<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" version="2.0"><channel><title>Just 36 News Feed</title><link>https://just36news.com</link><description>Just 36 News Feed Description</description><item><title>Breast Cancer Alert: महिलाएं सावधान! देर रात जागने की आदत बन रही बड़ा खतरा, ज़रा सी अनदेखी...</title><link>https://just36news.com/breast-cancer-alert:-women-bewarestaying-up-late-at-night-can-be-a-serious-</link><description>Breast Cancer Alert :भारत में महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर एक बेहद डरावनी रिपोर्ट सामने आई है। ब्रेस्ट कैंसर (स्तन कैंसर) के मामले अब न केवल बढ़ रहे हैंबल्कि यह युवा महिलाओं को भी अपना शिकार बना रहे हैं। हालिया शोध और आईसीएमआर (ICMR) की स्टडी में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि हमारी बदलती जीवनशैलीखासकर नींद की कमी और तनावइस कैंसर के पीछे के सबसे बड़े कारण बनकर उभरे हैं।
चिंताजनक आंकड़े: अब युवाओं पर भी खतरा
नेशनल सेंटर फॉर डिजीज इंफॉर्मेटिक्स एंड रिसर्च के अनुसारभारत में ब्रेस्ट कैंसर के मामलों में सालाना 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो रही है। पहले यह बीमारी 50 साल के बाद देखी जाती थीलेकिन अब 35 से 50 साल की महिलाएं इसकी चपेट में सबसे ज्यादा आ रही हैं। देर से शादी, बच्चों को स्तनपान (Breastfeeding) न कराना और शारीरिक गतिविधियों की कमी इसके मुख्य कारण हैं।
नींद की कमी और कैंसर का संबंध
क्या आप जानते हैं कि कम सोना कैंसर को दावत दे सकता है? स्टडी में सामने आया है कि नींद पूरी न होने से 'मेलाटोनिन' हार्मोन कम बनता हैजिससे एस्ट्रोजनका स्तर बिगड़ जाता है। गहरी नींद के दौरान शरीर अपने सेल्स और DNA की मरम्मत करता है। नींद की कमी इस प्रक्रिया को रोक देती हैजिससे कैंसर की कोशिकाएं पनपने लगती हैं। लगातार थकान शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर देती है।
मोटापा और एस्ट्रोजनका खतरनाक खेल
विशेषज्ञों के अनुसारपेट के आसपास जमा चर्बी ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को कई गुना बढ़ा देती है। शरीर का बढ़ा हुआ वजन सूजन पैदा करता है और इंसुलिन रेजिस्टेंस को बढ़ाता है। मेनोपॉज के बाद शरीर में जमा फैट ही एस्ट्रोजन का मुख्य जरिया बन जाता है। एस्ट्रोजन का अधिक स्तर ब्रेस्ट सेल्स में कैंसर की गांठ बना सकता है।</description><guid>breast-cancer-alert:-women-bewarestaying-up-late-at-night-can-be-a-serious-</guid><pubDate>31-Jan-2026 9:26:23 am</pubDate></item><item><title>रोज दर्द की दवा ले रहे हैं? सावधान! धीरे-धीरे खराब हो सकती है किडनी और लिवर</title><link>https://just36news.com/taking-painkillers-every-da-be-carefu-it-can-slowly-damage-your-kidneys-and-liver</link><description>नेशनल डेस्क:दर्द से तुरंत राहत देने वाली पेन किलर दवाएं जैसे NSAIDs (इबुप्रोफेन, डाइक्लोफेनाक, नेप्रोक्सन) और पैरासिटामोल आमतौर पर सुरक्षित मानी जाती हैं, लेकिन अगर इन्हें लंबे समय तक या बिना डॉक्टर की सलाह के लिया जाए, तो ये शरीर के सबसे अहम अंगकिडनी और लिवरको गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इन दवाओं का अत्यधिक या गलत इस्तेमाल धीरे-धीरे अंगों पर अतिरिक्त दबाव डालता है, जिससे क्रॉनिक डैमेज, ऑर्गन फेलियर तक का खतरा बढ़ सकता है।
किडनी पर पेन किलर का असर क्यों खतरनाक है?
NSAIDs शरीर में बनने वाले प्रोस्टाग्लैंडिन्स नामक केमिकल्स को रोक देती हैं। ये केमिकल्स किडनी की रक्त नलिकाओं को खुला रखने में मदद करते हैं। जब यह प्रक्रिया बाधित होती है तो किडनी में ब्लड फ्लो कम हो जाता है, फिल्ट्रेशन क्षमता घटती है,समय के साथ एक्यूट किडनी इंजरी, एनाल्जेसिक नेफ्रोपैथी या क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) हो सकती है। पैरासिटामोल सामान्य मात्रा में अपेक्षाकृत सुरक्षित है, लेकिन ओवरडोज या लंबे समय तक सेवन किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है।
ज्यादा खतरा किन लोगों में?
बुजुर्ग,हाई ब्लड प्रेशर या डायबिटीज के मरीज ,हार्ट डिजीज वाले,और पहले से किडनी की समस्या से जूझ रहे लोग।
लिवर पर कैसे असर डालती हैं दर्द की दवाएं?
लिवर का काम दवाओं को मेटाबॉलाइज करना होता है। पैरासिटामोल की अधिक मात्रा लेने पर लिवर में मौजूद ग्लूटाथियोन खत्म हो जाता है, जिससे लिवर सेल्स को सीधा नुकसान पहुंचता है।</description><guid>taking-painkillers-every-da-be-carefu-it-can-slowly-damage-your-kidneys-and-liver</guid><pubDate>27-Jan-2026 10:19:33 am</pubDate></item><item><title>मरीजों के लिए खुशखबरी! अब सिर्फ एक Blood Test में ही पकड़ी जाएंगी ढेरों बीमारियां, बार-बार टेस्ट की नहीं पड़ेगी जरूरत</title><link>https://just36news.com/good-news-for-patient-now,-a-single-blood-test-can-detect-many-diseases,-eliminating-the-need-for-repeated-tests</link><description>ICMR Multiplex Diagnostic Test :भारत में स्वास्थ्य जांच की दुनिया में एक बड़ा बदलाव आने वाला है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) एक ऐसी आधुनिक तकनीक पर काम कर रहा हैजिससे मरीजों को बार-बार अलग-अलग टेस्ट करवाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। एक ही मल्टीप्लेक्सटेस्ट के जरिए अब डेंगू, कोविड, फ्लू और टाइफाइड जैसी कई बीमारियों का पता एक साथ लगाया जा सकेगा। यह कदम न केवल इलाज को तेज करेगाबल्कि देश में बढ़ते एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) यानी दवाओं के बेअसर होने के खतरे को भी कम करेगा।
मौजूदा सिस्टम की चुनौती: देरी और बढ़ता खर्च
वर्तमान मेंजब किसी मरीज को बुखार या सांस लेने में तकलीफ होती हैतो डॉक्टर लक्षणों के आधार पर एक-एक करके टेस्ट करवाते हैं। पहले एक टेस्ट होता हैउसकी रिपोर्ट निगेटिव आने पर दूसरा टेस्ट लिखा जाता है। इस चक्कर में कई दिन निकल जाते हैं। सही बीमारी का पता देर से चलने के कारण मरीज की स्थिति गंभीर हो सकती है। बार-बार अलग-अलग जांच कराने से गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर पैसों का भारी बोझ पड़ता है।

समाधान: मल्टीप्लेक्स मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स
ICMR जिस नई तकनीक को विकसित कर रहा हैउसे मल्टीप्लेक्स टेस्ट कहा जाता है। इसकी खासियतें इस प्रकार हैं:

    
    एक सैंपल, अनेक नतीजे:मरीज के एक ही खून या स्वाब सैंपल से कई तरह के वायरस और बैक्टीरिया की पहचान हो जाएगी।
    
        
        सटीक इलाज:डॉक्टरों को तुरंत पता चल जाएगा कि संक्रमण का असली कारण क्या हैजिससे इलाज पहले दिन से ही सही दिशा में शुरू होगा।
        
        
        गंभीर मरीजों के लिए वरदान:सेप्सिस (खून में जहर फैलना) जैसी स्थितियों मेंजहां हर मिनट कीमती होता है वहां यह तकनीक जान बचा सकती है।
        
    
    
    एंटीबायोटिक दवाओं की बर्बादी पर रोक
    अक्सर जांच रिपोर्ट आने में देरी के कारण डॉक्टर मरीज को 'ब्रॉड-स्पेक्ट्रम' (तेज असर वाली) एंटीबायोटिक दवाएं दे देते हैं।ICMR की 2024 की रिपोर्ट के अनुसारभारत में कई आम एंटीबायोटिक्स अब बैक्टीरिया पर बेअसर साबित हो रही हैं। अगर नई जांच से बीमारी तुरंत पता चल जाती हैतो डॉक्टर केवल वही दवा देंगे जिसकी जरूरत है। इससे शरीर में दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता (AMR) नहीं बढ़ेगी।
    भारत की जरूरतों के अनुसार स्वदेशी टेस्ट
    ICMR इन टेस्ट किट्स को भारत में होने वाली आम बीमारियों के डेटा के आधार पर तैयार कर रहा है। कोविड-19 ने हमें सिखाया कि बीमारी की जल्दी पहचान कितनी जरूरी है। ये नए टूल्स भविष्य में किसी भी आउटब्रेक को शुरू होते ही पकड़ने में मदद करेंगे। बच्चों में एंटीबायोटिक दवाओं के बढ़ते गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए भी विशेष डायग्नोस्टिक टूल्स पर काम किया जा रहा है।
    
</description><guid>good-news-for-patient-now,-a-single-blood-test-can-detect-many-diseases,-eliminating-the-need-for-repeated-tests</guid><pubDate>23-Jan-2026 9:38:56 am</pubDate></item><item><title>दवाओं पर बनी रेड लाइन का क्या होता है मतलब? यहां जानें</title><link>https://just36news.com/what-does-the-red-line-on-medicines-mean-learn-here</link><description>Red Line In Medicine:आज के समय में हम में से ज्यादातर लोग शरीर में हल्की-सी परेशानी होते ही खुद ही डॉक्टर बन जाते हैं. सिर दर्द हो, बुखार आए या पेट में दिक्कत हो, तो सीधे केमिस्ट की दुकान से पेनकिलर या एंटीबायोटिक ले लेना आम आदत बन चुकी है. लेकिन यह आदत धीरे-धीरे आपकी सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकती है. खासकर तब, जब दवा के डिब्बे पर बनी लाल रंग की सीधी रेखा को हम नजरअंदाज कर देते हैं.
दवा पर बनी लाल लाइन का असली मतलब
दवाओं के पैकेट पर बनी लाल लाइन कोई डिजाइन नहीं होती, बल्कि यह एक चेतावनी होती है. इसका साफ मतलब है कि यह दवा केवल डॉक्टर की पर्ची पर ही ली जानी चाहिए. ऐसी दवाओं में ज्यादातर एंटीबायोटिक्स, स्ट्रॉन्ग पेनकिलर्स और कुछ खास मेडिसिन शामिल होती हैं. बिना सलाह इनका सेवन करने से बीमारी ठीक होने के बजाय और बिगड़ सकती है.
Antibiotics कैसे बन जाती हैं जानलेवा?
एंटीबायोटिक्स का काम शरीर में मौजूद बैक्टीरिया को खत्म करना होता है. लेकिन जब इन्हें बिना डॉक्टर की सलाह लिया जाता है या बीच में ही कोर्स छोड़ दिया जाता है, तो बैक्टीरिया इन दवाओं के खिलाफ मजबूत हो जाते हैं. इस कंडीशन को Antibiotic Resistance कहा जाता है. इसका मतलब यह है कि भविष्य में वही दवाएं गंभीर इंफेक्शन में भी असर नहीं करतीं. नतीजा यह होता है कि एक मामूली इंफेक्शन भी जानलेवा बन सकता है.
हर दवा हर शरीर के लिए नहीं होती
लाल लाइन यह भी समझाती है कि हर दवा हर व्यक्ति के लिए सेफ नहीं होती. उम्र, वजन, बीमारी की गंभीरता और पहले से चल रही दवाओं को देखकर ही डॉक्टर सही मेडिसिन और उसकी डोज तय करते हैं. खुद से दवा लेने से लिवर, किडनी और डाइजेस्टिव सिस्टम पर बुरा असर पड़ सकता है. कई बार दवा बीमारी को दबा देती है, जिससे असली समस्या समय पर पकड़ में नहीं आती.</description><guid>what-does-the-red-line-on-medicines-mean-learn-here</guid><pubDate>17-Jan-2026 8:26:04 pm</pubDate></item><item><title>Diabetes की दवा भी फेल! रोज 30 मिनट करें ये काम, शुगर लेवल खुद हो जाएगा कंट्रोल</title><link>https://just36news.com/even-diabetes-medication-fails-do-this-for-30-minutes-every-day,-and-your-sugar-levels-will-</link><description>नेशनल डेस्क।आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियां आम हो गई हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन गंभीर समस्याओं का समाधान जिम की महंगी मशीनों में नहीं बल्कि आपके रोजमर्रा के छोटे-छोटे बदलावों में छिपा है? डॉक्टरों का मानना है कि एक्सरसाइज इन बीमारियों के लिए किसी जादुई दवा की तरह काम करती है।
शुगर कंट्रोल करने का सबसे आसान तरीका: 'ब्रिस्क वॉकिंग'
अगर आप टाइप-2 डायबिटीज से जूझ रहे हैं तो रोजाना 30 मिनट की तेज चाल (Brisk Walking) आपके लिए रामबाण है। 3 महीने तक नियमित चलने से HbA1c लेवल में 0.5 से 1% तक की कमी आ सकती है। चलने से शरीर इंसुलिन का बेहतर इस्तेमाल करता है और खून में जमा शुगर ऊर्जा के रूप में खर्च हो जाती है। इतनी तेज चलें कि आप बात तो कर पाएं लेकिन गाना न गा सकें। दिन में 8,000 से 10,000 कदम चलने का लक्ष्य रखें।
हाई बीपी के लिए योग और प्राणायाम
हाई ब्लड प्रेशर (Hypertension) को कंट्रोल करने के लिए योग एक प्राकृतिक उपचार है।
प्रमुख आसन:बालासन, भुजंगासन और 'लेग्स-अप-द-वॉल' पोज।
नतीजे:शोध बताते हैं कि 8 हफ्तों तक रोजाना 15 मिनट योग करने से सिस्टोलिक बीपी 10-15 पॉइंट तक गिर सकता है।
तनाव मुक्ति:योग के साथ गहरी सांस लेने (Deep Breathing) से नसें रिलैक्स होती हैं और दिल की धड़कन संतुलित रहती है।
दिल की सुरक्षा के लिए स्ट्रेंथ ट्रेनिंग
मांसपेशियों को मजबूत बनाने वाली एक्सरसाइज न केवल बॉडी बनाती हैं बल्कि दिल के बोझ को भी कम करती हैं। हफ्ते में 2 दिन स्क्वैट्स, वॉल पुश-अप्स और प्लैंक जैसी कसरत करें। मजबूत मसल्स शुगर को जल्दी सोखती हैं जिससे खराब कोलेस्ट्रॉल घटता है और कमर का घेरा (Waist Size) कम होता है। हर एक्सरसाइज के 10-10 रिपीटेशन से शुरू करें।
स्विमिंग और HIIT: अन्य बेहतरीन विकल्प
तैराकी (Swimming): अगर आपके घुटनों में दर्द है तो तैराकी सबसे अच्छी है। यह पूरे शरीर की एक्सरसाइज है और दिल की चर्बी घटाती है। 20 मिनट की हाई-इंटेंसिटी इंटरवल ट्रेनिंग कम समय में ज्यादा फायदा देती है।
रोजाना की छोटी आदतें, बड़े बदलाव
किसी भी कसरत का पूरा फायदा तभी मिलता है जब आप नियमित रहें।
खाने के बाद टहलें:दोपहर और रात के खाने के बाद 10 मिनट जरूर चलें।
सीढ़ियों का प्यार:लिफ्ट के बजाय सीढ़ियों का इस्तेमाल करें।
धूप और वॉक:सुबह की धूप में 10 मिनट टहलने से विटामिन-D भी मिलता है और मूड भी अच्छा रहता है।</description><guid>even-diabetes-medication-fails-do-this-for-30-minutes-every-day,-and-your-sugar-levels-will-</guid><pubDate>12-Jan-2026 6:29:47 pm</pubDate></item><item><title>शराब शरीर के किस अंग को करती है सबसे ज्यादा Damage? लिवर या फिर...</title><link>https://just36news.com/which-part-of-the-body-does-alcohol-damage-the-most</link><description>Impact of Alcohol :शराब का सेवन सेहत के लिए खतरनाक हैयह बात हम सभी जानते हैंलेकिन अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि शराब शरीर के किस अंग को सबसे ज्यादा और सबसे पहले निशाना बनाती है लिवर या किडनी? सीनियर फिजिशियन डॉ. सचिन भार्गव के अनुसारशराब का असर पूरे शरीर पर पड़ता हैलेकिन लिवर वह अंग है जो सबसे पहले और सीधे तौर पर डैमेज होता है।

