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BREAKING NEWS : वीडी सतीशन ने ली केरल के मुख्यमंत्री पद की शपथ, ये नेता रहे मौजूद

BREAKING NEWS : वीडी सतीशन ने ली केरल के मुख्यमंत्री पद की शपथ, ये नेता रहे मौजूद

 कांग्रेस नेता वीडी सतीशन ने केरल के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है. अब 20 विधायक मंत्री पद की शपथ ले रहे हैं.

शपथ ग्रहण समारोह तिरुवनंतपुरम के सेंट्रल स्टेडियम में हो रहा है, जहां पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सांसद प्रियंका गांधी मौजूद हैं. इनके अलावा, कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी उपस्थित हैं.

वीडी सतीशन 6 बार के विधायक हैं और केरल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभा चुके हैं.

वो पहली बार 2001 में विधानसभा के लिए चुने गए और तब से लेकर अब तक पारावुर विधानसभा क्षेत्र से लगातार हर चुनाव जीतते आए हैं.

140 सीटों वाले केरल में यूडीएएफ़ गठबंधन ने 102 सीटों पर जीत दर्ज की थी.

155 करोड़ के बैंक घोटाले में ED का बड़ा एक्शन, 7 ठिकानों पर छापेमारी; AAP नेताओं से जुड़े तार

155 करोड़ के बैंक घोटाले में ED का बड़ा एक्शन, 7 ठिकानों पर छापेमारी; AAP नेताओं से जुड़े तार

 नई दिल्ली।  प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 155 करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी मामले में सोमवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए दिल्ली और गोवा में 7 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई ‘महेश टिम्बर प्राइवेट लिमिटेड’ से जुड़े कथित बैंक फ्रॉड मामले में की जा रही है। जांच एजेंसी ने AAP नेता दीपक सिंगला समेत कई संदिग्धों के घर और कारोबारी परिसरों को निशाने पर लिया है।

ईडी सूत्रों के मुताबिक छापेमारी दीपक सिंगला, महेश सिंगला, अमरीक गिल और अन्य संदिग्धों से जुड़े ठिकानों पर की जा रही है। जांच टीमों ने सुबह-सुबह सभी लोकेशनों पर पहुंचकर दस्तावेज, डिजिटल डेटा और वित्तीय रिकॉर्ड खंगालने शुरू कर दिए। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर किस तरह बैंकों से करोड़ों रुपये का लोन लेकर कथित हेराफेरी की गई।

जांच में पंजाब सरकार के गिरफ्तार मंत्री संजीव अरोड़ा के नाम की भी चर्चा सामने आई है। सूत्रों का दावा है कि इस बैंक फ्रॉड केस के तार संजीव अरोड़ा और उनके करीबियों से जुड़े हो सकते हैं। इससे आम आदमी पार्टी की राजनीतिक मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं।

बताया जा रहा है कि महेश टिम्बर प्राइवेट लिमिटेड पर कई बैंकों से करीब 155 करोड़ रुपये का लोन लेने के बाद वित्तीय अनियमितता और धोखाधड़ी करने का आरोप है। बैंकों को भारी नुकसान पहुंचाने के आरोप में पहले ही केस दर्ज किया जा चुका है। अब ईडी मनी लॉन्ड्रिंग और फंड ट्रांजैक्शन की जांच कर रही है।

फिलहाल एजेंसी की कार्रवाई जारी है और आने वाले समय में इस मामले में कई बड़े खुलासे हो सकते हैं। राजनीतिक गलियारों में भी इस रेड को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

PM मोदी को मिला 31वां अंतरराष्ट्रीय सम्मान, स्वीडन ने दिया सर्वोच्च ‘पोलर स्टार’ अवॉर्ड

PM मोदी को मिला 31वां अंतरराष्ट्रीय सम्मान, स्वीडन ने दिया सर्वोच्च ‘पोलर स्टार’ अवॉर्ड

 नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को स्वीडन की ओर से प्रतिष्ठित ‘रॉयल ऑर्डर ऑफ पोलर स्टार कमांडर ग्रैंड क्रॉस’ सम्मान प्रदान किया गया है। यह सम्मान उन्हें गोथेनबर्ग यात्रा के दौरान दिया गया। इसके साथ ही पीएम मोदी को मिलने वाले अंतरराष्ट्रीय सम्मानों की संख्या बढ़कर 31 हो गई है।

स्वीडन सरकार ने यह सम्मान भारत और स्वीडन के बीच व्यापार, प्रौद्योगिकी, नवाचार और स्थिरता जैसे क्षेत्रों में मजबूत सहयोग को मान्यता देते हुए प्रदान किया। दोनों देशों के रिश्तों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने और वैश्विक साझेदारी को मजबूत करने में पीएम मोदी की भूमिका को भी इस सम्मान के जरिए सराहा गया।

रॉयल ऑर्डर ऑफ पोलर स्टार’ स्वीडन का बेहद प्रतिष्ठित सम्मान माना जाता है, जो आमतौर पर विदेशी राष्ट्राध्यक्षों, राजनयिकों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष योगदान देने वाले व्यक्तियों को दिया जाता है। प्रधानमंत्री मोदी इससे पहले भी अमेरिका, फ्रांस, रूस, यूएई, मिस्र, ग्रीस और कई अन्य देशों के सर्वोच्च सम्मानों से सम्मानित हो चुके हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह सम्मान वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती ताकत और प्रधानमंत्री मोदी की अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता को दर्शाता है। हाल के वर्षों में भारत-स्वीडन संबंधों में तेजी आई है, खासकर हरित ऊर्जा, टेक्नोलॉजी, रक्षा और सतत विकास के क्षेत्रों में दोनों देशों की साझेदारी मजबूत हुई है।

भारत अवसरों की भूमि है, जो तकनीक और मानवता दोनों से प्रेरित है: प्रधानमंत्री मोदी

भारत अवसरों की भूमि है, जो तकनीक और मानवता दोनों से प्रेरित है: प्रधानमंत्री मोदी

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को भारत को अवसरों की धरती बताते हुए कहा कि देश तकनीक और मानवता, दोनों की ताकत से आगे बढ़ रहा है। द हेग में भारतीय प्रवासी समुदाय को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया इस समय कई चुनौतियों का सामना कर रही है, ऐसे दौर में भारत नवाचार, आर्थिक विकास और वैश्विक सहयोग की एक अहम ताकत बनकर उभर रहा है। उन्होंने कहा, “भारत अवसरों की धरती है, जो तकनीक और मानवता दोनों से प्रेरित है।”

प्रधानमंत्री ने कोविड-19 महामारी और दुनिया में जारी संघर्षों का जिक्र करते हुए कहा, “यह दशक दुनिया के लिए चुनौतियों का दशक बनता जा रहा है।” उन्होंने उभरती भू-राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितताओं से निपटने के लिए मजबूत अंतरराष्ट्रीय समन्वय और साझेदारी की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा, “भारत और नीदरलैंड ऊर्जा सुरक्षा और जल सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में लगातार सहयोग बढ़ा रहे हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि दोनों देश वैश्विक स्तर पर और अधिक करीब से काम कर सकते हैं और बड़े अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स हासिल करने के लिए मिलकर सहयोग कर सकते हैं। यूरोप के साथ भारत की बढ़ती आर्थिक भागीदारी का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रस्तावित भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) दोनों पक्षों के संबंधों को और मजबूत करेगा। उन्होंने कहा, “नीदरलैंड उन भारतीय व्यवसायों के लिए एक स्वाभाविक प्रवेश द्वार बन सकता है जो यूरोप में विस्तार करना चाहते हैं।”

प्रधानमंत्री ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने में भारतीय प्रवासी समुदाय की भूमिका की भी सराहना की और कहा कि यह समुदाय दोनों देशों के बीच एक भरोसेमंद सेतु का काम करता है और लोगों के बीच संबंधों और आर्थिक सहयोग को बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान देता है। उत्साहित भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वहां मिले प्यार और उत्साह ने उन्हें ऐसा महसूस कराया जैसे वह भारत के किसी उत्सव में शामिल हों। उन्होंने कहा, “इतना प्यार और उत्साह देखकर मैं कुछ पल के लिए भूल गया कि मैं नीदरलैंड में हूं।” प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि द हेग अब भारत-नीदरलैंड दोस्ती का जीवंत प्रतीक बन चुका ।

अमित शाह करेंगे मधुर डेयरी यूनिट-2 का उद्घाटन, डेयरी किसानों को मिलेगा बड़ा लाभ

अमित शाह करेंगे मधुर डेयरी यूनिट-2 का उद्घाटन, डेयरी किसानों को मिलेगा बड़ा लाभ

 केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह 17 मई, 2026 को गुजरात के गांधीनगर स्थित दशेला में मधुर डेयरी यूनिट-2 स्वचालित दुग्ध प्रसंस्करण एवं पैकेजिंग संयंत्र का उद्घाटन करेंगे। यह परियोजना सहकारी डेयरी अवसंरचना को मजबूत करने और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

“सहकार से समृद्धि” विज़न को मिलेगा बल

माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “सहकार से समृद्धि” मंत्र के तहत सहकारिता मंत्रालय आधुनिक अवसंरचना, तकनीक आधारित प्रणालियों और किसान-केंद्रित पहलों के जरिए देशभर में सहकारी पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में जुटा है। इसी कड़ी में मधुर डेयरी यूनिट-2 की स्थापना को अहम पहल माना जा रहा है। इस अवसर पर गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्रभाई पटेल, उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति भी मौजूद रहेंगे।

दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता में होगी बढ़ोतरी

नई डेयरी यूनिट के शुरू होने से क्षेत्र में दुग्ध प्रसंस्करण और पैकेजिंग क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। इससे सहकारी डेयरी नेटवर्क को मजबूती मिलेगी और दुग्ध उत्पादकों को उनके उत्पाद का बेहतर मूल्य प्राप्त हो सकेगा। सरकार के अनुसार, यह परियोजना उन्नत प्रौद्योगिकी, गुणवत्ता आश्वासन प्रणालियों और आधुनिक प्रसंस्करण अवसंरचना के जरिए डेयरी सहकारी पारिस्थितिकी तंत्र के आधुनिकीकरण की दिशा में बड़ा कदम है।

