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राजीव गांधी की जयंती पर कांग्रेस ने किया नमन, पंचायती राज और तकनीकी क्रांति में योगदान को सराहा

राजीव गांधी की जयंती पर कांग्रेस ने किया नमन, पंचायती राज और तकनीकी क्रांति में योगदान को सराहा

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती पर गुरुवार को कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने दिल्ली स्थित वीर भूमि पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पर पार्टी ने राजीव गांधी के विजन और योगदान को याद करते हुए कहा कि उनका कार्यकाल देश के लिए मील का पत्थर साबित हुआ। कांग्रेस संसदीय दल की चेयरपर्सन सोनिया गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने वीर भूमि पहुंचकर राजीव गांधी को पुष्प अर्पित किए। उनके साथ कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी मौजूद रहे। राहुल गांधी ने भी अपने पिता, पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

पूर्व प्रधानमंत्री की जयंती पर कांग्रेस नेताओं ने राजीव गांधी के दूरदर्शी फैसलों को याद किया। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने कहा, “राजीव गांधी का राजनीतिक कार्यकाल छोटा था, लेकिन उनका योगदान बहुत बड़ा था। उन्होंने कई क्रांतिकारी कदम उठाए, जिनमें पंचायती राज, आईटी क्रांति और वोटिंग की उम्र घटाकर 18 साल करना शामिल है। अगर राजीव आज हमारे बीच होते तो हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में नंबर वन होते।”

वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे सिर्फ औपचारिकता न निभाएं। उन्होंने कहा, “आज जो लोग यहां आए हैं, उनसे मेरी गुजारिश है कि वे सिर्फ ‘परिक्रमा’ करने के बजाय यह पढ़ें कि राजीव जी ने क्या कहा था, इस देश की यात्रा के लिए उनका विजन क्या था और उन्होंने देश के चरित्र के बारे में हमें क्या बताया था। जब तक हम उन बातों को ध्यान में नहीं रखेंगे, तब तक पीएम मोदी से लड़ना बहुत मुश्किल होगा।”

कांग्रेस नेता उदित राज ने भी राजीव गांधी को याद किया। उन्होंने कहा, “आज हम राजीव गांधी और उनके आदर्शों को याद कर रहे हैं। उनकी याद में यहां हजारों लोग जमा हुए हैं। उनके कार्यकाल में देश का कंप्यूटराइजेशन और जवाहर नवोदय विद्यालयों की स्थापना जैसी महत्वपूर्ण पहल की गईं। राजीव गांधी ने समाज के कमजोर वर्गों के लिए बहुत कुछ किया और उनके उत्थान के लिए काम किया।”

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती पर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा, “हमारे लिए यह प्रेरणा का दिन है और यह जगह भी प्रेरणा का स्रोत है। जब भी हम यहां आते हैं, तो नई ऊर्जा के साथ लौटते हैं। अगर राजीव आज जीवित होते, तो इस देश का इतिहास बदल गया होता, इस देश का भविष्य बदल गया होता, इस देश की किस्मत बदल गई होती। यह हमारा दुर्भाग्य है कि बहुत कम उम्र में ही वे हमें छोड़कर चले गए।”

कांग्रेस नेता सुबोध कांत सहाय ने कहा, “राजीव गांधी की जयंती एक आशीर्वाद की तरह है। उन्होंने आधुनिक भारत का सपना देखा और 18 साल की उम्र में वोट देने का अधिकार देकर युवाओं को सशक्त बनाया। उन्होंने महिलाओं को सशक्त बनाने और उनके अधिकारों को मजबूत करने का भी काम किया, जिसकी झलक आज ग्रामीण महिलाओं की तरक्की में दिखती है। ठीक जब वे पूरी तरह परिपक्व हो गए थे और देश का नेतृत्व करने में सक्षम थे, तभी कुदरत ने उन्हें हमसे छीन लिया। उनके बलिदान और उनकी कमी की भरपाई कभी नहीं हो सकती।”

दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने कहा कि राजीव गांधी ने देश को कंप्यूटर क्रांति, पंचायती राज कानून और 18 साल में वोटिंग का अधिकार दिया। उन्होंने कहा, “हम राजीव गांधी द्वारा दिखाए गए रास्ते पर आगे बढ़ने और देश की एकता, अखंडता और प्रगति के लिए मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

भारत की विकास यात्रा में राजीव गांधी का भी अहम योगदान: राजनाथ सिंह

भारत की विकास यात्रा में राजीव गांधी का भी अहम योगदान: राजनाथ सिंह

 पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती की अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उनको श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए बड़ा बयान दिया। रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत की विकास यात्रा में राजीव गांधी का भी अहम योगदान रहा है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती पर मैं उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। भारत की विकास यात्रा में उनका भी अहम योगदान रहा है।

पूर्व पीएम राजीव गांधी की भूमिका भारत को आधुनिक, समृद्ध और सशक्त राष्ट्र बनाने में अहम रही। उन्होंने सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत को विश्व में वर्तमान स्थान दिलाया और इसीलिए उन्हें भारत में ‘सूचना प्रौद्योगिकी का जनक’ कहा जाता है। उन्होंने देश में कंप्यूटर और आधुनिक तकनीक के उपयोग की शुरुआत की थी।

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती को हर साल ‘सद्भावना दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी और राहुल गांधी समेत कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने राजीव गांधी की समाधि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

वहीं, कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने सोशल मीडिया पर लिखा, “पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी जी ने भारत के निर्माण और तरक्की के लिए आधुनिक तकनीक और नए विचारों को अपनाने में विश्वास जताया। इसके लिए यह बेहद जरूरी था कि युवाओं की भागीदारी और उनकी प्रतिभा को विकसित करने के लिए समुचित व्यवस्था और अवसर प्रदान किए जाए।”

पायलट ने लिखा, “अपनी दूरदर्शिता से उन्होंने देश में आधुनिकरण की नई परिभाषा गढ़ी। कंप्यूटर और दूरसंचार क्रांति के विस्तार जैसे महत्वपूर्ण फैसलों ने देश को नई ऊंचाई तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। आज उनकी जयंती पर उन्हें हृदय की गहराइयों से नमन करता हूं।”

कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने ‘एक्स’ पर पोस्ट में लिखा, “राजीव गांधी न केवल भारत के प्रधानमंत्री थे बल्कि युवाओं के सबसे बड़े समर्थकों में से एक थे, एक ऐसे नेता जिनका मानना ​​था कि युवा भारतीय न केवल भविष्य हैं बल्कि वे शक्ति हैं जो एक आधुनिक राष्ट्र का निर्माण करेंगे। आधुनिक, तकनीकी रूप से उन्नत और आर्थिक रूप से सशक्त भारत का उनका विजन कांग्रेस पार्टी के लिए प्रेरणा और जिम्मेदारी है। राजीव जी को उनकी 82वीं जयंती पर भावभीनी श्रद्धांजलि।” (इनपुट-आईएएनएस)

 

गृह मंत्री अमित शाह ने 31वीं दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक की अध्यक्षता की, नदी जल विवाद, सुरक्षा और विकास के मुद्दों पर चर्चा

गृह मंत्री अमित शाह ने 31वीं दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक की अध्यक्षता की, नदी जल विवाद, सुरक्षा और विकास के मुद्दों पर चर्चा

 केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज गुरुवार को मामल्लापुरम के पास कोवलम के होटल में 31वीं दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें दक्षिणी राज्यों के नेताओं और वरिष्ठ अधिकारियों ने अंतर्राज्यीय विवादों, सुरक्षा और विकास प्राथमिकताओं पर चर्चा की।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने अमित शाह के आगमन पर उनका व्यक्तिगत रूप से स्वागत किया। कार्यवाही शुरू होने से पहले दोनों नेताओं ने संक्षिप्त बातचीत की। इस सम्मेलन में तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल और तेलंगाना के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू, केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन और तेलंगाना के उप मुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क उपस्थित थे। पुडुचेरी के मुख्यमंत्री एन रंगासामी उपस्थित नहीं थे, जबकि उपराज्यपाल के. कैलाशनाथन ने केंद्र शासित प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया।

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के उपराज्यपाल, लक्षद्वीप के अधिकारी और भाग लेने वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी उपस्थित थे। परिषद की बैठक में विचार-विमर्श में लंबे समय से लंबित नदी-जल और सीमा विवादों पर प्रमुखता से चर्चा होने की उम्मीद थी। इनमें कावेरी और कृष्णा नदियों के जल बंटवारे का विवाद, कर्नाटक का प्रस्तावित मेकेदातु बांध और मुल्लापेरियार बांध से संबंधित चिंताएं शामिल थीं।

तमिलनाडु द्वारा कर्नाटक सीमा के पास हाल ही में तीन तमिल पुरुषों की गोलीबारी की घटना को भी उठाए जाने और दोनों राज्यों के बीच बेहतर समन्वय की मांग करने की संभावना है। परिसीमन और दक्षिणी राज्यों पर इसके संभावित प्रभावों पर चर्चा होने की संभावना थी।

व्यापक एजेंडा में अंतर्राज्यीय सहयोग को मजबूत करना, आंतरिक सुरक्षा, आर्थिक विकास, औद्योगिक निवेश, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा शामिल थे।

प्रतिभागियों द्वारा महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों से जुड़े मामलों के शीघ्र निपटान के लिए विशेष त्वरित अदालतों की स्थापना के प्रस्ताव की भी जांच किए जाने की संभावना थी।

अधिकारियों ने बताया कि कोवलम बैठक का उद्देश्य प्रशासनिक समन्वय को मजबूत करना और सहकारी संघवाद को आगे बढ़ाना था। यह सम्मेलन भाग लेने वाली सरकारों को केंद्र सरकार के समक्ष अपने-अपने राज्यों से संबंधित चिंताओं को रखने और वर्षों से अनसुलझे विवादों के समन्वित समाधान खोजने का अवसर भी प्रदान करता है।