लिवर पर शराब का जानलेवा प्रहार
डॉ. सचिन बताते हैं कि जब आप शराब पीते हैंतो उसे पचाने और जहरीले तत्वों को बाहर निकालने की जिम्मेदारी लिवर की होती है। शराब को फिल्टर करने की प्रक्रिया में लिवर की कोशिकाएं (Cells) मरने लगती हैं। शराब का सबसे पहला लक्षण लिवर में चर्बी जमा होना है। लंबे समय तक शराब पीने से लिवर पर स्थायी घाव (Scarring) बन जाते हैंजिसे 'सिरोसिस' कहा जाता है। यह एक जानलेवा स्थिति है जिसमें लिवर काम करना बंद कर देता है।


किडनी पर कैसे पड़ता है असर?
किडनी का काम खून को छानना हैलेकिन शराब इस प्रक्रिया को मुश्किल बना देती है:

    डिहाइड्रेशन (पानी की कमी):शराब एक 'मूत्रवर्धक' (Diuretic) हैजिससे बार-बार पेशाब आता है और शरीर में पानी की कमी हो जाती है। इससे किडनी पर अतिरिक्त दबाव बढ़ता है।
    हाई ब्लड प्रेशर:शराब पीने से बीपी बढ़ता हैजो दुनिया भर में किडनी फेलियर का सबसे बड़ा कारण है।
    हेपेटोरेनल सिंड्रोम:जब शराब के कारण लिवर गंभीर रूप से खराब होता हैतो वह किडनी को भी साथ में फेल कर देता है। चिकित्सा विज्ञान में इस स्थिति को 'हेपेटोरेनल सिंड्रोम' कहा जाता है।


क्या शराब छोड़ने पर अंग दोबारा ठीक हो सकते हैं?
डॉ. सचिन भार्गव के अनुसारएक अच्छी खबर यह है कि मानव शरीर में खुद को ठीक करने की अद्भुत क्षमता होती है:

    रिकवरी संभव है:यदि कोई व्यक्ति शुरुआती लक्षणों के दौरान शराब पूरी तरह छोड़ देता हैतो लिवर और किडनी को पहुँचा नुकसान धीरे-धीरे कम होने लगता है और वे फिर से सामान्य रूप से काम कर सकते हैं।
    विड्रॉल लक्षण:अचानक शराब छोड़ने पर घबराहट या बेचैनी महसूस हो सकती है। इसे डॉक्टर की सलाह, दवाइयों और काउंसलिंग से आसानी से ठीक किया जा सकता है।

</description><guid>which-part-of-the-body-does-alcohol-damage-the-most</guid><pubDate>12-Jan-2026 6:25:00 pm</pubDate></item><item><title>HEALTH NEWS: सुबह उठकर ये 10 योग करने से मिलेगा शरीर और दिमाग को पूरा आराम</title><link>https://just36news.com/health-news:-doing-these-10-yoga-poses-in-the-morning-will-give-complete-rest-to-</link><description>HEALTH NEWS: सुबह की शुरुआत अगर योग से की जाए तो दिनभर शरीर में ऊर्जा और मन में शांति बनी रहती है। विशेषज्ञों के अनुसार रोज सुबह खाली पेट 10 आसान योगासन करने से तनाव, थकान, कमर-दर्द, गैस, मोटापा और अनिद्रा जैसी समस्याओं में काफी राहत मिलती है।
ताड़ासन, भुजंगासन, वज्रासन, पवनमुक्तासन, सूर्य नमस्कार, अनुलोम-विलोम, कपालभाति, बालासन, वृक्षासन और शवासन जैसे योग न सिर्फ शरीर को लचीला बनाते हैं बल्कि इम्यूनिटी भी बढ़ाते हैं।
नियमित योग अभ्यास से पाचन सुधरता है, ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और मानसिक तनाव कम होता है।
डॉक्टरों का कहना है कि रोज सिर्फ 2030 मिनट योग करने से दवाओं पर निर्भरता भी कम हो सकती है और व्यक्ति खुद को दिनभर तरोताजा महसूस करता है।</description><guid>health-news:-doing-these-10-yoga-poses-in-the-morning-will-give-complete-rest-to-</guid><pubDate>07-Jan-2026 11:00:41 am</pubDate></item><item><title>आंखें दे रही चेतावनी! इस परेशानी को न करें नजरअंदाज, यह खतरनाक संकेत बन सकता है जानलेवा</title><link>https://just36news.com/your-eyes-are-warning-ignore-this-problem-it-could-be-a-dangerous-sign-and-fatal</link><description>Dementia Symptoms :अब तक माना जाता था कि याददाश्त का खोना ही डिमेंशिया (Dementia) की पहली पहचान हैलेकिन हाल ही में हुई एक क्रांतिकारी रिसर्च ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। वैज्ञानिकों का दावा है कि आपकी आंखों की रेटिना की मोटाई यह बता सकती है कि भविष्य में आपको डिमेंशिया या अल्जाइमर होने का खतरा है या नहीं।
क्या है डिमेंशिया और आंखों से इसका रिश्ता?
डिमेंशिया दिमाग से जुड़ी एक गंभीर बीमारी हैजिसमें व्यक्ति की सोचने, समझने और याद रखने की शक्ति धीरे-धीरे खत्म होने लगती है। चीन के वैज्ञानिकों ने करीब 30,000 लोगों पर 10 साल तक अध्ययन किया। 'फ्रंटियर्स इन एजिंग न्यूरोसाइंस' जर्नल में प्रकाशित इस स्टडी के अनुसारहमारी आंखों की रेटिना (Retina) दिमाग की सेहत का आईना होती है। रेटिना आंखों के पीछे की वह परत है जो रोशनी को संकेतों में बदलकर दिमाग तक पहुंचाती है। चूंकि आंखों की नसें (Optic Nerve) सीधे दिमाग से जुड़ी होती हैंइसलिए दिमाग में होने वाली कोई भी हलचल आंखों में दिखाई दे सकती है।

रिसर्च के चौंकाने वाले नतीजे
वैज्ञानिकों ने रेटिना की मोटाई मापने के लिए OCT (ऑप्टिकल कोहेरेंस टोमोग्राफी) तकनीक का इस्तेमाल किया। रिसर्च में जो बातें सामने आईंवे बेहद महत्वपूर्ण हैं:

    
    पतली रेटिना, बढ़ता खतरा:जिन लोगों की रेटिना की परत पतली पाई गईउनमें अल्जाइमर का खतरा काफी अधिक था।
    
    
    
        
        3% का गणित:रेटिना की मोटाई में हर एक यूनिट की कमी डिमेंशिया के खतरे को 3 फीसदी बढ़ा देती है।
        
        
        फ्रंटोटेम्पोरल डिमेंशिया (FTD):जिन लोगों की रेटिना का मध्य हिस्सा बहुत पतला थाउनमें FTD होने की संभावना 41 फीसदी ज्यादा पाई गई।
        
    
    
    डिमेंशिया के शुरुआती लक्षण जिन्हें न करें नजरअंदाज
    अगर आप या आपके आसपास कोई इन लक्षणों का सामना कर रहा हैतो सतर्क हो जाएं:
    
        
        याददाश्त की कमी:हाल ही में हुई बातों या नामों को भूल जाना।
        
        
        बोलने में कठिनाई:बातचीत के दौरान सही शब्दों का चुनाव न कर पाना।
        
        
        भ्रम की स्थिति:समय, स्थान या लोगों को पहचानने में देरी होना।
        
        
        व्यवहार में बदलाव:अचानक चिड़चिड़ापन, डिप्रेशन या मूड स्विंग्स।
        
        
        फैसला लेने में असमर्थता:रोजमर्रा के छोटे-छोटे फैसले लेने में भी दिक्कत महसूस करना।
        
    
    
    बचाव और सावधानी
    हालांकि डिमेंशिया का कोई पक्का इलाज नहीं हैलेकिन समय रहते पहचान और सही जीवनशैली से इसे धीमा किया जा सकता है:
    
        
        नियमित व्यायाम:शारीरिक सक्रियता दिमाग की कोशिकाओं को स्वस्थ रखती है।
        
        
        हेल्दी डाइट:ओमेगा-3 और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर भोजन लें।
        
        
        दिमाग की कसरत:सुडोकू, शतरंज या नई भाषाएं सीखकर दिमाग को सक्रिय रखें।
        
        
        नियमित जांच:50 की उम्र के बाद आंखों और न्यूरोलॉजिकल चेकअप करवाते रहें।
        
    
    
</description><guid>your-eyes-are-warning-ignore-this-problem-it-could-be-a-dangerous-sign-and-fatal</guid><pubDate>02-Jan-2026 10:31:24 am</pubDate></item><item><title>Health Alert : कमर से पैर तक रहता है दर्द और चलने में होती है परेशानी तो हो सकती है इस खतरनाक बीमारी का संकेत</title><link>https://just36news.com/health-alert:-if-you-have-pain-from-your-waist-to-your-feet-and-have-</link><description>Health Alert :आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और घंटों एक ही जगह बैठकर काम करने की आदत ने कमर दर्द को आम बना दिया हैलेकिन अगर यह दर्द कमर से शुरू होकर आपके कूल्हों के रास्ते पैरों के नीचे तक जा रहा हैतो इसे सामान्य दर्द समझकर नजरअंदाज न करें। यह साइटिका (Sciatica) हो सकता हैजो शरीर की सबसे लंबी नस में खराबी का संकेत है।
क्या है साइटिका और यह दर्द क्यों होता है?
हमारे शरीर में साइटिका नर्व (Sciatic Nerve) सबसे लंबी और मोटी नस होती है। यह नस रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से (Lower Spine) से पांच अलग-अलग नसों के मेल से बनती है और कूल्हों से होते हुए दोनों पैरों के पिछले हिस्से तक जाती है। जब इस नस पर किसी कारण से सूजन आती है या दबाव पड़ता हैतो तेज दर्द शुरू हो जाता है। इसे ही मेडिकल भाषा में साइटिकाकहा जाता है।

साइटिका के प्रमुख लक्षण: इन्हें पहचानें
साइटिका का दर्द अन्य जोड़ों के दर्द से काफी अलग होता है।यह आमतौर पर शरीर के किसी एक हिस्से (दाएं या बाएं पैर) को प्रभावित करता है। कई मरीज इसे करंट या बिजली के तेज झटके जैसा महसूस करते हैं। पैरों में झुनझुनी होना, सुन्न पड़ जाना या चलते समय कमजोरी महसूस होना इसके बड़े लक्षण हैं। लंबे समय तक बैठने या खांसने-छींकने पर यह दर्द और ज्यादा बढ़ सकता है।

साइटिका होने की 3 मुख्य वजहें
1. हर्नियेटेड डिस्क (Herniated Disc):रीढ़ की हड्डी के बीच मौजूद डिस्क कुशन का काम करती हैं। जब कोई डिस्क चोट या दबाव के कारण फट जाती हैतो उसके अंदर का तरल पदार्थ बाहर निकलकर साइटिका नस को दबाने लगता है। यह साइटिका का सबसे सामान्य कारण है।
2. रीढ़ की हड्डी में चोट:किसी दुर्घटना या गिरने की वजह से यदि रीढ़ के निचले हिस्से (Lumbar Region) पर गंभीर चोट आती हैतो नसें दब सकती हैंजिससे साइटिका की समस्या पैदा हो जाती है।
3. ऑस्टियोआर्थराइटिस (गठिया):हड्डियों के जोड़ों के बीच एक कार्टिलेजनाम की चिकनी परत होती है। उम्र बढ़ने या बीमारी के कारण जब यह परत घिस जाती हैतो हड्डियां आपस में टकराने लगती हैं। रीढ़ की हड्डी में यह समस्या साइटिका नस पर दबाव डालती है।</description><guid>health-alert:-if-you-have-pain-from-your-waist-to-your-feet-and-have-</guid><pubDate>31-Dec-2025 8:48:07 am</pubDate></item><item><title>हाई बीपी और शुगर के मरीजों के लिए क्यों घातक है ठंडे पानी से नहाना, जानें वजह</title><link>https://just36news.com/why-bathing-in-cold-water-is-dangerous-for-high-blood-pressure-and-diabetes-patients,-know-the-reason</link><description>सर्दियों के आते ही ज्यादातर लोग गुनगुने पानी से नहाना पसंद करते हैं, लेकिन कुछ लोग सालभर ठंडे पानी से नहाने की आदत नहीं छोड़ते। उनका मानना है कि इससे शरीर ज्यादा एक्टिव रहता है। हालांकि, यह आदत हर किसी के लिए फायदेमंद नहीं होती। खासकर हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज से जूझ रहे लोगों के लिए सर्दियों में नहाने का तरीका सेहत पर सीधा असर डाल सकता है।
एक्सपर्ट की राय क्या कहती है?
लेडी हार्डिंग हॉस्पिटल के डॉक्टर एल.एच. घोटेकर के अनुसार, हाई बीपी और डायबिटीज के मरीजों के लिए सर्दियों में ठंडे पानी से नहाना आमतौर पर सुरक्षित नहीं माना जाता। ठंडा पानी शरीर के संपर्क में आते ही ब्लड सर्कुलेशन में अचानक बदलाव कर देता है। इससे शरीर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जो इन बीमारियों में खतरा बढ़ा सकता है।

क्यों बढ़ जाता है खतरा?
ठंडे पानी से नहाने पर कुछ मरीजों को चक्कर आना, घबराहट, बेचैनी या असहजता महसूस हो सकती है। जिन लोगों का ब्लड प्रेशर या ब्लड शुगर पहले से कंट्रोल में नहीं रहता, उनमें यह जोखिम और ज्यादा हो सकता है। अचानक तापमान परिवर्तन से हार्ट और नर्वस सिस्टम पर भी असर पड़ सकता है।

गुनगुना पानी क्यों है बेहतर विकल्प?
डॉक्टरों का कहना है कि सर्दियों में हाई बीपी और डायबिटीज के मरीजों को गुनगुने पानी से नहाना चाहिए। इससे शरीर धीरे-धीरे तापमान के अनुसार ढलता है और नहाते समय किसी भी तरह की परेशानी का खतरा कम हो जाता है।

नहाते समय किन बातों का रखें ध्यान?