संयंत्र का करेंगे औपचारिक उद्घाटन

कार्यक्रम के दौरान अमित शाह मधुर डेयरी यूनिट-2 की शिलापट्टिका का अनावरण करेंगे और दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र तथा व्यूइंग गैलरी का अवलोकन करेंगे। इसके अलावा वे नियंत्रण कक्ष से परिचालन प्रणालियों का शुभारंभ कर संयंत्र का औपचारिक उद्घाटन भी करेंगे।

महिला दुग्ध उत्पादकों का होगा सम्मान

उद्घाटन समारोह में डेयरी सहकारी संस्थाओं से जुड़ी महिला दुग्ध उत्पादक अमित शाह को मधुर डेयरी उत्पाद किट भेंट कर सम्मानित करेंगी। इसे भारत के सहकारी डेयरी आंदोलन में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और भूमिका का प्रतीक माना जा रहा है।

दुग्ध उत्पादक मंडलियों को वितरित होंगे प्रमाणपत्र

कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री द्वारा दुग्ध उत्पादक मंडलियों के प्रतिनिधियों को प्रमाणपत्र भी वितरित किए जाएंगे। सरकार का मानना है कि इससे जमीनी स्तर की डेयरी सहकारी संस्थाओं को मजबूती मिलेगी और आधुनिक अवसंरचना के जरिए दुग्ध उत्पादकों को अधिक अवसर प्राप्त होंगे।

ग्रामीण विकास और किसानों की आय पर रहेगा फोकस

मधुर डेयरी यूनिट-2 का उद्घाटन सहकारिता आधारित ग्रामीण विकास को गति देने, डेयरी किसानों के लिए बेहतर आजीविका अवसर सृजित करने और आधुनिक एवं सतत सहकारी मॉडल के जरिए भारत की डेयरी मूल्य श्रृंखला को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाएगा। 

विश्व दूरसंचार दिवस : डिजिटल क्रांति, वैश्विक संवाद और मानव सभ्यता का नया युग

विश्व दूरसंचार दिवस : डिजिटल क्रांति, वैश्विक संवाद और मानव सभ्यता का नया युग

 मानव सभ्यता का इतिहास वस्तुतः संचार के विकास का इतिहास है। आदिम मानव ने जब पहली बार गुफाओं की दीवारों पर चित्र उकेरे, धुएं के संकेतों का प्रयोग किया अथवा ध्वनियों के माध्यम से संदेश देने का प्रयास किया, तभी से संवाद की यात्रा आरम्भ हो चुकी थी। समय के साथ यह यात्रा कबूतरों, दूतों, टेलीग्राफ, टेलीफोन, रेडियो और टेलीविजन से आगे बढ़ते हुए इंटरनेट, स्मार्टफोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और क्वांटम संचार के युग तक पहुंच गई। आज मनुष्य केवल संवाद नहीं करता, बल्कि एक विशाल डिजिटल नेटवर्क का सक्रिय हिस्सा बन चुका है। इसी ऐतिहासिक और तकनीकी परिवर्तन की स्मृति तथा उसके वैश्विक महत्व को रेखांकित करने के लिए प्रतिवर्ष 17 मई को “विश्व दूरसंचार एवं सूचना समाज दिवस” मनाया जाता है। यह दिवस केवल तकनीकी उपलब्धियों का उत्सव नहीं, बल्कि उस वैश्विक परिवर्तन का प्रतीक है जिसने पृथ्वी को “वैश्विक ग्राम” से आगे बढ़ाकर “डिजिटल सभ्यता” में रूपांतरित कर दिया है।

आज सूचना शक्ति का सबसे प्रभावशाली स्रोत बन चुकी है। आधुनिक विश्व में राजनीतिक प्रभाव, आर्थिक वर्चस्व, सांस्कृतिक विस्तार और सामरिक क्षमता का निर्धारण बड़ी सीमा तक सूचना और संचार तकनीकों के नियंत्रण से हो रहा है। इसलिए कहा जाने लगा है कि “डेटा ही नया तेल है।” जिस प्रकार औद्योगिक युग में तेल आर्थिक शक्ति का आधार था, उसी प्रकार डिजिटल युग में डेटा और संचार अवसंरचना वैश्विक शक्ति-संतुलन को निर्धारित कर रहे हैं। डिजिटल क्रांति ने मानव जीवन को अभूतपूर्व गति प्रदान की है। इंटरनेट और मोबाइल तकनीक ने समय और दूरी की पारंपरिक सीमाओं को लगभग समाप्त कर दिया है। शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार, प्रशासन, राजनीति, संस्कृति और मनोरंजन जीवन का कोई क्षेत्र ऐसा नहीं बचा है जो दूरसंचार तकनीक से प्रभावित न हुआ हो। कोविड-19 महामारी के दौरान यह स्पष्ट रूप से दिखाई दिया कि डिजिटल संचार आधुनिक समाज की जीवन रेखा बन चुका है।

हालांकि, यह विकास केवल संभावनाएं ही नहीं लाया है; इसके साथ अनेक गंभीर चुनौतियां भी उभरी हैं। साइबर अपराध, डेटा गोपनीयता संकट, फेक न्यूज, डिजिटल लत, एल्गोरिद्मिक नियंत्रण और डिजिटल असमानता आधुनिक समाज के समक्ष नए प्रश्न खड़े कर रहे हैं।तकनीक जितनी अधिक शक्तिशाली होती जा रही है, उतनी ही अधिक नैतिक और मानवीय जिम्मेदारियां भी बढ़ रही हैं।विश्व दूरसंचार दिवस हमें यह विचार करने का अवसर देता है कि तकनीकी प्रगति का अंतिम उद्देश्य क्या होना चाहिए। क्या तकनीक केवल सुविधा और लाभ का माध्यम है, या वह मानवता के समग्र विकास, समानता और वैश्विक सहयोग का आधार भी बन सकती है? यही प्रश्न इस दिवस को केवल तकनीकी आयोजन न बनाकर एक गहन सभ्यतागत विमर्श में परिवर्तित कर देता है।

विश्व दूरसंचार दिवस का इतिहास : वैश्विक संवाद की संस्थागत यात्रा

विश्व दूरसंचार दिवस का इतिहास 17 मई 1865 से प्रारंभ होता है, जब पेरिस में “अंतरराष्ट्रीय टेलीग्राफ संघ” (International Telegraph Union) की स्थापना हुई। उस समय टेलीग्राफ आधुनिक संचार का सबसे तेज माध्यम था और विभिन्न देशों के बीच संदेशों के आदान-प्रदान हेतु एक अंतरराष्ट्रीय समन्वय की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। इसी उद्देश्य से इस संगठन की स्थापना की गई। बाद में यही संस्था “अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ” (International Telecommunication Union – ITU) के रूप में विकसित हुई। 1947 में ITU संयुक्त राष्ट्र की विशेष एजेंसी बन गई। यह विश्व की सबसे पुरानी अंतरराष्ट्रीय तकनीकी संस्थाओं में से एक है, जिसने वैश्विक संचार व्यवस्था को व्यवस्थित और समन्वित बनाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई।

21वीं सदी में जब इंटरनेट और डिजिटल तकनीकों का प्रभाव तीव्र गति से बढ़ने लगा, तब संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2005 में “सूचना समाज” (Information Society) की अवधारणा को वैश्विक महत्व प्रदान किया। इसके बाद इस दिवस को “World Telecommunication and Information Society Day (WTISD)” के रूप में व्यापक पहचान मिली। इसका उद्देश्य केवल दूरसंचार तकनीक का प्रचार नहीं, बल्कि सूचना और डिजिटल तकनीकों के सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक प्रभावों पर वैश्विक विमर्श को प्रोत्साहित करना है।

हर वर्ष इस दिवस के लिए एक विशेष थीम निर्धारित की जाती है। इन थीमों के माध्यम से डिजिटल समावेशन, सतत विकास, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, लैंगिक समानता, साइबर सुरक्षा और नवाचार जैसे समकालीन विषयों पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि दूरसंचार अब केवल तकनीकी विषय नहीं रह गया, बल्कि मानव विकास और वैश्विक शासन का केंद्रीय तत्व बन चुका है।

दूरसंचार का विकास : संकेतों से कृत्रिम बुद्धिमत्ता तक

मानव इतिहास में संचार के साधनों का विकास निरंतर होता रहा है। प्रारंभिक काल में संदेशों के लिए धुआं संकेत, ढोल, कबूतर और दूतों का प्रयोग किया जाता था। इन साधनों की सीमाएं स्पष्ट थीं , वे धीमे, असुरक्षित और सीमित दूरी तक प्रभावी थे। 19वीं शताब्दी में सैमुअल मोर्स द्वारा टेलीग्राफ के आविष्कार ने संचार इतिहास में क्रांति ला दी। पहली बार संदेशों को विद्युत संकेतों के माध्यम से लंबी दूरी तक तेजी से भेजा जाने लगा। इसके बाद अलेक्जेंडर ग्राहम बेल द्वारा टेलीफोन का आविष्कार मानव संवाद के इतिहास की ऐतिहासिक घटना सिद्ध हुआ। अब केवल लिखित संदेश ही नहीं, बल्कि मानव आवाज भी हजारों किलोमीटर दूर तक पहुंचने लगी।

20वीं शताब्दी में रेडियो और टेलीविजन ने जनसंचार को नई दिशा दी। रेडियो ने सूचना और मनोरंजन को व्यापक जनसमूह तक पहुंचाया, जबकि टेलीविजन ने दृश्य और श्रव्य माध्यमों को जोड़कर संचार को अधिक प्रभावशाली बनाया। राजनीति, संस्कृति, युद्ध और जनमत निर्माण पर इन माध्यमों का गहरा प्रभाव पड़ा। इसके बाद उपग्रह संचार का विकास हुआ, जिसने वैश्विक प्रसारण और अंतरराष्ट्रीय संपर्क को अभूतपूर्व गति प्रदान की। अंतरिक्ष में स्थापित उपग्रहों ने पृथ्वी को वास्तविक अर्थों में जोड़ना प्रारंभ किया। इंटरनेट का आगमन आधुनिक सूचना क्रांति का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ। इंटरनेट ने ज्ञान, व्यापार, प्रशासन और सामाजिक संबंधों की पूरी संरचना बदल दी। ईमेल, वेबसाइट, सर्च इंजन और सोशल मीडिया ने सूचना के आदान-प्रदान को लोकतांत्रिक बना दिया।