अधिकारियों ने कहा कि चर्चा में अनुवर्ती कार्रवाई के लिए व्यावहारिक तंत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जिसमें विभागों के बीच नियमित आदान-प्रदान और भाग लेने वाली सरकारों और प्रशासनों द्वारा संयुक्त रूप से स्वीकृत निर्णयों का तेजी से कार्यान्वयन शामिल है।

भारत-जापान के बीच समुद्री सुरक्षा सहयोग पर समझौता, रक्षा मंत्रियों ने किए हस्ताक्षर

भारत-जापान के बीच समुद्री सुरक्षा सहयोग पर समझौता, रक्षा मंत्रियों ने किए हस्ताक्षर

 भारत और जापान ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए रक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी ने 20 अगस्त को नई दिल्ली में द्विपक्षीय बैठक की। इस दौरान दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा सहयोग पर व्यवस्था संबंधी समझौते पर हस्ताक्षर किए गए, जो समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में आगे के सहयोग के लिए ढांचा उपलब्ध कराएगा।

समुद्री क्षेत्र की जानकारी साझा करने पर जोर

समझौते के तहत जापान मैरीटाइम सेल्फ-डिफेंस फोर्स और भारतीय नौसेना के बीच व्यावहारिक सहयोग को मजबूत किया जाएगा। इसमें समुद्री क्षेत्र से जुड़ी जानकारी साझा करने सहित अन्य गतिविधियां शामिल हैं। दोनों पक्षों ने समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में सेनाओं के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई।

रक्षा सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों की समीक्षा

दोनों रक्षा मंत्रियों ने संयुक्त बयान में कहा कि भारत-जापान विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी हिंद-प्रशांत में शांति, स्थिरता और समृद्धि के प्रमुख आधारों में से एक है। दोनों पक्षों ने समुद्री सुरक्षा, नौसेना सहयोग, रक्षा उपकरण एवं प्रौद्योगिकी, सैन्य अभ्यास और रक्षा उद्योग के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। उन्होंने जुलाई 2026 में दोनों देशों के नेताओं की ओर से जारी संयुक्त बयान का भी उल्लेख किया।

मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत के लिए प्रतिबद्धता

दोनों मंत्रियों ने मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए रक्षा सहयोग को और गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई। मौजूदा वैश्विक तनाव के बीच उन्होंने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा स्थिति पर एक-दूसरे के आकलन साझा करने को महत्वपूर्ण बताया।

यथास्थिति बदलने के प्रयासों का विरोध

दोनों देशों ने नौवहन और हवाई उड़ान की स्वतंत्रता तथा सुरक्षा में बाधा डालने वाली किसी भी एकतरफा कार्रवाई का विरोध किया। उन्होंने बल या दबाव के जरिए यथास्थिति बदलने के किसी भी प्रयास का भी विरोध किया। इसके अलावा खोज एवं बचाव, मानवीय सहायता और आपदा राहत के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।

नौसैनिक यात्राओं और संयुक्त अभ्यासों में होगा विस्तार

दोनों पक्ष समुद्री संचार मार्गों की सुरक्षा के लिए नौसैनिक जहाजों और सैन्य इकाइयों की पारस्परिक यात्राएं बढ़ाएंगे। संयुक्त सैन्य अभ्यासों के साथ सैन्यकर्मियों और विशेषज्ञों के आदान-प्रदान को भी बढ़ावा दिया जाएगा। बंदरगाहों तथा रखरखाव एवं मरम्मत सुविधाओं के इस्तेमाल में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी।

जहाज निर्माण और मरम्मत में सहयोग बढ़ेगा

दोनों देशों ने नौसैनिक जहाज निर्माण में सहयोग की संभावनाओं को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। दोनों पक्ष नौसैनिक जहाजों के संयुक्त विकास और डिजाइन की संभावनाएं तलाशेंगे। इसमें जापान की तकनीकी विशेषज्ञता और भारत की उत्पादन क्षमता का इस्तेमाल करने पर जोर दिया गया है। ‘मेक इन इंडिया’ के तहत भारत की उत्पादन क्षमता के उपयोग को लेकर भी चर्चा आगे बढ़ाई जाएगी। दोनों पक्ष निकट भविष्य में जहाज मरम्मत सुविधाओं के पारस्परिक इस्तेमाल के लिए व्यवस्था को अंतिम रूप देने पर भी सहमत हुए। समुद्री बारूदी सुरंगों से निपटने की क्षमता बढ़ाने में एक-दूसरे की विशेषज्ञता का लाभ उठाने पर भी चर्चा हुई।

धर्म गार्जियन और जेमेक्स का होगा विस्तार

दोनों मंत्रियों ने भारत-जापान के बीच लगातार बढ़ रहे सैन्य अभ्यासों का स्वागत किया। इसके तहत ‘धर्म गार्जियन’ और ‘जेमेक्स’ जैसे अभ्यासों को और विस्तार दिया जाएगा। दोनों ने इस साल होने वाले भारत-जापान वायुसेना अभ्यास ‘वीर गार्जियन 26’ की तैयारियों में हुई प्रगति का भी स्वागत किया।

पहली बार भारत आएंगे जापानी लड़ाकू विमान

‘वीर गार्जियन 26’ अभ्यास में पहली बार जापान की वायु आत्मरक्षा सेना के लड़ाकू विमान भारत आएंगे और अभ्यास में हिस्सा लेंगे। दोनों देशों ने सैन्य अभ्यासों को अधिक जटिल बनाने, उनमें मानवरहित प्रणालियों को शामिल करने और अवसर मिलने पर कम समय में संयुक्त अभ्यास आयोजित करने पर भी सहमति जताई।

विशेष अभियान बलों के बीच बढ़ेगा आदान-प्रदान

भारत और जापान की सेनाओं के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए विशेष अभियान बलों के बीच आदान-प्रदान बढ़ाया जाएगा। भारत में एकीकृत थिएटर कमान स्थापित होने के बाद जापान के साथ इस क्षेत्र में सहयोग की संभावनाएं तलाशने पर भी दोनों पक्षों ने सहमति जताई।

रक्षा प्रौद्योगिकी साझेदारी मजबूत करने पर जोर

राजनाथ सिंह ने जापान की ओर से रक्षा उपकरण और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के ढांचे की हालिया समीक्षा का स्वागत किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि जापान हिंद-प्रशांत क्षेत्र और पूरी दुनिया में शांति एवं स्थिरता में आगे भी योगदान देगा। उन्होंने दोनों देशों के बीच रक्षा और प्रौद्योगिकी साझेदारी को और मजबूत करने की उम्मीद भी जताई।

सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने पीएम मोदी से की मुलाकात, असम बाढ़ राहत पर मिला पूरा भरोसा

सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने पीएम मोदी से की मुलाकात, असम बाढ़ राहत पर मिला पूरा भरोसा

 असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने गुरुवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने राज्य में बाढ़ से निपटने के प्रयासों और आगे की रणनीति पर विस्तृत चर्चा की।

मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर बताया कि प्रधानमंत्री से आशीर्वाद और मार्गदर्शन प्राप्त करने का सौभाग्य मिला। उन्होंने लिखा कि बाढ़ राहत कार्यों के दौरान प्रधानमंत्री लगातार संपर्क में रहे, स्थिति की बारीकी से समीक्षा करते रहे और हरसंभव सहायता प्रदान करते रहे।

पुनर्निर्माण और सुधार का रोडमैप पेश

हिमंता बिस्वा सरमा ने प्रधानमंत्री के साथ अगले चरण का रोडमैप साझा किया। इसमें प्रभावित क्षेत्रों का पुनर्निर्माण, आजीविका की बहाली और व्यापक सुधार सुनिश्चित करने के उपाय शामिल हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने इस मिशन को सफल बनाने में भारत सरकार के अटूट समर्थन को दोहराया।

मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार द्वारा असम की जनता के जनादेश को पूरा करने के लिए पहले 100 दिनों में शुरू की गई प्रमुख पहलों की भी जानकारी दी। उन्होंने ‘विकसित असम’ के साझा विजन को साकार करने के प्रति प्रधानमंत्री के निरंतर मार्गदर्शन और प्रतिबद्धता के लिए आभार व्यक्त किया।

एनडीए 3.0 के 100 दिनों में महिलाओं को सशक्त बनाने पर जोर

इससे पहले मुख्यमंत्री ने एनडीए 3.0 सरकार के 100 दिन पूरे होने के अवसर पर अलग-अलग पोस्ट में अपनी उपलब्धियों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि असम की नारी शक्ति को सशक्त बनाने की दिशा में निरंतर कदम उठाए जा रहे हैं। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने वाली योजनाओं को मजबूत किया गया है, ताकि बेटियां स्वस्थ, आत्मविश्वासी और अपने सपनों को पूरा करने के लिए स्वतंत्र रह सकें।

एक अन्य पोस्ट में उन्होंने कहा कि विकसित असम के निर्माण के लिए लोगों की सेवा पूरी ईमानदारी से करने और विकास व कल्याण के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करने का संकल्प दोहराया जा रहा है। 

सीमावर्ती क्षेत्रों की पहले उपेक्षा हुई, अब वे मोदी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता हैं : केंद्रीय मंत्री रिजिजू

सीमावर्ती क्षेत्रों की पहले उपेक्षा हुई, अब वे मोदी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता हैं : केंद्रीय मंत्री रिजिजू

 केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने अरुणाचल प्रदेश में ‘‘चीन की ओर से घुसपैठ’’ के हालिया दावों को खारिज करते हुए गुरुवार को कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों की पहले उपेक्षा की जाती थी लेकिन अब ये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की ‘‘सर्वोच्च प्राथमिकता’’ हैं।

केंद्रीय मंत्री ने पूर्व रक्षा मंत्री ए. के. एंटनी द्वारा 2013 में संसद में दिए उस बयान का भी उल्लेख किया

