञों और अधिकारियों के साथ बातचीत की।
नई प्रयोगशाला और दो केंद्रों का उद्घाटन
कार्यक्रम के दौरान प्रल्हाद जोशी ने मुंबई स्थित राष्ट्रीय परीक्षण केंद्र में सूक्ष्मजीवविज्ञानी परीक्षण प्रयोगशाला का उद्घाटन किया। इसके अलावा उन्होंने गाजियाबाद स्थित राष्ट्रीय परीक्षण केंद्र के उत्तरी क्षेत्र केंद्र तथा महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास निगम की ऑरिक सिटी में स्थापित एनटीएच-ऑरिक उपग्रह केंद्र का वर्चुअल उद्घाटन भी किया।
परीक्षण क्षमता और उपभोक्ता सुरक्षा को मिलेगा बढ़ावा
नई सुविधाओं के शुरू होने से विभिन्न प्रमुख क्षेत्रों में परीक्षण क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। साथ ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुपालन को मजबूती मिलेगी तथा उपभोक्ता सुरक्षा और औद्योगिक प्रतिस्पर्धा को भी बढ़ावा मिलेगा।</description><guid>strong-testing-infrastructure-essential-for-consumer-protection-and-ease-of-doing-business</guid><pubDate>20-Jun-2026 11:45:15 am</pubDate></item><item><title>कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026: भारतीय दूतावास ने श्रद्धालुओं के लिए जारी की यात्रा से जुड़ी अहम जानकारी</title><link>https://just36news.com/kailash-mansarovar-yatra-2026:-indian-embassy-releases-important-information-for-pilgrims</link><description>चीन में भारत के राजदूत विक्रम दोरईस्वामी ने शुक्रवार को कैलाश मानसरोवर यात्रा (केएमवाई) पर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक वीडियो संदेश जारी किया। इस संदेश में उन्होंने यात्रियों का स्वागत किया और यात्रा से जुड़ी कुछ जरूरी सलाह दी।
बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, विदेश मंत्रालय (एमईए) और चीन की सरकार के सहयोग से आयोजित कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026, 20 जून को भारत से रवाना होगी। दूतावास की टीम आधिकारिक और निजी दोनों माध्यमों से यात्रा करने वाले सभी श्रद्धालुओं का पवित्र कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील की यात्रा के लिए हार्दिक स्वागत करती है।
राजदूत दोरईस्वामी के नेतृत्व में दूतावास की टीम ने हाल ही में यात्रा मार्गों का दौरा किया। टीम ने भारत के सिक्किम और उत्तराखंड से तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र (चीन) तक जाने वाले प्रमुख रास्तों का निरीक्षण किया। इस दौरान नाथू ला और लिपुलेख दर्रों के जरिए यात्रा व्यवस्थाओं और तैयारियों की समीक्षा की गई।
दूतावास ने वीडियो साझा करते हुए कहा, यह हमारे राजदूत का संदेश है। जल्द ही यात्रा से जुड़ी और तस्वीरें तथा जरूरी यात्रा सलाह भी जारी की जाएंगी। सभी श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सफल और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध यात्रा की शुभकामनाएं। राजदूत ने संदेश में बताया कि नाथू ला दर्रे पर पहुंचने के बाद चीनी कस्टम और इमिग्रेशन अधिकारी श्रद्धालुओं का स्वागत करेंगे। इसके बाद उन्हें बसों के जरिए याडोंग काउंटी ले जाया जाएगा।
उन्होंने वीडियो में यात्रा के समय, खाने-पीने की सुविधाओं और करेंसी एक्सचेंज जैसी अन्य जरूरी जानकारियां भी दीं। राजदूत ने यह भी कहा कि कैलाश मानसरोवर यात्रा के मार्ग से जुड़ी और जानकारी देने वाले कई वीडियो आगे भी जारी किए जाएंगे। पिछले सप्ताह उन्होंने तिब्बत की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक राजधानी ल्हासा का दौरा किया था। वहां उन्होंने स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों के साथ मिलकर भारतीय श्रद्धालुओं के लिए की गई तैयारियों और सुविधाओं की समीक्षा की।
ल्हासा हवाई अड्डे पर तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के विदेश मामलों के कार्यालय के उप महानिदेशक यांग लाहोंग ने उनका स्वागत किया। दूतावास के अनुसार, बाद में राजदूत ने तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के उपाध्यक्ष झाओ पेंग से मुलाकात की। झाओ पेंग ने श्रद्धालुओं के लिए की गई व्यवस्थाओं और तैयारियों की विस्तृत जानकारी दी। इससे पहले 13 जून को विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने नई दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू भवन में कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 के पहले जत्थे को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था।</description><guid>kailash-mansarovar-yatra-2026:-indian-embassy-releases-important-information-for-pilgrims</guid><pubDate>20-Jun-2026 11:40:41 am</pubDate></item><item><title>होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर ईरान के नए नियम, 48 घंटे पहले आवेदन जरूरी</title><link>https://just36news.com/iran-imposes-new-rules-on-ships-transiting-the-strait-of-hormuz,-requiring-48-hours-prior-application</link><description>ईरान ने शुक्रवार को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों के लिए नए नियम लागू किए हैं। इन नियमों के तहत अब जहाजों को पहले से रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इस बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते में प्रवेश करने से पहले परमिट और बीमा लेना जरूरी होगा। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-ईरान समझौते के बाद हाल ही में यह जलमार्ग फिर से खोला गया है।
ईरान की नई बनाई गई पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी (पीजीएसए) ने ये नए नियम जारी किए हैं। यह संस्था वॉशिंगटन और तेहरान के बीच हुए समझौते के तहत बनाई गई है, जिसका मकसद तीन महीने से ज्यादा चले संघर्ष के बाद इस रणनीतिक समुद्री रास्ते से व्यापारिक जहाजों की आवाजाही दोबारा शुरू करना है।
अथॉरिटी के मुताबिक, इन नियमों का उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना है। यह रास्ता दुनिया के करीब एक-पांचवें हिस्से के तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) व्यापार के लिए इस्तेमाल होता है।
पीजीएसए ने कहा, इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर और संबंधित अधिकारियों के निर्देश जारी होने के बाद, होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों को सूचित किया जाता है कि तय समय के दौरान केवल वही जहाज गुजर सकेंगे जो जरूरी नियमों को पूरा करते हुए अपनी यात्रा की अनुमति के लिए आवेदन जमा करेंगे।
नए नियमों के अनुसार, जहाज मालिकों और ऑपरेटरों को होर्मुज स्ट्रेट पहुंचने से कम से कम 48 घंटे पहले यात्रा की अनुमति के लिए आवेदन करना होगा। पीजीएसए ने कहा कि जहाजों को प्रवेश और बाहर निकलने के समय देरी से बचने के लिए अपनी पूरी जानकारी पहले ही देनी होगी।
अथॉरिटी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि जहाजों को यात्रा की अनुमति मिलने से पहले जरूरी परमिट और बीमा भी लेना होगा। इसके अलावा, जहाजों को ईरानी अधिकारियों की ओर से तय किए गए शिपिंग कॉरिडोर का ही इस्तेमाल करना होगा, ताकि उन इलाकों से बचा जा सके जहां संघर्ष के बाद अभी भी बारूदी माइन या अन्य खतरों की संभावना हो सकती है। अथॉरिटी ने चेतावनी दी है कि अगर कोई जहाज इन नियमों का पालन नहीं करता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी जहाज मालिकों की होगी।</description><guid>iran-imposes-new-rules-on-ships-transiting-the-strait-of-hormuz,-requiring-48-hours-prior-application</guid><pubDate>20-Jun-2026 11:37:56 am</pubDate></item><item><title>कल जारी होगी पीएम किसान योजना की 23वीं किस्त, 9 करोड़ 44 लाख से ज्यादा किसानों को मिलेगा लाभ</title><link>https://just36news.com/the-23rd-installment-of-the-pm-kisan-yojana-will-be-released-tomorrow</link><description>PM Kisan Yojana: प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना के तहत किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जून को पश्चिम बंगाल के तारकेश्वर से आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान देशभर के पात्र किसानों के बैंक खातों में योजना की 23वीं किस्त की राशि जारी करेंगे। यह राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से सीधे किसानों के खातों में भेजी जाएगी। कल 20 जून को 23वीं किस्त के तहत 18 हजार 880 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे 9 करोड़ 44 लाख से ज्यादा किसानों के खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए ट्रांसफर की जाएगी।
खैरागढ़-छुईखदान-गंडई (केसीजी) जिले के किसानों को भी इस किस्त का लाभ मिलेगा। जिले के 63,228 पात्र किसानों के बैंक खातों में कुल 12 करोड़ 64 लाख रुपये की राशि सीधे हस्तांतरित की जाएगी। इससे किसानों को खरीफ सीजन की तैयारियों में आर्थिक सहायता मिलेगी और वे बीज, खाद तथा अन्य कृषि आवश्यकताओं की पूर्ति आसानी से कर सकेंगे। कृषि विभाग के अनुसार प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना किसानों की आय बढ़ाने और खेती-किसानी को मजबूती देने की दिशा में केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण पहल है। योजना के तहत पात्र किसानों को प्रतिवर्ष 6 हजार रुपये की सहायता राशि तीन समान किस्तों में प्रदान की जाती है।
ई-केवाईसी और आधार लिंक जरूरी