21वीं सदी में स्मार्टफोन ने संचार को व्यक्ति-केंद्रित बना दिया। अब एक मोबाइल फोन केवल संवाद का साधन नहीं, बल्कि बैंक, बाजार, विद्यालय, कार्यालय और मनोरंजन केंद्र का रूप ले चुका है। आज विश्व 5G और 6G तकनीक की ओर अग्रसर है। इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग और क्वांटम संचार जैसी तकनीकें भविष्य की डिजिटल सभ्यता की आधारशिला बन रही हैं। आने वाले समय में मशीनें स्वयं संवाद करेंगी, निर्णय लेंगी और मानव जीवन के अनेक क्षेत्रों को संचालित करेंगी।

भारत में दूरसंचार का विकास : सीमित सेवाओं से डिजिटल महाशक्ति तक

भारत में दूरसंचार का प्रारंभ औपनिवेशिक काल में टेलीग्राफ प्रणाली से हुआ। ब्रिटिश शासन ने प्रशासनिक नियंत्रण और सैन्य उद्देश्यों के लिए संचार नेटवर्क का विस्तार किया। स्वतंत्रता के बाद दूरभाष सेवाओं का विस्तार आरंभ हुआ, पर लंबे समय तक यह सुविधा केवल सीमित वर्ग तक ही उपलब्ध रही। एक समय ऐसा था जब टेलीफोन कनेक्शन प्राप्त करने के लिए लोगों को वर्षों तक प्रतीक्षा करनी पड़ती थी। दूरसंचार सेवाएं महंगी और सीमित थीं। लेकिन 1991 के आर्थिक उदारीकरण के बाद भारतीय दूरसंचार क्षेत्र में ऐतिहासिक परिवर्तन आया।निजी कंपनियों के प्रवेश, प्रतिस्पर्धा और तकनीकी नवाचार ने भारत में मोबाइल क्रांति को जन्म दिया। मोबाइल फोन धीरे-धीरे आम नागरिक की पहुंच में आने लगे। कॉल दरों में कमी और इंटरनेट सेवाओं के विस्तार ने भारत को दुनिया के सबसे बड़े दूरसंचार बाजारों में परिवर्तित कर दिया।

आज भारत विश्व के सबसे बड़े मोबाइल और इंटरनेट उपभोक्ता देशों में शामिल है। ग्रामीण क्षेत्रों तक भी डिजिटल सेवाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है। सरकार की “डिजिटल इंडिया”, “भारतनेट” और “5G मिशन” जैसी योजनाओं ने डिजिटल अवसंरचना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भारतनेट परियोजना का उद्देश्य देश के गांवों तक ब्रॉडबैंड इंटरनेट पहुंचाना है। यह केवल तकनीकी परियोजना नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन का माध्यम भी है। इसके माध्यम से ग्रामीण भारत को शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रशासन और डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।UPI आधारित डिजिटल भुगतान प्रणाली ने भारतीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी है। आज मोबाइल फोन केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि वित्तीय लेन-देन, पहचान और व्यापार का प्रमुख उपकरण बन चुका है। भारत की डिजिटल भुगतान व्यवस्था विश्व के लिए मॉडल बन रही है।

डिजिटल इंडिया : प्रशासन और समाज का डिजिटल रूपांतरण

“डिजिटल इंडिया” कार्यक्रम ने भारत के प्रशासनिक और सामाजिक ढांचे को नई दिशा प्रदान की है। इसका उद्देश्य भारत को डिजिटल रूप से सशक्त समाज और ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था में परिवर्तित करना है। ई-गवर्नेंस के माध्यम से सरकारी सेवाओं को ऑनलाइन उपलब्ध कराया गया है। अब नागरिक प्रमाणपत्र, बैंकिंग सेवाएं, कर भुगतान और अनेक सरकारी सुविधाएं डिजिटल माध्यम से प्राप्त कर सकते हैं। इससे पारदर्शिता और प्रशासनिक दक्षता में वृद्धि हुई है।

शिक्षा के क्षेत्र में ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों ने ज्ञान के लोकतंत्रीकरण को संभव बनाया है। कोविड-19 महामारी के दौरान डिजिटल शिक्षा ने शिक्षा व्यवस्था को निरंतर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्चुअल क्लासरूम, डिजिटल पुस्तकालय और ऑनलाइन पाठ्यक्रमों ने भौगोलिक सीमाओं को कम किया है। स्वास्थ्य क्षेत्र में टेलीमेडिसिन और डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं ने ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों तक चिकित्सा सुविधाओं की पहुंच बढ़ाई है। वीडियो परामर्श, ई-प्रिस्क्रिप्शन और स्वास्थ्य ऐप्स ने स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिक सुलभ बनाया है।डिजिटल तकनीक ने स्टार्टअप संस्कृति को भी प्रोत्साहित किया है। भारत आज विश्व के प्रमुख स्टार्टअप केंद्रों में से एक बन चुका है। फिनटेक, एडटेक, हेल्थटेक और एग्रीटेक जैसे क्षेत्रों में डिजिटल नवाचार तेजी से बढ़ रहे हैं।

दूरसंचार और सामाजिक परिवर्तन

दूरसंचार तकनीक ने सामाजिक संबंधों की संरचना को गहराई से प्रभावित किया है। परिवार, मित्रता और सामुदायिक जीवन अब डिजिटल माध्यमों से संचालित होने लगे हैं। कनाडाई चिंतक मार्शल मैक्लुहान ने कहा था “The medium is the message.” अर्थात माध्यम स्वयं समाज को बदलने की क्षमता रखता है। आधुनिक डिजिटल माध्यमों ने वास्तव में मानव व्यवहार और सामाजिक संरचना को पुनर्परिभाषित किया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म आज जनमत निर्माण के अत्यंत प्रभावशाली माध्यम बन चुके हैं। ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे मंच सामाजिक आंदोलनों, राजनीतिक अभियानों और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों के प्रमुख साधन बन गए हैं।

डिजिटल प्लेटफॉर्मों ने महिलाओं, ग्रामीण समुदायों और वंचित वर्गों को नई आवाज प्रदान की है। एक ग्रामीण महिला ऑनलाइन माध्यम से अपना व्यवसाय चला सकती है; किसान मोबाइल पर मौसम और बाजार भाव की जानकारी प्राप्त कर सकता है; विद्यार्थी विश्व स्तरीय शिक्षा सामग्री तक पहुंच सकते हैं। हालांकि, सोशल मीडिया ने सामाजिक ध्रुवीकरण, ट्रोल संस्कृति, सूचना अराजकता और मानसिक तनाव जैसी समस्याओं को भी जन्म दिया है। डिजिटल दुनिया ने मनुष्य को जोड़ा भी है और कई बार अकेला भी कर दिया है।

आर्थिक विकास में दूरसंचार की भूमिका

आधुनिक अर्थव्यवस्था का आधार अब डिजिटल नेटवर्क बन चुका है। ई-कॉमर्स, फिनटेक, क्लाउड कंप्यूटिंग और ऑनलाइन सेवाओं का विस्तार दूरसंचार के बिना संभव नहीं था। दूरसंचार उद्योग स्वयं रोजगार सृजन का प्रमुख स्रोत बन चुका है। मोबाइल निर्माण, ऐप विकास, साइबर सुरक्षा, डेटा विश्लेषण और डिजिटल मार्केटिंग जैसे क्षेत्रों में लाखों रोजगार उत्पन्न हुए हैं। विदेशी निवेश ने भारतीय दूरसंचार क्षेत्र को वैश्विक प्रतिस्पर्धा से जोड़ा है। डिजिटल अर्थव्यवस्था भारत की GDP वृद्धि का महत्वपूर्ण आधार बनती जा रही है।“डेटा अर्थव्यवस्था” आधुनिक पूंजीवाद का नया चरण मानी जा रही है। बड़ी तकनीकी कंपनियां उपयोगकर्ताओं के डेटा के आधार पर वैश्विक आर्थिक शक्ति प्राप्त कर रही हैं। डेटा विश्लेषण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से उपभोक्ता व्यवहार को प्रभावित किया जा रहा है।

शिक्षा और स्वास्थ्य में दूरसंचार की भूमिका

दूरसंचार तकनीक ने शिक्षा के लोकतंत्रीकरण में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। ऑनलाइन शिक्षा प्लेटफॉर्म, वर्चुअल क्लासरूम और डिजिटल पुस्तकालयों ने ज्ञान को व्यापक और सुलभ बनाया है। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थी अब विश्व स्तरीय शैक्षणिक सामग्री तक पहुंच प्राप्त कर रहे हैं। डिजिटल शिक्षा ने सामाजिक और आर्थिक बाधाओं को आंशिक रूप से कम किया है। स्वास्थ्य क्षेत्र में टेलीमेडिसिन और ई-हेल्थ सेवाओं ने चिकित्सा व्यवस्था को नई दिशा दी है। महामारी के दौरान वीडियो परामर्श, ऑनलाइन दवा वितरण और स्वास्थ्य निगरानी ऐप्स अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुए। दूरसंचार ने आपदा और महामारी प्रबंधन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कोविड-19 के दौरान डिजिटल प्लेटफॉर्म प्रशासनिक समन्वय, जन-जागरूकता और स्वास्थ्य प्रबंधन का प्रमुख माध्यम बने।

