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शिक्षा पद्धति पर कोरोना का ग्रहण, राष्ट्रीय बजट में डिजीटल माध्यम रहेगा केंद्रित

शिक्षा पद्धति पर कोरोना का ग्रहण, राष्ट्रीय बजट में डिजीटल माध्यम रहेगा केंद्रित
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नई दिल्ली । 1 फरवरी को पेश हो रहे बजट में सरकार का ध्यान शिक्षा के क्षेत्र में विशेष रूप से होगा। अनुमान है कि इस बार के शिक्षा बजट में बढ़ोत्तरी भी हो सकती है। इसके पीछे सबसे बड़ा वजह है कोविड-19। इस बीमारी ने शिक्षा को बहुत ज्यादा प्रभावित किया है। ऑनलाइन पढ़ाई ने टीचिंग ट्रेंड को बदला है। वहीं देश की बड़ी आबादी के लिए मोबाइल और इंटरनेट से पढ़ाई अभी भी बड़ी चुनौति है। कोरोना के कारण काई निजी स्कूलों ने फीस नहीं ली या कम ली। शिक्षकों की सैलरी प्रभावित हुई और कई स्कूलों पर ताले लग गए। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि सरकार इन समस्याओं को देखते हुए राहत भरा बजट लेकर आए।
एक रिपोर्ट के मुताबिक 50 फीसदी स्कूलों ने फीस नहीं ली। जिससे इनके सालाना रेवेन्यू पर बड़ा असर आया है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि सरकार राहत कोष स्थापित करे। इसके लिए बजट में आबंटन की दिशा में सोचना चाहिए। इसके अलावा सरकार को डिजीटल और पारंपरिक दोनों ही ट्रेंड को बढ़ावा देने के साथ ही सरकारी स्कूलों में इनके इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी काम करना चाहिए। उम्मीद है कि स्कूलों में फ्री वाई-फाई और डिजटल उपकरणों के लिए सरकार इस बजट में प्रावधान करे। बंद हो रहे स्कूलों और कॉलेजों के लिए भी सरकार कोई मदद लेकर आए। सरकारी स्कूलों में इंफ्रास्ट्रक्चर और अच्छी गुणवत्ता के अलावा अध्यपकों की भी कमी है। सरकारी स्कूलों में पढ़ाई को बेहतर बनाने के लिए PPP मोड पर काम करने की जरूरत है, जिससे निजी और सरकारी स्कूलों की पढ़ाई और गुणवत्ता के अंतर को पाटा जा सके। इसके लिए अनुमान लगाया जा रहा है कि एक पायलट फंड स्थपित हो सकता है। बजट में इसका प्रावधान हो सकता है या होना चाहिए।
 


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