उप संचालक कृषि राजकुमार सोलंकी ने किसानों से अपील की है कि वे अपने बैंक खातों को आधार से लिंक कराएं और ई-केवाईसी की प्रक्रिया समय पर पूरी कर लें। उन्होंने कहा कि जिन किसानों की ई-केवाईसी या आधार सीडिंग लंबित है, उन्हें किस्त प्राप्त करने में परेशानी हो सकती है। उन्होंने किसानों से अपने बैंक खाते और योजना से संबंधित जानकारी की जांच करने तथा किसी भी त्रुटि को जल्द से जल्द सुधारने की सलाह दी है, ताकि किस्त की राशि बिना किसी बाधा के उनके खातों में पहुंच सके।
किसानों को मिलेगा सीधा लाभ
कृषि विभाग का कहना है कि खरीफ फसलों की बुवाई के दौर में मिलने वाली यह सहायता किसानों के लिए काफी उपयोगी साबित होगी। समय पर राशि मिलने से किसान कृषि निवेश बढ़ा सकेंगे और खेती से जुड़ी आवश्यक सामग्रियों की खरीद कर सकेंगे। प्रधानमंत्री द्वारा राशि जारी किए जाने के साथ ही देशभर के करोड़ों किसानों के खातों में धनराशि पहुंचना शुरू हो जाएगी, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।</description><guid>the-23rd-installment-of-the-pm-kisan-yojana-will-be-released-tomorrow</guid><pubDate>19-Jun-2026 8:56:40 pm</pubDate></item><item><title>कब से शुरू हो रही है अमरनाथ यात्रा, जानें क्या है बाबा बर्फानी का पौराणिक इतिहास, जो है लोगों की आस्था का केंद्र</title><link>https://just36news.com/when-does-the-amarnath-yatra-begin-learn-about-the-mythological-</link><description>श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर की खूबसूरत वादियों में स्थित अमरनाथ धाम हिंदू श्रद्धालुओं की आस्था का एक प्रमुख केंद्र है। हर वर्ष लाखों भक्त कठिन पर्वतीय मार्ग तय कर बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं। इस साल अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई 2026 से शुरू होकर 28 अगस्त 2026 तक चलेगी। करीब 57 दिनों तक चलने वाली इस यात्रा के लिए प्रशासन और श्राइन बोर्ड की ओर से व्यापक तैयारियां की जा रही है।
प्राकृतिक हिमलिंग है मुख्य आकर्षण
अमरनाथ गुफा की सबसे बड़ी विशेषता यहां बनने वाला प्राकृतिक हिम शिवलिंग है। माना जाता है कि गुफा के भीतर बर्फ से बनने वाला यह शिवलिंग किसी मानव द्वारा निर्मित नहीं होता, बल्कि प्राकृक रूप से आकार लेता है। श्रद्धालु इसे बाबा बर्फानी के रूप में पूजते हैं। यही कारण है कि यह धाम देश के सबसे महत्वपूर्ण शिव तीर्थों में गिना जाता है। वहीं सनातन धर्म में यह जगह बेहद ही खास महत्व रखती है। यहीं पर वैष्णो देवी मंदिर और अमरनाथ गुफा जैसे पवित्र धार्मिक स्थल हैं, जो हिंदुओं की गहरी आस्था के केंद्र हैं।
भगवान शिव और अमर कथा से जुड़ी है मान्यता
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, अमरनाथ गुफा वही स्थान है जहां भगवान शिव ने माता पार्वती को अमरत्व का रहस्य बताया था। कहा जाता है कि इस गुप्त ज्ञान को किसी अन्य जीव द्वारा न सुना जाए, इसलिए शिव ने यात्रा मार्ग में अपने प्रिय साथियों और प्रतीकों को नंदी, चंद्रमा, नाग, गणेश और अन्य को अलग-अलग स्थानों पर छोड़ दिया था। इसी कथा के कारण इस स्थान को अमरनाथ नाम मिला।
दर्शन से मिलती है आध्यात्मिक शांति
मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु इस पवित्र गुफा के दर्शन करता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है और उसके सभी पापों का नाश होता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि अमरनाथ गुफा में बाबा बर्फानी के दर्शन करने से व्यक्ति को आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है और जीवन में सकारात्मकता आती है। यही वजह है कि हर वर्ष देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस पवित्र यात्रा का हिस्सा बनते हैं।
ऊंचाई और कठिन मार्ग बनाते हैं यात्रा को खास
समुद्र तल से लगभग 3,888 मीटर की ऊंचाई पर स्थित अमरनाथ गुफा तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को कठिन पहाड़ी रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है। चुनौतीपूर्ण यात्रा होने के बावजूद हर साल बड़ी संख्या में भक्त यहां पहुंचते हैं। आस्था, साहस और तपस्या का यह संगम अमरनाथ यात्रा को अन्य तीर्थ यात्राओं से अलग पहचान देता है। अमरनाथ यात्रा में शामिल होने के लिए श्रद्धालुओं को पहले से पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी कारणों को देखते हुए प्रशासन ने बिना वैध रजिस्ट्रेशन किसी भी यात्री को यात्रा मार्ग पर जाने की अनुमति नहीं देने का फैसला किया है।</description><guid>when-does-the-amarnath-yatra-begin-learn-about-the-mythological-</guid><pubDate>16-Jun-2026 8:31:08 pm</pubDate></item><item><title>अब बिना डॉक्टर की पर्ची नहीं मिलेगी कोई भी कफ सिरप, केंद्र सरकार ने बदले दवा बिक्री के नियम</title><link>https://just36news.com/cough-syrups-will-no-longer-be-available-without-a-doctor</link><description>नई दिल्ली। दवाओं के सुरक्षित उपयोग को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने नई अधिसूचना जारी कर देशभर में सिरप की बिक्री के नियमों में बदलाव किया है। नए निर्देशों के अनुसार अब कफ सिरप समेत किसी भी प्रकार का औषधीय सिरप बिना डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के नहीं खरीदा जा सकेगा।

मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि अब मेडिकल स्टोर और फार्मेसी संचालकों को सिरप बेचने से पहले पंजीकृत चिकित्सक द्वारा जारी वैध पर्ची की जांच करनी होगी। यह व्यवस्था केवल खांसी की दवाओं तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सभी तरह के औषधीय सिरप पर समान रूप से लागू होगी।
दवाओं के गलत इस्तेमाल पर लगेगी लगाम
स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि हाल के वर्षों में कई दवाओं, विशेषकर कफ सिरप के अनुचित उपयोग और दुरुपयोग के मामले सामने आए हैं। बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा लेने की बढ़ती प्रवृत्ति स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। इसी को देखते हुए सरकार ने प्रिस्क्रिप्शन आधारित बिक्री प्रणाली लागू करने का फैसला लिया है।
मेडिकल स्टोरों को करना होगा नियमों का पालन
नई व्यवस्था लागू होने के बाद देशभर के दवा विक्रेताओं और फार्मेसी संचालकों को निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होगा। बिना डॉक्टर की पर्ची के सिरप बेचने पर संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
मरीजों की सुरक्षा पर सरकार का फोकस
सरकार का मानना है कि यह कदम दवाओं के जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देगा और लोगों को स्वयं इलाज करने की आदत से बचाएगा। साथ ही इससे मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने में भी मदद मिलेगी।स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा है कि दवाओं की अनियंत्रित बिक्री पर अंकुश लगाने के लिए यह एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकती है।
</description><guid>cough-syrups-will-no-longer-be-available-without-a-doctor</guid><pubDate>16-Jun-2026 5:20:31 pm</pubDate></item><item><title>भारत में बैन होगा टेलीग्राम, केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, जानें क्या है इसकी वजह</title><link>https://just36news.com/telegram-will-be-banned-in-india,-a-big-decision-by-the-central-government</link><description>नई दिल्ली : RE-NEET परीक्षा को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से आयोजित कराने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम पर अस्थायी प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। यह कदम राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की सिफारिशों के बाद उठाया गया है। सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 69A के तहत टेलीग्राम की सेवाओं पर सीमित अवधि के लिए रोक लगाई जाएगी। यह प्रतिबंध 22 जून 2026 तक प्रभावी रहेगा। सरकार का मानना है कि परीक्षा से जुड़ी गोपनीय जानकारी के दुरुपयोग और कथित पेपर लीक गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए यह कदम जरूरी है।
RE-NEET परीक्षा 21 जून को
गौरतलब है कि RE-NEET परीक्षा का आयोजन 21 जून 2026 को प्रस्तावित है। पिछले कुछ समय से टेलीग्राम के कई समूहों और चैनलों पर परीक्षा प्रश्नपत्रों के लीक होने या उससे जुड़े दावों की शिकायतें सामने आती रही हैं। इन्हीं आशंकाओं को देखते हुए सरकार ने यह एहतियाती निर्णय लिया है।
मैसेज एडिट फीचर पर भी रोक
सरकार ने टेलीग्राम को यह निर्देश भी दिया है कि भारत में पहले से मौजूद संदेशों के लिए एडिट (संपादन) सुविधा को अस्थायी रूप से बंद किया जाए। यह व्यवस्था 30 जून 2026 तक लागू रहेगी। अधिकारियों का कहना है कि जांच एजेंसियों को डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखने में इससे मदद मिलेगी और किसी भी संदिग्ध सामग्री में बाद में बदलाव नहीं किया जा सकेगा।
पहले भी उठते रहे हैं सवाल