उन्होंने पूर्व रक्षा मंत्री ए. के. एंटनी द्वारा 2013 में संसद में दिए उस बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें एंटनी ने स्वीकार किया था कि भारत में सीमावर्ती क्षेत्रों को अविकसित रखने की नीति लंबे समय तक अपनाई गई थी, जिसके कारण सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और क्षमताओं के विकास में चीन ने भारत को पीछे छोड़ दिया। हालांकि, एंटनी ने उसी भाषण में यह भी स्पष्ट किया था कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) के सत्ता में आने से 20-25 वर्ष पहले यह नीति बदल दी गई थी और उसके बाद से लगातार भारतीय सरकारें सीमा क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और सैन्य क्षमताओं को मजबूत कर रही हैं।

एंटनी ने दावा किया था

कांग्रेस नेता एंटनी ने दावा किया था कि तत्कालीन संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार ने इन क्षमताओं को मजबूत करने के लिए ‘सबसे अधिक’ काम किया। लोकसभा में अरुणाचल पश्चिम का प्रतिनिधित्व करने वाले रीजीजू की यह टिप्पणी अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी क्षेत्र में ‘‘चीनी सैन्य गतिविधियों’’ को लेकर नये सिरे से चिंता जताए जाने के बीच आई है।

रिजिजू ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा

रिजिजू ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘कुछ लोगों ने सीमा को लेकर यूं ही टिप्पणी कर दी। सीमावर्ती इलाके दुर्गम हैं, लेकिन नरेन्द्र मोदी सरकार सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। मैं बुनियादी ढांचे से जुड़े कार्यों में तेजी लाने के लिए अरुणाचल प्रदेश के माजा, गालेमो और ताकसिंग इलाकों में गया था। सीमावर्ती क्षेत्रों की पहले उपेक्षा हुई लेकिन अब ये सर्वोच्च प्राथमिकता हैं।’’

उन्होंने एक अन्य पोस्ट में सीमावर्ती बुनियादी ढांचे को लेकर कांग्रेस के रिकॉर्ड पर निशाना साधा। केन्द्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘कांग्रेस नेताओं में ए. के. एंटनी जी बहुत ईमानदार थे। उन्होंने रक्षा मंत्री रहते हुए संसद में स्वीकार किया था कि कांग्रेस सरकार की नीति सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा नहीं बनाने की थी।’’

रिजिजू ने पूर्व रक्षा मंत्री एंटनी द्वारा छह सितंबर 2013 को लोकसभा में दिए गए बयान का उल्लेख किया। तत्कालीन रक्षा मंत्री ने उस समय स्वीकार किया था कि चीन ने सीमा पर भारत की तुलना में कहीं बेहतर बुनियादी ढांचा विकसित किया है और उन्होंने इस मामले में भारत के पिछड़ने के लिए आजादी के बाद दशकों तक अपनाई गई नीति को जिम्मेदार ठहराया था।

एंटनी ने इस नीति के पीछे की सोच स्पष्ट करते हुए कहा था, ‘‘आजादी के बाद कई वर्षों तक भारत में यह नीति रही कि सीमावर्ती क्षेत्रों का विकास न करना ही सुरक्षा का सबसे बेहतर तरीका है। अविकसित सीमाएं विकसित सीमाओं की तुलना में अधिक सुरक्षित होती हैं इसलिए सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़कों या हवाई पट्टियों का कई वर्षों तक निर्माण नहीं किया गया।’’

कांग्रेस नेता ने कहा था, ‘‘उस दौरान चीन अपने सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का लगातार विकास करता रहा। नतीजतन वह अब हमसे आगे निकल गया है। सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और क्षमता के मामले में वे हमसे आगे हैं। मैं यह स्वीकार करता हूं। यह इतिहास का हिस्सा है।’’

हालांकि एंटनी ने यह भी कहा था कि भारत को अपनी गलती का एहसास हो गया था और उनके 2013 के बयान से 20 से 25 साल पहले ही देश ने इस संबंध में अपना रुख बदल लिया था। एंटनी ने कहा था, ‘‘लेकिन पिछले 20-25 वर्षों में भारत की सरकारों को भी इस गलती का एहसास हुआ और उन्होंने नीति बदल दी। अब हम भी सीमावर्ती क्षेत्रों में अपनी क्षमताओं को मजबूत कर रहे हैं… मैं बिना किसी अतिशयोक्ति के कह सकता हूं कि पिछले नौ वर्ष में संप्रग सरकार ने सीमावर्ती क्षेत्रों में क्षमताओं को मजबूत करने के लिए सबसे अधिक काम किया है। संप्रग के पहले और दूसरे कार्यकाल के दौरान यह काम किया जा रहा है। भविष्य में जो भी सरकार आएगी, वह भी इसे जारी रखेगी।’’

केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने पहले भी ऐसे दावों को खारिज कर दिया था

अरुणाचल प्रदेश में हालिया विवाद तक्सिंग क्षेत्र पर केंद्रित है। इससे पहले, केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने बुधवार को उन दावों को खारिज कर दिया था कि चीनी सैनिक अरुणाचल प्रदेश के भीतर 60 किलोमीटर तक घुस आए हैं। हालांकि उन्होंने स्थानीय निवासियों की चिंताओं को स्वीकार किया था।

भारत-चीन सीमा का मुद्दा गंभीर विषय

रिजिजू ने सोशल मीडिया हैंडल ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘भारत-चीन सीमा का मुद्दा गंभीर विषय है। ऐसे संवेदनशील मामले में झूठे दावे न करें। हम अतीत की गलतियां दोहराना नहीं चाहते। सरकार स्थानीय लोगों की चिंताओं का समाधान करेगी और भारतीय क्षेत्र की रक्षा करेगी।’’

दरअसल, भारत और चीन के बीच 3,400 किलोमीटर से अधिक लंबी विवादित सीमा है, जिसके कई हिस्सों में दोनों देशों के बीच वास्तविक सीमा का निर्धारण नहीं हुआ है। हाल में सीमा पर तनाव की खबरें सामने आने के बाद विदेश मंत्रालय ने कहा था कि चीन के साथ समग्र संबंधों के लिए वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर शांति और स्थिरता बेहद महत्वपूर्ण है।

रणधीर जायसवाल ने 11 अगस्त को कहा था

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 11 अगस्त को कहा था, ‘‘भारत और चीन के बीच सीमावर्ती क्षेत्रों से जुड़े मामलों में हमने चीनी पक्ष के साथ बातचीत के दौरान हमेशा इस बात पर बल दिया है कि हम इन मुद्दों को बेहद गंभीर मानते हैं।’’ उन्होंने कहा था, ‘‘हमने यह भी कहा है कि सीमा से जुड़े मामलों की स्थिति हमारे व्यापक द्विपक्षीय संबंधों की स्थिति पर भी असर डालेगी।’’उन्होंने कहा था कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना ‘‘अत्यंत महत्वपूर्ण’’ है।

अब प्रति ग्राहक 9 सिम की उच्चतम सीमा, केंद्र ने टेलीकॉम कंपनियों को दिए सख्त निर्देश

अब प्रति ग्राहक 9 सिम की उच्चतम सीमा, केंद्र ने टेलीकॉम कंपनियों को दिए सख्त निर्देश

 केंद्र सरकार के दूरसंचार विभाग (डीओटी) ने टेलीकॉम कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे प्रति ग्राहक नौ सिम की उच्चतम सीमा को किसी भी सब्सक्राइबर के लिए पार न करें। यह जानकारी गुरुवार को जारी आधिकारिक बयान में दी गई।

सरकारी की ओर से जारी सर्कुलर में कहा गया कि 24 अगस्त 2026 से, टीएसपी (टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर) ऐसे हर सब्सक्राइबर की पहचान करने के लिए जरूरी तकनीकी और संगठनात्मक उपाय करेंगे जो तय सीमा से ज्यादा मोबाइल कनेक्शन लेना चाहता है। वे उसे सूचित करेंगे कि उसके पास पहले से ही किसी व्यक्ति के लिए अनुमत अधिकतम संख्या में मोबाइल कनेक्शन हैं और इसलिए, उसे नया मोबाइल कनेक्शन नहीं दिया जा सकता है।”

इन निर्देशों के तहत ग्राहकों को ‘कस्टमर एप्लीकेशन फॉर्म’ (सीएएफ) में यह जानकारी देनी होगी कि उनके नाम पर अलग-अलग टेलीकॉम ऑपरेटरों और लाइसेंस प्राप्त सर्विस एरिया में पहले से कौन-कौन से मोबाइल कनेक्शन हैं। डीओटी के सर्कुलर में बताया गया है कि जिन ग्राहकों ने तय सीमा से ज्यादा मोबाइल कनेक्शन ले रखे हैं, उनकी जानकारी विभाग के द्वारा विकसित किए गए ‘डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म’ (डीआईपी) पर उपलब्ध है।

डीओटी ने टेलीकॉम ऑपरेटरों की मदद के लिए यह सिस्टम बनाया है ताकि वे ऐसे ग्राहकों की पहचान कर सकें, जिनके नाम पर मोबाइल कनेक्शन की तय सीमा पूरी हो चुकी है। डीआईपी अलग-अलग टेलीकॉम कंपनियों से मिली ग्राहकों की जानकारी का इस्तेमाल करता है। यह जानकारी टेलीकॉम कंपनियों के लिए उन ग्राहकों की पहचान करने में काम आती है जिन्होंने 9 सिम कार्ड की अधिकतम सीमा पार कर ली है।

सर्कुलर में कहा गया है, “जब तक टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर कस्टमर एप्लीकेशन फॉर्म (सीएएफ) की शर्तों के आधार पर ऐसे उपाय लागू नहीं करते, तब तक तय सीमा से ज्यादा एक्टिवेट किए गए किसी भी मोबाइल कनेक्शन को तुरंत सस्पेंड कर दिया जाएगा। यह सस्पेंशन तब तक रहेगा जब तक मोबाइल कनेक्शन की तय सीमा पार करने से जुड़ा मामला सुलझ नहीं जाता।

