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CG- कलयुगी मामा का शर्मनाक कारनामा : रची खौफनाक साजिश, जिंदा जीजा को मृत बताकर हड़प ली मासूमों की पुश्तैनी जमीन…..

CG- कलयुगी मामा का शर्मनाक कारनामा : रची खौफनाक साजिश, जिंदा जीजा को मृत बताकर हड़प ली मासूमों की पुश्तैनी जमीन…..

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में रिश्तों को शर्मसार कर देने वाला एक हैरतअंगेज मामला सामने आया है। यहां एक सगे मामा ने ही अपने तीन नाबालिग भांजे-भांजियों की करोड़ों की जमीन हड़पने के लिए अपने जीवित जीजा को कागजों में ‘मृत’ घोषित करा दिया। जीवित जीजा का फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाकर अपने ही मासूम भांजे-भांजियों की करोड़ों की पुश्तैनी जमीन हड़प ली। पीड़ित की रिपोर्ट पर पुलिस ने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, वहीं अन्य सहयोगियों की तलाश कर रही है।

मामला रायगढ़ जिले के ग्राम हालाहुली से जुड़ा है। पीड़ित मनीष शुक्ला को तब गहरा झटका लगा, जब उन्हें पता चला कि बिलासपुर के सकरी स्थित बच्चों की पुश्तैनी जमीन (खसरा नंबर 258, रकबा 0.1500 हेक्टेयर) बिना उनकी जानकारी के बेच दी गई है। जांच में खुलासा हुआ कि इस पूरे फर्जीवाड़े के पीछे उनके साले अखिलेश पांडेय और उसके भाई शामिल हैं।

जमीन हड़पने के लिए आरोपियों ने सरकारी दस्तावेजों और शपथ पत्रों में मनीष शुक्ला को मृत घोषित कर दिया और खुद को नाबालिग बच्चों का संरक्षक बताकर जमीन का सौदा कर डाला. बच्चों के हिस्से की रकम आपस में बांट ली गई। पीड़ित की शिकायत पर बिलासपुर की सकरी थाना पुलिस ने मामले में धारा 420, 464, 467, 468, 471 और 34 IPC के तहत एफआईआर दर्ज की है।

मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी अखिलेश पांडेय को जांजगीर-चांपा जिले के चांपा से गिरफ्तार कर लिया है। वहीं गड़बड़ घोटाले में शामिल अन्य आरोपी अनुराग पांडेय, अभिषेक पांडेय सहित अन्य की तलाश की जा रही है।

Train Cancellation : रेल यात्रियों की बढ़ेगी परेशानी, 2 दिन के लिए 6 पैसेंजर ट्रेनें कैंसिल

Train Cancellation : रेल यात्रियों की बढ़ेगी परेशानी, 2 दिन के लिए 6 पैसेंजर ट्रेनें कैंसिल

 बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर रेल मंडल में ब्रिज मरम्मत के चलते रेलवे में 2 दिन ट्रैफिक ब्लॉक लिया जाएगा। इस काम के चलते छत्तीसगढ़ की 6 पैसेंजर ट्रेनों को कैंसिल किया गया है।

17 और 18 जनवरी को बिलासपुर-रायगढ़-बिलासपुर और बिलासपुर-कोरबा-बिलासपुर मेमू लोकल ट्रेन दो दिन नहीं चलेंगी। इसके चलते रोजाना ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों को मुसीबतों का सामना करना पड़ेगा।

बिलासपुर रेल मंडल के कोटमीसोनार-जयरामनगर सेक्शन के बीच ट्रैफिक ब्लॉक लेकर मेंटेनेंस वर्क किया जाएगा। इसके चलते दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे से चलने और गुजरने वाली कुछ ट्रेनें प्रभावित रहेगी।

आज और कल इन दो दिनों में 6 पैसेंजर ट्रेनें रद्द रहेंगी, जबकि अन्य ट्रेनें अपनी रफ्तार कम रखकर ही गुजरेंगी।

Accident : मौत का तांडव; गहरी खाई में गिरते ही आग का गोला बनी ईको कार, दो युवकों की मौत

Accident : मौत का तांडव; गहरी खाई में गिरते ही आग का गोला बनी ईको कार, दो युवकों की मौत

 बिलासपुर : बिलासपुर से तातापानी महोत्सव के लिए निकले दो युवकों की सड़क हादसे में दर्दनाक मौत हो गई। जानकारी के मुताबिक, बिलासपुर के तोरवा निवासी गोपाल चंद्र डे (42 वर्ष) और देवरीखुर्द निवासी अरुण सेन (36 वर्ष) मंगलवार रात करीब 11 बजे अपनी ईको वाहन (क्रमांक CG 10 BF 1673) में टेंट का सामान और रूम हीटर लेकर विश्रामपुर स्थित तातापानी महोत्सव के लिए रवाना हुए थे। बुधवार तड़के करीब 4:30 बजे मोरगा चौकी क्षेत्र के मदनपुर फॉरेस्ट बैरियर के पास उनकी तेज रफ्तार वाहन अनियंत्रित होकर सड़क किनारे करीब 40 फीट गहरी खाई में जा गिरी।