टेलीग्राम का नाम कई बार पेपर लीक, साइबर धोखाधड़ी और अवैध ऑनलाइन गतिविधियों से जुड़े मामलों में सामने आता रहा है। जांच एजेंसियों का मानना है कि प्लेटफॉर्म के कुछ फीचर्स का दुरुपयोग कर अपराधी अपनी पहचान छिपाने और सबूत मिटाने की कोशिश करते हैं। केंद्र सरकार और परीक्षा एजेंसियां इस बार परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरत रही हैं।अधिकारियों का कहना है कि छात्रों के हितों की रक्षा और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। हालांकि, सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि यह प्रतिबंध स्थायी नहीं है, बल्कि केवल परीक्षा अवधि और जांच संबंधी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सीमित समय के लिए लागू किया गया है।</description><guid>telegram-will-be-banned-in-india,-a-big-decision-by-the-central-government</guid><pubDate>16-Jun-2026 5:13:35 pm</pubDate></item><item><title>PM Kisan Yojana : पीएम किसान योजना की 23वीं किस्त की तारीख तय, जानें किसानों के खाते में कब आएंगे पैसे</title><link>https://just36news.com/pm-kisan-yojana:-the-date-for-the-23rd-installment-of-the-pm-kisan-yojana-has-been-fixed</link><description>नई दिल्ली। देशभर के करोड़ों किसानों के लिए राहत और खुशी की खबर है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत मिलने वाली अगली किस्त का इंतजार अब खत्म होने जा रहा है। केंद्र सरकार ने 23वीं किस्त जारी करने की तारीख की घोषणा कर दी है, जिसके तहत पात्र किसानों के बैंक खातों में सीधे 2,000 रुपये ट्रांसफर किए जाएंगे।
20 जून को जारी होगी राशि
योजना से जुड़े आधिकारिक अपडेट के अनुसार, पीएम किसान योजना की 23वीं किस्त 20 जून 2026 को किसानों के खातों में भेजी जाएगी। यह राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में जमा होगी, जिससे किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
किसानों को मिलती है सालाना आर्थिक सहायता
केंद्र सरकार ने किसानों की आय को सहारा देने और खेती-किसानी से जुड़े खर्चों में मदद के उद्देश्य से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत वर्ष 2019 में की थी। इस योजना के अंतर्गत पात्र किसानों को हर वर्ष 6,000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। यह राशि तीन समान किस्तों में दी जाती है, जिसमें प्रत्येक किस्त के रूप में 2,000 रुपये सीधे किसानों के खातों में भेजे जाते हैं।
अब तक जारी हो चुकी हैं 22 किस्तें
योजना की शुरुआत के बाद से अब तक किसानों को 22 किस्तों का लाभ मिल चुका है। अब सरकार 23वीं किस्त जारी करने जा रही है, जिससे लाखों किसान परिवारों को आर्थिक सहयोग मिलेगा। यह राशि खेती से जुड़े कार्यों, बीज, खाद और अन्य आवश्यक खर्चों में मददगार साबित होती है।</description><guid>pm-kisan-yojana:-the-date-for-the-23rd-installment-of-the-pm-kisan-yojana-has-been-fixed</guid><pubDate>16-Jun-2026 3:57:08 pm</pubDate></item><item><title>Accident: दर्दनाक हादसे ने छिनी परिवार की खुशियां, कुएं में गिरी श्रद्धालुओं से भरी पिकअप, 8 लोगों की मौत</title><link>https://just36news.com/accident:-chinese-family&#039;s-happiness-ends-in-tragedy,-large-mosque-</link><description>सोलापुर। महाराष्ट्र के सोलापुर से एक बेहद ही दर्दनाक हादसे की खबर सामने आई है। जहां एक पिकअप वाहन सड़क किनारे स्थित एक कुएं में जा गिरी। जिससे की इस हादसे में 8 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। जबकि, प्रशासन और स्थानीय लोगों ने छह अन्य लोगों को बचा लिया। बताया गया की मृतकों में बच्चें भी शामिल थे। इस घटना से इलाके में हड़कंप मच गया है।
मंदिर से दर्शन कर लौट रहे थे श्रद्धालु
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दुर्घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय ग्रामीणों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया और प्रशासन को सूचना दी। पुलिस, आपदा राहत दल और स्थानीय लोगों की मदद से बचाव अभियान चलाया गया। कई घंटों की मशक्कत के बाद सभी घायलों और मृतकों को कुएं से बाहर निकाला गया। जानकारी के मुताबिक, वाहन में सवार सभी 14 लोग सोलापुर जिले के रंजनीगांव के निवासी थे। वे म्हास्वद स्थित प्रसिद्ध सिद्धनाथ मंदिर में दर्शन करने गए थे और वापस अपने गांव लौट रहे थे। इसी दौरान तंदुलवाड़ी गांव के समीप यह हादसा हो गया।
बताया जा रहा है कि जिस कुएं में वाहन गिरा, वह सड़क के बेहद करीब स्थित है और उसकी सुरक्षा दीवार भी पर्याप्त ऊंची नहीं थी। कुआं पूरी तरह पानी से भरा हुआ था, जिससे हादसा और भी घातक साबित हुआ। फिलहाल दुर्घटना के वास्तविक कारणों की जांच की जा रही है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, मृतकों में चार महिलाएं और चार बच्चे शामिल हैं। वहीं कुछ पुरुष यात्रियों को स्थानीय लोगों की मदद से समय रहते बाहर निकाल लिया गया। हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है।
जनप्रतिनिधियों ने जताया शोक
घटना की जानकारी मिलते ही क्षेत्र के जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचने लगे। सांसद धैर्यशील मोहिते-पाटिल ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि पीड़ित परिवारों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। वहीं विधायक उत्तम जानकर ने भी इसे अत्यंत दुखद घटना बताते हुए प्रशासन से त्वरित राहत और सहायता सुनिश्चित करने की बात कही। पुलिस ने मामला दर्ज कर दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। वहीं मृतकों के परिजनों को सांत्वना देने और प्रभावित परिवारों की सहायता के लिए प्रशासन आवश्यक कदम उठा रहा है।</description><guid>accident:-chinese-family&#039;s-happiness-ends-in-tragedy,-large-mosque-</guid><pubDate>15-Jun-2026 7:39:04 pm</pubDate></item><item><title>बड़ी खबर : अमेरिका-ईरान युद्ध पर ब्रेक, 4 महीने बाद शांति समझौते का ऐलान</title><link>https://just36news.com/big-news:-break-in-us-iran-war,-peace-agreement-announced-after-4-months</link><description>BIG NEWS : करीब चार महीने से जारी संघर्ष के बाद अमेरिका और ईरान के बीच एक समझौता हो गया है. इस समझौते की पुष्टि खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने की. इस खबर ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है क्योंकि दोनों देशों के बीच तनाव लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बना हुआ था.
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर किया ऐलान
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर पोस्ट करते हुए कहा कि ईरान के साथ समझौता पूरा हो चुका है.
उन्होंने यह भी कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को बिना किसी शुल्क के खोला जाएगा और अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी तुरंत हटाई जाएगी. साथ ही दुनिया भर के जहाजों को फिर से सामान्य आवाजाही शुरू करने का संदेश दिया गया.
पाकिस्तान ने निभाई मध्यस्थ की भूमिका
समझौते तक पहुंचने में पाकिस्तान की अहम भूमिका बताई गई है. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए कहा, दोनों पक्षों ने सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई को तुरंत और स्थायी रूप से खत्म करने पर सहमति जताई है. इसमें लेबनान भी शामिल है. उन्होंने यह भी बताया कि समझौते पर आधिकारिक हस्ताक्षर समारोह 19 जून को स्विट्जरलैंड में होगा.
आखिरी वक्त पर फंस सकता था समझौता
रिपोर्ट के अनुसार रविवार को यह समझौता लगभग टूटने की स्थिति में पहुंच गया था. कारण यह था कि इजरायल ने बेरूत के दक्षिणी इलाके में हमला किया, जहां ईरान समर्थित हिजबुल्लाह लड़ाकों को निशाना बनाया गया था. इसके बावजूद बातचीत जारी रही और अंततः समझौते की घोषणा कर दी गई.
समझौते में क्या-क्या शामिल है?
दोनों देशों के बीच हुई सहमति में कई महत्वपूर्ण बिंदु शामिल हैं.
सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई रोकना.
लेबनान को भी समझौते के दायरे में शामिल करना.
ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाना.
होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सामान्य आवाजाही बहाल करना.
इस सप्ताह तकनीकी स्तर की बातचीत जारी रखना.
19 जून को स्विट्जरलैंड में आधिकारिक हस्ताक्षर करना.
परमाणु कार्यक्रम पर भी बनी सहमति
समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम का मुद्दा भी शामिल है. जानकारी के अनुसार, समझौते में परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने और अत्यधिक समृद्ध परमाणु सामग्री को नष्ट करने की बात कही गई है. इसके लिए निगरानी और सत्यापन की व्यवस्था भी लागू करने का प्रस्ताव है.
हालांकि यहां एक बड़ा मतभेद भी सामने आया है. एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि परमाणु सामग्री को नष्ट किया जाएगा, जबकि एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने कहा कि अमेरिका ने ईरान को अपने देश में ही अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम के भंडार को कम करने की अनुमति देने पर सहमति जताई है.
अभी अंतिम शांति समझौता नहीं
यह समझौता फिलहाल अंतिम शांति संधि नहीं है. इसे एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग बताया गया है, जिसके तहत अगले 60 दिनों तक दोनों पक्ष एक व्यापक और अंतिम समझौते की दिशा में बातचीत करेंगे. इस दौरान अमेरिकी और ईरानी अधिकारी आगे की शर्तों पर चर्चा करेंगे.
ईरान ने रखी अपनी शर्त
ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा कि अंतिम समझौते पर बातचीत तभी आगे बढ़ेगी जब ईरान यह सुनिश्चित कर लेगा कि अमेरिका अपने वादों को पूरा कर रहा है. उन्होंने कहा कि इसमें सैन्य कार्रवाई रोकना, नाकाबंदी हटाना और संपत्तियों को जारी करना जैसी बातें शामिल हैं. साथ ही उन्होंने साफ कहा कि यह समझौता अमेरिका पर भरोसा करने का संकेत नहीं है और ईरान अमेरिकी प्रतिबद्धताओं के पालन पर नजर रखेगा.
अब आगे क्या?