किसान, महिला, युवा और श्रमिक फोकस में, आय बढ़ाना प्राथमिकता: शिवराज सिंह चौहान

किसान, महिला, युवा और श्रमिक फोकस में, आय बढ़ाना प्राथमिकता: शिवराज सिंह चौहान

 पटना के बामेती से शुरू हुआ बड़ा कृषि अभियान

पटना। बिहार में पटना के बामेती से बड़े कृषि अभियान की शुरुआत गुरुवार को की गई। यहां किसान समृद्धि, महिला उधमी, युवा रोजगार, श्रमिक उत्थान एवं जन कल्याण संवाद अभियान का शुभारंभ केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया। इस अभियान के शुभारंभ के मौके पर राज्य के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा, ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार, राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल मौजूद थे।

इस अवसर पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि धरती पर अगर कोई भगवान है, तो वह किसान है और मैं किसानों का सेवक हूं। खेती-किसानी को बेहतर बनाने के लिए हम लगातार प्रयास कर रहे हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अथक प्रयासों से एक समेकित कृषि प्रणाली यानी एकीकृत कृषि प्रणाली विकसित किया गया है, जो किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ खेती को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

केन्द्रीय मंत्री चाैहान ने कहा कि प्रधानमंत्री और बिहार सरकार की चिंता यह है कि हमारे ज्यादातर किसान छोटे हैं। कम जोत वाली भूमि में रोजी-रोटी चलाना, फायदे की खेती करना और परिवार चलाना आसान नहीं है। इसलिए हम लोगों ने कोशिश की है कि हम खेती का ऐसा मॉडल बनाएं कि कम खेती में भी ज्यादा आमदनी हो।

उन्होंने कहा कि हमारे किसानों के पास जमीन कम और कृषि लागत बढ़ती जा रही है। ऐसे में हमें कृषि लागत को कम करने की दिशा में काम करना होगा। सरकारी स्तर पर लगातार इसके लिए प्रयास हो रहे हैं।

आज हमारे समक्ष एक बड़ी चुनौती है कि केमिकल वाले फर्टिलाइजर के कारण हमारी जमीनें खराब हो गई हैं, हमारी जमीन का स्वास्थ्य खराब हो रहा है। इसके लिए किसानों के बीच जागरूकता फैलाने की जरूरत है।

इस दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों से प्राकृतिक खेती को अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती के माध्यम से खेती की लागत को कम किया जा सकता है और किसानों की आमदनी को बढ़ाया जा सकता है।

बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि जन कल्याण संवाद अभियान पाटलिपुत्र की धरती से शुरू होकर हर जिले तक पहुंचेगा। यह कृषि विकास का नया विचार है। किसान, महिला, युवा, श्रमिक सबकी इसमें भागीदारी होगी। इसमें कृषि को जन कल्याण और प्रगति का आधार बनाने के लिए प्रयास किए जाएंगे। बिहार के विकास और खुशहाली के लिए कृषि का विकास बेहद जरूरी है।

सभा को संबोधित करते हुए ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि बिहार में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में कृषि रोड मैप की शुरुआत की गई थी, जिसका राज्य के कृषि क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि बिहार के किसानों ने भी अपनी मेहनत और नई तकनीकों को अपनाकर कृषि उत्पादन बढ़ाया है और देश के अन्य राज्यों के किसानों के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ने का प्रयास किया है।

कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से आए किसानों ने प्राकृतिक एवं टिकाऊ कृषि से प्राप्त अनुभव साझा किए। 22 अगस्त से मगध की पावन धरती गया जी से कृषि जनकल्याण संवाद अभियान की शुरुआत होगी, जो जिलास्तर पर हर जिले में चलाया जाएगा।

पारंपरिक खेती के साथ-साथ फसल विविधिकरण, उद्यानिकी और पशुपालन से जुड़े किसान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

पारंपरिक खेती के साथ-साथ फसल विविधिकरण, उद्यानिकी और पशुपालन से जुड़े किसान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

 मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अशोकनगर के बलराम कृषि महोत्सव को वर्चुअली किया संबोधित

भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों के लिए नई तकनीक और नवाचार ने खेती में समृद्धि के नए रास्ते खोल हैं। आने वाले समय में कृषि उद्योग, ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार और समृद्धि के नए द्वार खोलेगा। उन्होंने किसानों से पारंपरिक खेती के साथ-साथ फसल विविधीकरण, उद्यानिकी और पशुपालन से जुड़ने का आव्हान किया। उन्होंने कहा कि फसल उत्पादन के साथ-साथ दुग्ध उत्पादन और मछली पालन को अपनाकर किसान अपनी आय को कई गुना बढ़ा सकते हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार को अशोक नगर में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन से वर्चुअली संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अशोकनगर के अन्नदाता अपनी मेहनत से प्रदेश भर के किसानों के लिए मिसाल बन रहे हैं। अशोकनगर की चंदेरी साड़ी ने मध्यप्रदेश को वैश्विक पहचान दिलाई है। अशोकनगर के शरबती गेहूं का स्वाद बेजोड़ है। अशोकनगर के शरबती गेहूं की देशभर में मांग है। प्रसन्नता का विषय है कि जिले के किसानों में धनिया और गुलाब जैसी उद्यानिकी फसलों के लिए रुचि बढ़ी है। कम बारिश की चुनौती के बीच डीआरएस तकनीक से धान की रोपाई का रकबा बढ़ाकर अशोक नगर के किसानों ने आपदा को अवसर में बदला है। फसल विविधीकरण से जिले में चना और मसूर का भी रकबा बढ़ा है।

सीमा पर जवान और खेत में किसान की भूमिका समान है

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसान, महिला, गरीब और युवा चारों वर्ग राज्य सरकार के लिए महत्वपूर्ण है। किसान के समृद्ध और खुशहाल होने से ही संपूर्ण समाज अन्न और धन-धान्य से परिपूर्ण रहेगा। सीमा पर जवान और खेत में किसान की भूमिका समान है, दोनों ही देश के लिए समर्पित हैं। राज्य सरकार पूर्ण संवेदनशीलता और सक्रियता से किसान हित में कार्य कर रही है। इसी के परिणाम स्वरुप पूरा साल किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसान का अर्थ ही स्वावलंबन है, अपने बलबूतों पर अपने परिवार के साथ-साथ संपूर्ण समाज के पालन पोषण के लिए अन्न का कटोरा भरने का सार्मथ्य किसानों में ही है। खेती को लाभप्रद बनाने के लिए संपूर्ण प्रदेश में बिजली, पानी की व्यवस्था के साथ-साथ खेतों तक सड़क संपर्क उपलब्ध कराने का कार्य जारी है। किसानों की सुविधा के लिए साल में एक ही बार खाते को क्लियर करने की व्यवस्था की गई है। कृषि भूमि के भूअर्जन पर किसानों को चार गुना मुआवजा दिया जाएगा।

किसानों को राज्य सरकार की ओर से अनेक सौगातें उपलब्ध कराई जा रही हैं

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को 12 से 20 प्रतिशत तक ले जाने के लिए विभिन्न गतिविधियां जारी हैं। कुछ माह बाद किसानों को दिन में ही पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराई जाएगी। लाड़ली बहना योजना और किसान सम्मान निधि से हमारे भाई-बहनों का जीवन स्तर उन्नत हुआ है। बड़ी राशि की सब्सिडी के माध्यम से किसानों को सिंचाई के लिए पांच, सात और दस हॉर्स पॉवर के बिजली पंपों की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। यह राज्य सरकार का किसानों के लिए सहयोग है। किसानों को राज्य सरकार की ओर से अनेक सौगातें उपलब्ध कराई जा रही हैं। सांदीपनि विद्यालय के साथ-साथ प्राथमिक और माध्यमिक शालाओं को भी बेहतर किया जा रहा है। किसानों की आने वाली पीढ़ी की सुरक्षा और उनके संवर्धन के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों को दी आगामी त्यौहारों की बधाई

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जन्माष्टमी, बलराम जयंती, रक्षाबंधन आदि त्यौहारों की बधाई दीं। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने अशोकनगर के बलराम कृषि महोत्सव में उपस्थित कृषकों से वर्चुअली संवाद किया। विधायक हेमंत खंडेलवाल तथा किसान जयपाल चावड़ा भी उपस्थित थे। विधायक बृजेंद्र सिंह यादव, किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष धर्मवीर रघुवंशी ने अशोक नगर को विभिन्न सौगातें देने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार माना।

रक्षाबंधन 2026: 27 को पूर्णिमा, फिर 28 को ही क्यों बंधेगी राखी? जानें सही तिथि और शुभ मुहूर्त

रक्षाबंधन 2026: 27 को पूर्णिमा, फिर 28 को ही क्यों बंधेगी राखी? जानें सही तिथि और शुभ मुहूर्त

 नई दिल्ली। भाई-बहन के अटूट प्रेम, स्नेह और विश्वास का पर्व रक्षाबंधन 2026 इस बार 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा। रक्षाबंधन की तारीख को लेकर इस बार लोगों के बीच काफी असमंजस है, क्योंकि सावन पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह से शुरू होगी और 28 अगस्त की सुबह तक रहेगी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि, आखिर राखी 27 अगस्त को बांधी जाएगी या 28 अगस्त को.पंचांग गणना के अनुसार, 28 अगस्त को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि विद्यमान रहेगी। इसी वजह से उदयातिथि के आधार पर रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त को मनाना शुभ माना जा रहा है। ऐसे में 27 अगस्त को राखी बांधने को लेकर भ्रमित होने की जरूरत नहीं है।

28 अगस्त को मनाया जाएगा रक्षाबंधन:
हिंदू पंचांग के अनुसार, सावन पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त 2026 की सुबह करीब 9:08 बजे शुरू होगी और 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे तक रहेगी। चूंकि 28 अगस्त को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए उदयातिथि के नियम के अनुसार इसी दिन रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएगा।
यानी इस वर्ष 27 अगस्त को पूर्णिमा तिथि शुरू होने के बावजूद रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा।

राखी बांधने का शुभ समय:
रक्षाबंधन के दिन भाई की कलाई पर राखी बांधने के लिए सुबह का समय विशेष माना जा रहा है।
पहला शुभ समय:
सुबह 5:57 बजे से सुबह 9:48 बजे तक
दूसरा शुभ समय:
दोपहर 1:52 बजे से शाम 4:35 बजे तक
इस दौरान बहनें भाई की पूजा कर रक्षासूत्र बांध सकती हैं।