खाई में गिरते ही वाहन में भीषण आग लग गई, जिसने देखते ही देखते पूरी गाड़ी को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे के वक्त दोनों युवक वाहन के भीतर ही फंसे रह गए और बाहर निकलने का मौका नहीं मिल सका, जिससे वे जिंदा जल गए। घटना की सूचना मिलते ही मोरगा पुलिस और दमकल की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन आग इतनी भयावह थी कि जब तक उस पर काबू पाया जाता, तब तक दोनों युवक पूरी तरह जलकर राख हो चुके थे। पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद शवों को बाहर निकालकर पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेजा है और मर्ग कायम कर दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है।

आदया श्रीवास्तव ने बढ़ाया छत्तीसगढ़ का मान, बनीं ‘जूनियर मिस इंडिया मिस कॉन्फिडेंट’

आदया श्रीवास्तव ने बढ़ाया छत्तीसगढ़ का मान, बनीं ‘जूनियर मिस इंडिया मिस कॉन्फिडेंट’

बिलासपुर| बिलासपुर की प्रतिभाशाली बालिका आदया श्रीवास्तव ने जयपुर के पाँच सितारा होटल क्लार्क्स आमेर में आयोजित प्रतिष्ठित जूनियर मिस इंडिया प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए ‘जूनियर मिस इंडिया मिस कॉन्फिडेंट का खिताब अपने नाम किया। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने न केवल बिलासपुर बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है।

इस भव्य प्रतियोगिता में देशभर से लगभग 180 प्रतिभागियों ने भाग लिया। अपने वर्ग में आदया ने उत्कृष्ट वाक्-कौशल, नृत्य की भाव-भंगिमा, आत्मविश्वास तथा फैशन शो के रैंप वॉक के माध्यम से निर्णायकों एवं दर्शकों का दिल जीत लिया। उनकी सशक्त प्रस्तुति और आत्मविश्वास ने उन्हें यह प्रतिष्ठित बिताब दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

खिताब जीतने पर आदया को ब्यूटी क्वीन क्राउन, सैश, प्रमाण-पत्र एवं गिफ्ट हैम्पर प्रदान किया गया। तीन दिनों तक चले इस मध्य आयोजन में बोलीवुड अभिनेत्री रीया अरोडा, लोकप्रिय टीवी सीरियल क्रिमिनल जस्टिस के निर्देशक निर्माता मनीष सिंह, फैशन जगत की प्रतिष्ठित हस्ती उन्नति सिंह, टीवी धारावाहिक अभिनेता जयदीप, बोलीवुड कोरियोग्राफर यतिन गांधी, मॉडल सेफाली सूद, प्रसिद्ध कवि आलोक श्रीवास्तव सहित अनेक जाते माने निर्णायकगण उपस्थित रहे। इसके अलावा राजस्थान के कई गणमान्य नागरिकों एवं बड़ी संख्या में दर्शको की भी उपस्थिति रही।

प्रतियोगिता के अंतिम चरण में देश के 25 प्रमुख शहरों से चयनित प्रतिभागियों ने अपने हुनर का प्रदर्शन किया, जिनमें से विजेताओं का चयन किया गया। इस राष्ट्रीय मंच पर आदया का प्रदर्शन विशेष रूप से सराहनीय रहा और उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई।

अपनी सफलता पर आदया ने खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि इस उपलब्धि के पीछे उन्हें अपने स्वर्गीय दादा-दादी, नाना-नानी, मामा-मामी तया माता-पिता का निरंतर आशीर्वाद और सहयोग मिला है। उन्होंने बताया कि कल्चरल राउंड में उन्होंने रायगढ़ घराने की कथक नृत्य शैली की प्रस्तुति दी, जबकि फैशन राउंड में उन्होंने प्रसिद्ध डिजाइनर रीमा माखीजा द्वारा डिज़ाइन की गई पोशाक में रैंप वॉक किया। आराध्या को फाइनल राउंड के लिए मिस इंडिया यूनिवर्स रह चुकी नयोनिता लोध ने प्रशिक्षित किया था। आदया ने भविष्य में सीनियर मिस इंडिया प्रतियोगिता में भाग लेने की भी इच्छा व्यक्त की।