अब सबकी नजर 19 जून को स्विट्जरलैंड में होने वाले आधिकारिक हस्ताक्षर समारोह पर है. अगर आने वाले 60 दिनों की बातचीत सफल रहती है, तो यह समझौता अमेरिका और ईरान के रिश्तों में एक बड़े बदलाव की शुरुआत साबित हो सकता है.</description><guid>big-news:-break-in-us-iran-war,-peace-agreement-announced-after-4-months</guid><pubDate>15-Jun-2026 5:36:26 pm</pubDate></item><item><title>16 महीने बाद आमने-सामने होंगे PM मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप, G-7 समिट में होगी अहम मुलाकात</title><link>https://just36news.com/pm-modi-and-president-trump-will-meet-face-to-face-after-16-months</link><description>नई दिल्ली/पेरिस। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 16 महीने बाद पहली बार आमने-सामने मुलाकात करने जा रहे हैं। दोनों नेता 17 जून को फ्रांस में आयोजित G-7 समिट के दौरान द्विपक्षीय बैठक करेंगे। फरवरी 2025 में प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिका यात्रा के बाद यह दोनों नेताओं की पहली प्रत्यक्ष मुलाकात होगी, जिस पर दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।
व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की है कि भारतीय समयानुसार शाम 6:15 बजे होने वाली इस बैठक में भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील प्रमुख एजेंडा रहेगी। दोनों देशों के बीच पिछले कई महीनों से व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए बातचीत जारी है और अब इस मुलाकात से महत्वपूर्ण प्रगति की उम्मीद जताई जा रही है।
प्रधानमंत्री मोदी 16 और 17 जून को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के निमंत्रण पर G-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस दौरान वे G-7 देशों, साझेदार राष्ट्रों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ वैश्विक आर्थिक विकास, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा करेंगे।
सूत्रों के मुताबिक, मोदी-ट्रंप बैठक में व्यापार के अलावा रक्षा सहयोग, ऊर्जा क्षेत्र में साझेदारी और वैश्विक भू-राजनीतिक हालात पर भी चर्चा हो सकती है। अमेरिका का मानना है कि भारत और अमेरिका स्वाभाविक आर्थिक साझेदार हैं और दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।
इस मुलाकात के दौरान खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव और हाल के दिनों में भारतीय नाविकों से जुड़े मुद्दे भी चर्चा का हिस्सा बन सकते हैं। ओमान तट के पास तेल टैंकरों पर हुई अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में भारतीय नागरिकों के प्रभावित होने के बाद भारत ने अपनी चिंता अमेरिका के समक्ष दर्ज कराई थी। ऐसे में समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता का मुद्दा भी दोनों नेताओं के बीच उठ सकता है।
G-7 समिट के बाद प्रधानमंत्री मोदी 18 जून को पेरिस में विभिन्न द्विपक्षीय बैठकों में हिस्सा लेंगे और यूरोप के सबसे बड़े टेक्नोलॉजी एवं स्टार्टअप कार्यक्रम VivaTech Summit में भी शामिल होंगे। साथ ही वे फ्रांस में भारतीय समुदाय को भी संबोधित करेंगे।</description><guid>pm-modi-and-president-trump-will-meet-face-to-face-after-16-months</guid><pubDate>14-Jun-2026 11:57:50 am</pubDate></item><item><title>भारत ने रचा इतिहास, मेड इन इंडिया C-295 सैन्य विमान ने भरी पहली सफल उड़ान</title><link>https://just36news.com/india-creates-history-as-&#039;made-in-india-c-295-military-aircraft-makes-its-first-successful-flight</link><description>नई दिल्ली। रक्षा क्षेत्र में भारत ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाया है। भारत में असेंबल किए गए पहले C-295 सैन्य परिवहन विमान ने बुधवार को अपनी पहली सफल परीक्षण उड़ान पूरी कर ली। इस ऐतिहासिक उपलब्धि की जानकारी भारतीय वायु सेना (IAF) ने दी और इस परियोजना से जुड़े सभी इंजीनियरों व विशेषज्ञों को बधाई दी।
करीब 21,935 करोड़ रुपये की लागत वाले इस रक्षा सौदे के तहत भारतीय वायु सेना कुल 56 C-295 विमान खरीद रही है। इनमें से 16 विमान सीधे एयरबस से प्राप्त किए जा रहे हैं, जबकि शेष 40 विमानों का निर्माण और असेंबली भारत में की जा रही है।


गुजरात के वडोदरा स्थित अत्याधुनिक उत्पादन केंद्र में टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड और एयरबस के सहयोग से इन विमानों का निर्माण हो रहा है। यह पहली बार है जब भारत में इस स्तर का आधुनिक सैन्य परिवहन विमान तैयार किया जा रहा है।
C-295 विमान दुर्गम और सीमावर्ती क्षेत्रों में जवानों, हथियारों और भारी सैन्य उपकरणों को तेजी से पहुंचाने में सक्षम है। इसकी सफल उड़ान भारतीय वायु सेना की परिचालन क्षमता को और मजबूत करेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि केवल रक्षा क्षेत्र की सफलता नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत अभियान के लिए भी एक बड़ा मील का पत्थर है। इससे भारत की रक्षा विनिर्माण क्षमता को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलेगी और देश सैन्य तकनीक के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में और आगे बढ़ेगा।











</description><guid>india-creates-history-as-&#039;made-in-india-c-295-military-aircraft-makes-its-first-successful-flight</guid><pubDate>11-Jun-2026 10:37:36 am</pubDate></item><item><title>काशी में बनेगा दुनिया का सबसे ऊंचा शिवलिंग, 100 करोड़ की लागत से 20 एकड़ में तैयार होगा भव्य शिव थीम पार्क</title><link>https://just36news.com/the-world-tallest-shivalinga-will-be-built-in-kashi,-a-grand-shiva-theme-</link><description>वाराणसी। मोक्ष और भगवान शिव की नगरी काशी जल्द ही एक और ऐतिहासिक पहचान हासिल करने जा रही है। वाराणसी में दुनिया का सबसे ऊंचा शिवलिंग स्थापित करने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए नगर निगम ने स्थान का चयन कर लिया है। नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल के अनुसार, आगामी 9 से 10 महीनों के भीतर इस महत्वाकांक्षी परियोजना को पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
जानकारी के अनुसार, भेलूपुर स्थित जलकल विभाग की लगभग 20 एकड़ भूमि पर यह भव्य शिवलिंग स्थापित किया जाएगा। इसके साथ ही शिव थीम पर आधारित एक आधुनिक अर्बन पार्क भी विकसित किया जाएगा, जो धार्मिक और पर्यटन दोनों दृष्टि से विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगा। करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होने वाली इस परियोजना में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए कई आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। पार्क परिसर में आकर्षक लेजर शो, थीम आधारित संरचनाएं और मनोरम हरित क्षेत्र तैयार किए जाएंगे, जिससे यह स्थल धार्मिक पर्यटन का नया केंद्र बन सके।
गौरतलब है कि वाराणसी में विश्व प्रसिद्ध भगवान काशी विश्वनाथ धाम स्थित है, जो द्वादश ज्योतिर्लिंगों में शामिल है। इसके अलावा काशी में अनेक प्राचीन शिव मंदिर मौजूद हैं, जिनका उल्लेख धार्मिक ग्रंथों और पुराणों में मिलता है। देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु हर वर्ष यहां दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।
परियोजना पूरी होने के बाद काशी आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को विश्व के सबसे ऊंचे शिवलिंग के दर्शन का अवसर मिलेगा। उम्मीद जताई जा रही है कि यह नया धार्मिक स्थल वाराणसी की आध्यात्मिक और पर्यटन पहचान को और अधिक वैश्विक स्तर पर स्थापित करेगा।
</description><guid>the-world-tallest-shivalinga-will-be-built-in-kashi,-a-grand-shiva-theme-</guid><pubDate>10-Jun-2026 2:48:14 pm</pubDate></item><item><title>इंडिया गठबंधन की बैठक में 25 दलों की मौजूदगी, महंगाई-बेरोजगारी समेत पांच मुद्दों पर बनी सहमति</title><link>https://just36news.com/25-parties-attended-the-india-coalition-meeting,-consensus-reached-</link><description>नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में आज सोमवार को इंडिया गठबंधन (INDIA Bloc) की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में कांग्रेस की अगुवाई में 25 राजनीतिक दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया और देश के विभिन्न अहम मुद्दों पर साझा रणनीति बनाने पर सहमति जताई। बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, सोनिया गांधी, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव समेत कई वरिष्ठ विपक्षी नेता मौजूद रहे।
बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए मल्लिकार्जुन खड़गे ने बताया कि गठबंधन के सभी दलों ने पांच प्रमुख मुद्दों पर एकजुट होकर आगे बढ़ने का फैसला किया है। इनमें शिक्षा व्यवस्था, बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की समस्याएं और आर्थिक हालात प्रमुख रूप से शामिल हैं। विपक्षी दलों ने नीट और सीबीएसई से जुड़े हालिया विवादों को लेकर केंद्र सरकार को भी घेरा। नेताओं ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उठाई।
खड़गे ने कहा कि, खड़गे ने कहा कि SIR में करोड़ों वोटर के नाम कटे। SIR और चुनाव की निष्पक्षता को लेकर CJI को लेटर लिखेंगे। देश के मौजूदा आर्थिक हालात, बेरोजगारी, महंगाई और किसानों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए केंद्र सरकार को जल्द सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए। साथ ही मानसून सत्र के दौरान संसद में विपक्ष की रणनीति को मजबूत करने के लिए प्रतिदिन समन्वय बैठकें आयोजित करने का भी फैसला लिया गया है। बैठक में यह भी तय हुआ कि इंडिया गठबंधन की सभी पार्टियां हर दो महीने में बैठक करेंगी। गठबंधन की अगली बैठक अगस्त महीने में हैदराबाद में आयोजित की जाएगी।
इन पांच मुद्दों पर बनी सहमति
1. SIR, मतदाता सूची में कथित हस्तक्षेप और चुनावों की निष्पक्षता के मुद्दे पर भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखने पर सहमति बनी है. यह पत्र उन्हें जल्द से जल्द सौंपा जाएगा।
2. नीट और सीबीएसई से जुड़े विवादों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए। उनके कार्यकाल में नीट और सीबीएसई परीक्षाओं से जुड़े मामलों में लाखों युवाओं के साथ अन्याय हुआ है। जिस वजह से बड़ी संख्या में युवा सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन कर रहे हैं।
3. देश की गंभीर आर्थिक स्थिति, बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई, अत्याचारों और किसानों से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाते रहेंगे। जनहित से जुड़े इन विषयों पर केंद्र सरकार को सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए, जिसमें हम अपने सभी मुद्दे और सुझाव रखेंगे।
4. इंडिया ब्लॉक के सभी दल हर दो महीने में बैठक करेंगे। हमारी अगली बैठक 8 अगस्त को हैदराबाद में आयोजित होगी।
5. संसद के मानसून सत्र के दौरान विपक्षी दलों के बीच समन्वय जारी रहेगा। इसके लिए नेता प्रतिपक्ष के कार्यालय में प्रतिदिन सुबह एक समन्वय बैठक आयोजित की जाएगी।
बता दें कि, बैठक के अंत में नेताओं ने संकेत दिए कि आने वाले समय में महंगाई, बेरोजगारी, चुनावी प्रक्रिया, संविधान और विदेश नीति जैसे मुद्दों पर केंद्र सरकार के खिलाफ संयुक्त अभियान चलाया जा सकता है। राजनीतिक जानकार इस बैठक को विपक्षी एकता के लिहाज से महत्वपूर्ण मान रहे हैं। हालांकि गठबंधन के भीतर मौजूद मतभेद पूरी तरह खत्म हुए हैं या नहीं, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। फिलहाल विपक्ष ने एकजुटता का संदेश देते हुए सरकार के खिलाफ साझा संघर्ष का संकेत दिया है।</description><guid>25-parties-attended-the-india-coalition-meeting,-consensus-reached-</guid><pubDate>09-Jun-2026 11:50:42 am</pubDate></item><item><title>बॉम्बे हाई कोर्ट को मिले 6 नए स्थायी जज, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नियुक्ति को दी मंजूरी</title><link>https://just36news.com/bombay-high-court-gets-6-new-permanent-judges,-president-draupadi-murmu-approves-the-appointments</link><description>नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संविधान द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए बॉम्बे उच्च न्यायालय के 6 अतिरिक्त न्यायाधीशों को स्थायी न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद जारी इस नियुक्ति में निवेदिता प्रकाश मेहता, प्रफुल्ल सुरेंद्रकुमार खुबलकर, अश्विन दामोदर भोबे, रोहित वासुदेव जोशी, अद्वैत महेंद्र सेठना और प्रवीण शेषराव पाटिल के नाम शामिल हैं।




</description><guid>bombay-high-court-gets-6-new-permanent-judges,-president-draupadi-murmu-approves-the-appointments</guid><pubDate>07-Jun-2026 2:31:03 pm</pubDate></item><item><title>BREAKING : राजधानी के मशहूर रेस्टोरेंट में लगी भीषण आग, अब तक 20 लोगों की मौत, बचाव कार्य जारी</title><link>https://just36news.com/breaking:-a-massive-fire-broke-out-in-a-famous-restaurant-in-the-capital</link><description>नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली के मालवीय नगर इलाके से एक बेहद दर्दनाक खबर सामने आई है. बुधवार सुबह यहां एक मशहूर रेस्टोरेंट में अचानक भीषण आग लग गई. दिल्ली पुलिस के मुताबिक, इस भयानक अग्निकांड में झुलसने और दम घुटने के कारण अब तक 20 लोगों की मौत हो चुकी है. हादसे के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी और दुख का माहौल है. दिल्ली पुलिस और दमकल विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, दिल्ली फायर सर्विस (DFS) को सुबह करीब 09:45 बजे मालवीय नगर के एक रेस्टोरेंट में आग लगने की सूचना मिली थी. सूचना मिलते ही दमकल विभाग की गाड़ियां और राहतकर्मी तुरंत मौके पर पहुंचे. नेहरू प्लेस (NRN) फायर स्टेशन के डिवीजनल ऑफिसर (DO) रविंदर खुद टीम के साथ मौके पर मौजूद रहकर राहत और बचाव कार्य की कमान संभाले हुए हैं.