रक्षाबंधन पर राहुकाल का समय:
सुबह 10:46 बजे से दोपहर 12:22 बजे तक रहेगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में राखी बांधने से बचने की सलाह दी जाती है।

क्या 28 अगस्त को भद्रा है?
रक्षाबंधन के दिन भद्रा को लेकर भी लोगों के मन में सवाल रहता है। उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार 28 अगस्त को भद्रा नहीं है। इसलिए इस दिन भद्रा के कारण राखी बांधने को लेकर किसी तरह की रोक नहीं बताई गई है।

रक्षाबंधन पर कैसे करें पूजा और राखी बांधने की रस्म?
*रक्षाबंधन के दिन सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर घर की साफ-सफाई करें। इसके बाद पूजा स्थल पर भगवान की पूजा करें और राखी बांधने के लिए पूजा की थाली तैयार करें।
*राखी हमेशा शुभ मुहूर्त देखकर बांधना बेहतर माना जाता है।
*पूजा की थाली में रोली या कुमकुम, अक्षत, दीपक, मिठाई और राखी रखें।
*भाई को तिलक लगाने के बाद अक्षत लगाएं और आरती करें।
*इसके बाद भाई की कलाई पर राखी बांधें।
*राखी बांधने के बाद मिठाई खिलाएं।
*भाई अपनी बहन को उपहार देकर उसके सुख और सम्मान की कामना करे।
*राहुकाल के दौरान राखी बांधने से बचें।

रक्षाबंधन 2026 को लेकर 27 और 28 अगस्त की तारीख का जो कन्फ्यूजन है, उसे दूर कर लें। उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार इस वर्ष रक्षाबंधन 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा। पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह तक रहेगी और 28 अगस्त को सूर्योदय के समय पूर्णिमा होने के कारण उदयातिथि के अनुसार इसी दिन पर्व मनाना शुभ माना गया है। राखी बांधने के लिए सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक का समय विशेष बताया गया है। इसके अलावा दोपहर 1:52 बजे से शाम 4:35 बजे तक भी राखी बांधी जा सकती है। वहीं सुबह 10:46 बजे से दोपहर 12:22 बजे तक राहुकाल रहेगा, इसलिए इस अवधि में राखी बांधने से बचने की सलाह दी जाती है।

मोदी कैबिनेट की बैठक में देश के लिए पांच बड़े फैसले, 13,041 करोड़ रुपये होंगे खर्च

मोदी कैबिनेट की बैठक में देश के लिए पांच बड़े फैसले, 13,041 करोड़ रुपये होंगे खर्च

 नई दिल्ली।  देश की बुनियादी ढांचे यानी फाउंडेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने बुधवार को बड़ा कदम उठाया है। कैबिनेट की बैठक के बाद प्रेस को जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में देश के लिए पांच बहुत ही महत्वपूर्ण और बड़े फैसले लिए गए हैं। इन सभी प्रोजेक्ट्स की कुल लागत 13041 करोड़ रुपये है।

समझिए किन प्रोजेक्ट्स को मिली मंजूरी?

बुधवार को मोदी कैबिनेट द्वारा मंजूर किए गए इन पांच प्रोजेक्ट्स में से चार रेलवे से और एक हाईवे से जुड़ा हुआ है।

हावड़ा-चेन्नई मुख्य मार्ग का चौहरीकरण- देश के इस बेहद अहम मुख्य रेल मार्ग पर यातायात को सुगम और तेज बनाने के लिए रेलवे लाइन के चौहरीकरण का बड़ा फैसला लिया गया है।

कटक से पारादीप रेल लाइन- इस रूट पर क्षमता बढ़ाने के लिए तीसरी और चौथी रेलवे लाइन बिछाने के प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई है।

अन्य दो रेलवे प्रोजेक्ट्स- रेल नेटवर्क को और अधिक मजबूत करने के लिए दो अन्य महत्वपूर्ण रेलवे परियोजनाओं को भी हरी झंडी दिखाई गई है।

मुजफ्फरपुर-नेपाल बॉर्डर हाईवे प्रोजेक्ट- पांचवां प्रोजेक्ट सड़क परिवहन से जुड़ा है, जिसके तहत बिहार में मुजफ्फरपुर से सीतामढ़ी होते हुए नेपाल सीमा तक जाने वाले सोनबरसा मार्ग पर फोर लेन हाईवे का निर्माण किया जाएगा।

देश के विकास को मिलेगी रफ्तार
सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से देश के अलग-अलग हिस्सों में कनेक्टिविटी बेहतर होगी, व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और आम लोगों का सफर सुगम तथा तेज हो जाएगा। बुनियादी ढांचे के विकास की दृष्टि से मोदी सरकार का यह एक और बड़ा और अहम कदम है।

सेना देश की रक्षा करती है, उसे राजनीतिक विवादों में न घसीटें: किरेन रिजिजू

सेना देश की रक्षा करती है, उसे राजनीतिक विवादों में न घसीटें: किरेन रिजिजू

 केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को कई अहम मुद्दों पर खुलकर सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि सेना देश की रक्षा करती है और उसे राजनीतिक विवादों में नहीं घसीटना चाहिए। रिजिजू ने चीन सीमा विवाद, राहुल गांधी के बयानों, संसद में हंगामे और अन्य विषयों पर खुलकर अपनी बात रखी।

चीन के 60 किलोमीटर घुसपैठ के दावे को किया खारिज 

राहुल गांधी के इस दावे पर कि चीन भारत में 60 किलोमीटर अंदर तक घुस गया है, रिजिजू ने कहा कि यह बिल्कुल गलत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अरुणाचल प्रदेश में सीमा का कई इलाकों में स्पष्ट सीमांकन नहीं हुआ है। यह कोई नया मुद्दा नहीं है। रिजिजू ने याद दिलाया कि पहले कांग्रेस सरकार के समय चीन ने अपनी तरफ सड़कें और बुनियादी ढांचा तेजी से विकसित किया, जबकि भारत की नीति सीमा क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर न बनाने की थी। तत्कालीन रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी ने भी संसद में इसकी पुष्टि की थी। 2014 के बाद मोदी सरकार ने नीति बदली और सीमा क्षेत्रों में सड़क निर्माण तेज किया। ताकसिंग तक सड़क संपर्क 2019 में पूरा हुआ। उन्होंने जोर दिया कि चीन ने भारतीय गांवों पर कब्जा नहीं किया है और आईटीबीपी की पेट्रोलिंग पहले से मजबूत हुई है।

सेना को राजनीति से दूर रखने की अपील

रिजिजू ने कहा कि सेना के जनरल के लिए ‘सड़क छाप’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल बेहद आपत्तिजनक है। कांग्रेस नेताओं को ऐसी भाषा पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। सेना देश की रक्षा करती है, उसे राजनीतिक विवादों में नहीं घसीटना चाहिए।

‘दिमागी नक्सल’ शब्द पर सफाई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस्तेमाल किए गए ‘दिमागी नक्सल’ शब्द पर उन्होंने कहा कि यह उन लोगों के लिए है जो संविधान के खिलाफ काम करते हैं। हथियारबंद नक्सलवाद लगभग समाप्त हो चुका है, लेकिन कुछ लोग माओवादी विचारधारा से जुड़े होकर जवानों की मौत पर जश्न मनाते हैं।

संसद हंगामा और अमित शाह पर टिप्पणी

विपक्ष के इस आरोप पर कि गृह मंत्री अमित शाह संसद नहीं आए, रिजिजू ने कहा कि शाह सुबह से रात तक संसद में रहते थे। विपक्ष ने सिर्फ अफवाह फैलाई। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी कांग्रेस सांसदों के गाली-गलौज और हंगामे को रोक सकते हैं। कोई भी नेता संविधान के खिलाफ अराजकता पैदा करे तो उसका समर्थन नहीं करना चाहिए।

अन्य मुद्दों पर सरकार का पक्ष

परिसीमन: सरकार कांग्रेस से समर्थन मांग रही है। सकारात्मक रुख आने पर सहयोग संभव है। 
वंदे मातरम: यह राष्ट्रीय गीत है। हर भारतीय को इसका सम्मान करना चाहिए। 
अभिजीत दिपके प्रकरण: आम आदमी पार्टी ने चुनाव हारने के बाद छात्रों को आगे बढ़ाया। केंद्र सरकार छात्रों की चिंताओं को सुनती है, लेकिन राजनीतिक लाभ नहीं उठाना चाहिए। 
विशेषाधिकार नोटिस: नियमों का उल्लंघन होने पर जारी किया जाता है। 
विपक्षी गठबंधन: फिलहाल विपक्ष बंटा हुआ है और आत्मविश्वास की कमी झेल रहा है। चुनाव न जीत पाने की हताशा संसद में निकालता है।

रिजिजू ने इटली की प्रधानमंत्री पर संदीप दीक्षित की टिप्पणी को लेकर कहा कि प्रधानमंत्री पूरे देश के होते हैं। उनका मजाक उड़ाने से देश की बदनामी होती है।

सीएम मोहन यादव ने लाड़ली बहनाओं के खातों में रक्षाबंधन गिफ्ट के साथ 1750 रुपए किए ट्रांसफर

सीएम मोहन यादव ने लाड़ली बहनाओं के खातों में रक्षाबंधन गिफ्ट के साथ 1750 रुपए किए ट्रांसफर

 मध्य प्रदेश- मध्य प्रदेश के मैहर जिले में राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बुधवार को लाड़ली बहनाओं को रक्षाबंधन के गिफ्ट के तौर पर ढाई सौ रुपए की अधिक राशि प्रदान की और प्रत्येक लाड़ली बहना के खाते में कुल 1750 रुपए ट्रांसफर किए गए। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मैहर में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में प्रदेश की 1 करोड़ 25 लाख 13 हजार से अधिक पात्र बहनों के बैंक खातों में सिंगल क्लिक से 2,148 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का अंतरण किया ।