राष्ट्रीय सुरक्षा और साइबर युग

आधुनिक युद्ध अब केवल सीमाओं पर नहीं लड़े जाते; वे साइबर स्पेस में भी संचालित होते हैं। संचार नेटवर्क राष्ट्रीय सुरक्षा का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं। साइबर हमले बैंकिंग, ऊर्जा, परिवहन और रक्षा संरचनाओं को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए डेटा संरक्षण और नेटवर्क सुरक्षा आज सामरिक आवश्यकता बन चुकी है। उपग्रह संचार, ड्रोन तकनीक और रियल-टाइम निगरानी आधुनिक रक्षा प्रणाली के महत्वपूर्ण अंग हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सैन्य तकनीकें युद्ध की प्रकृति को बदल रही हैं। आपदा प्रबंधन में भी दूरसंचार की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। भूकंप, बाढ़, महामारी और युद्ध जैसी परिस्थितियों में संचार व्यवस्था राहत और बचाव कार्यों का आधार बनती है।

लोकतंत्र, सूचना और डिजिटल सार्वजनिक क्षेत्र

संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिव कोफी अन्नान ने कहा था “Information is the oxygen of democracy.”वास्तव में लोकतंत्र में सूचना की स्वतंत्र पहुंच अत्यंत आवश्यक है। डिजिटल माध्यमों ने नागरिक भागीदारी को बढ़ाया है। आज राजनीतिक दल सोशल मीडिया और डिजिटल अभियानों के माध्यम से मतदाताओं तक पहुंचते हैं। नागरिक भी ऑनलाइन माध्यमों से अपनी राय और असहमति व्यक्त कर रहे हैं। लेकिन डिजिटल लोकतंत्र के सामने गंभीर चुनौतियां भी हैं। फेक न्यूज, डीपफेक तकनीक और एल्गोरिद्मिक दुष्प्रचार लोकतांत्रिक संस्थाओं को प्रभावित कर रहे हैं। कई बार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म समाज में वैचारिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा देते हैं। इसलिए डिजिटल स्वतंत्रता और डिजिटल उत्तरदायित्व के बीच संतुलन अत्यंत आवश्यक है।

डिजिटल विभाजन : नई असमानताओं का संकट

डिजिटल क्रांति के बावजूद विश्व की बड़ी आबादी अब भी इंटरनेट और तकनीकी सुविधाओं से वंचित है। इसे “डिजिटल डिवाइड” कहा जाता है। ग्रामीण-शहरी अंतर, आर्थिक विषमता और लैंगिक असमानता डिजिटल पहुंच को प्रभावित करती हैं। विकासशील देशों में तकनीकी अवसंरचना की कमी एक बड़ी चुनौती है। भारत में भी अनेक ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की गुणवत्ता और डिजिटल साक्षरता सीमित है। महिलाओं और वंचित वर्गों की डिजिटल पहुंच अपेक्षाकृत कम है। यदि डिजिटल समावेशन सुनिश्चित नहीं किया गया, तो तकनीकी प्रगति नई असमानताओं को जन्म दे सकती है। इसलिए डिजिटल अधिकारों को सामाजिक न्याय के व्यापक प्रश्न से जोड़कर देखने की आवश्यकता है।

दूरसंचार क्षेत्र की प्रमुख चुनौतियां

साइबर अपराध: हैकिंग, ऑनलाइन धोखाधड़ी, रैनसमवेयर और डेटा चोरी वैश्विक समस्या बन चुके हैं। डिजिटल निर्भरता जितनी बढ़ रही है, साइबर खतरे भी उतने ही गंभीर होते जा रहे हैं। डेटा गोपनीयता संकट: बड़ी तकनीकी कंपनियां उपयोगकर्ताओं के डेटा का विशाल संग्रह कर रही हैं। इससे निजता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर खतरा उत्पन्न हो रहा है। इंटरनेट लत और मानसिक स्वास्थ्य: अत्यधिक डिजिटल निर्भरता मानसिक तनाव, अकेलेपन, चिंता और अवसाद को बढ़ा रही है। विशेष रूप से किशोरों पर सोशल मीडिया का प्रभाव चिंता का विषय है। फेक न्यूज और दुष्प्रचार: भ्रामक सूचनाएं सामाजिक तनाव और राजनीतिक अस्थिरता को जन्म दे सकती हैं। सूचना की सत्यता आज लोकतांत्रिक स्थिरता का महत्वपूर्ण प्रश्न बन गई है। पर्यावरणीय संकट: ई-वेस्ट और डेटा सेंटरों की ऊर्जा खपत पर्यावरणीय चुनौतियों को बढ़ा रही है। डिजिटल विकास को पर्यावरणीय स्थिरता के साथ संतुलित करना आवश्यक है।

भविष्य की तकनीकें : 6G, AI और क्वांटम संचार

भविष्य का विश्व “हाइपर-कनेक्टेड” समाज होगा, जहां मशीनें और मनुष्य एक जटिल डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा होंगे। 5G और 6G: अत्यधिक तेज इंटरनेट और कम विलंबता नई औद्योगिक क्रांति का आधार बनेंगे। स्मार्ट सिटी, स्वचालित वाहन और रोबोटिक उद्योगों का विस्तार होगा। इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT): घरेलू उपकरण, वाहन और मशीनें इंटरनेट से जुड़कर स्मार्ट सिस्टम का निर्माण करेंगी। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI): AI आधारित संचार प्रणाली स्वतः निर्णय लेने, भाषा अनुवाद और डेटा विश्लेषण में सक्षम होगी। क्वांटम संचार: यह तकनीक लगभग अभेद्य साइबर सुरक्षा प्रदान कर सकती है और संचार सुरक्षा के क्षेत्र में क्रांति ला सकती है। सैटेलाइट इंटरनेट: दूरस्थ क्षेत्रों तक हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाने में सैटेलाइट इंटरनेट महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा और डिजिटल संप्रभुता

आज दूरसंचार वैश्विक शक्ति संतुलन का केंद्र बन चुका है। अमेरिका, चीन और भारत तकनीकी प्रतिस्पर्धा के प्रमुख खिलाड़ी हैं। चीन 5G अवसंरचना और दूरसंचार उपकरण निर्माण में अग्रणी है। अमेरिका कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्लाउड सेवाओं और डिजिटल प्लेटफॉर्मों में मजबूत स्थिति रखता है। भारत विशाल डिजिटल बाजार, युवा जनसंख्या और सॉफ्टवेयर क्षमता के कारण उभरती हुई शक्ति के रूप में सामने आया है। “तकनीकी उपनिवेशवाद” की अवधारणा आज विशेष चर्चा में है। बड़ी तकनीकी कंपनियां डेटा और डिजिटल अवसंरचना के माध्यम से वैश्विक प्रभाव स्थापित कर रही हैं। इसी संदर्भ में “डिजिटल संप्रभुता” का प्रश्न महत्वपूर्ण हो गया है। राष्ट्र अब अपने डेटा, नेटवर्क और साइबर अवसंरचना पर नियंत्रण बनाए रखना चाहते हैं।

भारतीय नीतियां और आत्मनिर्भर डिजिटल भविष्य

भारत सरकार ने डिजिटल अवसंरचना को मजबूत करने के लिए अनेक नीतियां लागू की हैं। राष्ट्रीय डिजिटल संचार नीति: इसका उद्देश्य किफायती और सार्वभौमिक डिजिटल पहुंच सुनिश्चित करना है। भारतनेट परियोजना: गांवों तक ब्रॉडबैंड इंटरनेट पहुंचाने की महत्वाकांक्षी योजना। मेक इन इंडिया: दूरसंचार उपकरण निर्माण में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना। सेमीकंडक्टर मिशन: चिप निर्माण क्षमता विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल। साइबर सुरक्षा नीति: डिजिटल नेटवर्क की सुरक्षा और डेटा संरक्षण को सुदृढ़ करना। इन पहलों का उद्देश्य केवल तकनीकी विकास नहीं, बल्कि डिजिटल आत्मनिर्भरता और समावेशी विकास सुनिश्चित करना है।

सांस्कृतिक और नैतिक विमर्श

डिजिटल तकनीक ने संस्कृति की प्रकृति को भी बदल दिया है। अब भाषा, साहित्य, संगीत और कला डिजिटल माध्यमों से वैश्विक स्तर पर प्रसारित हो रहे हैं। भारतीय भाषाओं का डिजिटलीकरण सांस्कृतिक संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। हिंदी, मैथिली, तमिल, बांग्ला और अन्य भारतीय भाषाएं इंटरनेट पर तेजी से विस्तार कर रही हैं। सोशल मीडिया ने अभिव्यक्ति को लोकतांत्रिक बनाया है, लेकिन साथ ही सूचना की जिम्मेदारी और नैतिक पत्रकारिता का प्रश्न भी गंभीर हो गया है। डिजिटल संस्कृति कई बार तात्कालिकता, सतहीपन और उपभोक्तावाद को बढ़ावा देती है। इसलिए तकनीक और मानवीय मूल्यों के बीच संतुलन आवश्यक है।

प्रधानमंत्री मोदी पांच-देशों के दौरे के तीसरे चरण में आज स्वीडन जाएंगे

प्रधानमंत्री मोदी पांच-देशों के दौरे के तीसरे चरण में आज स्वीडन जाएंगे

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने पांच देशों के दौरे के तीसरे चरण में रविवार को स्वीडन पहुंचेंगे। वे स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टरसन के निमंत्रण पर वहां जा रहे हैं। 17-18 मई के इस दौरे से भारत और स्वीडन के बीच व्यापार, इनोवेशन, ग्रीन टेक्नोलॉजी और उभरते क्षेत्रों में संबंधों के और मजबूत होने की उम्मीद है।

द्विपक्षीय संबंधों की होगी समीक्षा

विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री क्रिस्टरसन द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इस बातचीत का उद्देश्य भारत-स्वीडन संबंधों के सभी पहलुओं की समीक्षा करना और प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग के नए अवसर तलाशना है। विदेश मंत्रालय ने बताया कि दोनों नेता द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने के लिए सहयोग के नए रास्तों पर भी चर्चा करेंगे। दोनों देशों के बीच व्यापार 2025 में 7.75 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। वहीं, भारत में स्वीडन का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) वर्ष 2000 से 2025 के बीच 2.825 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है।