शुरुआती कार्रवाई के दौरान दमकलकर्मियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर रेस्टोरेंट की इमारत के बेसमेंट से 3 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला. उन्हें कैट्स (CATS) एम्बुलेंस के जरिए तुरंत पास के अस्पताल ले जाया गया. दिल्ली पुलिस ने बताया कि दमकलकर्मियों ने कुल 30 लोगों को सुरक्षित रेस्क्यू कर इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया है. हालांकि, अस्पताल ले जाए जाने के बाद डॉक्टरों ने 10 लोगों को मृत घोषित कर दिया. पुलिस और प्रशासन की टीमें अभी भी मौके पर मौजूद हैं और इस बात की जांच की जा रही है कि आग लगने की असली वजह क्या थी. हादसे में घायल हुए लोगों का इलाज जारी है और पूरे मामले पर नजर रखी जा रही है.</description><guid>breaking:-a-massive-fire-broke-out-in-a-famous-restaurant-in-the-capital</guid><pubDate>03-Jun-2026 2:18:02 pm</pubDate></item><item><title>सीजेआई सूर्यकांत ने 5 नए जजों को दिलाई शपथ, सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर हुई 37</title><link>https://just36news.com/cji-surya-kant-administered-the-oath-to-5-new-judges,-taking-the-supreme-court&#039;s-strength-to-37</link><description>भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के पांच नए न्यायाधीशों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इसके साथ ही देश की सर्वोच्च अदालत में न्यायाधीशों की कुल संख्या बढ़कर 37 हो गई है।
नए नियुक्त न्यायाधीशों में शामिल हैं:
 जस्टिस शील नागू
 जस्टिस श्री चंद्रशेखर
 जस्टिस संजीव सचदेवा
 जस्टिस अरुण पल्ली
 वरिष्ठ वकील वी. मोहना
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद शपथ
केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए बताया कि राष्ट्रपति ने मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद इन पांचों को सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया है। नियुक्तियां सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश पर की गई हैं।
नए जजों का संक्षिप्त परिचय:
 जस्टिस शील नागू: मई 2011 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायाधीश बने। जुलाई 2024 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने।
 जस्टिस श्री चंद्रशेखर: जनवरी 2013 में झारखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश नियुक्त हुए। जनवरी 2025 में बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का पदभार संभाला।
 जस्टिस संजीव सचदेवा: अप्रैल 2013 में दिल्ली हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश बने, मार्च 2015 में स्थायी न्यायाधीश नियुक्त हुए। जुलाई 2025 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने।
 जस्टिस अरुण पल्ली: दिसंबर 2013 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के न्यायाधीश बने। अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश नियुक्त हुए।
 वी. मोहना: सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकील हैं। उन्होंने संवैधानिक, दीवानी और सेवा कानून से संबंधित कई महत्वपूर्ण मामलों में वकालत की है।
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 22 मई और 27 मई को हुई बैठकों में इन नामों की सिफारिश की थी, जिसे केंद्र सरकार ने सोमवार को मंजूरी दे दी। यह नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट में लंबे समय से मौजूद न्यायाधीशों की कमी को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।</description><guid>cji-surya-kant-administered-the-oath-to-5-new-judges,-taking-the-supreme-court&#039;s-strength-to-37</guid><pubDate>03-Jun-2026 9:22:30 am</pubDate></item><item><title>विकसित भारत 2047 के विजन को साकार करने में स्वस्थ भारत होना बुनियादी जरूरत: जेपी नड्डा</title><link>https://just36news.com/a-healthy-india-is-a-fundamental-requirement-for-realizing-the-vision-</link><description>केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने मंगलवार को एम्स बठिंडा के दूसरे दीक्षांत समारोह को संबोधित किया और पास होकर निकले छात्रों को उनके पेशेवर सफर की शुरुआत करने पर बधाई दी। उन्होंने तृतीयक स्वास्थ्य सेवा, चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान को मजबूत करने की दिशा में संस्थान के बढ़ते योगदान की सराहना की।
जेपी नड्डा ने छात्रों को उनकी शैक्षणिक यात्रा सफलतापूर्वक पूरी करने पर बधाई दी और दूसरे दीक्षांत समारोह को छात्रों, उनके माता-पिता, संकाय सदस्यों और पूरे एम्स बठिंडा परिवार के लिए गर्व और उत्सव का क्षण बताया।
उन्होंने संस्थान की तेजी से हुई प्रगति और इस क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने में उसके योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि एम्स बठिंडा आज प्रतिदिन लगभग 3,000 ओपीडी मरीजों और लगभग 600 ओपीडी मरीजों का इलाज करता है और साथ ही एम्स ब्रांड से जुड़े उच्च मानकों और विश्वसनीयता को भी बनाए रखता है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने एम्स बठिंडा की सामुदायिक पहुंच की पहलों की भी सराहना की, जिसमें आसपास के 59 गांवों में हर महीने दो बार आयुष्मान शिविर आयोजित करना शामिल है, जहां नागरिकों की मधुमेह, उच्च रक्तचाप और कैंसर जैसी गैर-संक्रामक बीमारियों के लिए जांच की जाती है।
उन्होंने कहा कि टेलीमेडिसिन सेवाओं, मोबाइल मेडिकल इकाइयों, ग्रामीण जागरूकता अभियानों और स्वास्थ्य सेवा पहुंच कार्यक्रमों के माध्यम से यह संस्थान केवल अस्पताल-आधारित देखभाल से आगे बढ़कर सार्वजनिक स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू किए गए स्वास्थ्य सेवा सुधारों के परिवर्तनकारी प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए नड्डा ने कहा कि भारत का स्वास्थ्य सेवा दृष्टिकोण मुख्य रूप से उपचारात्मक मॉडल से विकसित होकर एक ऐसे व्यापक ढांचे में बदल गया है, जिसमें निवारक, प्रोत्साहक, पुनर्वास, प्रशामक और बुजुर्गों की देखभाल शामिल है।
उन्होंने बताया कि आज 1.82 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर पूरे देश में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए संपर्क के पहले बिंदु के रूप में कार्य कर रहे हैं।
नड्डा ने सरकार के निवारक स्वास्थ्य देखभाल पर जोर देने की बात पर बल देते हुए बताया कि 30 वर्ष से अधिक आयु के सभी लोगों को पंचायतों, आशा कार्यकर्ताओं और फ्रंटलाइन स्वास्थ्य कर्मियों के माध्यम से नियमित जांच (स्क्रीनिंग) करवाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इन पहलों के तहत हुई प्रगति की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि 36 करोड़ से अधिक लोगों की मुंह के कैंसर के लिए, 17 करोड़ से अधिक महिलाओं की स्तन कैंसर के लिए और 9 करोड़ से अधिक महिलाओं की सर्वाइकल कैंसर के लिए जांच की गई है। इसके अलावा 42 करोड़ से अधिक लोगों की मधुमेह और उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) के लिए जांच की गई है, जबकि देशव्यापी तपेदिक (टीबी) जांच अभियान भी चल रहा है।
राष्ट्र निर्माण में स्वास्थ्य के महत्व का जिक्र करते हुए नड्डा ने कहा कि विकसित भारत 2047 का सपना केवल एक स्वस्थ और कर्मठ आबादी के माध्यम से ही साकार किया जा सकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यद्यपि सरकारें बुनियादी ढांचा और आधुनिक सुविधाएं प्रदान कर सकती हैं, लेकिन स्वास्थ्य सेवा अंततः डॉक्टरों और स्वास्थ्य पेशेवरों के समर्पण, दक्षता और करुणा पर ही निर्भर करती है। डॉक्टरों को स्वास्थ्य प्रणाली की सच्ची ताकत बताते हुए उन्होंने टिप्पणी की कि बुनियादी ढांचा भले ही स्वास्थ्य सेवा का हार्डवेयर हो, लेकिन स्वास्थ्य पेशेवर ही इसके सॉफ्टवेयर हैं।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा के विकास के मामले पंजाब सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल हैं, और उन्होंने राज्य में स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे के विस्तार पर भी प्रकाश डाला।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने पिछले एक दशक में भारत के चिकित्सा शिक्षा तंत्र में हुए अभूतपूर्व विस्तार पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि एम्स संस्थानों की संख्या बढ़कर 23 हो गई है, मेडिकल कॉलेजों की संख्या 387 से बढ़कर 820 से अधिक हो गई है। स्नातक (यूजी) चिकित्सा सीटों की संख्या लगभग 59,000 से बढ़कर 1.28 लाख से अधिक हो गई है और स्नातकोत्तर (पीजी) सीटों की संख्या लगभग 31,000 से बढ़कर 86,000 से अधिक हो गई है।
उन्होंने आगे बताया कि सरकार अगले पांच वर्षों में यूजी तथा पीजी चिकित्सा की 75,000 सीटें जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है, जिनमें से लगभग 23,000 सीटें पिछले दो वर्षों के दौरान पहले ही स्थापित की जा चुकी हैं।
नड्डा ने सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में भारत की महत्वपूर्ण उपलब्धियों पर भी प्रकाश डाला, जिनमें 2014 में देश को पोलियो-मुक्त घोषित किया जाना और 2015 में मातृ एवं नवजात टिटनेस का उन्मूलन शामिल है। उन्होंने बताया कि अब देश में ट्रेकोमा सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय नहीं रहा है, और काला-अजार, कुष्ठ रोग तथा लिम्फैटिक फाइलेरिया के उन्मूलन की दिशा में भी काफी प्रगति हुई है।