इससे पहले मुख्यमंत्री यादव ने मां शारदा के दर्शन किए और लाडली बहनाओं पर पुष्प वर्षा की। मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना की 39वीं किस्त के रूप में 1,500 रुपए प्रति हितग्राही कुल 1,835.46 करोड़ रुपये से अधिक और रक्षाबंधन के विशेष अवसर पर 250 रुपये प्रति हितग्राही कुल 312.83 करोड़ रुपये से अधिक की अतिरिक्त सहायता अन्तरित की गई। इस प्रकार प्रत्येक लाड़ली बहना के खाते में कुल 1,750 रुपये की संयुक्त राशि सीधे डीबीटी के माध्यम से पहुंची।

राज्य में लाडली बहना योजना की जून 2023 में योजना की शुरुआत की गई थी और अगस्त 2026 तक की कुल 39 किश्तों के माध्यम से लाभार्थी महिलाओं के खातों में 63 हजार 248 करोड़ रुपये की सहायता राशि अंतरित की जा चुकी है। चालू वित्तीय वर्ष 2026-2027 के लिए राज्य सरकार ने इस योजना के लिये 23,882.81 करोड़ रूपये का विस्तृत बजट प्रावधान रखा है।

पीएम मोदी की मुफ्त कोचिंग पहल के क्रियान्वयन को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने समीक्षा बैठक की

पीएम मोदी की मुफ्त कोचिंग पहल के क्रियान्वयन को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने समीक्षा बैठक की

 केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने बुधवार को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग उपलब्ध कराने की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल के क्रियान्वयन को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की।

प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले शनिवार को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपने संबोधन में इस पहल की घोषणा की थी। केंद्रीय मंत्री जोशी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ हुई बैठक का मुख्य मकसद “एक मजबूत राष्ट्रीय मंच बनाना था, जिससे देश भर के छात्रों को उच्च-गुणवत्ता वाली अध्ययन सामग्री, विशेषज्ञों का मार्गदर्शन और व्यवस्थित तैयारी की सुविधा मिल सके”।
प्रधानमंत्री ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के परिवारों पर आर्थिक बोझ कम करने के लिए मुफ़्त ऑनलाइन कोचिंग की घोषणा की थी। पीएम मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा था, “कोचिंग कक्षाएं गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर बोझ हैं। हम विभिन्न परीक्षाओं के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग उपलब्ध कराएंगे।” उन्होंने कहा था, ‘‘हर माता-पिता को लगता है कि अगर वे अपने बच्चे को कोचिंग कक्षा में नहीं भेजते हैं तो उनका परिवार प्रतिष्ठित नहीं माना जाएगा।’’

पीएम- मोदी ने 15 अगस्त 2026 को अपने 80वें स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में गरीब और मध्यमवर्गीय विद्यार्थियों के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग पहल की घोषणा की। इस योजना का उद्देश्य महंगे कोचिंग संस्थानों के आर्थिक बोझ को कम करना और दूरदराज के ग्रामीण छात्रों को डिजिटल माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है।

Cabinet: चार मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स को मंजूरी, पीएम मोदी ने कहा-कनेक्टिविटी को मिलेगा बढ़ावा

Cabinet: चार मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स को मंजूरी, पीएम मोदी ने कहा-कनेक्टिविटी को मिलेगा बढ़ावा

 पीएम मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने बुधवार को रेल मंत्रालय की लगभग 9,450 करोड़ रुपए की कुल लागत वाली चार परियोजनाओं को मंजूरी दी है। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी देते हुए बताया कि इससे आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।

पीएम मोदी ने कहा कि कैबिनेट ने चार मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है, जिससे भारतीय रेलवे नेटवर्क की क्षमता बढ़ेगी और लाखों लोगों को फायदा होगा। इन प्रोजेक्ट्स के कई फायदे होंगे, जैसे- यात्री और माल ढुलाई को मजबूत करना, भीड़-भाड़ कम करना, लॉजिस्टिक्स की बेहतर क्षमता और बेहतर कनेक्टिविटी, व्यापार और पर्यटन।

इन परियोजनाओं में खड़गपुर-भद्रक (रानीताल) चौथी लाइन – 173 किमी (पश्चिम बंगाल और ओडिशा), भद्रक-हरिदासपुर चौथी लाइन – 75 किमी (ओडिशा), गुम्मिडिपूंडी-गुडूर तीसरी और चौथी लाइन – 90 किमी (आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु), और कटक-पारादीप (बडाबन्धा) तीसरी और चौथी लाइन – 72 किमी (ओडिशा) शामिल है।

बढ़ी हुई लाइन क्षमता से आवागमन में उल्लेखनीय सुधार होगा, जिसके परिणामस्वरूप भारतीय रेल की परिचालन दक्षता और सेवा विश्वसनीयता में वृद्धि होगी। इन बहु-ट्रैकिंग प्रस्तावों से परिचालन के सुव्यवस्थित होने और भीड़भाड़ में कमी आने की उम्‍मीद है। ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री मोदी के नए भारत के विजन के अनुरूप हैं, जिसका उद्देश्य क्षेत्र के व्यापक विकास के माध्यम से इस क्षेत्र के लोगों को आत्मनिर्भर बनाना है, जिससे उनके लिए रोजगार/स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अंतर्गत बनाई गई हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य एकीकृत योजना और हितधारकों के परामर्श के माध्यम से मल्‍टी मॉडल कनेक्‍टिविटी और लॉजिस्टिक दक्षता को बढ़ाना है। इन परियोजनाओं से लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित होगी।

पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश राज्यों के 8 जिलों को कवर करने वाली ये 4 परियोजनाएं भारतीय रेल के वर्तमान नेटवर्क को लगभग 410 किलोमीटर तक बढ़ा देंगी। प्रस्तावित मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं से लगभग 6,448 गांवों की कनेक्टिविटी में सुधार होगा, जिनकी आबादी लगभग 60 लाख है।

प्रस्तावित क्षमता वृद्धि से देश भर के कई प्रमुख पर्यटन स्थलों तक रेल कनेक्टिविटी में सुधार होगा, जिसमें कुलडीहा वन्यजीव अभयारण्य, भितरकनिका राष्ट्रीय उद्यान, मां भद्रकाली मंदिर, मां धमराई मंदिर, पंचलिंगेश्वर मंदिर, तलसारी-उदयपुर और चांदीपुर समुद्र तट, पुलिकट झील, नेलपट्टू पक्षी अभयारण्य, भगवान वीरराघव पेरुमल मंदिर, गदा कुजंगा जगन्नाथ मंदिर, सरला मंदिर, धबलेश्वर मंदिर, ललितगिरि (बौद्ध स्थल) आदि शामिल हैं।

प्रस्तावित परियोजनाएं कोयला, लौह अयस्क, सीमेंट, लोहा और इस्पात, कंटेनर, ऑटोमोबाइल, अनाज आदि जैसी वस्तुओं के परिवहन के लिए आवश्यक मार्ग हैं। क्षमता वृद्धि कार्यों से प्रति वर्ष 76 मिलियन टन माल ढुलाई की अतिरिक्त क्षमता प्राप्त होगी। भारतीय रेल के पर्यावरण के अनुकूल और ऊर्जा कुशल परिवहन माध्यम होने के कारण यह जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने और देश की लॉजिस्टिक्‍स लागत को कम करने में सहायक होगी। साथ ही, यह तेल आयात (लगभग 13 करोड़ लीटर) को कम करेगी और कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन (लगभग 65 करोड़ किलोग्राम) को घटाएगी, जो 2.60 करोड़ वृक्षारोपण के बराबर है।

सोशल मीडिया का उपयोग सूचना देने के लिए नहीं, लोगों की चिंताएं सुनने व हल करने में भी करें:राष्ट्रपति

सोशल मीडिया का उपयोग सूचना देने के लिए नहीं, लोगों की चिंताएं सुनने व हल करने में भी करें:राष्ट्रपति

 राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को भारतीय सूचना सेवा (आईआईएस) के अधिकारियों से कहा कि वे सोशल मीडिया मंचों का इस्तेमाल केवल सूचना देने और लोगों से जुड़ने के लिए नहीं, बल्कि उनकी चिंताओं को सुनने, समझने और उनका समाधान करने के लिए भी करें। राष्ट्रपति ने कहा कि सोशल मीडिया ने नागरिकों के सूचना प्राप्त करने, उसे साझा करने और उस पर प्रतिक्रिया देने के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है।

भारतीय सूचना सेवा के प्रशिक्षु अधिकारी राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति से मिलने आए थे। राष्ट्रपति मुर्मू ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘आपको सोशल मीडिया मंचों का इस्तेमाल केवल सूचना देने और लोगों से जुड़ने के लिए नहीं, बल्कि उनकी चिंताओं को सुनने, समझने और उनका जवाब देने के लिए भी करना चाहिए।’’

उन्होंने कहा कि अधिकारी यह सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे कि सरकार की नीतियों, कार्यक्रमों और पहलों की जानकारी लोगों तक स्पष्ट, सटीक और समय पर पहुंचे। राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘इसके साथ ही आपकी जिम्मेदारी लोगों की बात सुनने की भी है। आपको जनता की चिंताओं, उनकी आकांक्षाओं और सुझावों को समझने का प्रयास करना चाहिए। यह सुनिश्चित करना होगा कि जनसंचार प्रभावी और नागरिक केंद्रित हो।’’

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि तेजी से जटिल होते सूचना माहौल में अधिकारियों को तथ्यों और भ्रामक सूचनाओं के बीच अंतर करना होगा। उन्होंने कहा, ‘‘संकट के समय आपको जिम्मेदारी के साथ प्रतिक्रिया देनी चाहिए। आज के दौर में जब गलत सूचनाएं बहुत तेजी से फैलती हैं, तो यह सुनिश्चित करना चाहिए कि नागरिकों को सही और प्रमाणिक जानकारी आसानी से और समय पर उपलब्ध हो।’’

राष्ट्रपति ने नागरिकों के साथ लगातार संवाद बनाए रखने के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि संचार माध्यमों को इस तरह तैयार किया जाना चाहिए कि लोगों से सार्थक दोतरफा संवाद सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि ऐसे माहौल में, जहां सूचनाएं तुरंत फैलती हैं, संचार में हमेशा सटीकता, विश्वसनीयता और जनहित को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