    बहुत ठंडे या बहुत गर्म पानी से न नहाएं
    खाली पेट या कमजोरी की हालत में स्नान न करें
    बाथरूम का तापमान बहुत कम हो तो पहले शरीर को एडजस्ट होने दें
    नहाते समय चक्कर, घबराहट या सांस की दिक्कत हो तो तुरंत स्नान रोक दें
    
    इन बातों का भी रखें ख्याल
    हाई बीपी और डायबिटीज के मरीजों को रोजाना ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल की जांच करनी चाहिए। संतुलित डाइट लें, पर्याप्त पानी पिएं और दवाइयों को नियमित रूप से लेते रहें। किसी भी असामान्य लक्षण पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।

</description><guid>why-bathing-in-cold-water-is-dangerous-for-high-blood-pressure-and-diabetes-patients,-know-the-reason</guid><pubDate>28-Dec-2025 9:58:31 am</pubDate></item><item><title>सर्दियों में क्यों बदल जाता है पेशाब का रंग? जानें कब है सामान्य और कब गंभीर बीमारी का संकेत</title><link>https://just36news.com/why-does-urine-color-change-in-winter-learn-when-it-normal-and-when-its-a-sign-of-serious-illness</link><description>सर्दियों के मौसम में शरीर में कई तरह के बदलाव देखने को मिलते हैं। ठंड बढ़ने पर खानपान, पानी पीने की आदत और दिनचर्या में फर्क आ जाता है। इस दौरान कई लोग यह अनुभव करते हैं कि उनके पेशाब का रंग सामान्य से अलग दिखाई देता है। कुछ को यह गहरा पीला लगता है, तो कुछ को हल्का पीला या अलग तरह का। ऐसे बदलाव को लेकर अक्सर लोगों के मन में सवाल उठते हैं कि क्या यह किसी बीमारी का संकेत है।
क्या सर्दियों में पेशाब का रंग बदलना रोग का संकेत है?
लेडी हार्डिंग हॉस्पिटल की डॉ. एल.एच. घोटेकर का कहना है कि सर्दियों में पेशाब का रंग बदलना जरूरी नहीं कि किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो। ठंड के मौसम में लोग अक्सर पानी कम पीते हैं क्योंकि प्यास कम लगती है और पसीना भी कम आता है। इसके कारण शरीर में पानी की कमी हो सकती है, जो सीधे पेशाब के रंग पर असर डालती है। पर्याप्त पानी न मिलने पर पेशाब गाढ़ा हो जाता है और उसका रंग गहरा पीला दिखाई देता है।
आमतौर पर हल्का पीला रंग सामान्य माना जाता है। लेकिन यदि पेशाब का रंग बहुत गहरा पीला, भूरा, लाल या झागदार नजर आए, तो इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए। यदि यह बदलाव थोड़े समय के लिए हो और किसी अन्य परेशानी के बिना अपने आप ठीक हो जाए, तो घबराने की जरूरत नहीं होती। वहीं, अगर पेशाब के रंग के साथ जलन, दर्द, बदबू, बार-बार पेशाब आना या लगातार थकान जैसी समस्याएं भी हों, तो यह किसी अंदरूनी समस्या का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में समय पर डॉक्टर से सलाह लेना बेहद जरूरी है।
कौन सी बीमारियों का खतरा हो सकता है?
पेशाब के रंग में बदलाव कुछ बीमारियों की ओर इशारा कर सकता है। इनमें यूरिनरी इंफेक्शन, किडनी से जुड़ी समस्याएं, लिवर की परेशानी या डिहाइड्रेशन शामिल हैं। इसके अलावा, कुछ मामलों में ब्लड शुगर की अनियमितता या पीलिया जैसी स्थिति में भी पेशाब का रंग बदल सकता है।
यदि पेशाब का रंग लगातार असामान्य बने रहे या उसमें खून दिखाई दे, तो यह गंभीर संकेत हो सकता है। पेशाब करते समय दर्द या जलन होना भी किसी संक्रमण का लक्षण हो सकता है। इसलिए इन लक्षणों को हल्के में लेने के बजाय समय पर जांच कराना और विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।
कैसे रखें खुद का ख्याल?
दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
ठंड में भी प्यास लगने पर पानी न छोड़ें।
संतुलित और साफ-सुथरा आहार लें।
पेशाब को लंबे समय तक रोककर न रखें।
किसी भी असामान्य लक्षण पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।</description><guid>why-does-urine-color-change-in-winter-learn-when-it-normal-and-when-its-a-sign-of-serious-illness</guid><pubDate>25-Dec-2025 10:48:24 am</pubDate></item><item><title>क्या आपका दिल है एकदम फिट? इन 4 टेस्ट से तुरंत चलेगा पता, जानें कब और किस कंडीशन में किए जाते हैं</title><link>https://just36news.com/is-your-heart-in-perfect-shape-these-4-tests-will-tell-you-immediately</link><description>आज की बदलती जीवनशैली और अस्वस्थ खानपान की वजह से दिल की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। उम्र बढ़ने के साथ-साथ दिल की सुरक्षा और स्वास्थ्य पर ध्यान देना बेहद जरूरी हो गया है। कार्डियोथोरेसिक सर्जन डॉ. जेरेमी लंदन, जिनके 25 साल से अधिक का क्लिनिकल अनुभव है, ने हाल ही में इंस्टाग्राम पर दिल की सेहत से जुड़े कुछ अहम स्क्रीनिंग टेस्ट के बारे में जानकारी साझा की।
एंकल ब्रेकियल इंडेक्स (ABI)
डॉ. लंदन बताते हैं कि एंकल ब्रेकियल इंडेक्स टेस्ट हाथों और टखनों में ब्लड प्रेशर की तुलना करता है। पैरों में खून का बहाव कम होने का मतलब अक्सर शरीर की दूसरी जगहों पर भी धमनियों में प्लाक जमा होना हो सकता है। कम ABI हार्ट अटैक और स्ट्रोक का बड़ा संकेत हो सकता है, भले ही व्यक्ति में कोई लक्षण दिखाई न दें।
कैरोटिड अल्ट्रासाउंड
कैरोटिड अल्ट्रासाउंड गर्दन की कैरोटिड धमनियों की तस्वीरें बनाता है, जो दिल से दिमाग तक रक्त पहुंचाती हैं। यह टेस्ट प्लाक के कारण होने वाली रुकावटों का पता लगाता है और स्ट्रोक के जोखिम का मूल्यांकन करने में मदद करता है।
इकोकार्डियोग्राम (Echocardiogram)
इकोकार्डियोग्राम, जिसे इको भी कहा जाता है, धड़कते दिल की लाइव तस्वीरें दिखाता है। यह टेस्ट बताता है कि दिल कितनी अच्छी तरह रक्त पंप कर रहा है, वाल्व कैसे काम कर रहे हैं और दिल की मांसपेशियों में कोई कमजोरी या मोटापा तो नहीं है।
कार्डियक सीटी एंजियोग्राम (CCTA)
कार्डियक सीटी एंजियोग्राम एक उच्च तकनीकी सीटी स्कैन है जो एक्स-रे और कंप्यूटर का उपयोग करके दिल और कोरोनरी धमनियों की 3D तस्वीरें बनाता है। यह टेस्ट धमनियों में ब्लॉकेज, संकुचन या प्लाक का सटीक पता लगाने में मदद करता है। डॉ. लंदन ने सलाह दी है कि दिल से जुड़े किसी भी टेस्ट को करवाने से पहले व्यक्तिगत डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है। डॉक्टर आपकी उम्र, जीवनशैली और मेडिकल हिस्ट्री को ध्यान में रखकर तय करेंगे कि कौन-सा टेस्ट आपके लिए सबसे उपयुक्त रहेगा।</description><guid>is-your-heart-in-perfect-shape-these-4-tests-will-tell-you-immediately</guid><pubDate>25-Dec-2025 10:42:15 am</pubDate></item><item><title>सावधान! वेट लॉस की दवा कहीं आपके लिए भी न कर दें मुश्किल पैदा, खासकर यह लोग रहें सतर्क</title><link>https://just36news.com/beware-weight-loss-pills-may-cause-problems-for-you,-especially-these-people-should-be-cautious</link><description>दुनिया भर में वजन घटाने के लिए मशहूर 'ओजेम्पिक' इंजेक्शन अब भारत में भी चर्चा का केंद्र बना हुआ है। मूल रूप से टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों के लिए बनाई गई यह दवा आजकल अपनी एक 'साइड इफेक्ट' के कारण सुर्खियों में हैऔर वह है तेजी से वजन कम करना। दिसंबर 2025 में भारत में इसकी उपलब्धता बढ़ने के साथ ही इसके फायदों और खतरों पर बहस तेज हो गई है।
ओजेम्पिक क्या है और यह कैसे काम करती है?
ओजेम्पिक का वैज्ञानिक नाम सेमाग्लूटाइड (Semaglutide) है। यह हमारे शरीर में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले GLP-1 हॉर्मोन की नकल करती है। डॉ. अनिल गोम्बर (सीनियर कंसल्टेंट, यथार्थ सुपर स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल) के अनुसारयह दवा शरीर में निम्नलिखित बदलाव लाती है।यह दिमाग को संकेत देती है कि आपका पेट भरा हुआ है। यह पेट के खाली होने की प्रक्रिया को धीमा कर देती हैजिससे आप लंबे समय तक तृप्त महसूस करते हैं। यह इंसुलिन के उत्पादन को बढ़ाती है और ग्लूकागॉन (जो शुगर बढ़ाता है) को कम करती है।
कीमत और परिणाम: क्या यह पैसा वसूल है?
मीडिया रिपोर्ट्स और बाजार के आंकड़ों के अनुसार भारत में इस इंजेक्शन का मासिक खर्च 10,000 से 20,000 रुपये के बीच आता है। एक साल में व्यक्ति का वजन 15% तक कम हो सकता है। शोध बताते हैं कि दवा छोड़ने के कुछ ही समय बाद घटा हुआ दो-तिहाई वजन वापस लौट आता है। इसे हफ्ते में केवल एक बार लगाना होता है।
गंभीर खतरे और साइड इफेक्ट्स
जितनी यह दवा असरदार हैउतने ही इसके जोखिम भी डराने वाले हैं। 2025 की लेटेस्ट स्टडीज के अनुसार:

    
    पैनक्रियाटाइटिस:पैंक्रियास में सूजन का खतरा 146% तक बढ़ सकता है।
    
    
    दृष्टि हानि (NAION):आंखों की एक दुर्लभ बीमारी का जोखिम बढ़ता हैजिससे रोशनी जा सकती है।
    
    
    थायरॉइड ट्यूमर:जानवरों पर हुए परीक्षण में थायरॉइड कैंसर के लक्षण देखे गए हैं।
    
    
    गैस्ट्रोपेरेसिस:पेट की मांसपेशियां इतनी कमजोर हो सकती हैं कि भोजन पचना मुश्किल हो जाता है।
    

किन लोगों को इस इंजेक्शन से दूर रहना चाहिए?
यदि आप वजन घटाने के लिए इसे आजमाना चाहते हैंतो सुनिश्चित करें कि आप इन श्रेणियों में न आते हों:

    
    जिन्हें पहले कभी पैनक्रियाटाइटिस रहा हो।
    
    
    जिनके परिवार में थायरॉइड कैंसर का इतिहास (Family History) हो।
    
    
    किडनी या लिवर की गंभीर बीमारी वाले मरीज।
    
    
    गर्भवती महिलाएं या स्तनपान कराने वाली माताएं।
    

क्या हैं इसके फायदे? (डॉक्टर की सलाह पर)
अगर डॉक्टर की देखरेख में इसका सही इस्तेमाल किया जाएतो यह टाइप-2 डायबिटीज को नियंत्रित करने, हृदय रोगों (Heart Disease) के खतरे को कम करने और मोटापे से लड़ने में मदद कर सकती है। कुछ अध्ययनों में इसे अल्जाइमर जैसी भूलने की बीमारी में भी मददगार पाया गया है।</description><guid>beware-weight-loss-pills-may-cause-problems-for-you,-especially-these-people-should-be-cautious</guid><pubDate>24-Dec-2025 10:37:07 am</pubDate></item><item><title>सावधान! जीभ साफ करने की ये आदत आपको दे सकती है खतरनाक इंफेक्शन, न करें इसे नज़रअंदाज़</title><link>https://just36news.com/beware-this-habit-of-cleaning-your-tongue-can-lead-to-a-dangerous-infection</link><description>Tongue Clean Risk :आजकल सोशल मीडिया पर टंग स्क्रैपिंगयानी जीभ साफ करना एक बड़ा हेल्थ ट्रेंड बन गया है। इन्फ्लुएंसर्स और वीडियो में दावा किया जाता है कि जीभ पर जमी सफेद परत को खुरचकर हटाने से सांसों की बदबू (Bad Breath) तुरंत खत्म हो जाती है और मुंह फ्रेश हो जाता हैलेकिन डॉक्टरों और विशेषज्ञों ने इस पर एक बड़ी चेतावनी जारी की है। क्या आप जानते हैं कि आपकी यह छोटी सी आदत आपके दिल (Heart) को खतरे में डाल सकती है?
कैसे काम करता है टंग स्क्रैपर और क्या है जोखिम?
टंग स्क्रैपर का इस्तेमाल जीभ की सतह पर जमा बैक्टीरिया, मृत कोशिकाओं और खाने के कणों को निकालने के लिए किया जाता है। कई लोग इसे टूथब्रश से ज्यादा प्रभावी मानते हैं। जब आप मेटल या प्लास्टिक के स्क्रैपर से जोर लगाकर जीभ साफ करते हैंतो जीभ की नाजुक त्वचा पर बेहद बारीक कट लग सकते हैं। ये कट इतने छोटे होते हैं कि नग्न आंखों से दिखाई भी नहीं देते। इन सूक्ष्म घावों के जरिए मुंह के खतरनाक बैक्टीरिया सीधे आपके रक्त प्रवाह (Bloodstream) में प्रवेश कर जाते हैं।
टंग स्क्रैपिंग और दिल का इंफेक्शन: एंडोकार्डाइटिस (Endocarditis)
'पबमेड सेंट्रल' (PubMed Central) में छपी एक रिसर्च के अनुसारजीभ के जरिए खून में पहुंचे बैक्टीरिया दिल के वाल्व और उसकी अंदरूनी परत तक पहुंच सकते हैं। इससे एंडोकार्डाइटिस नामक जानलेवा बीमारी हो सकती है।

    
    
        
        मृत्यु दर:विशेषज्ञों के अनुसारइस बीमारी में मृत्यु दर 15% से 30% तक हो सकती है।
        
        
        किसे है ज्यादा खतरा?जिन लोगों को पहले से हार्ट की बीमारी हैजिनका हार्ट वाल्व बदला गया हैजिन्हें पेसमेकर लगा है या जिनकी इम्यूनिटी कमजोर हैउनके लिए टंग स्क्रैपिंग बहुत जोखिम भरी हो सकती है।
        क्या है एंडोकार्डाइटिस? यह दिल के वाल्व में होने वाला एक गंभीर संक्रमण है।
        
    
    एंडोकार्डाइटिस के मुख्य लक्षण
    अगर जीभ साफ करने की आदत के बाद आपको ये लक्षण दिखेंतो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें:
    
        
        लगातार हल्का बुखार और कमजोरी महसूस होना।
        
        
        सांस फूलना या दिल की धड़कन का अनियमित होना।
        
        
        पैरों, हाथों या पेट में अचानक सूजन आना।
        
        
        अचानक वजन कम होना।
        
    
    डॉक्टरों की सलाह: सुरक्षित तरीका क्या है?
    दंत चिकित्सकों (Dentists) के अनुसारमुंह की सफाई के लिए ट्रेंड के पीछे भागने के बजाय सुरक्षित तरीके अपनाएं:
    
        
        सॉफ्ट ब्रश का इस्तेमाल:जीभ को खुरचने के बजाय नरम बालों वाले टूथब्रश से हल्के हाथों से साफ करें। यह उतना ही असरदार और कहीं ज्यादा सुरक्षित है।
        
        
        सफाई का सही तरीका:दिन में दो बार ब्रश करें और फ्लॉस(Floss) करना न भूलें।
        
        
        जड़ तक जाएं:अगर सांसों की बदबू लगातार बनी हुई है तो यह केवल जीभ की गंदगी नहीं बल्कि पेट की खराबी, मसूड़ों की बीमारी या कैविटी का संकेत हो सकता है
        
    
    