आदया, रायगढ़ घराने की प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना वासती वैष्णव की शिष्या है और उनके मार्गदर्शन में अपनी शास्त्रीय नृत्य कला को निरतर निखार रही है।

उल्लेखनीय है कि आदया वास्तव, क्रांति नगर बिलासपुर निवासी, डीपीएस स्कूल, बिलासपुर की कक्षा सातवी की छात्रा है। वे पूर्व क्रिकेटर आलोक वास्तव, जो वर्तमान में CMPDI में विभागाध्यक्ष (मानव संसाधन एवं प्रशासन) के पद पर कार्यरत है, तथा आँचल श्रीवास्तव की पुत्री हैं। पुत्री की इस राष्ट्रीय उपलब्धि पर माता-पिता ने गये और प्रसन्नता व्यक्त की है।

 
ब्रेकिंग : बड़े पैमाने पर सिविल जजों का हुआ तबादला, उच्च न्यायिक सेवा के अधिकारियों का भी किया गया ट्रांसफर, देखिए लिस्ट..!!

ब्रेकिंग : बड़े पैमाने पर सिविल जजों का हुआ तबादला, उच्च न्यायिक सेवा के अधिकारियों का भी किया गया ट्रांसफर, देखिए लिस्ट..!!

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में न्यायिक प्रशासन को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सिविल जज (जूनियर डिविजन) तथा उच्च न्यायिक सेवा के सदस्यों के ट्रांसफर और पोस्टिंग से जुड़े आदेश जारी किए हैं। हाईकोर्ट द्वारा जारी इन आदेशों के तहत प्रदेश के विभिन्न जिलों में पदस्थ न्यायाधीशों को नए जिलों में स्थानांतरित किया गया है और उन्हें स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे निर्धारित तिथि से अपने नए पदों पर कार्यभार ग्रहण करें।

देखिए लिस्ट…..

CG : अनिल टुटेजा, अनवर ढेबर सहित 4 को हाईकोर्ट से मिली जमानत, हाईकोर्ट ने इन मामलों में दी राहत

CG : अनिल टुटेजा, अनवर ढेबर सहित 4 को हाईकोर्ट से मिली जमानत, हाईकोर्ट ने इन मामलों में दी राहत

 बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कस्टम मिलिंग मामले में अनिल टुटेजा, अनवर ढेबर, अतुल सिंह और मुकेश मनचंदा को जमानत दे दी है। कस्टम मिलिंग मामले में जांच के दौरान ईओडब्ल्यू ने अनवर ढेबर और अनिल टुटेजा को आरोपी बनाते हुए केस दर्ज किया था। कोर्ट में चालान पेश होने के बाद दोनों को न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। अब हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद उनकी रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। खास बात यह है कि हाईकोर्ट की बेंच ने जांच एजेंसियों के दावों पर कड़ी टिप्पणी की है। इसमें साफ कहा गया है कि आरोपियों के अपराध में सहभागिता के साक्ष्य जांच एजेंसी पेश नहीं कर सकी है। इसके अलावा किसी मिलर द्वारा जबरन वसूली की शिकायत नहीं की गई है। इन बातों को जमानत का आधार माना गया है।

ईओडब्ल्यू के अनुसार, फरवरी 2025 में रोशन चंद्राकर और मनोज सोनी के खिलाफ पहला चालान पेश किया गया था। जांच एजेंसी का दावा है कि कस्टम मिलिंग के नाम पर राइस मिलरों से 20 रुपए प्रति क्विंटल की दर से अवैध राशि वसूली जाती थी। आरोप है कि भुगतान नहीं करने पर माकफैंड के जिला विपणन अधिकारियों के जरिए बिल रोक दिए जाते थे, जिससे दबाव बनाकर वसूली की जाती थी।

जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की बेंच ने कहा कि आर्थिक अपराध होने मात्र से जमानत स्वतः अस्वीकार नहीं की जा सकती। आवेदक की किसी भी शासकीय निर्णय में किसी प्रकार की सहभागिता के कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए हैं- ना कोई नोटशीट, ना कोई दस्तावेज, ना कहीं हस्ताक्षर वाले कोई भी दस्तावेज। इन सब कारणों से न्यायालय ने माना कि आवेदक को आगे हिरासत में रखना आवश्यक नहीं है और जमानत योग्य मामला बनता है।

बयान एक जैसे- हाईकोर्ट की बेंच ने सुनवाई करते हुए कहा कि चावल मिलरों के 47 बयान एक जैसे (कॉपी-पेस्ट) पाए गए;

ये यांत्रिक व अविश्वसनीय हैं। इसके अलावा हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सह-आरोपियों के बयान अकेले आधार नहीं बन सकते; सुप्रीम कोर्ट के इस स्पष्ट कानून का जिक्र किया गया। साथ ही सह-आरोपी जिन पर सीधे आरोप हैं, गिरफ्तार नहीं किए गए।