उन्होंने अधिकारियों से नवीनतम तकनीकी साधनों का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करने को कहा। उन्होंने कहा कि नवाचार को नैतिक मूल्यों, मानवीय समझ और जवाबदेही को ध्यान में रखते हुए अपनाना चाहिए। राष्ट्रपति ने कहा कि ऐसे में जब भारत 2047 की ओर बढ़ रहा है भारतीय सूचना सेवा के अधिकारियों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगी।उन्होंने कहा, ‘‘जानकारी रखने वाला नागरिक विकास और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में सक्रिय भागीदारी कर सकता है। मैं आपसे आग्रह करती हूं कि भारत की समृद्ध विविधता को ध्यान में रखते हुए संवेदनशीलता और सहानुभूति के साथ संवाद करें।’’

राष्ट्रपति से भारतीय सांख्यिकी सेवा (आईएसएस) के प्रशिक्षु अधिकारियों ने भी मुलाकात की। राष्ट्रपति ने उन्हें (प्रशिक्षु आईएसएस को) संबोधित करते हुए कहा कि उनका काम अर्थव्यवस्था और समाज के विभिन्न क्षेत्रों में तथ्यों पर आधारित नीतियां बनाने में मदद करेगा। उन्होंने कहा, ‘‘हमेशा याद रखें कि हर आंकड़े के पीछे वास्तविक लोग और उनका जीवन होता है। आपको आंकड़ों को नागरिकों, शोधकर्ताओं और नीति निर्माताओं के लिए अधिक सुलभ बनाना चाहिए।’’

राष्ट्रपति ने कहा कि विश्वसनीय आंकड़े बेहतर शासन की नींव होते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘आज के आंकड़ा आधारित दौर में प्रभावी सार्वजनिक नीतियां काफी हद तक सटीक, समय पर और विश्वसनीय आंकड़ों की उपलब्धता पर निर्भर करती हैं। भारतीय सांख्यिकी सेवा आधिकारिक आंकड़े तैयार करने, उनका विश्लेषण करने और उनकी व्याख्या करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ये आंकड़े हमारे करोड़ों नागरिकों के जीवन को प्रभावित करने वाले फैसलों का आधार बनते हैं।’’

उन्होंने कहा कि देश की सांख्यिकी व्यवस्था डिजिटल तकनीक और आंकड़े जुटाने तथा उनके विश्लेषण के नए तरीकों के माध्यम से महत्वपूर्ण बदलाव के दौर से गुजर रही है। राष्ट्रपति ने कहा कि मशीन लर्निंग और अन्य उभरती तकनीकों के बढ़ते इस्तेमाल से अधिक त्वरित और विस्तृत जानकारी तैयार करने के नए अवसर मिल रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘इन बदलावों के साथ आप पर सांख्यिकीय निष्पक्षता, वस्तुनिष्ठता, गोपनीयता और पेशेवर उत्कृष्टता बनाए रखने की बड़ी जिम्मेदारी भी आती है।’’ मुर्मू ने कहा कि भारतीय सूचना सेवा और भारतीय सांख्यिकी सेवा दोनों का साझा उद्देश्य शासन की गुणवत्ता को मजबूत करना और देश के लोगों की सेवा करना है। उन्होंने कहा, ‘‘प्रभावी संवाद और विश्वसनीय जानकारी जीवंत एवं उत्तरदायी लोकतंत्र के आवश्यक स्तंभ हैं।’’ राष्ट्रपति ने अधिकारियों से अपने फैसलों में विवेकपूर्ण, व्यवहार में संवेदनशील और ईमानदारी बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध रहने को कहा। उन्होंने कहा, ‘‘आपको मिली जिम्मेदारी के साथ लोगों की निष्पक्षता, विनम्रता और समर्पण के साथ सेवा करने की गहरी जिम्मेदारी जुड़ी है। आपका ज्ञान और कौशल महत्वपूर्ण होगा, लेकिन नागरिकों के प्रति आपका चरित्र, प्रतिबद्धता और संवेदनशीलता ही अंततः आपके योगदान को परिभाषित करेगी।’’

चुनावी राज्यों उत्तर प्रदेश, पंजाब और गुजरात के लिए भाजपा प्रभारियों की नियुक्ति

चुनावी राज्यों उत्तर प्रदेश, पंजाब और गुजरात के लिए भाजपा प्रभारियों की नियुक्ति

 भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष नितिन नवीन ने मंगलवार को राज्यसभा सदस्य विनोद तावड़े को उत्तर प्रदेश में पार्टी मामलों का प्रभारी नियुक्त किया और नवनियुक्त राष्ट्रीय सचिव जगदीश ईश्वरभाई पटेल को सह-प्रभारी बनाया।

पार्टी की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, नवनियुक्त भाजपा राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सदस्य सतीश पूनिया को पंजाब में पार्टी मामलों का प्रभारी नियुक्त किया गया है। नवीन ने राज्यसभा सदस्य तरुण चुघ को गुजरात में पार्टी मामलों का प्रभारी बनाया है। भाजपा ने एक परिपत्र में कहा, ‘‘ये नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू होंगी। अन्य राज्यों के प्रभारियों की नियुक्ति उचित समय पर की जाएगी। तब तक वर्तमान प्रभारी व्यवस्था जारी रहेगी।’’

पार्टी सूत्रों के अनुसार, ये नियुक्तियां अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए की गई हैं। पंजाब और उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव अगले वर्ष की शुरुआत में प्रस्तावित हैं, जबकि गुजरात में चुनाव 2027 के उत्तरार्ध में हो सकते हैं।

यह घटनाक्रम भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन द्वारा पार्टी की राष्ट्रीय टीम में व्यापक बदलाव किए जाने के एक दिन बाद सामने आया है। नयी टीम में कई नए चेहरों को शामिल किया गया है। इनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय महासचिव और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के पूर्व पदाधिकारी राम माधव को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है।

नयी टीम में राष्ट्रीय उपाध्यक्षों की संख्या 11 से बढ़ाकर 13 कर दी गई है, जिनमें से नौ नए चेहरे हैं। राष्ट्रीय महासचिवों की कुल संख्या भी बढ़ाकर आठ कर दी गयी है। पिछली टीम के सात राष्ट्रीय महासचिव थे। भाजपा की नयी टीम में 16 राष्ट्रीय सचिव हैं, जबकि पिछली टीम में 11 राष्ट्रीय सचिव थे।
विनोद तावड़े और सुनील बंसल भाजपा की नयी टीम में बरकरार रखे गए केवल दो राष्ट्रीय महासचिव हैं। भाजपा की राजस्थान इकाई के पूर्व अध्यक्ष सतीश पूनिया को आठ राष्ट्रीय महासचिवों वाली नयी टीम में शामिल किए गए नए चेहरों में जगह मिली है।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, तावड़े और बंसल दोनों को संगठन के क्षेत्र में उनके प्रभावशाली काम के लिए सराहते हुए ये पद दिए गए हैं। सूत्रों ने बताया कि पार्टी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत में बंसल के योगदान को विशेष रूप से ध्यान में रखा। भाजपा के राज्यसभा सदस्य तरुण चुघ को राज्यसभा सदस्य अरुण सिंह की जगह पार्टी के केंद्रीय कार्यालय का प्रभारी बनाया गया है।

एमपी सरकार 5 साल में विज्ञान-प्रौद्योगिकी पर 492 करोड़ रुपये करेगी खर्च

एमपी सरकार 5 साल में विज्ञान-प्रौद्योगिकी पर 492 करोड़ रुपये करेगी खर्च

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आगामी पांच वर्षों में 492 करोड़ रुपये खर्च करने का फैसला लिया गया।

लोक निर्माण विभाग के मंत्री राकेश सिंह ने मंत्रिमंडल के फैसलों की जानकारी देते हुए संवाददाताओं को बताया कि इस फैसले से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में मध्यप्रदेश की तस्वीर बदल जाएगी। उन्होंने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री मोहन यादव ने आज (मंगलवार को) विज्ञान-प्रौद्योगिकी को लेकर एक बड़ा फैसला किया। राज्य सरकार विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आगामी पांच वर्षों के लिए 492 करोड़ रुपये से अधिक की योजनाएं संचालित करेगी।’’

सिंह ने कहा कि राज्य सरकार का विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के लिए बजट 734 करोड़ रुपये है और इससे राज्य में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का परिदृश्य बदल जाएगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के लिए महज छह करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान हुआ करता था और यह अंतर स्पष्ट करता है कि कांग्रेस सरकार ने इस क्षेत्र की उपेक्षा की।

उन्होंने कहा कि 80वें स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा लाल किले से घोषित संकल्पों की सिद्धि में मध्यप्रदेश का महत्वपूर्ण योगदान रहेगा।

सिंह ने बताया कि मंत्रिमंडल ने पांच से 15 वर्ष की आयु के बच्चों में छिपी खेल प्रतिभाओं को तलाशने के लिए गांव-गांव और स्कूल-स्कूल प्रतिभा खोज अभियान शुरू करने का भी फैसला किया है। उन्होंने कहा, ‘‘चयनित बच्चों को विशेष प्रशिक्षण देकर बेहतर खिलाड़ी बनाया जाएगा।’’

मंत्री ने बताया कि मंत्रिमंडल ने युवाओं के लिए नि:शुल्क ऑनलाइन कोचिंग की व्यवस्था करने और आने वाले एक वर्ष में एक करोड़ से अधिक युवाओं को कृत्रिम मेधा (एआई) का कौशल प्रशिक्षण देने का भी फैसला किया है।

दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से जो प्रमुख घोषणाएं की थीं, उनमें देश के युवाओं के लिए नि:शुल्क ऑनलाइन कोचिंग की व्यवस्था, उन्हें एआई का कौशल प्रशिक्षण देने, ग्रामीण खेल प्रतिभाओं को निखारने और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर विशेष जोर देने की बातें शामिल थीं।