एम्स बठिंडा की अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) नीरजा भाटला ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री का स्वागत किया और संस्थान को उनके निरंतर मार्गदर्शन तथा सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में सरकार ने स्वास्थ्य सेवा को अधिक समावेशी, सुलभ और किफायती बनाने के लिए अभूतपूर्व प्रयास किए हैं और इसी क्रम में पूरे देश में एम्स नेटवर्क का विस्तार सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित हुआ है।</description><guid>a-healthy-india-is-a-fundamental-requirement-for-realizing-the-vision-</guid><pubDate>03-Jun-2026 9:16:05 am</pubDate></item><item><title>मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना को बड़ी सफलता, महाराष्ट्र में तीसरी पर्वतीय सुरंग का निर्माण पूरा</title><link>https://just36news.com/mumbai-ahmedabad-bullet-train-project-gets-major-breakthrough,-construction-of-third-mountain-tunnel-in-</link><description>मुंबई- अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत महाराष्ट्र में तीसरी पर्वतीय सुरंग का निर्माण सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। पालघर जिले में पिछले पांच महीनों के भीतर तीन पर्वतीय सुरंगों के निर्माण पूरा होने से देश की पहली हाई-स्पीड रेल परियोजना को नई गति मिली है। यह उपलब्धि परियोजना के सबसे तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण खंडों में तेज प्रगति का संकेत मानी जा रही है।
एमटी-07 सुरंग का निर्माण हुआ पूरा
हाल ही में पूरी हुई एमटी-07 पर्वतीय सुरंग 417 मीटर लंबी और 14.4 मीटर चौड़ी है। यह सुरंग बुलेट ट्रेन कॉरिडोर की दोनों पटरियों के लिए बनाई गई है। इसकी खुदाई दोनों सिरों से नियंत्रित ड्रिलिंग और ब्लास्टिंग तकनीक के माध्यम से की गई। निर्माण कार्य के दौरान उन्नत इंजीनियरिंग मानकों और सुरक्षा प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन किया गया।
अत्याधुनिक निगरानी और सुरक्षा प्रणाली का उपयोग
सुरंग निर्माण के दौरान संरचनात्मक स्थिरता, श्रमिकों की सुरक्षा और कार्य की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक निगरानी प्रणालियों तथा भू-तकनीकी उपकरणों का उपयोग किया गया। सरफेस सेटलमेंट पॉइंट्स (एसएसपी), 3डी टारगेट, स्ट्रेन गेज और सिस्मोग्राफ जैसे उपकरणों के जरिए कंपन, सुरंग की गतिविधियों और आसपास की संरचनाओं की लगातार निगरानी की गई। इसके अलावा वेंटिलेशन सिस्टम, अग्नि सुरक्षा व्यवस्था, नियंत्रित पहुंच और निरंतर भू-तकनीकी निरीक्षण जैसी सुरक्षा व्यवस्थाएं भी लागू रहीं।
पांच महीनों में तीन सुरंगों का निर्माण पूरा
इससे पहले 2 जनवरी 2026 को पालघर जिले के सफाले के पास 1.5 किलोमीटर लंबी पहली पर्वतीय सुरंग एमटी-05 का निर्माण पूरा हुआ था। इसके बाद 3 फरवरी 2026 को 454 मीटर लंबी दूसरी सुरंग एमटी-06 का निर्माण न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड (एनएटीएम) के जरिए पूरा किया गया। अब एमटी-07 के निर्माण के साथ पांच महीनों के भीतर तीन पर्वतीय सुरंगें पूरी हो चुकी हैं।
अन्य सुरंगों पर भी तेजी से जारी है काम
महाराष्ट्र में निर्माणाधीन सात पर्वतीय सुरंगों में से एमटी-05, एमटी-06 और एमटी-07 की खुदाई पूरी हो चुकी है। एमटी-08 की 350 मीटर लंबी सुरंग की खुदाई अक्टूबर 2023 में ही पूरी हो गई थी। वहीं एमटी-03 में 80% से अधिक, एमटी-04 में लगभग 60% कार्य पूरा हो चुका है, जबकि एमटी-01 और एमटी-02 में निर्माण कार्य जारी है।
औद्योगिक क्षेत्र को जोड़ रहा है हाई-स्पीड कॉरिडोर
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर महाराष्ट्र के बोइसर और गुजरात के वापी के बीच स्थित महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्र से होकर गुजरता है। वापी और बोइसर स्टेशनों के बीच स्थित तीन पर्वतीय सुरंगों एमटी-08, एमटी-07 और एमटी-06 की खुदाई सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी है, जिससे इस खंड में निर्माण कार्य को गति मिली है।
हाई-स्पीड रेल अवसंरचना को मिलेगी मजबूती
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत उन्नत सुरंग निर्माण, निगरानी और आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। यह परियोजना देश में सुरक्षित, आधुनिक और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप हाई-स्पीड रेल अवसंरचना विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।</description><guid>mumbai-ahmedabad-bullet-train-project-gets-major-breakthrough,-construction-of-third-mountain-tunnel-in-</guid><pubDate>03-Jun-2026 9:11:09 am</pubDate></item><item><title>अल नीनो की आशंका पर केंद्र अलर्ट, किसानों के हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता : शिवराज सिंह चौहान</title><link>https://just36news.com/centre-alert-on-possibility-of-el-nino,-protecting-farmers-interests-is-top-priority-shivraj-singh-chouhan</link><description>केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने संभावित अल नीनो परिस्थितियों को लेकर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में कहा कि घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन समय रहते तैयारी करना आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार किसानों के हितों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है और खरीफ सीजन को प्रभावित होने से बचाने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
कम वर्षा वाले क्षेत्रों पर विशेष निगरानी के निर्देश
बैठक में केंद्रीय मंत्री ने कम वर्षा की आशंका वाले राज्यों और जिलों पर विशेष निगरानी रखने तथा आवश्यकता पड़ने पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पुनर्बुवाई, जीवनरक्षक सिंचाई, कम अवधि वाली फसलें, वैकल्पिक बुवाई योजनाएं और जिला-विशिष्ट कृषि सलाह किसानों तक समय पर पहुंचाई जानी चाहिए।
बीज, नमी और जल प्रबंधन पर सरकार का फोकस
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि संभावित मौसमीय चुनौतियों को देखते हुए बीजों की उपलब्धता, खेतों में नमी संरक्षण, जल प्रबंधन और वैकल्पिक फसल योजनाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने भरोसा जताया कि बेहतर तैयारी के जरिए किसानों पर किसी भी प्रतिकूल प्रभाव को कम किया जा सकेगा।
जलाशयों का जलस्तर सामान्य से बेहतर
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि वर्तमान में देश के जलाशयों में जलस्तर सामान्य से बेहतर स्थिति में है, जो खरीफ सीजन की तैयारियों के लिए एक बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि उपलब्ध जल संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के लिए राज्यों के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है।
रोग और कीट प्रबंधन की अग्रिम तैयारी पर जोर
बैठक में रोग एवं कीट प्रबंधन को भी प्रमुखता से उठाया गया। शिवराज सिंह चौहान ने निर्देश दिए कि मौसम में बदलाव, नमी के असंतुलन या वर्षा में अंतराल के कारण बढ़ने वाले संभावित रोगों और कीटों की अग्रिम पहचान की जाए। साथ ही उनकी निगरानी और उपचार संबंधी सलाह पहले से तैयार कर राज्यों और किसानों तक तेजी से पहुंचाई जाए।
मोबाइल एडवाइजरी और डिजिटल संचार तंत्र होगा मजबूत
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार के पास पर्याप्त डेटा, तकनीकी प्लेटफॉर्म और संचार व्यवस्था उपलब्ध है। ऐसे में किसानों तक सीधे मोबाइल संदेश, कृषि सलाह, चेतावनी और फसल संबंधी जानकारी पहुंचाने की व्यवस्था को और मजबूत किया जाना चाहिए। उन्होंने राज्य स्तरीय तंत्र, कॉल सेंटर, स्थानीय अधिकारियों और डिजिटल माध्यमों को एकीकृत कर प्रभावी सूचना प्रणाली विकसित करने पर जोर दिया।
राज्यों की तैयारियों की होगी लगातार समीक्षा
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि राज्यों की तैयारियों की निरंतर समीक्षा की जाएगी। जिन राज्यों में तैयारियां बेहतर हैं, उनके अनुभव साझा किए जाएंगे और जहां अतिरिक्त सहयोग की जरूरत होगी, वहां केंद्र सरकार सक्रिय हस्तक्षेप करेगी। उन्होंने कहा कि किसानों तक समय पर सहायता पहुंचाना सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
संयुक्त रणनीति के साथ काम करने की जरूरत
बैठक में मंत्री ने कहा कि मौसम, जल, बीज, फसल, रोग-कीट, सिंचाई और ग्रामीण विकास से जुड़े विभाग अलग-अलग काम करने के बजाय साझा डेटा और संयुक्त रणनीति के साथ आगे बढ़ें। इससे जिला और राज्य स्तर पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकेगी।
किसानों का आत्मविश्वास बनाए रखना लक्ष्य
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार का उद्देश्य केवल संभावित जोखिम का आकलन करना नहीं, बल्कि समय रहते ऐसे सभी कदम उठाना है जिससे किसानों का आत्मविश्वास बना रहे और खेती की निरंतरता प्रभावित न हो। उन्होंने विश्वास जताया कि बेहतर जल प्रबंधन, उन्नत कृषि तकनीकों, समय पर बीज उपलब्धता और मजबूत समन्वय के बल पर संभावित चुनौतियों का प्रभाव काफी हद तक कम किया जा सकेगा।</description><guid>centre-alert-on-possibility-of-el-nino,-protecting-farmers-interests-is-top-priority-shivraj-singh-chouhan</guid><pubDate>03-Jun-2026 9:05:09 am</pubDate></item><item><title>रुद्रम-II मिसाइल का सफल परीक्षण, भारत की रक्षा क्षमता को मिली नई मजबूती</title><link>https://just36news.com/successful-test-of-rudram-ii-missile,-india-defense-capability-gets-a-new-boost</link><description>रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और भारतीय वायु सेना (आईएएफ) ने स्वदेशी रूप से विकसित अत्याधुनिक रुद्रम-II वायु-से-सतह मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण किया है। चुनौतीपूर्ण परिचालन परिस्थितियों में किए गए इस परीक्षण ने मिसाइल की सटीकता, विश्वसनीयता और उसकी सभी प्रमुख प्रणालियों की क्षमता को प्रमाणित किया।
सभी लक्ष्यों पर सटीक प्रहार