</description><guid>beware-this-habit-of-cleaning-your-tongue-can-lead-to-a-dangerous-infection</guid><pubDate>24-Dec-2025 10:34:18 am</pubDate></item><item><title>Potato Adulteration: आपकी रसोई में आलू के तौर पर जहर तो नहीं मौजूद? घर पर 1 मिनट में ऐसे करें पहचान</title><link>https://just36news.com/potato-adulteration:-is-there-poison-in-the-form-of-potatoes-in-your-kitchen</link><description>आज के इस दौर में मार्केट में हर कई चीज़ें मिलावटी मिल रही हैं। इन मिलावटी चीज़ों के सेवन से शरीर को कई तरह से नुक्सान होता है। मार्केट में मौजूद मिलाटवखोरों को इससे कोई मतलब नहीं। ऐसे मेंसर्दियों का सीजन शुरू होते ही बाजार में 'नए आलू' की मांग बढ़ जाती है, लेकिन इसी मांग का फायदा उठाकर मिलावटखोर आपकी सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। मुनाफे के लालच में विक्रेता पुराने कोल्ड स्टोरेज वाले आलुओं को अमोनिया और सिंथेटिक रंगों से ट्रीट करके 'नया आलू' बनाकर बेच रहे हैं। यह प्रक्रिया न केवल धोखाधड़ी है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए अत्यंत घातक भी है। विशेषज्ञों के अनुसार इन रसायनों के संपर्क में आने से सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन और त्वचा संबंधी गंभीर रोग हो सकते हैं। इस मिलावट के पीछे का मुख्य कारण पुराने स्टॉक को ऊंचे दामों पर निकालना और उपज को कृत्रिम रूप से चमकदार बनाना है
ऐसे बनाते हैं पुराने आलू को नया
मिलावटखोर पुराने आलू का कायाकल्प करने के लिए एक पूरी प्रक्रिया अपनाते हैं। सबसे पहले पुराने आलुओं को अमोनिया के घोल में कई घंटों तक डुबोकर रखा जाता है। इससे आलू का सख्त छिलका मुलायम और पतला हो जाता है। इसके बाद इसे घोल से निकालकर गीली मिट्टी में रगड़ा जाता है, जिससे ऊपरी छिलका उतर जाता है और आलू बिल्कुल ताजे 'नए आलू' जैसा दिखने लगता है। कई बार इनका रंग निखारने के लिए हानिकारक सिंथेटिक रंगों का भी प्रयोग किया जाता है।
केमिकल वाले आलू की पहचान कैसे करें?
बाजार से आलू खरीदते समय आप इन आसान तरीकों से मिलावट पकड़ सकते हैं:

    असामान्य चमक:अगर आलू जरूरत से ज्यादा चमकदार और उसकी सतह एकदम चिकनी दिख रही है, तो समझ जाएं कि इसमें केमिकल का इस्तेमाल हुआ है। प्राकृतिक नए आलू की सतह साधारण और सफेद होती है।
    छिलके की परत:नया आलू खुरचने पर छिलका निकलता है, लेकिन अगर छिलका पूरी परत के रूप में आसानी से उतर रहा है, तो वह अमोनिया से ट्रीट किया गया पुराना आलू है।
    अजीब गंध:आलू को सूंघकर देखें; यदि उसमें मिट्टी के बजाय किसी तीखी या रासायनिक दवा जैसी महक आ रही है, तो उसे खरीदने से बचें।
    काटने पर अंतर:नया आलू काटने पर सूखा और कड़ा होता है, जबकि केमिकल युक्त पुराना आलू काटने पर अंदर से पानी या रस छोड़ता है।
    पानी का परीक्षण:आलू को पानी में भिगोकर देखें। यदि मिट्टी के साथ पानी का रंग बदलने लगे, तो समझ लें कि इसे सिंथेटिक रंगों से रंगा गया है।

</description><guid>potato-adulteration:-is-there-poison-in-the-form-of-potatoes-in-your-kitchen</guid><pubDate>22-Dec-2025 8:47:52 am</pubDate></item><item><title>सर्दियों में कम प्यास लगना शरीर के लिए है खतरे की घंटी, किडनी और लिवर पर होता है सीधा असर</title><link>https://just36news.com/less-thirst-in-winter-is-a-danger-signal-for-the-body,-it-has-a-direct-impact-on-the-kidneys-and-liver</link><description>सर्दियों के मौसम में तापमान गिरते ही लोगों को प्यास कम लगने लगती है। ठंड की वजह से पसीना कम आता है और इसी कारण अधिकतर लोग पूरे दिन में एक या दो गिलास पानी पीकर ही संतुष्ट हो जाते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि प्यास न लगने के बावजूद शरीर को सर्दियों में भी पर्याप्त मात्रा में पानी की उतनी ही जरूरत होती है, जितनी गर्मियों में। पानी की कमी शरीर के कई अंगों पर नकारात्मक असर डाल सकती है, खासकर किडनी और लिवर पर इसका प्रभाव गंभीर हो सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, एक वयस्क व्यक्ति को दिनभर में कम से कम 2.5 से 3 लीटर पानी जरूर पीना चाहिए। अगर ठंड के मौसम में सादा पानी पीने में परेशानी होती है, तो गुनगुना पानी एक बेहतर विकल्प हो सकता है। इसके अलावा नारियल पानी, ताजे फलों के रस, सब्जियों के जूस और घर पर बने सूप के जरिए भी शरीर में पानी की कमी को पूरा किया जा सकता है।
कम पानी पीने से किडनी की सेहत पर खतरा
किडनी को शरीर की सफाई करने वाली मशीन माना जाता है। इसका मुख्य काम खून को साफ करना और शरीर में जमा गंदगी को यूरिन के जरिए बाहर निकालना होता है। जब व्यक्ति पर्याप्त पानी नहीं पीता, तो किडनी को इस गंदगी को बाहर निकालने में दिक्कत होती है। इससे किडनी में पथरी बनने का खतरा बढ़ जाता है। इसके साथ ही यूरिन इंफेक्शन, पेशाब में जलन जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं। अगर लंबे समय तक पानी की कमी बनी रहे, तो किडनी धीरे-धीरे कमजोर होने लगती है और उसका कामकाज प्रभावित हो सकता है।
लिवर के लिए बढ़ जाती है परेशानी
पानी की कमी का असर लिवर पर भी साफ तौर पर दिखाई देता है। लिवर का मुख्य काम शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालना और भोजन को पचाने में मदद करना होता है। इन दोनों प्रक्रियाओं के लिए पर्याप्त पानी जरूरी है। जब शरीर में पानी की कमी हो जाती है, तो विषैले तत्व लिवर में जमा होने लगते हैं। इससे लिवर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और उसकी कार्यक्षमता धीमी हो जाती है।
पानी कम पीने से खून गाढ़ा होने लगता है, जिससे लिवर को अपना काम करने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इस स्थिति में लिवर में सूजन की समस्या हो सकती है और शरीर में थकान व ऊर्जा की कमी महसूस होने लगती है।
पेट की समस्या और कब्ज की शिकायत
सर्दियों के मौसम में खानपान में भी बदलाव आ जाता है। लोग अक्सर तला-भुना और भारी भोजन ज्यादा मात्रा में खाने लगते हैं। ऐसे भोजन को पचाने के लिए पर्याप्त पानी बेहद जरूरी होता है। अगर पानी कम पिया जाए, तो पाचन क्रिया प्रभावित होती है और पेट ठीक से साफ नहीं हो पाता। इसका नतीजा कब्ज, गैस और पेट में भारीपन के रूप में सामने आता है, जो रोजमर्रा की जिंदगी को परेशान कर सकता है।
विशेषज्ञों की मानें तो सर्दियों में भी नियमित अंतराल पर पानी पीने की आदत डालना बेहद जरूरी है। भले ही प्यास न लगे, लेकिन शरीर की अंदरूनी सफाई और अंगों के सही कामकाज के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीना सेहतमंद रहने की सबसे जरूरी शर्त है।</description><guid>less-thirst-in-winter-is-a-danger-signal-for-the-body,-it-has-a-direct-impact-on-the-kidneys-and-liver</guid><pubDate>22-Dec-2025 8:42:39 am</pubDate></item><item><title>भारत में लॉन्च हुई ओजेम्पिक की दवा, अब आसानी से घटा सकेंगे वजन, जानें कितनी होगी कीमत</title><link>https://just36news.com/ozempic-medicine-launched-in-india,-now-you-can-lose-weight-easily,-know-the-price</link><description>दुनियाभर में लोकप्रिय डायबिटीज की दवा ओजेम्पिक अब भारत में भी उपलब्ध हो गई है। नोवो नॉर्डिस्क ने इसे भारत में लॉन्च कर दिया है। यह दवा शुगर कंट्रोल करने के साथ-साथ वजन घटाने में भी मददगार मानी जा रही है। इस दवा के माध्यम से डायबिटीज रोगियों और मोटापे से परेशान लोगों को इलाज में नया विकल्प मिलेगा।
ओजेम्पिक में सक्रिय घटक सेमाग्लूटाइड है, जो शरीर में प्राकृतिक रूप से मौजूद GLP-1 हार्मोन की तरह काम करता है। यह हार्मोन भूख को नियंत्रित करता है और शुगर लेवल को संतुलित रखता है। जब व्यक्ति कम भोजन करता है, तो शरीर में कैलोरी की खपत भी कम हो जाती है, जिससे वजन कम होने में मदद मिलती है। इस दवा का यह असर उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो डायबिटीज के साथ-साथ वजन कम करने की प्रक्रिया में हैं।
भारत में कीमत और डोज
0.25 एमजी हफ्ते की डोज: ₹2,200
0.5 एमजी हफ्ते की डोज: ₹2,540
1 एमजी हफ्ते की डोज: ₹2,800
ओजेम्पिक की डोज मरीज की मेडिकल हिस्ट्री, मोटापे और डायबिटीज के प्रकार के अनुसार डॉक्टर तय करते हैं। यदि कोई व्यक्ति एक महीने या छह महीने तक दवा का सेवन करता है, तो डोज की कुल कीमत भी उसी के अनुसार बढ़ती है।
सावधानियां और चेतावनी
दिल्ली के जीटीबी अस्पताल में मेडिसिन विभाग के डॉ. अजीत कुमार ने बताया कि ओजेम्पिक का भारत में लॉन्च होना अच्छी खबर है, लेकिन इसे किसी भी व्यक्ति को बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं लेना चाहिए। यह जरूरी नहीं कि दवा सभी व्यक्तियों पर समान रूप से असर करेगी। इसके कुछ नुकसान भी हो सकते हैं। उन लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए जिनके पेट की गंभीर बीमारियां हैं या जिनका शुगर लेवल अत्यधिक बढ़ा हुआ है। दवा लेने से पहले डॉक्टर से परामर्श आवश्यक है।
डॉ. कुमार ने स्पष्ट किया कि ओजेम्पिक का इस्तेमाल केवल मेडिकल सलाह के तहत ही किया जाना चाहिए। सही डोज और चिकित्सकीय निगरानी के साथ इस दवा का सेवन करना सुरक्षित रहेगा। ओजेम्पिक अब भारत में डायबिटीज और वजन नियंत्रण के लिए एक नया विकल्प बन गया है। यह दवा शुगर लेवल को नियंत्रित करने के साथ-साथ भूख को कम करके वजन घटाने में मदद करती है। हालांकि, इसका सेवन डॉक्टर की देखरेख में ही किया जाना चाहिए, ताकि संभावित दुष्प्रभावों से बचा जा सके।</description><guid>ozempic-medicine-launched-in-india,-now-you-can-lose-weight-easily,-know-the-price</guid><pubDate>20-Dec-2025 9:49:52 am</pubDate></item><item><title>HEALTH : रात में स्वेटर पहनकर सोना सेहत के लिए नुकसानदेह? जानिए एक्सपर्ट की चेतावनी</title><link>https://just36news.com/health-is-wearing-a-sweater-at-night-harmful-to-your-health-learn-from-an-expert-warning</link><description>HEALTH NEWS: सर्दियों में ठंड से बचने के लिए कई लोग रात में भी स्वेटर या बहुत गर्म कपड़े पहनकर सो जाते हैं, लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक यह आदत सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकती है, क्योंकि इससे शरीर का तापमान जरूरत से ज्यादा बढ़ जाता है और नींद की प्राकृतिक प्रक्रिया बाधित होती है।
डॉक्टर बताते हैं कि सोते समय शरीर खुद को ठंडा करता है ताकि गहरी और सुकूनभरी नींद आ सके, लेकिन स्वेटर पहनने से बेचैनी, बार-बार नींद टूटना, ज्यादा पसीना आना, डिहाइड्रेशन, त्वचा पर रैशेज, खुजली, घमौरियां और ब्लड सर्कुलेशन से जुड़ी दिक्कतें हो सकती हैं।




आदर्श नींद के लिए कमरे का तापमान लगभग 18 से 21 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए और हल्के, सांस लेने वाले कपड़े पहनने की सलाह दी जाती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ज्यादा ठंड लगने पर स्वेटर पहनने के बजाय हल्की रजाई या कंबल का इस्तेमाल बेहतर विकल्प है, ताकि शरीर का तापमान संतुलित रहे और नींद की गुणवत्ता खराब न हो।



</description><guid>health-is-wearing-a-sweater-at-night-harmful-to-your-health-learn-from-an-expert-warning</guid><pubDate>16-Dec-2025 10:02:48 am</pubDate></item><item><title>HEALTH : किचन के 7 देसी मसाले जो खराब कोलेस्ट्रॉल को प्राकृतिक रूप से कम कर सकते हैं</title><link>https://just36news.com/health-7-desi-kitchen-spices-that-can-naturally-lower-bad-cholesterol</link><description>HEALTH NEWS: खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा तेजी से बढ़ जाता है, लेकिन एक्सपर्ट्स बताते हैं कि किचन में मौजूद कुछ आम मसाले इसे प्राकृतिक रूप से कम करने में मदद कर सकते हैं। कोलेस्ट्रॉल एक चिप-चिपा फैटी पदार्थ है, जिसमें LDL यानी खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ जाए तो धमनियां ब्लॉक होकर हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।



डॉक्टर की सलाह के साथ कुछ देसी नुस्खे अपनाने से LDL कम और HDL यानी अच्छा कोलेस्ट्रॉल बढ़ाया जा सकता है। अदरक ब्लड प्रेशर और खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में प्रभावी है, रिसर्च में पाया गया कि यह ट्राइग्लिसराइड्स और LDL को घटाकर HDL बढ़ा सकता है। मेथी दाना में मौजूद सैपोनिन्स LDL के अवशोषण को कम करते हैं और रोज सुबह भिगोकर खाने से फायदा मिलता है।


लहसुन में मौजूद एलिसिन खून में जमा फैट को घोलकर धमनियों को साफ करता है, खाली पेट 2 कच्ची कलियां असर दिखाती हैं। हल्दी में कर्क्यूमिन सूजन कम करके ब्लड वेसल्स को स्वस्थ रखता है जिससे कोलेस्ट्रॉल जमना कम होता है, इसे दूध में या कच्ची हल्दी के रूप में लिया जा सकता है। दालचीनी ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल दोनों को नियंत्रित करती है, आधा चम्मच पाउडर गुनगुने पानी के साथ लेना फायदेमंद माना जाता है।




अजवाइन और जीरा मेटाबोलिज्म बढ़ाकर फैट को ब्रेक करने में मदद करते हैं, अजवाइन में मौजूद थाइमोल फैट को गलाता है जबकि जीरा एंटीऑक्सिडेंट्स से लिपिड लेवल बैलेंस करता है। प्याज में पाए जाने वाले फ्लेवोनॉइड्स खराब कोलेस्ट्रॉल को कम कर अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाते हैं, इसे रोज सलाद या सब्जी में शामिल किया जा सकता है। किचन में मौजूद ये सरल मसाले हार्ट को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।











</description><guid>health-7-desi-kitchen-spices-that-can-naturally-lower-bad-cholesterol</guid><pubDate>29-Nov-2025 9:24:15 am</pubDate></item><item><title>बदलते मौसम में गले की खराशखांसी से तुरंत राहत! जानें 3 घरेलू नुस्खे, एक देता है अगले दिन ही आराम</title><link>https://just36news.com/get-instant-relief-from-sore-throat-and-cough-during-changing-weather-learn-3-home-remedies</link><description>नई दिल्ली। बदलते मौसम में बच्चों से लेकर बड़ों तक गले की समस्या आम हो गई है। सूखी खांसी, खराश और गले में जलन लोगों को दिनभर परेशान करती है। ऐसे में घरेलू नुस्खे बेहद असरदार माने जाते हैं। आयुर्वेदिक विशेषज्ञों का कहना है कि सही तरीके से अपनाए गए नुस्खे सिर्फ एक दिन में राहत दे सकते हैं  खासकर शहद और सेंधा नमक वाला घरेलू उपचार।
1. शहद और सेंधा नमक  अगले दिन ही राहत देने वाला नुस्खा
यह नुस्खा प्रसिद्ध आयुर्वेदिक डॉक्टर सुभाष गोयल ने सुझाया है।