एआई और ग्रीन टेक्नोलॉजी पर रहेगा फोकस

उम्मीद है कि चर्चा का मुख्य केंद्र हरित परिवर्तन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), उभरती टेक्नोलॉजी, स्टार्टअप, मजबूत सप्लाई चेन, रक्षा निर्माण, अंतरिक्ष सहयोग, जलवायु कार्रवाई और लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करना होगा। स्वीडन को यूरोप की अग्रणी इनोवेशन आधारित अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता है। ऐसे में दोनों देश भविष्य उन्मुख क्षेत्रों में रणनीतिक सहयोग को और विस्तार देना चाहते हैं।

यूरोपियन राउंड टेबल फॉर इंडस्ट्री में लेंगे हिस्सा

इस दौरे का एक मुख्य आकर्षण यूरोपियन राउंड टेबल फॉर इंडस्ट्री में प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री क्रिस्टरसन की भागीदारी होगी। यह व्यापार जगत के नेताओं का एक प्रमुख अखिल-यूरोपीय मंच है। दोनों नेता उर्सुला वॉन डेर लेयेन के साथ मिलकर इस सभा को संबोधित करेंगे।

नीदरलैंड दौरे के बाद स्वीडन पहुंचेंगे पीएम मोदी

स्वीडन का यह दौरा प्रधानमंत्री मोदी के नीदरलैंड के दो दिवसीय आधिकारिक दौरे के तुरंत बाद हो रहा है। प्रधानमंत्री मोदी इससे पहले वर्ष 2018 में पहली बार आयोजित भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन के लिए स्वीडन गए थे। प्रधानमंत्री मोदी ने शनिवार को अपने डच समकक्ष रॉब जेटन के निमंत्रण पर नीदरलैंड का दौरा पूरा किया। यह उनका नीदरलैंड का दूसरा दौरा था।

डच शाही परिवार से भी हुई मुलाकात

16 मई को ह्यूस टेन बॉश स्थित रॉयल पैलेस में राजा विलेम-अलेक्जेंडर और रानी मैक्सिमा ने प्रधानमंत्री मोदी की मेजबानी की। यहां दोनों पक्षों के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई, जिसके बाद प्रधानमंत्री के सम्मान में दोपहर भोज का आयोजन किया गया। प्रधानमंत्री रॉब जेटन और पीएम मोदी ने बाद में सीमित और प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत की, जिसके बाद 16 मई की शाम को डिनर बैठक हुई।

भारत-नीदरलैंड संबंधों को और मजबूत करने पर जोर

दोनों प्रधानमंत्रियों ने भारत और नीदरलैंड के बीच लंबे समय से चले आ रहे ऐतिहासिक व्यापारिक संबंधों, लोगों के बीच गहरे जुड़ाव और मजबूत द्विपक्षीय रिश्तों को याद किया। उन्होंने कई क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने की अपनी साझा प्रतिबद्धता व्यक्त की।

राष्ट्रपति मुर्मु ने सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने को दी मंजूरी

राष्ट्रपति मुर्मु ने सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने को दी मंजूरी

 देश की न्याय व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने को मंजूरी दे दी है। राष्ट्रपति ने ‘सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन अध्यादेश, 2026’ जारी किया है, जिसके तहत अब सुप्रीम कोर्ट में जजों की स्वीकृत संख्या 33 से बढ़ाकर 37 कर दी गई है। इसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश यानी चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया शामिल नहीं होंगे।

लंबित मामलों का बोझ कम करने पर फोकस

इस फैसले का मुख्य उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों के बढ़ते बोझ को कम करना और लोगों को तेजी से न्याय दिलाना है। माना जा रहा है कि जजों की संख्या बढ़ने से मामलों की सुनवाई में तेजी आएगी और लंबे समय से लंबित केसों का निपटारा जल्दी हो सकेगा।

अर्जुन राम मेघवाल ने दी जानकारी

केंद्रीय कानून एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने ‘सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) अधिनियम, 1956’ में संशोधन करते हुए जजों की संख्या बढ़ाने वाले अध्यादेश को मंजूरी दे दी है।

कैबिनेट ने पहले ही दे दी थी मंजूरी

यह अध्यादेश केंद्र सरकार के उस फैसले के कुछ ही दिनों बाद आया, जिसमें केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सुप्रीम कोर्ट में चार नए जजों के पद बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इससे पहले 5 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में ‘सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026’ को संसद में पेश करने का फैसला लिया गया था।

अदालत की कार्यक्षमता बढ़ाने की कोशिश

सरकार का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में लगातार बढ़ते कामकाज और लंबित मामलों की संख्या को देखते हुए यह कदम जरूरी हो गया था। नए जजों की नियुक्ति से अदालत की कार्यक्षमता बढ़ेगी और सुनवाई में हो रही देरी को कम करने में मदद मिलेगी।

2019 में भी बढ़ाई गई थी संख्या

भारत में सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या बढ़ाने से जुड़ा पहला कानून वर्ष 1956 में बनाया गया था। इसके बाद समय-समय पर न्यायपालिका की बढ़ती जरूरतों के अनुसार जजों की संख्या में बदलाव किया जाता रहा है। इससे पहले वर्ष 2019 में सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या 30 से बढ़ाकर 33 की गई थी। अब नए अध्यादेश के बाद सुप्रीम कोर्ट में कुल स्वीकृत जजों की संख्या, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सहित, 38 हो जाएगी।

पीएम मोदी की मौजूदगी में टाटा और एएसएमएल के बीच अहम एमओयू

पीएम मोदी की मौजूदगी में टाटा और एएसएमएल के बीच अहम एमओयू

 भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण को नई गति देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए एएसएमएल और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटन की मौजूदगी में हुआ।

धोलेरा में बनेगा पहला फ्रंट-एंड सेमीकंडक्टर फैब

दोनों नेताओं ने गुजरात के धोलेरा में स्थापित होने वाले भारत के पहले फ्रंट-एंड सेमीकंडक्टर फैब के लिए टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और एएसएमएल की साझेदारी का स्वागत किया। इस परियोजना को भारत के सेमीकंडक्टर मिशन के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

पीएम मोदी ने साझेदारी को बताया भविष्य के लिए अहम

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “भविष्य के क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत किया जा रहा है। प्रधानमंत्री रॉब जेटन और मैंने भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण इकोसिस्टम को आगे बढ़ाने के लिए टाटा और एएसएमएल के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर होते देखे। एएसएमएल, गुजरात के धोलेरा में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की आगामी सेमीकंडक्टर सुविधा की स्थापना और विस्तार में सहयोग करेगा।”

उन्होंने कहा कि सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत की प्रगति देश के युवाओं के लिए अपार अवसर लेकर आ रही है और आने वाले समय में इस क्षेत्र को और अधिक मजबूती दी जाएगी।

एएसएमएल देगा तकनीक और विशेषज्ञता का सहयोग

क्रिस्टोफ़ फ़ूके ने कहा कि भारत के लिए सेमीकंडक्टर अब एक स्पष्ट प्राथमिकता बन चुका है और टाटा देश का पहला सेमीकंडक्टर फैब स्थापित करने जा रही कंपनी है। उन्होंने कहा कि इस एमओयू के तहत एएसएमएल, टाटा को उत्पाद, तकनीक और विशेषज्ञ मानव संसाधन के स्तर पर सहयोग देगा, ताकि पहले फैब के लिए सर्वश्रेष्ठ लिथोग्राफी समाधान उपलब्ध कराया जा सके।

डच कंपनियों को भारत में निवेश का न्योता

प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और नीदरलैंड के बीच बिजनेस-टू-बिजनेस संबंधों के मजबूत होने का स्वागत किया और भारतीय अर्थव्यवस्था में डच कंपनियों की बढ़ती रुचि की सराहना की। उन्होंने हालिया आर्थिक सुधारों और नीतिगत पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार कारोबार सुगमता बढ़ाने और स्थिर, पारदर्शी एवं भरोसेमंद नीति वातावरण तैयार करने के लिए लगातार काम कर रही है।

कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर

पीएम मोदी ने डच कंपनियों को समुद्री क्षेत्र, नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल तकनीक, सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और स्वास्थ्य सेवाओं जैसे क्षेत्रों में भारत में निवेश के अवसर तलाशने के लिए प्रोत्साहित किया। बैठक में दोनों प्रधानमंत्रियों ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को जल्द लागू करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

डच कंपनियों ने साझा की विस्तार योजनाएं

बैठक में ऊर्जा, बंदरगाह, स्वास्थ्य, कृषि, व्यापार और तकनीक समेत कई क्षेत्रों की प्रमुख डच कंपनियों के सीईओ भी शामिल हुए। उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भारत सरकार के सुधार एजेंडे की सराहना करते हुए भारत में अपने विस्तार की योजनाएं साझा कीं।

प्रधानमंत्री मोदी की नीदरलैंड यात्रा में 17 अहम समझौते, सेमीकंडक्टर से शिक्षा तक सहयोग को बढ़ावा

प्रधानमंत्री मोदी की नीदरलैंड यात्रा में 17 अहम समझौते, सेमीकंडक्टर से शिक्षा तक सहयोग को बढ़ावा

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीदरलैंड यात्रा के दौरान भारत और नीदरलैंड के बीच रणनीतिक, आर्थिक, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग को नई मजबूती देने के लिए 17 अहम समझौतों और दस्तावेजों पर सहमति बनी। इन समझौतों में सेमीकंडक्टर, जल प्रबंधन, हरित ऊर्जा, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और प्रवासन जैसे कई प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं।

रणनीतिक साझेदारी के लिए रोडमैप तैयार

दोनों देशों ने ‘भारत-नीदरलैंड रणनीतिक साझेदारी रोडमैप 2026-2030’ पर सहमति जताई। यह व्यापक दस्तावेज आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय सहयोग की दिशा तय करेगा और व्यापार, तकनीक तथा वैश्विक साझेदारी को नई गति देगा।