पूरक चालान पर सवाल-हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में बिना कोर्ट की अनुमति सप्लीमेंट्री चाजर्शीट दाखिल की गई; इससे आवेदक की स्वतंत्रता प्रभावित नहीं की जा सकती। साथ ही वैध अभियोजन स्वीकृति के बिना ट्रायल शुरू ही नहीं हो सकता। जमानत पर सहमति देते हुए बेंच ने कहा कि सह-आरोपी रोशन चंद्राकर व मनोज सोनी को जमानत मिल चुकी है। इसी तरह आरोप मुख्यतः दस्तावेजी / डिजिटल साक्ष्य पर आधारित, जो पहले से एजेंसी के कब्जे में हैं जांच एजेंसी के फरार होने, सबूत से छेड़छाड़ या गवाहों को प्रभावित करने की आशंका पर हाईकोर्ट ने कहा कि इसका कोई ठोस खतरा नहीं।

CG ब्रेकिंग : एक साथ 8 संकुल समन्वयकों का इस्तीफा, कहा नहीं करेंगे ये कार्य…

CG ब्रेकिंग : एक साथ 8 संकुल समन्वयकों का इस्तीफा, कहा नहीं करेंगे ये कार्य…

 बिलासपुर। जिला शिक्षा विभाग में कार्य करने वाले शहर एवं ग्रामीण क्षेत्र के आठ संकुल समन्वयकों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफा की वजह पारिवारिक और स्वास्थ्यगत तथा व्यक्तिगत कारण बताया जा रहा है। हालांकि शिक्षा विभाग से मिले सूत्रों के अनुसार शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्यों के अलावा कई अलग से कार्य संकुल समन्वयकों से करवाए जा रहे है। वहीं छोटी सी मानवीय या लिपिकीय त्रुटि होने के बाद संकुल समन्वयकों को प्रताड़ित किया जाता है और कुछ तथाकथित आरटीआई कार्यकर्ताओं द्वारा उनका भयादोहन कर उनसे वसूली करते हैं और पैसे नहीं मिलने पर झूठी शिकायतें उच्चाधिकारियों से करते हैं। जिससे तंग आकर संकुल समन्वयकों ने इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा समग्र शिक्षा विभाग के संचालक को भेजा है।

समग्र शिक्षा विभाग को आठ अलग-अलग संकुल समन्वयकों के त्यागपत्र प्राप्त हुए है। सभी में एक ही तरह का कारण बताया गया है। इस्तीफा में पारिवारिक और स्वास्थ्यगत कारणों को आधार बनाया गया है। इस्तीफे में कहा गया है कि गिरता स्वास्थ्य, पारिवारिक व्यस्तताएं और व्यक्तिगत समस्याओं के चलते वे इस्तीफा दे रहे है। समन्वयकों के अनुसार वे अब अपने मूल जिम्मेदारी शिक्षण कार्य पर अधिक ध्यान देना चाहते हैं। वे व्यक्तिगत कारणों से इस प्रशासनिक पद का निर्वहन करने में स्वयं को असमर्थ पा रहे हैं। हालांकि अधिकारियों ने किसी का इस्तीफा स्वीकृत नहीं किया है और उन्हें होल्ड पर रखा है। समग्र शिक्षा विभाग के अधिकारी संकुल समन्वयकों से बात करने की बात कह रहे है।

समन्वयकों ने बताया कि शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्यों के अलावा उनसे जाति प्रमाण पत्र,व्यक्तिगत कार्य और अन्य विभागों के डाक आदान– प्रदान व प्रशासनिक पत्राचार जैसे गैर शैक्षणिक कार्य भी कराए जा रहे हैं। यह उनके दायित्व क्षेत्र से बाहर है और इन कार्यों के चलते उनका मूल शैक्षणिक कार्य भी प्रभावित हो रहा है।

अतिरिक्त कार्यों के दबाव के चलते इसका असर संकुल समन्वयकों के स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। मिली जानकारी के अनुसार दयालबंद संकुल के एक शैक्षणिक समन्वयक की अकाल मौत काम के दबाव में हो चुकी हैं। वही दयालबंद संकुल के ही एक अन्य समन्वयक को हाई बीपी के चलते लकवा हो गया है।