    
    1 चम्मच शहद में  चम्मच सेंधा नमक मिलाएँ।
    
    
    मिश्रण को उंगली से चाटें और गले पर हल्की मालिश होने दें।
    
    
    इसके बाद गर्म पानी या ब्लैक टी पिएँ (दूध और चीनी न डालें)।
    

डॉक्टर का दावा:
इस नुस्खे से गले की खराश और सूखी खांसी में अगले दिन ही आराम मिल जाता है।
2. अदरक रस + तुलसी रस + शहद  तीन गुना असरदार फॉर्मूला
यह पेस्ट गले की सूजन, कफ और जलन को तेजी से ठीक करता है।



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     चम्मच अदरक रस
    
    
     चम्मच तुलसी रस
    
    
     चम्मच शहद
    इन्हें मिलाकर पेस्ट बनाएँ और सेवन करें।
    अदरक में एंटीइंफ्लेमेटरी गुण, तुलसी में इम्यूनिटी बूस्टर और शहद में एंटीबैक्टीरियल तत्व मिलकर गला तुरंत शांत करते हैं।
    

3. तुलसीकाली मिर्च की चाय  सूखी खांसी का आसान इलाज
यह चाय बदलते मौसम में बेहद असरदार मानी जाती है।

    
    1 ग्लास पानी
    
    
    56 तुलसी पत्ते
    
    
    थोड़ी काली मिर्च
    इसे अच्छी तरह उबालें और छानकर स्वाद अनुसार शहद मिलाएँ।
    नियमित सेवन से सूखी खांसी में तेजी से राहत मिलती है।
    

डॉ. कहते हैं
बदलते मौसम में अगर दवाइयों से राहत नहीं मिल रही है तो ये घरेलू नुस्खे बेहद प्रभावी हैं। नियमित रूप से इन्हें अपनाने से गले की ज्यादातर समस्याएँ ठीक हो जाती हैं।




</description><guid>get-instant-relief-from-sore-throat-and-cough-during-changing-weather-learn-3-home-remedies</guid><pubDate>16-Nov-2025 9:03:01 am</pubDate></item><item><title>सर्दियों में क्यों बढ़ जाती है अंजीर की डिमांड? डॉक्टर ने बताया सेहत का असली विंटर फॉर्मूला</title><link>https://just36news.com/why-does-the-demand-for-figs-increase-in-winter-a-doctor-reveals-the-true</link><description>नई दिल्ली। Anjeer Khane Ke Fayde: सर्दियों का मौसम वैसे ही सेहत के लिए खास माना जाता है, लेकिन इस मौसम में अंजीर खाने के फायदे कई गुना बढ़ जाते हैं। अंजीर शरीर को गर्मी देता है, इम्यूनिटी को मजबूत बनाता है, पाचन बेहतर करता है और त्वचा को ग्लोइंग बनाता है। आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. के अनुसार, अंजीर को सर्दियों में नेचुरल हीलर माना जाता है।



अंजीर क्यों है सर्दियों का सुपरफूड?
अंजीर में विटामिन A, C और K भरपूर होता है। वहीं कैल्शियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम और आयरन जैसे मिनरल इसे बेहद पौष्टिक बनाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह ठंड में शरीर की जरूरतों को पूरा करने वाला सबसे आसान और प्राकृतिक स्रोत है।
पाचन के लिए बेहद फायदेमंद
आयुर्वेदिक मेडिसिन में अंजीर का इस्तेमाल सदियों से कब्ज और पाचन संबंधी समस्याओं के इलाज में किया जाता रहा है। इसमें मौजूद फाइबर मल त्याग को नियमित करता है और पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है।
वजन घटाने में मददगार
डॉ. जैदी बताते हैं
अंजीर में कैलोरी कम और फाइबर ज्यादा होता है। यह भूख को नियंत्रित करता है और वेट लॉस में मदद करता है। 100 ग्राम अंजीर में सिर्फ 74 कैलोरी और लगभग 3 ग्राम फाइबर होता है।
स्किन के लिए भी फायदेमंद
अंजीर शरीर को हाइड्रेटेड रखता है और एंटीऑक्सीडेंट्स त्वचा को ग्लोइंग बनाते हैं। इससे मुंहासों, झुर्रियों और डलनेस में कमी आती है।
अंजीर का सही तरीका और समय

    
    रातभर पानी या दूध में भिगोकर सुबह खाएँ
    
    
    रात में दूध में उबालकर भी सेवन कर सकते हैं
    
    
    सूखे मेवे की तरह भी रोज़ 23 अंजीर खाए जा सकते हैं
    

डॉक्टर का बयान
डॉ. कहते हैं
सर्दियों में अंजीर शरीर को ऊर्जा, गर्मी और पोषण तीनों देता है। यह पाचन, इम्यूनिटी और स्किन के लिए बेहद फायदेमंद है। सही मात्रा और सही समय में सेवन इसका असर दोगुना कर देता है।


</description><guid>why-does-the-demand-for-figs-increase-in-winter-a-doctor-reveals-the-true</guid><pubDate>16-Nov-2025 8:54:29 am</pubDate></item><item><title>Silent Heart Attack: साइलेंट हार्ट अटैक क्या है? इन लक्षणों को कभी न करें नजरअंदाज, जानें कैसे पहचानें और बचें. </title><link>https://just36news.com/silent-heart-attack:-what-is-a-silent-heart-attack</link><description>तेज़ रफ्तार जिंदगी, बढ़ता तनाव और गलत लाइफस्टाइल के चलते हार्ट अटैक के मामले दुनिया भर में लगातार बढ़ रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट के अनुसार, हर साल लगभग 1.8 करोड़ लोग हार्ट संबंधी बीमारियों के कारण मौत का शिकार होते हैं, जिनमें से करीब एक-तिहाई हार्ट अटैक से होती है। हाल ही में डॉक्टरों ने एक और खतरनाक रूप की चेतावनी दी है। साइलेंट हार्ट अटैक। इसे साइलेंट इसलिए कहा जाता है क्योंकि मरीज को सामान्य हार्ट अटैक जैसे तेज दर्द या बेचैनी का अनुभव नहीं होता। यह धीरे-धीरे होता है और अक्सर तब तक पता नहीं चलता जब तक हृदय पर गंभीर नुकसान न हो जाए।

साइलेंट हार्ट अटैक के मुख्य कारण
साइलेंट हार्ट अटैक का मुख्य कारण हार्ट की नसों में कोलेस्ट्रॉल और फैट का जमाव है, जिससे रक्त प्रवाह (ब्लड फ्लो) बाधित हो जाता है। इसके अलावा, निम्नलिखित कारण इसे बढ़ावा देते हैं:
➤ हाई ब्लड प्रेशर
➤ डायबिटीज
➤ मोटापा
➤ धूम्रपान
➤ अधिक मानसिक तनाव
➤ असंतुलित और फैटी डाइट
विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाओं में लक्षण पुरुषों की तुलना में अधिक अस्पष्ट होते हैं, जिससे समय पर डाइग्नोसिस में देरी हो सकती है। 40 वर्ष से ऊपर के लोग, डायबिटीज के मरीज और कम एक्टिव जीवन जीने वाले लोग इसका ज्यादा शिकार होते हैं।

साइलेंट हार्ट अटैक के लक्षण
राजीव गांधी हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अजीत जैन के अनुसार, साइलेंट हार्ट अटैक के लक्षण अक्सर हल्के या असामान्य होते हैं। इन्हें अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं। मुख्य लक्षण हैं:
सीने में हल्का दबाव या जलन (जो अक्सर एसिडिटी या गैस समझ लिया जाता है)
➤ पीठ, गर्दन, जबड़े या कंधे में हल्का दर्द
➤ सांस फूलना
➤ अचानक थकान या नींद में परेशानी
➤ बार-बार पसीना आना

मतली या चक्कर
डायबिटीज के मरीजों में दर्द का अहसास कम होने की वजह से यह हार्ट अटैक बिना दर्द के भी हो सकता है। इसलिए अगर शरीर में बार-बार ये संकेत दिखाई दें, तो इसे हल्के में न लें। समय पर ECG और डॉक्टर की जांच से इस खतरे को पहचाना जा सकता है।

बचाव के आसान उपाय
नियमित रूप से ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल की जांच करें।
➤ रोजाना 30 मिनट एक्सरसाइज या वॉक करें।
➤ संतुलित और हेल्दी डाइट लें; तली-भुनी और मीठी चीजों से बचें।
➤ धूम्रपान और शराब का सेवन पूरी तरह बंद करें।
➤ पर्याप्त नींद लें और तनाव कम करने की कोशिश करें।</description><guid>silent-heart-attack:-what-is-a-silent-heart-attack</guid><pubDate>12-Oct-2025 8:48:07 am</pubDate></item><item><title>HEALTH NEWS: रोज़ाना नंगे पैर चलने से मिलते हैं चमत्कारी फायदे, आयुर्वेदिक एक्सपर्ट ने बताए ज़रूरी टिप्स</title><link>https://just36news.com/health-news:-walking-barefoot-daily-has-miraculous-benefits</link><description>नई दिल्ली। रोज़ाना कुछ देर टहलना सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि नंगे पैर चलना आयुर्वेद में एक बेहतरीन हेल्थ प्रैक्टिस मानी गई है? आयुर्वेदिक एक्सपर्ट और एमडी (आयुर्वेद) डॉ. मनीषा मिश्रा ने हाल ही में अपने इंस्टाग्राम वीडियो में नंगे पैर चलने के चमत्कारी लाभ बताए हैं।



नंगे पैर चलने के फायदे

    
    तीनों दोष का संतुलन: वायु, पित्त और कफ संतुलित रहते हैं।
    
    
    पैर और शरीर की मजबूती: पैरों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और पोस्चर सुधरता है।
    
    
    दर्द से राहत: एड़ी दर्द और पैरों की सूजन में प्राकृतिक राहत।
    
    
    बेहतर नींद: नसों पर हल्का दबाव पड़ने से मन शांत होता है और नींद गहरी आती है।
    
    
    इम्यूनिटी और एनर्जी: मिट्टी या घास पर चलने से शरीर की नेगेटिव एनर्जी डिस्चार्ज होती है।
    

कितना और कब चलें?

    
    रोज़ाना 10 से 15 मिनट घास, मिट्टी या रेत पर चलें।
    
    
    सुबह और शाम का समय सबसे अच्छा है।
    
    
    कंक्रीट या सीमेंटेड जगह पर नंगे पैर चलने से बचें।
    
    
    आयुर्वेद के अनुसार, बसंत ऋतु (फरवरीअप्रैल) में इसका असर और भी बेहतर होता है।
    

आयुर्वेद कहता है कि छोटी-सी आदत भी बड़ी हेल्थ प्रॉब्लम्स को दूर करने में मदद कर सकती है। ऐसे में रोज़ाना नंगे पैर चलने की आदत अपनाकर आप शरीर और मन, दोनों को रिफ्रेश कर सकते हैं।


</description><guid>health-news:-walking-barefoot-daily-has-miraculous-benefits</guid><pubDate>19-Sep-2025 7:09:54 am</pubDate></item><item><title>कहीं भी, कभी भी: वक्त के साथ मस्तिष्क तेज करने वाले तीन आसान वर्कआउट्स</title><link>https://just36news.com/anywhere,-anytime-three-easy-workouts-to-sharpen-your-brain-in-no-time</link><description>नई दिल्ली। health news: हाल ही में प्रकाशित एक समीक्षा के अनुसार, किसी भी उम्र के लोग जिन व्यायामों का नियमित अभ्यास करते हैंचाहे वे हल्के हों या मध्यमउनसे मस्तिष्क स्वास्थ्य में बेहद सकारात्मक बदलाव आए हैं ।
यही नहीं, ये तीन स्पेशल एक्टिविटीज़ विशेष रूप से फायदेमंद हैं:
1. योग और ताई ची
मान लीजिए ये mind‑body एक्सरसाइज़ हैं जो विशिष्ट तरीके से मस्तिष्क को फिट रखने में मदद करती हैं।
इन्हें 23 दिन प्रति सप्ताह 2060 मिनट तक करना चाहिए ।
2. Exergames (एक्टिव वीडियो गेम्स)
यह तकनीक-मिलीजुली व्यायाम विधि मस्तिष्क को एक्टिव रखती है, विशेषकर निर्णय लेने और स्मृति से जुड़े कार्यों में।
सप्ताह में 35 दिन  2030 मिनट करना सबसे अच्छा रहता है ।
3. मध्यम-ताकत वाले व्यायाम
ये व्यायामजैसे तेज़ चलना, वेट लिफ्टिंग, साइकिलिंगस्मृति और निर्णय शक्ति को सुधारते हैं।
सप्ताह में 150 मिनट कुल मिलाएं ।
अधिक विस्तृत जानकारी
इन तीनों अभ्यासों से कॉग्निशन, मेमोरी, * निर्णय क्षमता*, और तनाव नियंत्रण में सुधार होता है।
विशेषज्ञ कहते हैं कि ये विधाएँ मस्तिष्क के उन हिस्सों को सक्रिय करती हैं जो उम्र के साथ कमजोर हो जाते हैं ।</description><guid>anywhere,-anytime-three-easy-workouts-to-sharpen-your-brain-in-no-time</guid><pubDate>26-Jun-2025 8:23:56 am</pubDate></item><item><title>Health News: सुबह उठते ही पानी पीएं  मस्तिष्क, त्वचा, पाचन सब मिलेंगे बेहद लाभ!</title><link>https://just36news.com/health-news:-drink-water-as-soon-as-you-wake-up-in-the-morning-</link><description>नई दिल्ली। कई प्रमुख पोषण विशेषज्ञों और शोधों ने एक छोटी लेकिन बेहद असरदार आदत की चर्चा की है: सुबह उठते ही पानी पीना। चाहे नियमित दिन हो या वर्कटाइम, ये एक-से-तीन गिलास पानी आपके पूरे दिन को बदल सकते हैं ।
क्या-क्या फायदे मिलेंगे:
रिहाइड्रेट करता है  रात भर बिना पानी से शरीर सूख जाता है, ग्लास पानी शरीर को सामान्य करता है ।
मेटाबॉलिज्म बूस्ट  पानी पीने के बाद शरीर तापमान बदलता है, जिससे कैलोरी बर्निंग तेज होती है (लगभग 30% तक!) ।
डाइजेशन और कब्ज़ में सुधार  सुबह खली पेट पानी से पाचन सक्रिय होता है, कब्ज़ दूर होती है ।
मस्तिष्क को उत्तेजना  दिमाग का 75% हिस्सा पानी है; सुबह के पानी से ध्यान, मूड और याददाश्त में सुधार होता है ।
स्किन की चमक  त्वचा में नमी बनी रहती है, झुर्रियां कम होती हैं ।
वजन और भूख नियंत्रण  पानी से पेट भरा रहता है, जिससे बांका नहीं लगता और भूख नियंत्रित होती है ।
डिटॉक्स और किडनी रिहैब  सुबह पानी से लिवर और किडनी बेहतर फल-क्रिया करती है और डिटॉक्स में मदद मिलती है ।
कैसे शुरू करें?
1. सुबह 2030 मिनट ब्लम रखने के बाद 12 गिलास पानी पिएं।
2. चाहें तो पानी धीमा तापमान या हल्का गर्म पी सकते हैं।
3. बाद में संतुलित नाश्ता करें।
4. दिन में कम से कम 23 लीटर पानी नियमित रूप से लेना बेहतर है।</description><guid>health-news:-drink-water-as-soon-as-you-wake-up-in-the-morning-</guid><pubDate>21-Jun-2025 8:27:27 am</pubDate></item><item><title>रात के समय दिखने लगते हैं Kidney Damage के ये लक्षण, समय रहते सतर्क न हुए तो बढ़ सकता है खतरा</title><link>https://just36news.com/these-symptoms-of-kidney-damage-start-appearing-at-night,-if-you-are-not-careful-in-time-then-the-danger-may-increase</link><description>Kidney Damage:किडनीहमारे शरीर का एक बेहद जरूरी अंग है, जो शरीर में मौजूद विषैले तत्वों को बाहर निकालने और ब्लड को फिल्टर करने का काम करता है। लेकिन बदलती जीवनशैली, असंतुलित खानपान और लगातार बढ़ती अनहेल्दी आदतों के कारण अब लोगों में किडनी से जुड़ी बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है।