संस्कृति और प्रवासन से जुड़े समझौते

यात्रा के दौरान चोल राजवंश के ताम्रपत्र भारत को लौटाने पर सहमति बनी। इसके अलावा भारत और नीदरलैंड के बीच आवाजाही और प्रवासन को सुगम बनाने के लिए समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किए गए।

सेमीकंडक्टर और क्रिटिकल मिनरल्स पर बड़ा सहयोग

टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और एएसएमएल के बीच गुजरात के धोलेरा में सेमीकंडक्टर फैब को सहयोग देने के लिए समझौता ज्ञापन हुआ। इसके साथ ही भारत के खान मंत्रालय और नीदरलैंड के विदेश मंत्रालय के बीच क्रिटिकल मिनरल्स पर भी एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।

जल और हरित ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग

भारत के जल शक्ति मंत्रालय और नीदरलैंड के इंफ्रास्ट्रक्चर एवं वॉटर मैनेजमेंट मंत्रालय के बीच गुजरात की कल्पसर परियोजना के लिए तकनीकी सहयोग पर आशय पत्र जारी किया गया। इसके अलावा हरित हाइड्रोजन सहयोग, नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा रूपांतरण परियोजनाओं पर कई संयुक्त समझौते और कार्य समूहों की स्थापना पर सहमति बनी।

कृषि और डेयरी क्षेत्र को मिलेगा बढ़ावा

पश्चिम त्रिपुरा में फ्लोरीकल्चर के लिए इंडो-डच उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने पर सहमति बनी। वहीं, बेंगलुरु स्थित पशुपालन उत्कृष्टता केंद्र में डेयरी प्रशिक्षण के लिए इंडो-डच उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किया जाएगा। पशुपालन और डेयरी क्षेत्र में सहयोग के लिए दोनों देशों के बीच संयुक्त घोषणा पत्र भी जारी किया गया।

स्वास्थ्य और शिक्षा में भी साझेदारी मजबूत

स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग के लिए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद और नीदरलैंड के सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संस्थान के बीच आशय पत्र पर हस्ताक्षर हुए। वहीं उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग के लिए दोनों देशों के बीच समझौता ज्ञापन पर सहमति बनी।

विश्वविद्यालयों और एएसआई के बीच समझौते

नालंदा विश्वविद्यालय और ग्रोनिंगन विश्वविद्यालय के बीच शैक्षणिक सहयोग पर समझौता हुआ। इसके अलावा लेडेन यूनिवर्सिटी लाइब्रेरीज़ और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के बीच भी समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।

सीमा शुल्क सहयोग पर भी समझौता

भारत और नीदरलैंड के बीच सीमा शुल्क मामलों में पारस्परिक प्रशासनिक सहायता पर भी समझौता हुआ, जिससे व्यापारिक प्रक्रियाओं को और अधिक सुगम और पारदर्शी बनाने में मदद मिलेगी।

वैश्विक तेल संकट का असर, दिल्ली में सीएनजी पहली बार 80 रुपए के पार

वैश्विक तेल संकट का असर, दिल्ली में सीएनजी पहली बार 80 रुपए के पार

 दिल्ली में सीएनजी फिर से महंगी हो गई है। रविवार को इसकी कीमतों में 1 रुपए प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी की गई। सिर्फ दो दिनों में यह दूसरी बार बढ़ोतरी हुई है, जिससे दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में यात्रियों पर ईंधन लागत का बोझ और बढ़ गया है।

दिल्ली में पहली बार 80 रुपए के पार पहुंची सीएनजी

दिल्ली में सीएनजी की कीमत एक रुपए बढ़ने के बाद 80.09 रुपए प्रति किलोग्राम हो गई है। यह पहली बार है जब राजधानी में सीएनजी के दाम 80 रुपए प्रति किलोग्राम के आंकड़े को पार कर गए हैं। वहीं, नोएडा और गाजियाबाद में सीएनजी की कीमत अब 88.70 रुपए प्रति किलोग्राम हो गई है।

शुक्रवार को भी बढ़े थे दाम

इससे पहले शुक्रवार को सीएनजी की कीमतों में 2 रुपए प्रति किलोग्राम का इजाफा किया गया था। उस समय दिल्ली में सीएनजी की दर बढ़कर 79.09 रुपए प्रति किलोग्राम हो गई थी।

पेट्रोल और डीजल भी हुए महंगे

शुक्रवार को राष्ट्रीय राजधानी में पेट्रोल की कीमतों में लगभग 3 रुपए प्रति लीटर और डीजल की कीमतों में लगभग 3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई थी। इसके बाद दिल्ली में पेट्रोल 97.77 रुपए प्रति लीटर और डीजल 90.67 रुपए प्रति लीटर की दर से बिक रहा है।

पश्चिम एशिया तनाव का असर

ईंधन की कीमतों में यह उछाल पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट की लगातार नाकेबंदी के बीच आया है। वैश्विक तेल और गैस व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है और आपूर्ति में रुकावटों के कारण अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है।

सरकार ने बढ़ोतरी को बताया सीमित

ईंधन की बढ़ती कीमतों को लेकर हो रही आलोचना पर केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल के बावजूद भारत पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी को सीमित रखने में सफल रहा है।

कई देशों की तुलना में भारत में कम असर

किरण रिजिजू ने बताया कि कई देशों में ईंधन की कीमतों में 20% से लेकर लगभग 100% तक की बढ़ोतरी हुई, जबकि भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में क्रमशः केवल 3.2% और 3.4% की बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि वैश्विक बाजारों में अस्थिरता के बावजूद सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों ने उपभोक्ताओं को महंगाई के बड़े असर से बचाने के लिए लंबे समय तक नुकसान उठाया।a

“विदेशी मुद्रा बचाने के लिए केंद्र का बड़ा फैसला, चांदी आयात पर तत्काल पाबंदी”

“विदेशी मुद्रा बचाने के लिए केंद्र का बड़ा फैसला, चांदी आयात पर तत्काल पाबंदी”

 नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और बढ़ते इम्पोर्ट बिल के बीच केंद्र सरकार ने चांदी के आयात को लेकर बड़ा फैसला लिया है। केंद्र ने 99.9 फीसदी शुद्धता वाले सिल्वर बार समेत कुछ विशेष प्रकार की चांदी की ईंटों के आयात पर तत्काल प्रभाव से पाबंदी लगा दी है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) की अधिसूचना के अनुसार, इन सिल्वर बार को ‘फ्री’ कैटेगरी से हटाकर ‘रिस्ट्रिक्टेड’ श्रेणी में डाल दिया गया है, यानी अब इनके आयात के लिए विशेष अनुमति जरूरी होगी।

वाणिज्य मंत्रालय की संशोधित आयात नीति के तहत यह कदम देश में बढ़ते चांदी आयात को नियंत्रित करने और विदेशी मुद्रा पर दबाव कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है। इससे पहले सरकार सोना और चांदी पर इम्पोर्ट ड्यूटी भी 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर चुकी है, जबकि प्लैटिनम पर यह शुल्क 15.4 प्रतिशत तक पहुंचा दिया गया है।

सरकार ने गोल्ड और सिल्वर डोरे, सिक्कों और अन्य कीमती धातुओं से जुड़े उत्पादों के ड्यूटी स्ट्रक्चर में भी बदलाव किए हैं। साथ ही एडवांस ऑथराइजेशन स्कीम के तहत सोने के आयात पर 100 किलोग्राम की सीमा तय कर निगरानी और कड़ी कर दी गई है। सरकार का मानना है कि भारत बड़ी मात्रा में सोना और चांदी आयात करता है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर भारी दबाव पड़ता है।

पश्चिम एशिया संकट और कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण पहले ही देश का आयात बिल बढ़ चुका है। ऐसे में सरकार गैर-जरूरी आयात को कम कर व्यापार घाटा और डॉलर पर निर्भरता घटाना चाहती है। माना जा रहा है कि इन फैसलों का असर आने वाले दिनों में सोना-चांदी के बाजार और कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।

PM की अपील पर CM मोहन यादव का बड़ा फैसला अब 13 नहीं, सिर्फ 8 गाड़ियों के साथ चलेगा CM का काफिला

PM की अपील पर CM मोहन यादव का बड़ा फैसला अब 13 नहीं, सिर्फ 8 गाड़ियों के साथ चलेगा CM का काफिला

 Mohan Yadav ने प्रधानमंत्री Narendra Modi की ईंधन बचाने की अपील के बाद बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री ने अपने आधिकारिक काफिले में शामिल वाहनों की संख्या 13 से घटाकर 8 कर दी है।

 

इसके साथ ही वाहनों की रैलियों और दिखावटी काफिलों पर रोक लगा दी गई है। मंत्रियों को सरकारी वाहनों का उपयोग कम से कम करने के निर्देश दिए गए हैं, जबकि अधिकारियों से साफ कहा गया है कि वे बिना किसी तामझाम और जुलूस के पदभार ग्रहण करें।

सरकार के इस फैसले को ईंधन बचत, सरकारी खर्च में कटौती और सादगी को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा संदेश माना जा रहा है।
महिलाओं के लिए बड़ी खुशखबरी, हर महीने मिलेंगे 2500 रुपये, जानिए कौन उठा सकेगा फायदा

महिलाओं के लिए बड़ी खुशखबरी, हर महीने मिलेंगे 2500 रुपये, जानिए कौन उठा सकेगा फायदा

 दिल्ली :- दिल्ली की महिलाओं के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आ रही है. दिल्ली सरकार जल्द ही महिलाओं को हर महीने 25,00 रुपये की आर्थिक मदद देने वाली योजना शुरू कर सकती है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस योजना के लिए रजिस्ट्रेशन जून 2026 से शुरू हो सकते हैं. हालांकि, इसकी सटीक तारीख सरकार की ओर से अलग से जारी की जाएगी. पहले इस योजना को ‘महिला समृद्धि योजना’ कहा जा रहा था, लेकिन अब इसे ‘दिल्ली लक्ष्मी योजना’ नाम दिए जाने की चर्चा है. यह योजना बीजेपी सरकार के उन बड़े वादों में शामिल थी, जो 2025 दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान किए गए थे. अब सरकार इस योजना को जमीन पर उतारने की तैयारी में जुटी हुई है.