परीक्षण के दौरान प्रक्षेपित की गई सभी मिसाइलों ने अपने पूर्वनिर्धारित लक्ष्यों पर अत्यंत सटीकता के साथ प्रहार किया। चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज (आईटीआर) द्वारा तैनात उन्नत ट्रैकिंग और रेंज उपकरणों से प्राप्त आंकड़ों ने पुष्टि की कि परीक्षण के सभी निर्धारित उद्देश्य पूरी तरह सफल रहे।
स्वदेशी तकनीक से विकसित हुई रुद्रम-II
रुद्रम-II मिसाइल का विकास हैदराबाद स्थित डीआरडीओ की नोडल प्रयोगशाला इमारत अनुसंधान केंद्र (आरसीआई) ने किया है। इसके विकास में रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला (डीआरडीएल), उच्च ऊर्जा सामग्री अनुसंधान प्रयोगशाला (एचईएमआरएल), शस्त्र अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (एआरडीई) तथा एकीकृत परीक्षण रेंज सहित कई प्रयोगशालाओं ने सहयोग किया।
सार्वजनिक और निजी क्षेत्र का महत्वपूर्ण योगदान
इस परियोजना में विकास सह उत्पादन साझेदारों (डीसीपीपी) के अलावा हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल), क्षेत्रीय सैन्य विमानन योग्यता केंद्र, मिसाइल प्रणाली गुणवत्ता आश्वासन एजेंसी और विभिन्न उद्योगों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन संस्थानों के सहयोग से मिसाइल के विकास और परीक्षण को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया।
राजनाथ सिंह ने दी बधाई
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रुद्रम-II के सफल परीक्षण के लिए डीआरडीओ, भारतीय वायु सेना, रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों और उद्योग जगत के सभी सहयोगियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सफलता भारत की स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकियों की बढ़ती परिपक्वता, विश्वसनीयता और क्षमता का प्रमाण है।
आत्मनिर्भर रक्षा क्षेत्र को मिलेगा बल
रक्षा मंत्री ने कहा कि यह उपलब्धि उन्नत हथियार प्रणालियों के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को और मजबूत करेगी तथा देश की रक्षा तैयारियों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
वैज्ञानिकों और तकनीकी टीमों की सराहना
रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव तथा डीआरडीओ के अध्यक्ष ने इस उपलब्धि से जुड़े सभी वैज्ञानिकों, तकनीकी विशेषज्ञों और परिचालन टीमों को बधाई देते हुए इसे देश की रक्षा क्षमता के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।</description><guid>successful-test-of-rudram-ii-missile,-india-defense-capability-gets-a-new-boost</guid><pubDate>03-Jun-2026 8:58:15 am</pubDate></item><item><title>जून की शुरुआत के साथ बदले कई बड़े नियम, LPG सिलेंडर से लेकर कार और UPI तक का सीधा असर आपकी जेब पर</title><link>https://just36news.com/several-major-rules-changed-with-the-start-of-june,-directly-impacting-</link><description>नई दिल्ली। जून महीने की शुरुआत के साथ ही देशभर में कई बड़े वित्तीय और रोजमर्रा से जुड़े नियम बदल गए हैं। इन बदलावों का सीधा असर आम लोगों, कारोबारियों और ग्राहकों की जेब पर पड़ने वाला है। 1 जून 2026 से कमर्शियल LPG सिलेंडर महंगा हो गया है, मारुति सुजुकी की कारों की कीमतें बढ़ गई हैं, बैंकिंग नियमों में बदलाव लागू हो गए हैं, सोलर पैनल महंगे हो सकते हैं और UPI पेमेंट सिस्टम में भी बड़ा बदलाव किया गया है। आइए जानते हैं आज से लागू हुए 5 बड़े बदलावों के बारे में।
1. कमर्शियल LPG सिलेंडर महंगा
हर महीने की तरह तेल कंपनियों ने 1 जून को LPG सिलेंडर की नई कीमतें जारी कर दी हैं। घरेलू 14.2 किलो वाले सिलेंडर के दाम में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन 19 किलो वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत फिर बढ़ा दी गई है। दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर 42 रुपये महंगा होकर 3113.50 रुपये का हो गया है, जबकि कोलकाता में इसकी कीमत 52.50 रुपये बढ़ गई है। इसका असर होटल, रेस्तरां और छोटे कारोबारियों पर पड़ सकता है।
इसके अलावा पेट्रोलियम मंत्रालय ने LPG और PNG कनेक्शन रखने वालों के लिए भी नियम सख्त कर दिए हैं। अब जिन उपभोक्ताओं के घर PNG कनेक्शन लग चुका है, उन्हें 30 दिनों के भीतर अपना LPG कनेक्शन सरेंडर करना होगा।
2. Maruti Suzuki की कारें हुईं महंगी
जून की पहली तारीख से मारुति सुजुकी ने अपनी कई कारों की कीमतें बढ़ा दी हैं। कंपनी के अनुसार बढ़ी हुई कीमतें आज से लागू हो गई हैं। Alto, Brezza, WagonR और अन्य कई मॉडल अब पहले से महंगे मिलेंगे। कंपनी ने अलग-अलग मॉडलों की कीमतों में अधिकतम 30 हजार रुपये तक की बढ़ोतरी की है। ऐसे में नई कार खरीदने की योजना बना रहे लोगों को अब ज्यादा खर्च करना पड़ेगा।
3. HDFC Bank ने बदले नियम
1 जून 2026 से HDFC Bank ने अपने करंट अकाउंट और कुछ अन्य खातों से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। बैंक के मुताबिक अब छोटे नोट और सिक्के जमा करने पर नई लिमिट और चार्ज लागू होगा। 20 रुपये या उससे कम मूल्य के नोटों के लिए 10 हजार रुपये प्रतिमाह और सिक्कों के लिए 5 हजार रुपये प्रतिमाह की सीमा तय की गई है। इससे ज्यादा रकम जमा करने पर अतिरिक्त 2 प्रतिशत शुल्क देना होगा।
4. Solar Panel हो सकते हैं महंगे
आज से सोलर पैनल सेक्टर में भी नया नियम लागू हो गया है। अब सरकारी योजनाओं और सब्सिडी वाले प्रोजेक्ट्स में केवल Approved List of Models and Manufacturers (ALMM List-II) में शामिल सोलर मॉड्यूल और सेल का ही इस्तेमाल किया जाएगा। सरकार का कहना है कि इससे गुणवत्ता सुनिश्चित होगी, लेकिन इसके कारण सोलर पैनल की कीमतों में बढ़ोतरी होने की आशंका जताई जा रही है।
5. UPI पेमेंट सिस्टम में बड़ा बदलाव
डिजिटल पेमेंट को ज्यादा सुरक्षित बनाने के लिए NPCI ने UPI सिस्टम में बड़ा बदलाव लागू किया है। अब किसी भी UPI ट्रांजैक्शन के दौरान PIN डालने से पहले पैसे पाने वाले व्यक्ति का बैंक खाते में दर्ज नाम स्क्रीन पर दिखाई देगा। इसका मकसद गलत खाते में पैसे ट्रांसफर होने और ऑनलाइन फ्रॉड की घटनाओं को कम करना है।
इन सभी बदलावों का असर सीधे आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी और खर्चों पर पड़ सकता है। ऐसे में नई दरों और नियमों की जानकारी रखना जरूरी हो गया है।</description><guid>several-major-rules-changed-with-the-start-of-june,-directly-impacting-</guid><pubDate>01-Jun-2026 11:59:14 am</pubDate></item><item><title>खेत बचाओ अभियान बनेगा किसानों के अधिकारों की आवाज, देशभर में चलेगा जन आंदोलन : शिवराज चौहान</title><link>https://just36news.com/-save-the-farm-campaign-will-become-the-voice-of-farmer</link><description>एक जून को मध्य प्रदेश के रायसेन जिले से होने वाले खेत बचाओ अभियान के राष्ट्रीय शुभारंभ से पूर्व केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को देशभर के कृषि विज्ञान केंद्रों, आईसीएआर संस्थानों, कृषि विश्वविद्यालयों, केंद्र एवं राज्य सरकारों के वरिष्ठ कृषि अधिकारियों तथा किसान हित में कार्यरत साथियों से वर्चुअल संवाद किया।
उन्होंने अभियान को जनभागीदारी, वैज्ञानिक दृष्टि और राष्ट्रीय दायित्व के साथ आगे बढ़ाने का आह्वान किया। शिवराज सिंह ने इस महत्वपूर्ण अभियान में शामिल होने के लिए सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से फोन पर चर्चा की है, वहीं वे केंद्रीय मंत्रियों और अन्य सभी जनप्रतिनिधियों से भी सहभागिता की अपील कर रहे हैं।
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि धरती मां को बचाने, खेती का भविष्य सुरक्षित करने और आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों की रक्षा करने का राष्ट्रीय अभियान है। उन्होंने कहा कि बढ़ता तापमान, रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का असंतुलित उपयोग, मिट्टी के स्वास्थ्य में गिरावट और बदलते जलवायु संकट खेती के सामने गंभीर चुनौती बनकर खड़े हैं, इसलिए समय रहते व्यापक जागरूकता और व्यवहारिक हस्तक्षेप आवश्यक है।
उन्होंने आगे बताया कि 1 जून को रायसेन जिले के रामसिया गांव से प्रारंभ हो रहा राष्ट्रव्यापी खेत बचाओ अभियान किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग, मिट्टी परीक्षण, सॉयल हेल्थ कार्ड, प्राकृतिक खेती, फसल चयन, जल संरक्षण, हरी खाद, कम वर्षा की स्थिति में वैकल्पिक कृषि पद्धतियों तथा नकली खाद-बीज और पेस्टिसाइड की पहचान जैसे विषयों पर जागरूक करेगा।
उन्होंने जोर देकर कहा कि केवल सलाह देना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि खेत स्तर पर डेमो, वैज्ञानिक प्रमाण और व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से किसानों का विश्वास मजबूत करना होगा।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देशभर में 30 जून तक का विस्तृत रोडमैप तैयार किया जाए, जिसमें यह स्पष्ट हो कि कौन अधिकारी, वैज्ञानिक, संस्थान या टीम किस तिथि को किस गांव में जाएगी। उन्होंने निर्देश दिए कि हर जिले का कार्यक्रम पूर्व नियोजित हो, डैशबोर्ड आधारित मॉनिटरिंग हो, स्थानीय स्तर पर समुचित व्यवस्थाएं सुनिश्चित हों और अभियान के हर चरण में प्रभावी समन्वय दिखाई दे।
उन्होंने राज्यों के कृषि विभागों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इस अभियान को सफल बनाने के लिए केंद्र, राज्य, आईसीएआर, कृषि विश्वविद्यालय, कृषि विज्ञान केंद्र, जनप्रतिनिधि, विद्यार्थी और किसान हितैषी संस्थाएं एकजुट होकर कार्य करें। उन्होंने सांसदों, विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों को भी अभियान से जोड़ने तथा प्राकृतिक खेती व टिकाऊ कृषि के व्यवहारिक नमूने प्रस्तुत करने पर बल दिया।