रात के समय दिखने लगते हैं Kidney Damage के ये लक्षण
विशेषज्ञों का कहना है कि किडनी खराब होने की स्थिति में शरीर कुछ संकेत देने लगता है, जिनमें से कुछ लक्षण खासकर रात के समय दिखाई देते हैं। इन संकेतों को समय पर पहचान कर इलाज शुरू कर दिया जाए तो किडनी को गंभीर नुकसान से बचाया जा सकता है।
रात में नजर आने वाले किडनी खराब होने के लक्षण:
पैरों में सूजन
यदि सोने से पहले या सुबह उठने पर पैरों में सूजन दिखाई दे तो यह संकेत हो सकता है कि किडनी ठीक से कार्य नहीं कर रही है। ऐसा तब होता है जब शरीर में पानी और सोडियम की मात्रा जमा होने लगती है।
बार-बार पेशाब आना
रात में बार-बार पेशाब के लिए उठना सामान्य नहीं है। यह भी किडनी डैमेज का एक शुरुआती संकेत हो सकता है। इस स्थिति में बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।
रात में अत्यधिक प्यास लगना
अगर रात में बार-बार प्यास लगती है और आप सामान्य से ज्यादा पानी पी रहे हैं, तो यह भी किडनी में गड़बड़ी का संकेत हो सकता है।




नक्सल आपरेशंस में शामिल छत्तीसगढ़ के सीनियर IPS अफसरों का सम्मान, गृहमंत्री अमित शाह बोले, बहादूर जवानों से छत्तीसगढ़ आकर मुलाकात करूंगा




सांस फूलना
कई बार रात के समय अचानक सांस फूलने लगे तो यह गंभीर संकेत हो सकता है। किडनी जब सही तरीके से टॉक्सिन्स को बाहर नहीं निकाल पाती है, तो इससे फेफड़ों पर असर पड़ सकता है और सांस फूलने जैसी दिक्कत होती है।
त्वचा पर खुजली और रैशेज
किडनी की खराबी के कारण शरीर में जमा टॉक्सिन्स त्वचा पर असर डालते हैं, जिससे खुजली, जलन और छोटे-छोटे दाने हो सकते हैं।
किडनी को कैसे रखें स्वस्थ?
ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल को नियंत्रण में रखें।
नियमित रूप से एक्सरसाइज करें और वजन को संतुलित रखें।
पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं, जिससे विषैले तत्व शरीर से बाहर निकल सकें।
नमक का सेवन कम करें और धूम्रपान से बचें।

</description><guid>these-symptoms-of-kidney-damage-start-appearing-at-night,-if-you-are-not-careful-in-time-then-the-danger-may-increase</guid><pubDate>08-Jun-2025 4:34:17 pm</pubDate></item><item><title>Health Tips : ब्लैक कॉफी के फायदे और नुकसान: जानें सेहत पर इसका असर और सही मात्रा</title><link>https://just36news.com/health-tips-benefits-and-disadvantages-of-black-coffee-know-its-effect-on-health-and-the-right-quantity</link><description>Health Tips : चाय-कॉफी हमारे देश में सुबह की शुरुआत का अहम हिस्सा बन चुके हैं। खासकरकॉफीके शौकीनों में ब्लैक कॉफी का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। दूध वाली कॉफी के मुकाबले ब्लैक कॉफी कोस्वास्थ्यके लिए बेहतर माना जाता है क्योंकि इसमें कैलोरी कम होती है और कई स्वास्थ्य लाभ भी होते हैं।


क कॉफी के फायदे और नुकसान
ब्लैक कॉफी आपके शरीर को एनर्जेटिक बनाए रखने के साथ दिमाग की कार्यक्षमता को भी बढ़ाती है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सिडेंट्स सेहत को कई तरह से फायदा पहुंचाते हैं और वजन घटाने में भी मददगार होती है।
लेकिन ध्यान रहे, किसी भी चीज की अधिकता नुकसानदेह हो सकती है। ब्लैक कॉफी का अत्यधिक सेवन नींद की कमी, बेचैनी, दिल की धड़कन तेज होना जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है।

</description><guid>health-tips-benefits-and-disadvantages-of-black-coffee-know-its-effect-on-health-and-the-right-quantity</guid><pubDate>31-May-2025 9:59:31 am</pubDate></item><item><title>Heatwave : लू लगने पर दिखते हैं ये 5 लक्षण, जानिए </title><link>https://just36news.com/heatwave:-these-5-symptoms-are-seen-when-heat-stroke-occurs,-know-more</link><description>Heatwave :लू लगने पर अक्सर शरीर में कुछ लक्षण नजर आते हैं। अगर ये 5 लक्षण लक्षण नजर आए तो समझ जाएं कि आप लू की चपेट में हैं। जिसे देखने के बाद आपको डॉक्टर से मिलना ही मिलना चाहिए।

लू लगने पर दिखते हैं ये 5 लक्षण




1.अत्यधिक गर्मी और पसीना न आना:

शरीर का तापमान बहुत बढ़ जाता है और पसीना नहीं निकलता है, जिससे त्वचा गर्म और सूखी हो जाती है.







2.बेहोशी या उलझन:

चक्कर आना, धुंधली दृष्टि, और भ्रम जैसी समस्याएं हो सकती हैं.



3.सिरदर्द और चक्कर आना:











लू लगने से सिरदर्द और चक्कर आना भी हो सकता है.







4.त्वचा गर्म और सूखना:

लू लगने पर त्वचा गर्म और सूखी हो जाती है, क्योंकि पसीना नहीं आता है.







5.तेज़ दिल की धड़कन और चिड़चिड़ापन:
दिल की धड़कन तेज हो सकती है और व्यक्ति चिड़चिड़ा हो सकता है.




कैसे करें बचाव

    दोपहर में बाहर न निकलें।
    सिर ढककर रखें। खूब पानी पिएं।
    हल्के और ढीले कपड़े पहनें।
    तला भुना ना खाएं

</description><guid>heatwave:-these-5-symptoms-are-seen-when-heat-stroke-occurs,-know-more</guid><pubDate>08-May-2025 9:25:36 am</pubDate></item><item><title>DRINKS : गर्मियों में राहत की तलाश? ये पेय देंगे शरीर को ठंडक और ताजगी</title><link>https://just36news.com/drinks:-looking-for-relief-in-summer-these-drinks-will-give-coolness-and-freshness-to-the-body</link><description>SUMMER DRINKS : तापमान में लगातार बढ़ोतरी के साथ ही भीषण गर्मी लोगों को बेहाल कर रही है। ऐसे में शरीर को भीतर से ठंडक देने और डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए ठंडे और सेहतमंद पेय पदार्थों का सेवन बेहद जरूरी हो गया है। आयुर्वेद और पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ प्राकृतिक पेय न सिर्फ शरीर को ठंडा रखते हैं बल्कि ऊर्जा भी प्रदान करते हैं।
1. नारियल पानी:
गर्मी में सबसे बेहतरीन प्राकृतिक पेय है नारियल पानी। यह शरीर को हाइड्रेट करता है और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी को दूर करता है। इसका सेवन थकान को भी कम करता है।
2. बेल का शरबत:
बेल फल को आयुर्वेद में बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। इसका शरबत पाचन तंत्र को मजबूत करता है और शरीर को ठंडक देता है। लू लगने की आशंका भी इससे कम होती है।
3. आम पना:
कच्चे आम से बना आम पना गर्मी में शरीर को ठंडा रखने वाला पारंपरिक पेय है। यह लू से बचाता है और डाइजेशन भी सुधारता है।
4. नींबू पानी (शिकंजी):
नींबू पानी में अगर थोड़ा काला नमक और पुदीना डाल दिया जाए, तो यह और भी अधिक ठंडक देता है। यह शरीर को रिफ्रेश करता है और नमक-पानी की कमी को दूर करता है।
5. छाछ (मट्ठा):
दही से बना छाछ न केवल ठंडक देता है बल्कि पेट के लिए भी बेहद फायदेमंद है। यह पाचन को दुरुस्त रखता है और शरीर को हाइड्रेटेड बनाए रखता है।
6. तरबूज और खीरे का रस:
ये दोनों फल पानी से भरपूर होते हैं। इनका रस पीने से शरीर को ठंडक मिलती है और गर्मी से राहत मिलती है।
विशेषज्ञों की सलाह:
गर्मी के मौसम में कैफीन और अत्यधिक शक्कर वाले कोल्ड ड्रिंक्स से परहेज करना चाहिए, क्योंकि ये शरीर को डिहाइड्रेट कर सकते हैं। इसके बजाय प्राकृतिक पेय को प्राथमिकता दें।
निष्कर्ष:
गर्मी से राहत पाने के लिए रोजाना कम से कम 2-3 बार ठंडे प्राकृतिक पेय का सेवन करें। इससे न सिर्फ लू और डिहाइड्रेशन से बचाव होगा, बल्कि शरीर को ठंडक और ऊर्जा भी मिलेगी।</description><guid>drinks:-looking-for-relief-in-summer-these-drinks-will-give-coolness-and-freshness-to-the-body</guid><pubDate>16-Apr-2025 10:45:37 am</pubDate></item><item><title>Health NEWS: गर्मियों के मौसम में पपीता खाने के फायदे जो आपको हैरान कर देंगे</title><link>https://just36news.com/health-news-benefits-of-eating-papaya-in-summer-season-that-will-surprise-you</link><description>HealthNEWS:एक फल है। पपीता का वैज्ञानिक नाम कॅरिका पपया ( carica papaya ) है। इसकी फेमिली केरीकेसी ( Caricaceae ) है। इसका औषधीय उपयोग होता है। पपीता स्वादिष्ट तो होता ही है इसके अलावा स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है। सहज पाचन योग्य है। पपीता भूख और शक्ति बढ़ाता है। यह प्लीहा, यकृत को रोगमुक्त रखता और पीलिया जैसे रोगाें से मुक्ती देता है। कच्ची अवस्था में यह हरे रंग का होता है और पकने पर पीले रंग का हो जाता है। इसके कच्चे और पके फल दोनों ही उपयोग में आते हैं। कच्चे फलों की सब्जी बनती है। इन कारणों से घर के पास लगाने के लिये यह बहुत उत्तम फल है।
इसके कच्चे फलों से दूध भी निकाला जाता है, जिससे पपेन तैयार किया जाता है। पपेन से पाचन संबंधी औषधियाँ बनाई जातीं हैं। अत: इसके पक्के फल का सेवन उदरविकार में लाभदायक होता है। पपीता सभी उष्ण समशीतोष्ण जलवायु वाले प्रदेशों में होता है। उच्च रक्तदाब पर नियंत्रण रखने के लिए पपीते के पत्ते को सब्जी में प्रयोग करते है। पपीते में ए, बी, डी विटामिन और केल्शियम, लोह, प्रोटीन आदि तत्त्व विपुल मात्रा में होते है। पपीते से वीर्य बढ़ता है। त्वचा रोग दूर होते हैैं। ज़ख्म जल्दी ठीक होते है। मूत्रमार्ग की बिमारी दूर होती है। पाचन शक्ति बढ़ती है। मूत्राशय की बिमारी दूर होती है। खॉसी के साथ रक्त आ रहा हो तो वह रुकता है। मोटापा दूर होता है। कच्चे पपीता की सब्जी खाने से स्मरणशक्ती बढती है। पपीता और ककड़ी हमारे स्वास्थ्य केंद्र लिए उपयुक्त है।
इम्युनिटी बढ़ाता है
पपीता विटामिन-सी का एक अच्छा सोर्स है, जो शरीर की बीमारियों से लड़ने की क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है। विटामिन-सी व्हाइट ब्लड सेल्स के निर्माण को बढ़ावा देता है, जो इन्फेक्शन और बीमारियों से लड़ने में मदद करते हैं। रोजाना पपीता खाने से आपकी इम्युनिटी मजबूत होती है और आप बीमारियों से दूर रहते हैं।
त्वचा के लिए फायदेमंद
पपीता में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन-सी त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाने में मदद करते हैं। यह त्वचा की झुर्रियों को कम करने और उम्र बढ़ने के लक्षणों को धीमा करने में मददगार होता है। पपीता का नियमित रूप से खाने से त्वचा की रंगत निखरती है और मुंहासे, दाग-धब्बे जैसी समस्याएं दूर होती हैं।
रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है
पपीते में विटामिन सी और अन्य एंटीऑक्सीडेंट की उच्च मात्रा प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाती है। एक मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली शरीर को संक्रमण से लड़ने और बीमारियों से जल्दी ठीक होने में मदद करती है।
आंखों के लिए लाभदायक
पपीता में विटामिन-ए और बीटा-कैरोटीन भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो आंखों की सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है। यह आंखों की रोशनी को बढ़ाने और मोतियाबिंद जैसी समस्याओं को रोकने में मदद करता है। रोजाना पपीता खाने से आंखों की सेहत अच्छी रहती है।
हृदय स्वास्थ्य
पपीते में मौजूद फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट और पोटैशियम कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करके और रक्तचाप को नियंत्रित करके हृदय स्वास्थ्य में योगदान करते हैं। बेहतर हृदय स्वास्थ्य हृदयाघात और स्ट्रोक जैसी हृदय संबंधी बीमारियों के जोखिम को कम करता है।
हड्डियों को मजबूत बनाता है
पपीता में विटामिन-के और कैल्शियम की मात्रा होती है, जो हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। विटामिन-के कैल्शियम के अब्जॉर्प्शन को बढ़ाता है, जिससे हड्डियों की डेंसिची बढ़ती है और ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा कम होता है।
हड्डियों को मजबूत बनाता है
पपीता में विटामिन-के और कैल्शियम की मात्रा होती है, जो हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। विटामिन-के कैल्शियम के अब्जॉर्प्शन को बढ़ाता है, जिससे हड्डियों की डेंसिची बढ़ती है और ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा कम होता है।</description><guid>health-news-benefits-of-eating-papaya-in-summer-season-that-will-surprise-you</guid><pubDate>16-Apr-2025 5:11:52 pm</pubDate></item><item><title>Gond Katira Benefits : स्किन से हड्डियों तक फायदेमंद: जानें गोंद कतीरा के बेहतरीन लाभ</title><link>https://just36news.com/gond-katira-benefits:-beneficial-from-skin-to-bones-know-the-best-benefits-of-gond-katira</link><description>Gond Katira Benefits : गर्मी के मौसम में शरीर को ठंडा और तरोताजा बनाए रखना बेहद जरूरी होता है। ऐसे में गोंद कतीरा एक बेहतरीन और प्राकृतिक उपाय साबित हो सकता है। इसकी तासीर ठंडी होती है, जो शरीर को अंदरूनी ठंडक प्रदान करती है और गर्मी से होने वाली समस्याओं से राहत देती है। यह न सिर्फ शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाता है, बल्कि स्किन ग्लो बढ़ाने और हड्डियों को मजबूत बनाने में भी सहायक होता है।
गोंद कतीरा के अद्भुत फायदे
1. शरीर को ठंडक देता है
गर्मी में गोंद कतीरा का सेवन शरीर की भीतरी गर्मी को कम करता है। यह लू लगने के खतरे को कम करता है और शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाने में मदद करता है।
2. पाचन तंत्र को सुधारता है
यह पाचन को दुरुस्त रखने में मदद करता है और आंतों को ठंडक प्रदान करता है। कब्ज, एसिडिटी और पेट की जलन जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में भी यह कारगर साबित होता है।
3. स्किन की चमक बढ़ाता है
गोंद कतीरा शरीर में नमी बनाए रखता है, जिससे त्वचा ग्लोइंग और हेल्दी बनी रहती है। यह ड्राई स्किन और झुर्रियों को कम करने में भी सहायता करता है।
4. हड्डियों को मजबूत बनाता है
यह कैल्शियम और अन्य पोषक तत्वों से भरपूर होता है, जो हड्डियों की मजबूती में सहायक है। यह ऑस्टियोपोरोसिस जैसी हड्डियों की बीमारियों को रोकने में भी मदद करता है।
5. उम्र बढ़ाने में मददगार
आयुर्वेद के अनुसार, गोंद कतीरा शरीर को अंदर से शुद्ध करता है, जिससे ताजगी और ऊर्जा बनी रहती है। इसके एंटी-एजिंग गुण झुर्रियों को कम करते हैं और त्वचा को जवां बनाए रखते हैं।
6. इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है
गोंद कतीरा शरीर को जरूरी पोषक तत्व प्रदान करता है और इम्यूनिटी को बूस्ट करने में मदद करता है। यह वायरल इंफेक्शन और अन्य मौसमी बीमारियों से बचाव में भी कारगर साबित हो सकता है।
कैसे करें सेवन?
गोंद कतीरा को रातभर पानी में भिगोकर सुबह दूध या शरबत में मिलाकर पी सकते हैं। नियमित रूप से इसका सेवन करने से गर्मियों में शरीर को ठंडक और सेहत को फायदा मिलता है।</description><guid>gond-katira-benefits:-beneficial-from-skin-to-bones-know-the-best-benefits-of-gond-katira</guid><pubDate>02-Apr-2025 6:05:35 pm</pubDate></item><item><title> Face Pack : ग्लोइंग स्किन पाने के लिए चेहरें पर लगाएं पपीता, दही और शहद का फेस मास्क</title><link>https://just36news.com/face-pack:-apply-papaya-curd-and-honey-face-mask-to-get-glowing-skin</link><description>Papaya and Honey Face Pack: हेल्दी और ग्लोइंग पाने के लिए आप पपीते और दही से बना फेस मास्क भी लगा सकते हैं। यह फेस मास्क त्वचा में प्राकृतिक निखार बढ़ाने में मदद करता है। आइए जानते है फेस मास्क कैसे बनाना है।
सामग्री