इस्तीफा देने वाले समन्वयकों ने बातचीत में बताया कि कुछ तथाकथित आरटीआई कार्यकर्ताओं के द्वारा छोटी सी भी लिपिकीय या मानवीय त्रुटि होने पर उनसे उगाही का प्रयास किया जाता है। पैसे नहीं देने पर नौकरी खा जाने और निलंबित करवाने की धमकी दी जाती है। संकुल समन्वयकों ने बताया कि एक साल में शिक्षा विभाग में कुल 102 आरटीआई आवेदन प्राप्त हुए हैं। जिनमें 88 व्यक्तिगत जानकारी के आवेदन है। इसके बलबूते पर उनसे वसूली की कोशिश की जा रही है। इसकी शिकायत सभी संकुल समन्वयकों ने पुलिस में भी की है। पर अब तक कार्यवाही नहीं हुई है।

इन्होंने दिया इस्तीफा

विकास साहू कुदुदंड, मनोज सिंह बिजौर, योगेंद्र वर्मा मोपका,आशीष वर्मा सिरगिट्टी,श्रीकांत भगत दयालबंद,प्रभात कुमार मिश्रा तारबाहर, शेषमणी कुशवाहा चांटीडीह,शशिभूषण पाटनवार बालक सरकंडा शामिल है।

Accident : छत्तीसगढ़ में दिल दहला देने वाला सड़क हादसा, युवती समेत 2 की मौत…. कार के उड़े परखच्चे

Accident : छत्तीसगढ़ में दिल दहला देने वाला सड़क हादसा, युवती समेत 2 की मौत…. कार के उड़े परखच्चे

 बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में नूतन चौक से देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसे की खबर सामने आई है, जहां तेज रफ्तार कार और हाइवा की जोरदार टक्कर में युवती समेत दो लोगों की मौत हो गई। हादसा इतना भीषण था कि कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई, जबकि दो युवक गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती है, मौके पर पहुंची सरकंडा पुलिस ने दोनों वाहनों को जब्त कर हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है।

गुरुवार रात करीब साढ़े ग्यारह बजे अरपा पार नूतन चौक स्थित सेंट्रल लाइब्रेरी के सामने यह हादसा उस वक्त हुआ, जब सीपत चौक से राजकिशोर नगर की ओर जा रही टाटा नेक्सान कार नूतन चौक पर यूटर्न ले रही थी। इसी दौरान राजकिशोर नगर की ओर से तेज रफ्तार में आ रही हाइवा से कार की आमने-सामने जोरदार भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार के परखच्चे उड़ गए। हादसे में कार सवार अंशु चन्द्रा, उम्र 24 वर्ष, निवासी जांजगीर-चांपा की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि हिमांशु राठौर, उम्र 26 वर्ष ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया, मृतक हिमांशु अटल यूनिवर्सटी के कंप्यूटर साइंस का छात्र था।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक टक्कर कार के उस हिस्से में हुई, जहां युवती बैठी थी, जिससे उसके सिर में गंभीर चोट आई। कार का गेट और सीट बुरी तरह चिपक जाने के कारण युवती वाहन में फंस गई थी, जिसे कड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाला गया। हादसे में आनंद चन्द्रा और नीरज द्विवेदी गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनका इलाज जारी है। वहीं मौके से कार में शराब की बोतलें और सिगरेट मिलने की बात भी सामने आई है, जिससे हादसे के समय नशे में होने की आशंका जताई जा रही है। सरकंडा पुलिस ने दोनों पक्षों के ऊपर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

 
CG NEWS : 5 स्पा सेंटरों पर पुलिस की रेड, हो रहा था ये गंदा काम

CG NEWS : 5 स्पा सेंटरों पर पुलिस की रेड, हो रहा था ये गंदा काम

 बिलासपुर। सिविल लाइन थाना क्षेत्र में पुलिस ने स्पा सेंटरों में नियमों के उल्लंघन को लेकर विशेष अभियान चलाया। जांच के दौरान एक्वा स्पा 36 मॉल, एसीसी स्पा व्यापार विहार, दर्शना स्पा भारतीय नगर, एलिमेंट्स स्पा और एक्वा-2 स्पा की सघन जाँच की गई।

जाँच में अनियमित गतिविधियां सामने आने पर संबंधित प्रबंधकों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई। कार्रवाई में अविनाश लहरे, ऋषभ सारथी, मोहम्मद मोइन खान, मनीष जोशी और अमन सेन शामिल हैं।

पुलिस का कहना है कि यह अभियान सिविल लाइन क्षेत्र में स्पा सेंटरों में सुरक्षा और नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए चलाया गया है।