शिवराज सिंह ने कहा कि अभियान को बहुउद्देश्यीय स्वरूप देते हुए किसान क्रेडिट कार्ड, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, फसल बीमा योजना, सॉयल हेल्थ कार्ड, मिनी बीज किट, दलहन-तिलहन मिशन, तथा कृषि यंत्रीकरण जैसी योजनाओं का लाभ भी किसानों तक पहुंचाया जाए; इससे खेत बचाने के साथ-साथ किसान की आय, जागरूकता, और कृषि प्रबंधन क्षमता को भी मजबूत किया जा सकेगा।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने प्रचार-प्रसार पर जोर देकर इसे अभियान का अहम हिस्सा बताते हुए कहा कि यह देशहित का कार्यक्रम है और इसकी जानकारी जितनी तेजी से गांव-गांव पहुंचेगी, अभियान उतना ही प्रभावशाली बनेगा। उन्होंने अधिकारियों और वैज्ञानिकों से कहा कि वे बिना संकोच मीडिया से संवाद करें, क्योंकि यह अभियान धरती, खेती और अन्नदाता के भविष्य से जुड़ा हुआ है।</description><guid>-save-the-farm-campaign-will-become-the-voice-of-farmer</guid><pubDate>31-May-2026 10:33:49 pm</pubDate></item><item><title>हर साल लाखों जानें ले रहा तंबाकू, रोकथाम के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी</title><link>https://just36news.com/tobacco-claims-millions-of-lives-every-year-collective-efforts-are-necessary-to-prevent-it</link><description>तंबाकू आज दुनिया के सामने मौजूद सबसे गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक है। हर साल लाखों लोग तंबाकू सेवन से होने वाली बीमारियों के कारण अपनी जान गंवा देते हैं। लोगों को तंबाकू के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने और इसके सेवन को कम करने के उद्देश्य से हर वर्ष 31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस (World No Tobacco Day) मनाया जाता है। यह दिवस केवल एक जागरूकता अभियान नहीं, बल्कि एक स्वस्थ और तंबाकू-मुक्त समाज के निर्माण का वैश्विक संकल्प भी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा शुरू की गई यह पहल लोगों को यह समझाने का प्रयास करती है कि तंबाकू का सेवन न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य बल्कि परिवार, समाज और अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर प्रभाव डालता है।
विश्व तंबाकू निषेध दिवस का उद्देश्य
विश्व तंबाकू निषेध दिवस मनाने की शुरुआत वर्ष 1987 में विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य तंबाकू सेवन से होने वाले स्वास्थ्य खतरों के बारे में लोगों को जागरूक करना और सरकारों, संस्थाओं तथा नागरिकों को तंबाकू नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम उठाने के लिए प्रेरित करना है। यह दिवस हर वर्ष एक विशेष थीम के साथ मनाया जाता है, जिसके माध्यम से तंबाकू उद्योग की रणनीतियों, युवाओं को लक्षित करने वाले प्रचार और स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।
तंबाकू: एक धीमा जहर
तंबाकू को अक्सर धीमा जहर कहा जाता है क्योंकि इसका प्रभाव धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचाता है। बीड़ी, सिगरेट, हुक्का, सिगार, खैनी, गुटखा, जर्दा और पान मसाला जैसे विभिन्न रूपों में तंबाकू का सेवन किया जाता है। इनमें मौजूद निकोटीन अत्यधिक नशे की लत पैदा करने वाला तत्व है। इसके अलावा तंबाकू में हजारों हानिकारक रसायन पाए जाते हैं, जिनमें से कई कैंसर उत्पन्न करने वाले होते हैं। तंबाकू का सेवन फेफड़ों के कैंसर, मुंह के कैंसर, गले के कैंसर, हृदय रोग, स्ट्रोक, श्वसन संबंधी बीमारियों और उच्च रक्तचाप जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि तंबाकू से होने वाली अधिकांश बीमारियां रोकी जा सकती हैं, यदि समय रहते इसके सेवन को छोड़ दिया जाए।
भारत में तंबाकू सेवन की स्थिति
भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां तंबाकू का सेवन व्यापक स्तर पर होता है। यहां धूम्रपान के साथ-साथ बिना धुएं वाले तंबाकू उत्पादों का भी बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में तंबाकू सेवन एक गंभीर समस्या बना हुआ है। विशेष चिंता की बात यह है कि युवाओं और किशोरों के बीच भी तंबाकू उत्पादों का उपयोग बढ़ता देखा गया है। कई बार जिज्ञासा, साथियों का दबाव, विज्ञापनों का प्रभाव या सामाजिक वातावरण युवाओं को तंबाकू की ओर आकर्षित करता है। एक बार इसकी लत लगने के बाद इससे छुटकारा पाना काफी कठिन हो जाता है।
युवाओं के लिए सबसे बड़ा खतरा
तंबाकू उद्योग अक्सर युवाओं को अपने उत्पादों की ओर आकर्षित करने के लिए विभिन्न तरीके अपनाता है। आकर्षक पैकेजिंग, फ्लेवर वाले उत्पाद और अप्रत्यक्ष प्रचार युवाओं को प्रभावित करते हैं। कम उम्र में तंबाकू सेवन शुरू करने वाले लोगों में भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा अधिक होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि किशोरावस्था में विकसित होने वाला मस्तिष्क निकोटीन के प्रभाव के प्रति अधिक संवेदनशील होता है। इससे न केवल लत तेजी से लगती है बल्कि मानसिक और शारीरिक विकास पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है। इसलिए स्कूलों, कॉलेजों और परिवारों की भूमिका युवाओं को तंबाकू से दूर रखने में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
निष्क्रिय धूम्रपान भी है खतरनाक
तंबाकू सेवन का नुकसान केवल सेवन करने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता। धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के आसपास मौजूद लोग भी इसके दुष्प्रभावों का शिकार बनते हैं। इसे निष्क्रिय धूम्रपान या सेकेंड हैंड स्मोक कहा जाता है। घर, कार्यालय या सार्वजनिक स्थानों पर सिगरेट और बीड़ी के धुएं के संपर्क में आने वाले लोगों में भी फेफड़ों की बीमारियां, हृदय रोग और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। बच्चों और गर्भवती महिलाओं पर इसका प्रभाव विशेष रूप से गंभीर हो सकता है। यही कारण है कि सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान प्रतिबंधित करने के लिए विभिन्न देशों में कानून बनाए गए हैं।
आर्थिक और सामाजिक प्रभाव
तंबाकू केवल स्वास्थ्य को ही नुकसान नहीं पहुंचाता, बल्कि इसका आर्थिक और सामाजिक प्रभाव भी व्यापक होता है। तंबाकू से होने वाली बीमारियों के उपचार पर परिवारों और सरकारों को भारी खर्च करना पड़ता है। कई परिवारों की आय का बड़ा हिस्सा चिकित्सा खर्चों में चला जाता है। इसके अलावा बीमारी और समय से पहले मृत्यु के कारण उत्पादकता में कमी आती है, जिससे राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ता है। गरीब और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर इसका प्रभाव और अधिक गंभीर होता है, क्योंकि सीमित आय का एक हिस्सा तंबाकू उत्पादों पर खर्च हो जाता है।
तंबाकू नियंत्रण के लिए सरकारी प्रयास
भारत सरकार और विभिन्न राज्य सरकारों ने तंबाकू नियंत्रण के लिए कई कदम उठाए हैं। सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान प्रतिबंध, तंबाकू उत्पादों पर चेतावनी चित्र, विज्ञापनों पर रोक और तंबाकू उत्पादों पर कर बढ़ाना ऐसे महत्वपूर्ण उपाय हैं जिनका उद्देश्य लोगों को तंबाकू सेवन से हतोत्साहित करना है। इसके अलावा स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों के आसपास तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने तथा जनजागरूकता अभियानों के माध्यम से लोगों को इसके खतरों के बारे में जानकारी दी जाती है। स्वास्थ्य संस्थान भी तंबाकू छोड़ने के इच्छुक लोगों को परामर्श और सहायता प्रदान कर रहे हैं।
तंबाकू छोड़ना क्यों जरूरी है?
तंबाकू छोड़ने का निर्णय किसी व्यक्ति के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संबंधी निर्णय हो सकता है। तंबाकू छोड़ने के कुछ ही घंटों के भीतर शरीर में सकारात्मक बदलाव शुरू हो जाते हैं। रक्तचाप और हृदय गति सामान्य होने लगती है, जबकि कुछ महीनों में फेफड़ों की कार्यक्षमता में सुधार दिखाई देने लगता है। लंबे समय तक तंबाकू से दूरी बनाए रखने पर कैंसर, हृदय रोग और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है। इसके साथ ही व्यक्ति की आर्थिक बचत बढ़ती है और जीवन की गुणवत्ता में भी सुधार होता है।
समाज और परिवार की भूमिका
तंबाकू-मुक्त समाज के निर्माण में केवल सरकार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की भूमिका महत्वपूर्ण है। परिवार बच्चों और युवाओं को सही दिशा देने में अहम योगदान दे सकते हैं। माता-पिता यदि स्वयं तंबाकू से दूर रहें और इसके दुष्प्रभावों के बारे में खुलकर चर्चा करें, तो बच्चों में इसके प्रति जागरूकता बढ़ सकती है। शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक संगठनों और मीडिया को भी इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। जागरूकता अभियान, स्वास्थ्य शिविर और परामर्श कार्यक्रम तंबाकू सेवन को कम करने में प्रभावी साबित हो सकते हैं।
स्वस्थ भविष्य के लिए सामूहिक संकल्प
विश्व तंबाकू निषेध दिवस हमें यह याद दिलाता है कि तंबाकू से होने वाली अधिकांश मौतों और बीमारियों को रोका जा सकता है। इसके लिए व्यक्तिगत जागरूकता, सामाजिक सहयोग और प्रभावी सरकारी नीतियों की आवश्यकता है। यदि प्रत्येक व्यक्ति तंबाकू से दूरी बनाने का संकल्प ले और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करे, तो एक स्वस्थ और सुरक्षित समाज का निर्माण संभव है। तंबाकू छोड़ना केवल एक व्यक्तिगत निर्णय नहीं, बल्कि परिवार, समाज और आने वाली पीढ़ियों के बेहतर भविष्य की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है। विश्व तंबाकू निषेध दिवस हमें यही संदेश देता है कि स्वस्थ जीवन का आधार सही विकल्पों में छिपा है और तंबाकू से दूरी उन सबसे महत्वपूर्ण विकल्पों में से एक है।</description><guid>tobacco-claims-millions-of-lives-every-year-collective-efforts-are-necessary-to-prevent-it</guid><pubDate>31-May-2026 10:21:57 pm</pubDate></item></channel></rss>