हर महीने सीधे खाते में आएंगे 2500 रुपये
इस योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये सीधे उनके बैंक खाते में भेजे जाएंगे. दिल्ली सरकार ने इसके लिए 2026-27 के बजट में 5100 करोड़ रुपये का प्रावधान भी रखा था. माना जा रहा है कि करीब 17 लाख महिलाओं को इस योजना का फायदा मिल सकता है.

कौन महिलाएं होंगी योजना के लिए पात्र?
इस योजना का लाभ सभी महिलाओं को नहीं मिलेगा. इसके लिए कुछ जरूरी शर्तें तय की गई हैं. जैसे-

महिला की उम्र 21 से 59 साल के बीच होनी चाहिए.
महिला BPL (गरीबी रेखा से नीचे) या EWS श्रेणी में आती हो.
महिला दिल्ली की निवासी हो और कम से कम 5 साल से यहां रह रही हो.
महिला सरकारी नौकरी में न हो और न ही रिटायर कर्मचारी हो.
महिला किसी अन्य सरकारी योजना का लाभ न ले रही हो.
परिवार की आय लगभग 2.5 से 3 लाख रुपये सालाना के बीच हो.
योजना को महिला एवं बाल विकास विभाग लागू करेगा, जिसकी जिम्मेदारी खुद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के पास है.

रजिस्ट्रेशन के लिए किन दस्तावेजों की पड़ सकती है जरूरत?
हालांकि, सरकार ने अभी तक पूरी आधिकारिक सूची जारी नहीं की है, लेकिन रजिस्ट्रेशन के समय कुछ जरूरी दस्तावेज मांगे जा सकते हैं. जैसे-

दिल्ली पते वाला आधार कार्ड
BPL प्रमाण पत्र या गरीबी का प्रमाण
बैंक खाते की जानकारी
आधार से लिंक मोबाइल नंबर
पासपोर्ट साइज फोटो
निवास प्रमाण पत्र
महंगाई और बढ़ते खर्चों के बीच यह योजना दिल्ली की लाखों महिलाओं के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है.

VB-G RAM G Act: इस दिन से मनरेगा की जगह लेगा ‘विकसित भारत-जी राम जी’ अधिनियम

VB-G RAM G Act: इस दिन से मनरेगा की जगह लेगा ‘विकसित भारत-जी राम जी’ अधिनियम

 नई दिल्ली। VB-G RAM G Act:  भारत सरकार ने ग्रामीण विकास और रोजगार को नई दिशा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए “विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)” यानी VB–G RAM G अधिनियम, 2025 को अधिसूचित कर दिया है। यह नया अधिनियम 1 जुलाई 2026 से देशभर के ग्रामीण क्षेत्रों में लागू होगा।

नई व्यवस्था लागू होने के साथ ही Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act (मनरेगा) 2005 को उसी तिथि से निरस्त माना जाएगा। सरकार के अनुसार यह बदलाव विकसित भारत@2047 के विजन के अनुरूप ग्रामीण भारत में समेकित, उत्पादकता आधारित और भविष्य उन्मुख विकास मॉडल स्थापित करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है।

नई योजना के तहत प्रत्येक ग्रामीण परिवार, जिसके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक श्रम करने के इच्छुक होंगे, उन्हें हर वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के मजदूरी आधारित रोजगार की वैधानिक गारंटी मिलेगी। यह व्यवस्था ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने, आय बढ़ाने और ग्राम स्तर पर सतत विकास को गति देने के उद्देश्य से लागू की जा रही है।

अधिनियम में यह भी प्रावधान किया गया है कि रोजगार मांगने के बाद निर्धारित समय सीमा में कार्य उपलब्ध नहीं होने पर श्रमिक बेरोजगारी भत्ते के पात्र होंगे। मजदूरी भुगतान प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से सीधे बैंक या डाकघर खातों में किया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि मजदूरी का भुगतान साप्ताहिक आधार पर या मस्टर रोल बंद होने के 15 दिनों के भीतर किया जाएगा। देरी होने पर श्रमिकों को क्षतिपूर्ति भी दी जाएगी।

केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए इस योजना हेतु ₹95,692.31 करोड़ का बजटीय आवंटन किया है, जो ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम के लिए अब तक का सबसे बड़ा बजट माना जा रहा है। राज्यों के संभावित अंशदान सहित इस योजना का कुल परिव्यय ₹1.51 लाख करोड़ से अधिक होने का अनुमान है।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि महात्मा गांधी नरेगा से विकसित भारत-जी राम जी में ट्रांजिशन पूरी तरह सुचारु और श्रमिक-केंद्रित होगा। 30 जून 2026 तक मनरेगा के तहत चल रहे सभी कार्य बिना किसी बाधा के जारी रहेंगे और उन्हें नई व्यवस्था में समाहित किया जाएगा। मौजूदा ई-केवाईसी सत्यापित जॉब कार्ड नए ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी होने तक मान्य रहेंगे।

जिन श्रमिकों के पास जॉब कार्ड नहीं हैं, वे ग्राम पंचायत स्तर पर आवेदन कर सकेंगे। केवल ई-केवाईसी लंबित होने के कारण किसी भी श्रमिक को रोजगार से वंचित नहीं किया जाएगा।

ग्रामीण विकास मंत्रालय विभिन्न नियमों और प्रक्रियाओं के मसौदे राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के परामर्श से तैयार कर रहा है। इनमें शिकायत निवारण, मजदूरी भुगतान, प्रशासनिक व्यय, संचालन समिति और ट्रांजिशनल प्रावधानों से जुड़े नियम शामिल हैं।

सरकार का मानना है कि विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम, 2025 ग्रामीण रोजगार, ग्रामीण अवसंरचना और आत्मनिर्भर गांवों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा तथा ग्राम पंचायतों को ग्रामीण परिवर्तन के केंद्रीय स्तंभ के रूप में स्थापित करेगा।

CYBER : व्हाट्सऐप पर शादी का कार्ड खोलते ही बिजनेसमैन के खाते से उड़ गए 5 लाख

CYBER : व्हाट्सऐप पर शादी का कार्ड खोलते ही बिजनेसमैन के खाते से उड़ गए 5 लाख

 बेंगलुरु। व्हाट्सऐप पर आए एक फर्जी शादी के कार्ड ने बेंगलुरु के एक व्यवसायी को लाखों का नुकसान पहुंचा दिया। साइबर ठगों ने शादी के निमंत्रण के नाम पर APK फाइल भेजी, जिसे डाउनलोड करते ही पीड़ित का मोबाइल हैक हो गया और कुछ ही मिनटों में उसके खाते से 5 लाख रुपये से ज्यादा निकाल लिए गए।

मैसेज में लिखा था कि शादी समारोह की पूरी जानकारी देखने के लिए अटैचमेंट डाउनलोड करें। कार्ड बिल्कुल असली निमंत्रण जैसा दिखाई दे रहा था, जिससे व्यवसायी ठगी का शिकार हो गया। पुलिस जांच में सामने आया कि APK फाइल डाउनलोड करते ही ठगों को फोन की गोपनीय जानकारी और बैंकिंग एक्सेस मिल गया। इसके बाद 16 अप्रैल 2026 की सुबह 4:45 से 4:54 बजे के बीच कई UPI ट्रांजेक्शन कर कुल 5,00,440 रुपये निकाल लिए गए।

आशंका है कि इसी तरह के मैसेज शहर के कई लोगों को भेजे गए हैं और यह एक बड़े साइबर फ्रॉड नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने आईटी एक्ट की धारा 66(C), 66(D) और BNS 2023 की धारा 318(4) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। साइबर एक्सपर्ट्स ने लोगों को सलाह दी है कि व्हाट्सऐप पर आए किसी भी APK फाइल या अनजान लिंक को डाउनलोड न करें, क्योंकि एक छोटी सी गलती बैंक खाता खाली कर सकती है।

 
 
 
PM Modi : ‘अभी सोना न खरीदें, पेट्रोल-डीजल बचाएं’, 24 घंटे में दूसरी बार पीएम मोदी की देशवासियों से अपील

PM Modi : ‘अभी सोना न खरीदें, पेट्रोल-डीजल बचाएं’, 24 घंटे में दूसरी बार पीएम मोदी की देशवासियों से अपील

 वडोदरा। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 घंटे में दूसरी बार देशवासियों से पेट्रोल-डीजल का कम इस्तेमाल करने और फिलहाल सोना न खरीदने की अपील की है। वडोदरा में सरदारधाम हॉस्टल के उद्घाटन कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा कि देश को इस समय विदेशी मुद्रा बचाने की जरूरत है, इसलिए लोगों को ऐसे उत्पादों और गतिविधियों से बचना चाहिए जिन पर विदेशों में पैसा खर्च होता है।

इससे पहले रविवार को हैदराबाद की रैली में भी प्रधानमंत्री ने लोगों से विदेश यात्रा टालने, सोने की खरीद रोकने और ईंधन की बचत करने की अपील की थी। पीएम मोदी ने कहा कि कोरोना महामारी के बाद अब पश्चिम एशिया का युद्ध इस दशक का बड़ा वैश्विक संकट बनता जा रहा है और इसका असर पूरी दुनिया के साथ भारत पर भी पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि भारत अपने आयात का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल पर खर्च करता है और जिस क्षेत्र से तेल की सप्लाई होती है, वही इस समय संघर्ष की स्थिति में है। प्रधानमंत्री ने लोगों से मेट्रो, इलेक्ट्रिक बस, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और कार पूलिंग अपनाने की अपील करते हुए कहा कि जहां संभव हो वहां वर्क फ्रॉम होम और वर्चुअल मीटिंग्स को प्राथमिकता दी जाए। पीएम मोदी ने कहा कि सोने के आयात पर भी देश का बहुत बड़ा पैसा विदेश जाता है, इसलिए हालात सामान्य होने तक लोग सोने की खरीद टालें। उन्होंने एक बार फिर ‘वोकल फॉर लोकल’ पर जोर देते हुए कहा कि विदेशी सामान की बजाय देश में बने उत्पादों को अपनाना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।