Breaking : तेज रफ्तार का कहर, अमरकंटक जा रही कार पेड़ से टकराई… दो की मौत

Breaking : तेज रफ्तार का कहर, अमरकंटक जा रही कार पेड़ से टकराई… दो की मौत

 बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के न्यायधानी में दर्दनाक सड़क हादसे में दो युवकों की मौत हो गई। रायपुर से पुर्णिमा स्नान के लिए अमरकंटक जा रहे श्रद्धालुओं की कार बेलगहना क्षेत्र के ग्राम भसको के पास सड़क से उतरकर पेड़ से जा टकराई। हादसे में दो लोगों की मौत हो गई, वहीं तीन घायल हैं। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराने के बाद हादसे की सूचना मृतक के परिजनों को दी गई है। परिजनों के आने पर शव का पीएम कराया गया है। मामला बेलगहना चौकी क्षेत्र का है।

बेलगहना चौकी से मिली जानकारी के अनुसार रायपुर खम्हारडीह थाना अंतर्गत कचना निवासी रामकुमार धीवर(45) अपने साथियों निलेश्वर धीवर(38) दलदल सीवनी, सुखसागर मानिकपुरी(39) निवासी मजेठा थाना खरोरा, अमित चंद्रवंशी निवासी दलदल सीवनी और राजकुमार साहू के साथ पुर्णिमा स्नान के लिए अमरकंटक जा रहे थे। कार निलेश्वर चला रहा था। सुबह करीब नौ बजे वे बेलगहना चौकी क्षेत्र के ग्राम भसको के पास पहुंचे थे। तभी तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर सड़क से उतरकर पेड़ से जा टकराई। इस हादसे में रामकुमार धीवर और राजकुमार साहू को गंभीर चोटे आई। हादसे में निलेश्वर और उनके दो अन्य साथी भी घायल हो गए। किसी ने हादसे की सूचना बेलगहना पुलिस को दी। तब बेलगहना पुलिस मौके पर पहुंची। मौके पर रामकुमार की मौत हो गई थी। पुलिस ने सभी घायलों को अस्पताल भेजा। रास्ते में राजकुमार ने भी दम तोड़ दिया। पुलिस ने दोनों के शव को पीएम के लिए भेज दिया। हादसे की सूचना पर परिजन भी रतनपुर पहुंच गए। यहां उनका पीएम कराया गया।

फंस गया था शव, दो घंटे तक किया गया मशक्कत

हादसे की सूचना पर पुलिस की टीम मौके पर पहुंच गई। हादसे के कारण कार बुरी तरह पिचक गया था। इसके कारण रामकुमार का शव बुरी तरह फंस गया था। पुलिस ने करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद शव को किसी तरह निकाला गया। इसके बाद शव को पीएम के लिए भेज दिया गया।

यह हुए घायल

हादसे में घायल हुए लोगों में कार चालक नीलेश्वर धीवर 38 वर्ष निवासी दलदल सिवनी, रायपुर, सुखसागर मानिकपुरी 39 वर्ष निवासी मजेठा, आरंग रायपुर तथा अमित चंद्रवंशी 39 वर्ष निवासी दलदल सिवनी, मोवा रायपुर शामिल हैं। एक्सीडेंट में कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी थी और चालक नीलेश्वर के दोनों पैर टूटकर कार में फंस गए थे। पुलिस और स्थानीय लोगों ने कड़ी मशक्कत के बाद घायलों को बाहर निकाला और तत्काल अस्पताल पहुंचाया। गंभीर रूप से घायल तीनों युवकों को सिम्स में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है।

छत्तीसगढ़ पुलिस आरक्षक भर्ती मामले में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और व्यापम को जारी किया नोटिस, तीन सप्ताह के भीतर मांगा जवाब

छत्तीसगढ़ पुलिस आरक्षक भर्ती मामले में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और व्यापम को जारी किया नोटिस, तीन सप्ताह के भीतर मांगा जवाब

 बिलासपुर। पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा की चयन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर दायर याचिका पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शासन और व्यापम को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने दोनों पक्षों से तीन सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।

दरअसल, पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा मामले में दायर याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। परीक्षा में चयन प्रक्रिया में अनियमितता को लेकर 10 अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें सुनवाई करते हुए जस्टिस पीपी साहू की सिंगल बेंच ने राज्य सरकार और व्यापम को नोटिस जारी की है। अब इस मामले में अगली सुनवाई 3 हफ्ते बाद निर्धारित की गई है।

बता दें कि 10 अभ्यर्थियों ने पुलिस आरक्षक भर्ती चयन प्रक्रिया में भर्ती नियम 2007 के उल्लंघन का जिक्र किया गया है। उनका कहना है कि कुल 5,967 पदों पर भर्ती होनी थी, लेकिन चयन सूची में केवल 2,500 अभ्यर्थियों के नाम जारी किए गए हैं।

ब्रेकिंग : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, पटवारी से RI पदोन्नति परीक्षा निरस्त, इस वजह से लिया फैसला