    पपीते का पल्प  2 चम्मच
    दही- 2 चम्मच
    शहद- आधा चम्मच

बनाने की विधि
पपीते के पल्प के साथ गाढ़ा दही मिलाएं। अब इसमें आधा चम्मच शहद मिलाकर चेहरे और गर्दन पर लगाएं और सूखने दें। इस फेस मास्क को आप सप्ताह में 2 से 3 बार लगा सकते हैं।
Papaya and Honey Face Pack पपीते और दही फेस मास्क के फायदे-
पपीते में मौजूद एंजाइम्स, विटामिन्स और एंटीऑक्सीडेंटओवरऑल स्किन हेल्थ के लिएजरूरी होती हैं। ये स्किन को एक्सफोलिएट और मॉइस्चराइज करने में मदद करते हैं। इससे स्किन एजिंग का खतरा कम होता है और स्किन में ग्लो आता है। दही त्वचा को हाइड्रेट और मॉइस्चराइज करने में मदद करता है। इसमें मौजूद लैक्टिक एसिड स्किन को एक्सफोलिएट करता है और स्किन इंफ्लेमेशन कम करता है। इसे इस्तेमाल करने से स्किन इलास्टिसिटी इंप्रूव होती है और स्किन में रिंकल्स और फाइन लाइंस जल्दी नहीं आते हैं। शहद में एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुण मौजूद होते हैं, जो ओवरऑल स्किन हेल्थ के लिए जरूरी हैं। त्वचा पर शहद लगाने से स्किन हाइड्रेट रहती है, स्किन हील होती है और एक्ने-पिंपल्स का असर भी कम होता है।</description><guid>face-pack:-apply-papaya-curd-and-honey-face-mask-to-get-glowing-skin</guid><pubDate>02-Apr-2025 6:02:22 pm</pubDate></item><item><title>गन्ने का रस या नारियल पानी? जानिए गर्मियों में सेहत के लिए क्या है ज्यादा फायदेमंद</title><link>https://just36news.com/sugarcane-juice-or-coconut-water-know-what-is-more-beneficial-for-health-in-summer</link><description>गर्मियों में सभी के लिए हाइड्रेशन बहुत महत्वपूर्ण होता है, और इसके लिए गन्ने का रस और नारियल पानी दोनों ही शानदार विकल्प हैं। हालांकि, दोनों के अपने-अपने फायदे हैं, तो चलिए, हम दोनों की तुलना करते हैं और जानते हैं कि कौन-सा आपके लिए ज्यादा फायदेमंद हो सकता है।
गन्ने का रस
फायदे

    प्राकृतिक ऊर्जा का स्रोत गन्ने का रस शरीर को ताजगी और ऊर्जा प्रदान करता है, क्योंकि इसमें प्राकृतिक शर्करा होती है जो तुरंत ऊर्जा देती है।
    पाचन में मदद यह पाचन में सुधार करता है और कब्ज की समस्या को दूर करता है।
    त्वचा के लिए अच्छा इसमें एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन C होते हैं, जो त्वचा को चमकदार और स्वस्थ बनाए रखते हैं।
    हीमोग्लोबिन बढ़ाने में सहायक गन्ने का रस आयरन से भरपूर होता है, जो खून की कमी को दूर करने में मदद करता है।

नुकसान

    गन्ने का रस मीठा होता है और इसमें शर्करा की मात्रा अधिक होती है, इसलिए इसे सीमित मात्रा में ही पीना चाहिए, खासकर अगर आप वजन घटाने या शुगर कंट्रोल पर ध्यान दे रहे हैं।

नारियल पानी
फायदे

    इलेक्ट्रोलाइट्स का अच्छा स्रोत इसमें प्राकृतिक इलेक्ट्रोलाइट्स (पोटैशियम, सोडियम, मैग्नीशियम) होते हैं, जो शरीर को हाइड्रेटेड रखते हैं और तरल पदार्थों की कमी को जल्दी पूरा करते हैं।
    हल्का और पाचन में मददगार यह हल्का और आसानी से पचने वाला होता है, जिससे पेट पर बोझ नहीं पड़ता।
    वजन कम करने में मदद नारियल पानी में कैलोरी कम होती है, जो वजन कम करने वालों के लिए एक बेहतरीन विकल्प है।
    त्वचा को पोषण यह त्वचा को हाइड्रेट करता है और मुंहासों को कम करने में मदद करता है।

नोट:कुछ लोग नारियल पानी का स्वाद पसंद नहीं करते हैं, और इसकी उपलब्धता भी कुछ क्षेत्रों में सीमित हो सकती है।
कौन सा पेय है ज्यादा फायदेमंद ?
हाइड्रेशन और इलेक्ट्रोलाइट्स अगर आप गर्मी में हाइड्रेटेड रहना चाहते हैं, तो नारियल पानी सबसे अच्छा विकल्प है, क्योंकि यह शरीर में तरल पदार्थों और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी को जल्दी पूरा करता है।
ऊर्जा और पाचन यदि आप ज्यादा ऊर्जा चाहते हैं और पाचन संबंधी समस्याओं से बचना चाहते हैं, तो गन्ने का रस बेहतरीन विकल्प है।
वजन घटाना अगर आप वजन घटाना चाहते हैं या कैलोरी कम करना चाहते हैं, तो नारियल पानी बेहतर है क्योंकि इसमें कैलोरी कम होती है और यह हल्का होता है।
गौरतलब है कि दोनों ड्रिंक्स गर्मी में हाइड्रेशन के लिए अच्छे हैं, लेकिन नारियल पानी हाइड्रेशन और इलेक्ट्रोलाइट्स की बहाली में ज्यादा प्रभावी होता है। वहीं, गन्ने का रस ऊर्जा देने में ज्यादा मदद करता है। आप अपनी आवश्यकताओं के हिसाब से इनका चुनाव कर सकते हैं।</description><guid>sugarcane-juice-or-coconut-water-know-what-is-more-beneficial-for-health-in-summer</guid><pubDate>20-Mar-2025 10:03:08 am</pubDate></item><item><title>kidney को रखना चाहते हैं स्वस्थ? इन 5 गलतियों से बचें वरना हो सकता है नुकसान</title><link>https://just36news.com/do-you-want-to-keep-your-kidneys-healthy-avoid-these-5-mistakes-or-else-it-can-cause-harm</link><description>नई दिल्ली।शरीर का ख्यालरखना बेहद जरूरी है, क्योंकि अगर हम अपनी सेहत पर ध्यान नहीं देंगे, तो कई बीमारियां हमें घेर सकती हैं।kidneyहमारे शरीर का एक अहम अंग है, जो रक्त को साफ करने और विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने का काम करती है। लेकिन गलत आदतों की वजह से किडनी पर बुरा असर पड़ सकता है और गंभीर बीमारियां जन्म ले सकती हैं।
kidney को रखना चाहते हैं स्वस्थ?
अगर आप अपनी किडनी को स्वस्थ रखना चाहते हैं, तो कुछ आदतों से बचना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं 5 ऐसी आम गलतियों के बारे में, जो किडनी को धीरे-धीरे खराब कर सकती हैं।
1. ज्यादा नमक खाना
अगर आप बहुत ज्यादा नमक खाते हैं, तो संभल जाइए! अधिक नमक का सेवन ब्लड प्रेशर बढ़ाता है और किडनी पर दबाव डालता है, जिससे किडनी को नुकसान पहुंच सकता है।
कैसे बचें?
दिनभर में 5 ग्राम (1 चम्मच) से ज्यादा नमक न खाएं।
प्रोसेस्ड फूड और पैकेज्ड स्नैक्स से दूरी बनाएं।
2. कम पानी पीना
कम पानी पीना किडनी की सेहत के लिए सबसे खतरनाक आदतों में से एक है। पानी शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है, लेकिन अगर आप कम पानी पीते हैं, तो किडनी पर दबाव बढ़ता है और वह सही से काम नहीं कर पाती।
कैसे बचें?
रोजाना 8-10 गिलास पानी जरूर पिएं।
ज्यादा नमक, मसालेदार खाना खाने के बाद पानी की मात्रा बढ़ाएं।
3. अधिक कैफीन का सेवन
अगर आप बहुत ज्यादा चाय, कॉफी या एनर्जी ड्रिंक्स पीते हैं, तो यह किडनी के लिए खतरनाक हो सकता है। कैफीन ब्लड प्रेशर बढ़ाता है, जिससे किडनी पर बुरा असर पड़ता है।
कैसे बचें?
दिन में 2 कप से ज्यादा चाय या कॉफी न पिएं।
कैफीनयुक्त ड्रिंक्स की बजाय हर्बल टी या नींबू पानी का सेवन करें।
4. सिगरेट पीना
सिगरेट पीने से केवल फेफड़े ही नहीं, बल्कि किडनी भी प्रभावित होती है। सिगरेट में मौजूद हानिकारक तत्व किडनी की ब्लड वेसल्स को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे किडनी धीरे-धीरे कमजोर हो जाती है।
कैसे बचें?
धूम्रपान पूरी तरह बंद करें।
हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं और सिगरेट की लत छोड़ने के लिए एक्सपर्ट से सलाह लें।
5. अधिक शराब का सेवन
शराब किडनी के लिए धीमा जहर साबित हो सकती है। यह किडनी की फिल्टर करने की क्षमता को कमजोर कर देती है, जिससे शरीर में विषैले तत्व जमा होने लगते हैं और धीरे-धीरे किडनी फेलियर का खतरा बढ़ जाता है।
कैसे बचें?
शराब का सेवन पूरी तरह बंद करें या सीमित मात्रा में लें।
हेल्दी ड्रिंक्स जैसे नारियल पानी और जूस को अपनी डाइट में शामिल करें।</description><guid>do-you-want-to-keep-your-kidneys-healthy-avoid-these-5-mistakes-or-else-it-can-cause-harm</guid><pubDate>16-Mar-2025 4:43:05 pm</pubDate></item><item><title>Health Tips: अमृत से कम नहीं है कच्ची हल्दी, दूध में उबालकर रोजाना पीने से जोड़ों का दर्द होगा जड़ से खत्म!</title><link>https://just36news.com/health-tips:-raw-turmeric-is-no-less-than-nectar,-boiling-it-in-milk-and-</link><description>Health Tips:किचन मेंहल्दीएक ऐसी चीज है जो काफी गुणकारी होती है। चाहे आप हल्दी को आप मसाले के तौर पर इस्तेमाल करें, पान में घोलकर पीएं या शहद में डालकर खाएं। हल्दी के कई फायदे हैं। यह आपकी सेहत के लिए काफी रामबाण है। कच्ची हल्दी का उपयोग आयुर्वेद में कई स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज के लिए किया जाता है। रात को दूध में उबालकर कच्ची हल्दी पीने से आपके शरीर को कई फायदे मिल सकते हैं।
जोड़ों के दर्द में राहत
कच्ची हल्दी में कुरकुमिन नामक यौगिक होता है जो जोड़ों के दर्द में राहत दिलाने में मदद करता है। अगर आप जोड़ों के दर्द से परेशान हैं और कई जगह दिखाने के बावजूद आपको आराम नहीं मिल पा रहा है तो आप कच्ची हल्दी का सेवन करना शुरू कर दें। कच्ची हल्दी आपको जोड़ों के दर्द से काफी निजात दिलाती है। रोजाना रात को आप कच्ची हल्दी को दूध में डालकर उबाल लें। फिर इसको थोड़ा ठंडा होने पर पीएं।
पाचन तंत्र को बनाती है मजबूत
कच्ची हल्दी में फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। अगर आप रेगुलर मोड पर कच्ची हल्दी का सेवन करते हैं तो यह आपके पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में काफी गुणकारी है।वहीं कच्ची हल्दी में विटामिन सी और ई होते हैं जो इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने में मदद करते हैं।
स्किन एलर्जी से बचाती है कच्ची हल्दी
कच्ची हल्दी में एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो त्वचा की समस्याओं में राहत दिलाने में मदद करते हैं। दूध के अलावा भी आप कच्ची हल्दी को पानी में उबाल लें। फिर इस पानी को आप गर्म पानी की बोतल में मिला लें। पूरे दिन अब आप इस पानी को पीते रहें। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट आपकी स्किन के लिए काफी लाभकारी होते हैं। इसके साथ ही यह पेट की समस्याओं को भी दूर करती है।
वहीं कच्ची हल्दी में कुरकुमिन नामक यौगिक होता है जो कैंसर के खतरे को कम करने में मदद करता है। कच्ची हल्दी का उपयोग करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श लेना आवश्यक है, खासकर यदि आप किसी दवा का सेवन कर रहे हैं या किसी स्वास्थ्य समस्या से पीड़ित हैं।a</description><guid>health-tips:-raw-turmeric-is-no-less-than-nectar,-boiling-it-in-milk-and-</guid><pubDate>06-Feb-2025 4:49:01 pm</pubDate></item><item><title>Benefits Of Vajrasana : बेहतर स्वास्थ्य के लिए दिन में बस 5 मिनट कर लीजिए यह आसन, तनाव से लेकर मांसपेशियों का दर्द होगा दूर</title><link>https://just36news.com/benefits-of-vajrasana:-for-better-health,-do-this-asana-for-just-5-minutes-</link><description>Benefits Of Vajrasana :आज के भागदौड़ भरे दिनचर्या में बेहतर स्वास्थ्य के लिए योग सबसे इफेक्टिव एक्सरसाइज में से एक है.योग में भी कई प्रकार की मुद्राएं होती हैं, आज हम जिस योगासन के बारे में आपको बताने वाले हैं, अगर इस आसन को आप केवल 5 मिनट भी कर लेंगे, तो इससे आपके शरीर को कई फायदे मिलेंगे. इतना ही नहीं मानसिक शांति से लेकर आपका कंसंट्रेशन बढ़ेगा और मांसपेशियों को भी मजबूती मिलेगी. हम बात कर रहे हैं वज्रासन की, वज्रासन में केवल 5 मिनट बैठने से ही आपके शरीर को कई बेहतरीन फायदे मिलेंगे.