ED Action: पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री सुजीत बोस गिरफ्तार, 10 घंटे की पूछताछ के बाद ED की बड़ी कार्रवाई

ED Action: पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री सुजीत बोस गिरफ्तार, 10 घंटे की पूछताछ के बाद ED की बड़ी कार्रवाई

 कोलकाता। पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री और तृणमूल कांग्रेस नेता सुजीत बोस को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने नगरपालिका भर्ती घोटाले में गिरफ्तार कर लिया है। करीब 10 घंटे तक चली लंबी पूछताछ के बाद ईडी ने यह बड़ी कार्रवाई की। जांच एजेंसी का आरोप है कि सुजीत बोस ने साउथ दमदम म्यूनिसिपैलिटी में विभिन्न पदों पर भर्ती कराने के नाम पर करीब 150 उम्मीदवारों की अवैध सिफारिश की और इसके बदले मोटी रकम वसूली गई।

सोमवार सुबह बोस अपने बेटे समुद्र बोस के साथ कोलकाता के सॉल्ट लेक स्थित ईडी कार्यालय पहुंचे थे, जहां दोनों से घंटों पूछताछ की गई। ईडी के मुताबिक जांच के दौरान कई फ्लैट्स, बैंक खातों में भारी कैश डिपॉजिट और संदिग्ध लेनदेन का पता चला है, जिन्हें कथित तौर पर नौकरी दिलाने के बदले हासिल किया गया था।

एजेंसी ने दावा किया कि इस पूरे नेटवर्क में कैश मैनेजमेंट का काम गौतम नाम का व्यक्ति संभालता था, जिसके यहां पहले हुई छापेमारी में करीब 3 करोड़ रुपये बरामद हुए थे। इस मामले में टीएमसी विधायक और पूर्व मंत्री रतिन घोष को भी समन भेजा गया था, लेकिन वह पूछताछ में शामिल नहीं हुए। ईडी सूत्रों के अनुसार, रतिन घोष को पहले भी कई बार नोटिस भेजे जा चुके हैं। अब ईडी मंगलवार को सुजीत बोस को विशेष अदालत में पेश करेगी, जहां एजेंसी रिमांड की मांग कर सकती है।

PMModi: दुनिया में बढ़ते ईंधन संकट पर PM मोदी अलर्ट, देशवासियों से बोले- अब ये करना होगा

PMModi: दुनिया में बढ़ते ईंधन संकट पर PM मोदी अलर्ट, देशवासियों से बोले- अब ये करना होगा

 PMModi: पश्चिम एशिया में जारी तनाव, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से राष्ट्रहित में कई बड़े संकल्प लेने की अपील की है। पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया इस समय लगातार संकटों से गुजर रही है। पहले कोरोना महामारी और उसके बाद यूक्रेन युद्ध ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया, जिसका असर आज भी खाद्यान्न, ईंधन और खाद की कीमतों पर साफ दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि भारत जैसे देश, जो अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करते हैं, उन्हें अब अतिरिक्त सतर्कता और जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ना होगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेहद ऊंचे स्तर पर पहुंच चुकी हैं। भारत के पास तेल के पर्याप्त भंडार नहीं हैं, इसलिए बड़ी मात्रा में ईंधन विदेशों से खरीदना पड़ता है। इससे देश की विदेशी मुद्रा पर भारी दबाव पड़ता है। ऐसे समय में हर नागरिक का दायित्व बनता है कि वह ईंधन की बचत कर देश की आर्थिक मजबूती में योगदान दे। पीएम मोदी ने कहा कि अगर हर व्यक्ति थोड़ा-थोड़ा प्रयास करे तो देश अरबों रुपये की विदेशी मुद्रा बचा सकता है।
पीएम मोदी ने कोरोना काल की याद दिलाते हुए कहा कि उस समय लोगों ने वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन मीटिंग और वीडियो कॉन्फ्रेंस जैसी व्यवस्थाओं को तेजी से अपनाया था। इससे न सिर्फ समय की बचत हुई बल्कि यात्रा कम होने से ईंधन की खपत भी घटी थी। उन्होंने कहा कि अब समय की मांग है कि इन व्यवस्थाओं को फिर से प्राथमिकता दी जाए। जिन कामों को ऑनलाइन किया जा सकता है, उन्हें अनावश्यक यात्रा के बजाय डिजिटल माध्यम से पूरा किया जाए।

प्रधानमंत्री ने लोगों से सार्वजनिक परिवहन का अधिक से अधिक उपयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि जिन शहरों में मेट्रो सेवा उपलब्ध है, वहां निजी वाहनों की जगह मेट्रो का इस्तेमाल बढ़ाना चाहिए। यदि कार से सफर जरूरी हो तो कार पूलिंग अपनाई जाए ताकि कम ईंधन खर्च हो। इसके साथ ही उन्होंने रेलवे फ्रेट सेवाओं के ज्यादा इस्तेमाल पर जोर देते हुए कहा कि इलेक्ट्रिक ट्रेनों से माल परिवहन करने पर डीजल की खपत काफी कम होती है। जिन लोगों के पास इलेक्ट्रिक वाहन हैं, उन्हें भी अधिक से अधिक उनका उपयोग करना चाहिए।

पीएम मोदी ने देशवासियों से कम से कम एक साल तक विदेश यात्रा टालने की भावुक अपील भी की। उन्होंने कहा कि आजकल मध्यम वर्ग में डेस्टिनेशन वेडिंग, विदेशी टूर और विदेशों में छुट्टियां मनाने का चलन तेजी से बढ़ा है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में राष्ट्रहित सर्वोपरि होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत में ही कई खूबसूरत पर्यटन स्थल मौजूद हैं, जहां लोग घूमने जा सकते हैं और इससे देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

प्रधानमंत्री ने सोने की खरीदारी को लेकर भी बड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि पहले जब देश संकट में होता था तो लोग राष्ट्रहित में सोना दान करते थे। आज दान की जरूरत नहीं है, लेकिन देशहित में यह संकल्प जरूर लिया जा सकता है कि अगले एक साल तक कोई नया सोने का आभूषण नहीं खरीदा जाएगा। इससे अनावश्यक आयात कम होगा और विदेशी मुद्रा की बचत होगी।

पीएम मोदी ने कहा कि वैश्विक संकट के इस दौर में देश को आत्मनिर्भर और मजबूत बनाने के लिए हर नागरिक की भागीदारी जरूरी है। उन्होंने भरोसा जताया कि भारतवासी अगर जिम्मेदारी और अनुशासन के साथ छोटे-छोटे संकल्प लें, तो देश हर चुनौती का मजबूती से सामना कर सकता है।

PF Money via ATM: अब ATM और UPI से निकाल सकेंगे PF का पैसा! करोड़ों कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी

PF Money via ATM: अब ATM और UPI से निकाल सकेंगे PF का पैसा! करोड़ों कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी

 PF Money via ATM: देश के करोड़ों कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। अब जल्द ही कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के सदस्य ATM और UPI के जरिए अपने PF खाते से रियल टाइम में पैसे निकाल सकेंगे। लंबे समय से कर्मचारी इस सुविधा का इंतजार कर रहे थे, क्योंकि मौजूदा व्यवस्था में PF का पैसा निकालने के लिए ऑनलाइन क्लेम करना पड़ता है और रकम खाते में आने में कई बार 7 से 15 दिन तक लग जाते हैं। अब EPFO अपने सिस्टम को आधुनिक और तेज बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठा रहा है, जिससे PF निकासी पहले से कहीं ज्यादा आसान और फास्ट हो जाएगी।

जानकारी के मुताबिक EPFO इस प्रोजेक्ट पर तेजी से काम कर रहा है और संभावना जताई जा रही है कि मई 2026 के आखिर तक ATM और UPI के जरिए PF निकासी की सुविधा शुरू हो सकती है। इस सुविधा के लागू होने के बाद कर्मचारियों को इमरजेंसी में पैसों के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। खासतौर पर मेडिकल इमरजेंसी, अस्पताल खर्च या किसी जरूरी जरूरत के समय कर्मचारी सीधे ATM या UPI के जरिए तुरंत पैसा निकाल सकेंगे।

फिलहाल PF निकालने की प्रक्रिया काफी लंबी मानी जाती है। कर्मचारी को EPFO पोर्टल पर क्लेम फाइल करना होता है, फिर दस्तावेजों का वेरिफिकेशन होता है और उसके बाद रकम बैंक खाते में ट्रांसफर की जाती है। कई बार तकनीकी दिक्कतों या अधूरे दस्तावेजों की वजह से क्लेम रिजेक्ट भी हो जाता है। ऐसे में नई सुविधा कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है।
सरकार की ओर से मिली जानकारी के अनुसार PF खाताधारक अपने कुल जमा PF अमाउंट का केवल 50 प्रतिशत हिस्सा ही ATM या UPI के जरिए निकाल सकेंगे। बाकी रकम के लिए पुराने पोर्टल सिस्टम का इस्तेमाल करना होगा। इस सुविधा का लाभ वही कर्मचारी उठा पाएंगे जिनका UAN एक्टिव होगा, आधार लिंक होगा, मोबाइल नंबर अपडेट होगा और नॉमिनेशन की प्रक्रिया पूरी होगी। EPFO ने ऐसे कर्मचारियों से जल्द जरूरी अपडेट पूरा करने की अपील की है।

सुरक्षा को लेकर भी EPFO विशेष तैयारी कर रहा है। एक्सपर्ट्स के सवालों के बीच संगठन मल्टी-लेयर ऑथेंटिकेशन सिस्टम लागू करने की तैयारी में है। इसमें आधार आधारित OTP और बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन जैसे सेफ्टी फीचर्स शामिल किए जा सकते हैं, ताकि खाताधारकों का पैसा पूरी तरह सुरक्षित रहे।नई सुविधा शुरू होने के बाद करोड़ों कर्मचारियों को अपने PF पैसे के लिए दिनों तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा और जरूरत पड़ते ही वे ATM या UPI के जरिए तुरंत रकम निकाल सकेंगे।

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