ब्रेकिंग : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, पटवारी से RI पदोन्नति परीक्षा निरस्त, इस वजह से लिया फैसला

बिलासपुर। हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में पटवारी से आरआई राजस्व निरीक्षक के पद पर पदोन्नति को निरस्त कर दिया है। 216 पटवारियों को आरआई के पद पर पदोन्नति दी गई थी। बिलासपुर हाई कोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में पटवारी से राजस्व निरीक्षक के पद पर आयोजित पदोन्नति परीक्षा को निष्पक्षता के अभाव में निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने चयन प्रक्रिया में भाई-भतीजावाद और पक्षपात के संकेत मिलने की बात कही है। छत्तीसगढ़ में राजस्व विभाग से जुड़ी पदोन्नति प्रक्रिया पर हाई कोर्ट ने बड़ा और सख्त फैसला सुनाने के साथ ही अपनाई गई प्रक्रिया पर कड़ी टिप्प्णी की है।

पटवारी से राजस्व निरीक्षक पद पर पदोन्नति के लिए आयोजित परीक्षा को हाई कोर्ट ने निरस्त कर दिया है। इस फैसले के बाद 216 पटवारियों को दी गई पदोन्नति स्वतः समाप्त हो जाएगी। मामले की सुनवाई के बाद जस्टिस एनके व्यास ने अपने फैसले में कहा है कि पदोन्नति परीक्षा प्रणाली दूषित थी और चयन प्रक्रिया पारदर्शी व निष्पक्ष नहीं थी। कोर्ट ने माना कि परीक्षा और चयन प्रक्रिया में गंभीर खामियां थीं, जिनसे परीक्षा की विश्वसनीयता और पवित्रता पर सवाल खड़े होते हैं।

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड और याचिकाकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत तथ्यों से यह स्पष्ट संकेत मिलते हैं कि चयन प्रक्रिया में भाई-भतीजावाद, कदाचरण और पक्षपात की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने माना कि परीक्षा न तो समान अवसर के सिद्धांत पर आधारित थी और न ही यह प्रशासनिक पदोन्नति के मानकों पर खरी उतरती है। कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि राजस्व निरीक्षक का पद एक प्रोफेशनल और जिम्मेदारीपूर्ण पद है, जहां पारदर्शिता और योग्यता सर्वोपरि होनी चाहिए। यदि पदोन्नति की प्रक्रिया ही संदेह के घेरे में हो, तो ऐसे चयन को वैध नहीं माना जा सकता।

कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा है कि जब पदोन्नति परीक्षा ही कदाचरण के घेरे में है और दूषित है तब पटवारी से पदोन्नति प्राप्त राजस्व निरीक्षकों को प्रशिक्षण पर भेजने का प्रश्न ही नहीं उठता।

नई परीक्षा कराने की छूट

हाई कोर्ट ने राज्य शासन को छूट दी है कि वह पटवारी से राजस्व निरीक्षक पद पर पदोन्नति के लिए नई परीक्षा आयोजित कर सकता है। कोर्ट ने साफ कहा कि परीक्षा पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप होनी चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में ऐसी किसी भी चयन प्रक्रिया में परीक्षा की पवित्रता और निष्पक्षता से कोई समझौता न हो। योग्य उम्मीदवारों को अवसर मिले और किसी भी प्रकार का पक्षपात या अनुचित लाभ न दिया जाए।

Accident : चौथिया जा रही तेज रफ्तार बस पलटी, 40 यात्री थे सवार, मची चीख-पुकार

Accident : चौथिया जा रही तेज रफ्तार बस पलटी, 40 यात्री थे सवार, मची चीख-पुकार

 बिलासपुर।  बिलासपुर में शनिवार देर रात कोटा मार्ग पर ग्राम खपराखोल के पास एक यात्री बस अनियंत्रित होकर सड़क पर पलट गई। बस में करीब 40 यात्री सवार थे। हादसे में लगभग छह यात्री घायल हो गए, जिनमें दो की हालत गंभीर बताई जा रही है।

मिली जानकारी के अनुसार, जुनेजा बस (क्रमांक CG 16 H 0109) बिलासपुर से सेमरिया (लोरमी) जा रही थी। बस में सवार यात्री चौथिया कार्यक्रम में शामिल होकर लौट रहे थे। इसी दौरान खपराखोल के पास अचानक बस का संतुलन बिगड़ गया और वह पलट गई

दुर्घटना के बाद आसपास के लोगों की मदद से सभी घायलों को लोरमी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पहुंचाया गया। मामूली रूप से घायल यात्रियों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। दो यात्री अब्दुल हसीम (35 वर्ष), जरीन खान (17 वर्ष) गंभीर रूप से घायल है। दोनों को प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए मुंगेली जिला अस्पताल रेफर किया गया है।