कैसे किया जाता है वज्रासन

वज्रासन एक आसान और इफेक्टिव योग मुद्रा है, इसमें घुटनों के बल बैठा जाता है. इस आसन को करने के लिए सबसे पहले एक समतल जगह पर योगा मैट बिछाएं. अपने घुटनों को मोड़ें, दोनों पैरों को पीछे की ओर ले जाएं और पंजों को एक साथ जोड़ लें. अपनी एड़ियों पर बैठ जाएं और दोनों हथेलियां को घुटने पर रखें, रीढ़ की हड्डी और गर्दन को सीधा रखें, आंखें बंद कर लें, धीरे-धीरे सांस लें और छोड़ें. इस मुद्रा में 5 से 7 मिनट तक बैठें, धीरे-धीरे आप इस टाइम को बढ़ा भी सकते हैं.
वज्रासन करने के 9 फायदे

पाचन तंत्र को बेहतर बनाएं
जी हां, वज्रासन करने से पेट के अंगों पर दबाव पड़ता है, जिससे आपकी पाचन क्रिया बेहतर होती है. यह योगासन कब्ज, अपच, गैस जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में मदद कर सकता है.
डायबिटीज को कंट्रोल करें

रोजाना अगर आप 5 से 10 मिनट तक वज्रासन करते हैं, तो इससे आपके शरीर का ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल रहता है. खासकर टाइप टू डायबिटीज के मरीजों के लिए यह बहुत ही इफेक्टिव योगासन है.
वेट लॉस में मदद करें

वज्रासन करने से पेट की चर्बी को कम करने में भी मदद मिलती है, इससे पाचन तंत्र तो ठीक होता ही है, साथ ही आप तेजी से कैलोरी भी बर्न कर सकते हैं. खाना खाने के बाद आपको 5 मिनट वज्रासन में जरूर बैठना चाहिए.
हार्ट हेल्थ को बेहतर बनाएं

रोजाना 5 से 10 मिनट तक वज्रासन में बैठने में शरीर का ब्लड प्रेशर कंट्रोल रहता है, जिससे हार्ट हेल्थ बेहतर होती है और दिल की मांसपेशियों को मजबूत रखने में भी मदद मिलती है.
तनाव को कम करें

जी हां, वज्रासन आपके ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाता है, जिससे दिमाग को शांत करने में भी मदद मिलती है. ये स्ट्रेस-एंजाइटी को कम करके आपके मन को शांत कर सकता है.
घुटनों और पैरों के दर्द में फायदेमंद

अगर आप रोजाना 5 से 10 मिनट तक वज्रासन करते हैं, तो इससे आपके घुटनों और पैरों के दर्द में फायदा मिलता है. आर्थराइटिस की समस्या वाले लोगों को भी इससे बेहतरीन फायदे होते हैं.
पीठ के निचले हिस्से के दर्द को कम करें

जब आप कुछ समय के लिए वज्रासन में बैठते हैं, तो इससे आपका बॉडी पोस्चर ठीक होता है और यह आपके पीठ के निचले हिस्से में दर्द को कम करने में मदद कर सकता है.
UTIमें हेल्प करें वज्रासन
यूरिनरी सिस्टम को हेल्दी बनाए रखने में वज्रासन मदद करता है, इससे यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन या यूरिन से संबंधित समस्या नहीं होती है.
मांसपेशियों को मजबूत बनाएं

जब आप घुटने के बल बैठते हैं, तो इससे आपके पैरों के साथ ही पीठ की मांसपेशियां भी मजबूत होती है. साथ ही हाथ, गर्दन और दिमाग की मांसपेशियों को भी मजबूती मिलती है.





</description><guid>benefits-of-vajrasana:-for-better-health,-do-this-asana-for-just-5-minutes-</guid><pubDate>06-Feb-2025 4:49:25 pm</pubDate></item><item><title>Health Tips : बेहतर सेहत के लिए किसी वरदान से कम नहीं है यह हरा पत्ता, फायदे जानकर आप भी शुरू कर देंगे सेवन</title><link>https://just36news.com/health-tips-this-green-leaf-is-no-less-than-a-boon-for-better-health</link><description>Sehajan patti ke fayde :आम तौर पर घर के आसपास आपको सहजन के पेड़ आसानी से मिल जायेंगे. सहजन के पत्ते स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है।सहजन का पौधा आपकी सेहत को कई तरीके से फायदे पहुंचा सकता है. इसका फूल, फल और पत्ते सभी कुछ बहुत उपयोगी होता है. इसमें विटामिन ए, विटामिन बी, विटामिन सी, आयरन, पोटैशियम, मैग्नीशियम, कैल्शियम और ज़िंक जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो आपकी ओवरऑल हेल्थ का ख्याल रखते हैं. ऐसे में आइए जानते हैं सहजन के पत्ते आपकी हेल्थ को किन-किन तरीके से फायदा पहुंचाते हैं. आइए जानते हैं विस्तार से






सहजन की पत्तियों के फायदे

त्वचा के लिए है लाभकारी
सहजन की पत्तियों में संतरे की तुलना सात गुना ज्यादा विटामिन सी होता है. साथ ही इसमें कैल्शियम की भी मात्रा भरपूर होती है.इसके अलावा यह आयरन का भी अच्छा सोर्स होता है. इसका सेवन आपकी त्वचा, मांसपेशियों और हड्डियों के लिए रामबाण हो सकता है.
ब्लड शुगर करे कंट्रोल
ब्लड शुगर को भी कंट्रोल करने में सहजन की पत्तियां बहुत काम आती हैं. इसमें एंटी इंफ्लेमेटरी और एंटी बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, जो पेट के लिए अच्छा होता है.
खून की कमी करे दूर
खून की भी कमी को दूर करने में सहजन की पत्तियों बहुत मददगार होता है. एनीमिया की बीमारी को दूर करने में भी सहजन की पत्तियों बहुत फायदेमंद है. इस पत्ती में प्रोटीन, एमिनो एसिड, फाइबर, विटामिन बी, सी और ई पाया जाता है.
लिवर रखे हेल्दी
लिवर को भी हेल्दी बनाए रखने में सहजन की पत्ती बहुत लाभकारी है. मोरिंगा में पॉलीफेनॉल नाम का एक कंपाउंड होता है जो लिवर को प्रोटेक्ट करने और डैमेज रिकवर करने में मदद करता है.
सूखी आंख की परेशानी करे दूर
सहजन में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो सूखी आंख या ड्राई आई और मोतियाबिंद जैसी बीमारी को ठीक करने में मदद करते हैं. इनमें आंखों की सफाई और नमी प्रदान करने वाले गुण होते हैं, जो त्वचा को हानिकारक तत्वों से बचाने का काम करते हैं.





</description><guid>health-tips-this-green-leaf-is-no-less-than-a-boon-for-better-health</guid><pubDate>06-Feb-2025 4:49:34 pm</pubDate></item><item><title>Oral Health Care Tips:रेड वाइन, कॉफी या कोल्ड ड्रिंक.. क्या है दांतों के लिए ज्यादा नुकसानदायक?</title><link>https://just36news.com/oral-health-care-tips:-red-wine,-coffee-or-cold-drink</link><description>कोल्ड ड्रिंक और रेड वाइन ये कुछ ऐसी ड्रिंक्स हैं, जिन्हें लोग सबसे ज्यादा पीना पसंद करते हैं। सुबह की चाय-कॉफी से लेकर बाहर दोस्तों से मिलते समय कोल्ड ड्रिंक या वाइन पीना लोगों की डाइट का अहम हिस्सा बन चुका है।
सबसे ज्यादा स्टेनिंग रेड वाइन से होती है। रेड वाइन दांत के इनेमल, यानी ऊपरी कवरिंग से लेकर जड़ों तक स्टेन लगाता है। ऐसा इसमें मौजूद क्रोमोजेहै। कॉफी में क्रोमोजेन्स होते हैं और काली कोल्ड ड्रिंक काफी पिग्मेंटेड होती है। इसके कारण दांतों पर स्टेनिंग होने लगती है। हालांकि, कॉफी के कारण दांत के सिर्फ ऊपरी सतह पर ही डिसकलरेशन होता है, लेकिन यह भी धीरे-धीरे लंबे समय तक रह सकता है।इतना ही नहीं, इन ड्रिंक्स के कारण सिर्फ स्टेनिंग ही नहीं, दांतों को और भी कई नुकसान हो सकते हैं। इन ड्रिंक्स की एसिडिटी और शुगर के कारण दांतों से जुड़ी कई परेशानियां हो सकती हैं।
बचाव?
इसलिए इनसे बचने के लिए स्ट्रॉ का इस्तेमाल किया जाए। इससे ये ड्रिंक्स आपके दांतों के कॉन्टेक्ट में कम आएंगे। साथ ही, इन ड्रिंक्स को पीने के बाद पानी से कुल्ला करना जरूरी है, ताकि इनके पार्टिकल्स दांतों और मसूड़े पर न लगे रहें।
डॉ. यादव बताती हैं कि इन ड्रिंक्स में मौजूद शुगर और एसिड दांतों को सड़ा देते हैं। इसके कारण इनेमल इरोजन यानी दांत के ऊपरी परत को नुकसान और कैविटी हो सकती है।इसमें कैविटी की समस्या सबसे ज्यादा कोल्ड ड्रिंक से हो सकती है। वहीं, कॉफी के कारण मुंह सूखने और सलाइवा कम बनने लगता है। इस वजह से मुंह का पीएच लेवल कम हो सकता है, जो दांतों के लिए नुकसानदेह है।</description><guid>oral-health-care-tips:-red-wine,-coffee-or-cold-drink</guid><pubDate>16-Jan-2025 7:47:31 am</pubDate></item><item><title>Health Tips :भीगी किशमिश का सेवन इन 5 लोगों के लिए फायदेमंद है, सुबह खाली पेट खाएं फिर देखें कमाल</title><link>https://just36news.com/health-tips:-consuming-soaked-raisins-is-beneficial-for-these-5-people,-eat-them-on-an-empty-</link><description>Soaked Raisins Benefits in Hindi:ड्राई फ्रूट्स का सेवन सेहत के लिए हमेशा फायदेमंद माना जाता है. कई लोग ड्राई फ्रूट्स को सूखा खाना पसंद करते हैं. तो वहीं कई लोग इनको भिगोकर खाना पसंद करते हैं. किशमिश, बादाम, अखरोट और अंजीर जैसे ड्राई फ्रूट्स को भिगोकर खाना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है. इसलिए लोग कुछ ड्राई फ्रूट्स का सेवन लोग इसको भिगोकर करते हैं. आज हम एक ऐसे ही मेवे की बात करने वाले हैं जो शरीर को सेहतमंद बनाने में मददगार माना जाता है. हम बात कर रहे हैं किशमिश की जिसे पोषण का खजाना कहा जाए तो गलत नहीं होगा. अगर आप भी मजे से किशमिश खाते हैं तो और इसके लाभों के बारे में नहीं जानते हैं तो आज हम आपको बताएंगे इसको खाने से होने वाले फायदे. खासतौर से भीगी किशमिश का सेवन सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है. बता दें कि रोजाना सुबह खाली पेट भीगी किशमिश खाने से शरीर को कई लाभ मिल सकते हैं. भीगी किशमिश (Raisins Health Benefits) में आयरन, पोटैशियम, कैल्शियम, मैग्निशियम और फाइबर जैसे गुण पाए जाते हैं, जो शरीर को कई तरह की परेशानियों से बचाने में मदद कर सकते हैं.


1. हड्डियों के लिए फायदेमंद
किशमिश को कैल्शियम का अच्छा सोर्स भी माना जाता है. हम सभी जानते हैं कि कैल्शियम हड्डियों के लिए बेहद जरूरी होता है. ऐसे में अगर आप रोजाना भीगी किशमिश का सेवन करते हैं तो ये हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद कर सकती है.
2. आयरन से भरपूर
किशमिश में आयरन भी पाया जाता है जो शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी को पूरा करने में मदद कर सकता है. अगर आप रोजाना सुबह खाली पेट भीगी किशमिश का सेवन करते हैं तो आयरन की कमी को दूर किया जा सकता है.
3. बेहतर पाचन में मददगार
किशमिश को फाइबर का अच्छा सोर्स भी माना जाता है, फाइबर पाचन को बेहतर बनाने में मदद करता है. भीगी हुई किशमिश का सेवन पेट से जुड़ी बीमारियों से बचाने में मदद कर सकता है.
4. वजन बढ़ाने में मददगार
हर रोज सुबह खाली पेट भीगी किशमिश का सेवन वजन को बढ़ाने में भी मदद कर सकता है. अगर आप वजन बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं तो ऐसे में किशमिश का सेवन आपके लिए फायदेमंद हो सकता है.
5. एनर्जी बूस्टर
किशमिश में मौजूद आर्जिनिन नाम का प्रोटीन शरीर में एनर्जी को बढ़ाने में मदद करता है.

</description><guid>health-tips:-consuming-soaked-raisins-is-beneficial-for-these-5-people,-eat-them-on-an-empty-</guid><pubDate>05-Jan-2025 9:01:13 am</pubDate></item><item><title>खून में दिखने वाले इस संकेत से हार्ट अटैक का खतरा, कैसे करें बचाव?</title><link>https://just36news.com/this-sign-seen-in-the-blood-may-indicate-the-risk-of-heart-attack,-how-to-prevent-it</link><description>Heart Attack Cause:आजकल लाइफस्टाइल डिजीज के मामले ज्यादा बढ़ने लगे हैं, इसमें हार्ट अटैक के मामले सबसे ज्यादा सामने आ रहे हैं। इसके मामलों के बढ़ने का एक कारण खून भी है। जी हां, अगर हमारे शरीर में खून गाढ़ा होने लगता है, तो इससे भी हार्ट अटैक का रिस्क बढ़ने लगता है। मेडिकल टर्म में खून गाढ़ा होने की स्थिति को हाइपरकोएग्युलेबिलिटी कहते हैं। इसमें शरीर के अंदर खून गाढ़ा होने से रक्त थक्के जमने लगते हैं। इससे कई गंभीर समस्याएं हो सकती हैं, जिनमें लिवर डैमेज और हार्ट अटैक का जोखिम बढ़ सकता है। आइए जानते हैं इस पर डॉक्टर की राय।
क्या सच में खून गाढ़ा होने से हार्ट अटैक आता है?
इस बारे में हमें डॉक्टर सलीम जैदी बता रहे हैं, जो एक यूनानी डॉक्टर हैं। उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पेज पर वीडियो शेयर कर बताया है कि खून गाढ़ा होने से उसके थक्के बनने लगते हैं। खून के थक्कों से दिल की नसों तक ब्लड सप्लाई प्रभावित होती है, दिल तक खून सही से नहीं पहुंचेगा, तो इससे हार्ट अटैक आ सकता है। डॉक्टर ने इस पर कुछ स्पेशल टिप्स बताई हैं, जिनकी मदद से खून के गाढ़े होने की स्थिति से आप बच सकेंगे।
क्यों गाढ़ा होता है खून?
बॉडी में खून के गाढ़े होने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे:

    हाई कोलेस्ट्रॉल- जब खून में कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ जाता है तो यह ब्लड वेसल्स पर जम सकता है।
    हाई BP- हाई ब्लड प्रेशर से भी रक्त के थक्के बनने की संभावना बढ़ जाती है।
    धूम्रपान करने से भी खून गाढ़ा हो जाता है।
    इस होम रेमेडी से खून को करें पतला
    डॉक्टर जैदी ने इस नुस्खे में सिर्फ 2 चीजों का इस्तेमाल किया है, जिसमें लहसुन और शहद शामिल हैं। इसे खाने के लिए आपको रोजाना लहसुन की 2 कलियों को शहद के साथ मिलाकर दरदरा कूटना है। इसके बाद इसे खाली पेट खाना है और ऊपर से 1 गिलास गुनगुना पानी पीना है। लहसुन में एलिसिन नामक तत्व होता है जो प्राकृतिक रूप से खून को पतला करता है और ब्लॉकेज होने से आपको बचाता है। शहद एक नेचुरल एंटी-इंफ्लेमेटरी फूड है, जो खून के प्रवाह में सुधार करता है और इम्यूनिटी को बढ़ाता है।
    खून गाढ़ा होने से अन्य नुकसान
    इससे हार्ट अटैक के अलावा, हार्ट स्ट्रोक के मामले बढ़ते हैं। ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बढ़ता है। इससे किडनी फेल होने की संभावनाएं बढ़ती हैं। खून गाढ़ा होने से सांस लेने में तकलीफ होती है।
    
</description><guid>this-sign-seen-in-the-blood-may-indicate-the-risk-of-heart-attack,-how-to-prevent-it</guid><pubDate>30-Dec-2024 12:10:23 pm</pubDate></item></channel></rss>