सिंह ने बताया कि मंत्रिमंडल की बैठक में प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में डिंडोरी जिले के देश में प्रथम स्थान पर आने का भी उल्लेख किया गया।

इस उपलब्धि के लिए डिंडोरी जिले और वहां की पूरी टीम को बधाई दी गई। उन्होंने कहा कि डिंडोरी जिले के सफल मॉडल को प्रदेश के अन्य जिलों में भी लागू किया जाएगा ताकि वे भी योजना के सफल क्रियान्वयन में बेहतर प्रदर्शन कर सकें

ओडिशा में बाढ़ की स्थिति गंभीर, IMD ने और अधिक बारिश का पूर्वानुमान व्यक्त किया

ओडिशा में बाढ़ की स्थिति गंभीर, IMD ने और अधिक बारिश का पूर्वानुमान व्यक्त किया

 बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पश्चिम में बने अवदाब के कारण पिछले 24 घंटे में हुई भारी बारिश से मंगलवार को ओडिशा के उत्तरी जिलों में बाढ़ की स्थिति और गंभीर हो गई। भारी बारिश से कई नदिया उफना गई है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने जाजपुर और भद्रक जिलों के बाढ़ प्रभावित गांवों का दौरा करने के बाद मौजूदा स्थिति की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय बैठक की और तत्काल उठाए जाने वाले कदमों पर चर्चा की। बाढ़ से करीब 9.40 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने अब तक 3.30 लाख प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है।

बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पश्चिम में बना अवदाब अब झारखंड और उससे सटे पश्चिम बंगाल के उत्तरी हिस्सों की ओर बढ़ गया है। हालांकि, भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने मंगलवार को ओडिशा के कुछ हिस्सों में भारी बारिश जारी रहने का पूर्वानुमान जताया है।

आईएमडी ने सुंदरगढ़, झारसुगुड़ा और बरगढ़ जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश के लिए ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है। वहीं, संबलपुर, देवगढ़, क्योंझर, सोनपुर और बलांगीर जिलों के लिए भारी बारिश का ‘येलो अलर्ट’ जारी किया गया है।

मौसम विभाग ने सुंदरगढ़, झारसुगुड़ा, बरगढ़, संबलपुर, देवगढ़, क्योंझर, सोनपुर और बलांगीर जिलों में बिजली कड़कने तथा 30-40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का भी अनुमान जताया है।

ओडिशा तट के पास समुद्र की स्थिति खराब रहने की संभावना को देखते हुए आईएमडी ने मछुआरों को 18 अगस्त को समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी है।

विशेष राहत आयुक्त (एसआरसी) कार्यालय के अनुसार, पिछले 24 घंटे में मयूरभंज जिले के बहलदा में 273 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि रायरंगपुर में 207 मिलीमीटर और बालासोर में 93.1 मिलीमीटर बारिश हुई।

जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता दिलीप कुमार राउत ने कहा कि जाजपुर, भद्रक और केंद्रापड़ा जिलों में बाढ़ का कारण बनी बैतरणी और ब्राह्मणी नदियों का जलस्तर फिलहाल स्थिर है, लेकिन सुंदरगढ़ और झारसुगुड़ा में भारी बारिश के कारण इनके जलस्तर में बढ़ोतरी की संभावना है।

राउत ने बताया कि झारखंड के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण स्वर्णरेखा नदी का जलस्तर भी बढ़ सकता है। इससे बालासोर जिले के बस्ता, बालीपाल और जलेश्वर समेत कई प्रखंडों में बाढ़ का पानी घुस सकता है। उन्होंने कहा, ‘‘झारखंड से छोड़ा गया अतिरिक्त बाढ़ का पानी बुधवार को बालासोर पहुंचने की आशंका है।’’

राउत ने महानदी नदी तंत्र में बाढ़ की संभावना से इनकार करते हुए कहा कि विशेषज्ञों के अनुमान के मुताबिक हीराकुंड बांध के 10 गेटों से पानी छोड़े जाने के बाद कटक के पास मुंडली में करीब चार लाख क्यूसेक पानी बहने की संभावना है। उन्होंने बताया कि हीराकुंड जलाशय में वर्तमान जलस्तर 619.97 फुट है, जबकि इसका पूर्ण जलाशय स्तर 630 फुट है।

इस बीच, राज्य सरकार ने प्रभावित जिलों में राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है। प्रभावित इलाकों में ओडिशा त्वरित कार्य बल (ओडीआरएएफ) की 45 टीमें, एनडीआरएफ की आठ टीमें और अग्निशमन सेवा की 53 इकाइयां तैनात की गई हैं।

नारी शक्ति के साहस का प्रमाण है ‘अपराजिता-परंग ला 2026’: राजनाथ सिंह

नारी शक्ति के साहस का प्रमाण है ‘अपराजिता-परंग ला 2026’: राजनाथ सिंह

 रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज (18 अगस्त 2026) नई दिल्ली में राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) की अखिल भारतीय बालिका उच्च-ऊंचाई वाली दुर्गम पदयात्रा ‘अपराजिता-परंग ला 2026’ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। अभियान के तहत 28 महिला कैडेट हिमालय के चुनौतीपूर्ण इलाकों से होकर 250 किलोमीटर की 30 दिवसीय पदयात्रा करेंगी। यह अभियान परंग ला दर्रे से होकर गुजरेगा, जो 5,578 मीटर (18,300 फीट) की ऊंचाई पर हिमाचल प्रदेश की स्पीति घाटी को लद्दाख के चांगथांग क्षेत्र से जोड़ता है।

तीनों सेनाओं की महिला अधिकारी करेंगी नेतृत्व

अभियान का नेतृत्व तीनों सेनाओं की तीन महिला अधिकारी करेंगी। इसमें 28 कैडेट शामिल हैं, जिनकी औसत आयु 19 वर्ष है। सबसे कम उम्र की प्रतिभागी साढ़े 16 वर्ष की है। रक्षा मंत्री ने इतनी चुनौतीपूर्ण उच्च-ऊंचाई वाली पदयात्रा में युवा महिला कैडेटों की भागीदारी को देश की ‘नारी शक्ति’ के साहस, दृढ़ संकल्प और बढ़ती क्षमताओं का सशक्त प्रमाण बताया।

30 दिनों में तय होगा 250 किलोमीटर का सफर

अधिकारियों, चिकित्सा कर्मियों, प्रशिक्षकों और सहायक कर्मचारियों के साथ अभियान दल करीब 250 किलोमीटर की दूरी 30 दिनों में तय करेगा। अभियान का मार्ग हिमालय के दूरस्थ और चुनौतीपूर्ण इलाकों से होकर गुजरेगा। इसमें किब्बर, दुमला, थलटक, बोंगरोजेन, परंग ला दर्रा, डाक कारज़ोंग, नोर्बू सुम्दो, कियांगडोम और कोरज़ोक जैसे पड़ाव शामिल हैं। दल को उच्च-ऊंचाई वाले रेगिस्तान, ग्लेशियर, बर्फ के मैदान और नदी घाटियों से होकर गुजरना होगा।

साहस और दृढ़ संकल्प का प्रमाण है अभियान

राजनाथ सिंह ने अभियान दल को सुरक्षित और सफल पदयात्रा के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि ऐसे अभियान युवाओं में नेतृत्व क्षमता, मानसिक दृढ़ता, अनुशासन और आत्मविश्वास विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कैडेटों की शारीरिक और मानसिक तैयारी की सराहना करते हुए कहा कि यह अभियान उनके लिए दृढ़ता, आत्मविश्वास और आत्म-खोज का यादगार अनुभव होगा।

सुरक्षा और पर्यावरण को प्राथमिकता देने की अपील

रक्षा मंत्री ने कैडेटों से अभियान के दौरान सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदायों के साथ संपर्क को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। उन्होंने प्रशिक्षकों के निर्देशों का सख्ती से पालन करने और अनावश्यक जोखिमों से बचने की सलाह दी। साथ ही, हिमालयी पर्यावरण की रक्षा के लिए कचरा नहीं फैलाने और स्थानीय समुदायों की संस्कृति एवं परंपराओं का सम्मान करने को कहा।

‘अपराजिता’ बने रहने की प्रेरणा

राजनाथ सिंह ने कहा कि यह अभियान कैडेटों के जीवन में महत्वपूर्ण पड़ाव साबित होगा और उन्हें जीवन के हर क्षेत्र में ‘अपराजिता’ बने रहने की प्रेरणा देगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि कैडेट परंग ला से केवल यादगार अनुभव लेकर नहीं लौटेंगी, बल्कि अपनी आंतरिक शक्ति की गहरी समझ भी हासिल करेंगी।

‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना

रक्षा मंत्री ने भूमि, जल और वायु में साहसिक गतिविधियों में एनसीसी कैडेटों की बढ़ती उपलब्धियों का उल्लेख किया। उन्होंने महिला कैडेटों की भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि विभिन्न एनसीसी निदेशालयों से आई कैडेटों की अलग-अलग भाषाएं, संस्कृतियां और पृष्ठभूमियां साझा मिशन के जरिए ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को प्रदर्शित करती हैं।

दो चरणों में आयोजित हो रहा अभियान

अभियान दो चरणों में आयोजित किया जा रहा है। पहले चरण में भाबा-पिन घाटी क्षेत्र में तैयारी और ऊंचाई के अनुकूलन के लिए ट्रेक आयोजित किया गया। इसके बाद प्रदर्शन और योग्यता के आधार पर एनसीसी महिला कैडेटों की अंतिम टीम का चयन किया गया।

नेतृत्व और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देना लक्ष्य

‘अपराजिता-परंग ला 2026’ का उद्देश्य एनसीसी महिला कैडेटों में नारी शक्ति, नेतृत्व, आत्मविश्वास, टीम वर्क, सहनशक्ति और राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करना है। अभियान के दौरान कैडेटों को चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में सामूहिक निर्णय, अनुशासन और जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ने का अनुभव मिलेगा।

एनसीसी के वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद

इस अवसर पर एनसीसी के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल वीरेंद्र वत्स तथा एनसीसी और रक्षा मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। 

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