घटना की सूचना मिलते ही जूना पारा चौकी प्रभारी संजीव ठाकुर पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्य कराया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। हादसे के कारणों का पता लगाया जा रहा है।

वरिष्ठता को दरकिनार कर जूनियर शिक्षक को दिया प्रमोशन, हाई कोर्ट ने किया आदेश निरस्त

वरिष्ठता को दरकिनार कर जूनियर शिक्षक को दिया प्रमोशन, हाई कोर्ट ने किया आदेश निरस्त

 बिलासपुर। एक शिक्षक द्वारा स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा नियम विरुद्ध किए गए पदोन्नति को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी। मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग के आदेश को निरस्त कर दिया है। हाई कोर्ट ने साफ कहा कि सेवा नियमों का अवहेलना कर किसी पात्र कर्मचारी को उसके वैधानिक अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता। हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता को विभाग के समक्ष अभ्यावेदन पेश करने व राज्य सरकार को भर्ती एवं पदोन्नति नियम 2008 के अनुसार तीन महीने के भीतर निर्णय लेने का आदेश दिया है।

याचिकाकर्ता दिनेश कुमार राठौर अधिवक्ता जितेन्द्र पाली, अनिकेत वर्मा के जरिए बिलासपुर हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता की प्रारंभिक नियुक्ति 26 अप्रैल 1989 को निम्न वर्ग शिक्षक के पद पर हुई थी। 2 फरवरी 2009 को उच्च वर्ग शिक्षक के पद पर पदोन्नत किया गया। 23 जनवरी 2015 को एक आदेश जारी कर डीईओ ने 18 अगस्त 2008 से उनको वरिष्ठता प्रदान की। याचिका के अनुसार स्कूल शिक्षा विभाग के नियमों व मापदंड के अनुसार पांच वर्ष की सेवा पूर्ण कर ली थी और वह व्याख्याता (लेक्चरर) पद पर पदोन्नति के लिए पात्र था।

याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में नियमों का हवाला देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा राजपत्रित सेवा (स्कूल स्तर सेवा) भर्ती एवं पदोन्नति नियम, 2008 के अनुसार व्याख्याता का पद 100 प्रतिशत पदोन्नति द्वारा उच्च वर्ग शिक्षकों से भरा जाना है। इसके बावजूद विभागीय पदोन्नति समिति द्वारा 19 जून 2012 को जारी पदोन्नति आदेश में उससे कनिष्ठ शिक्षकों को पदोन्नति दे दी गई। विभागीय अफसरों ने उसके मामले पर विचार नहीं किया। उसका दावा इस आधार पर खारिज कर दिया कि, 1 अप्रैल 2010 की स्थिति में उसके पास स्नातकोत्तर डिग्री नहीं थी।

याचिकाकर्ता ने बताया कि विभागीय अधिकारियों ने जानबूझकर उसके नाम पर पदोन्नति के लिए विचार ही नहीं किया 16 अप्रैल 2012 को स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त कर ली थी। मामले की सुनवाई जस्टिस संजय जायसवाल के सिंगल बेंच में हुई। मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग सहित अन्य अफसरों को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने का निर्देश दिया था। मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने 16 सितम्बर 2016 के आदेश जिसमें याचिकाकर्ता को स्नातकोत्तर उपाधि नहीं होने के कारण पदोन्नति हेतु पात्र नहीं माना गया था, राज्य शासन के इस आदेश को निरस्त कर दिया है। याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वे अपनी समस्त मांगों के साथ अभ्यावेदन प्रस्तुत करें तथा सक्षम प्राधिकारी को 90 दिनों के भीतर भर्ती एवं पदोन्नति नियम, 2008 के अनुसार निर्णय लेने का निर्देश दिया है।

अनुदान प्राप्त स्कूलों के सेवानिवृत्त शिक्षकों की पेंशन याचिका हाईकोर्ट ने की खारिज

अनुदान प्राप्त स्कूलों के सेवानिवृत्त शिक्षकों की पेंशन याचिका हाईकोर्ट ने की खारिज

 बिलासपुर। अनुदान प्राप्त स्कूलों के रिटायर्ड शिक्षकों ने सरकारी स्कूल के शिक्षकों की तरह पेंशन की मांग करते हुए अपने अधिवक्ताओं के माध्यम से हाई कोर्ट में अलग-अलग याचिका दायर की थी। मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने रिटायर्ड शिक्षकों की याचिकाओं को खारिज कर दिया है। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है, राज्य सरकार याचिकाकर्ताओं के स्कूल को 100 प्रतिशत ग्रांट-इन-एड दे रहा है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि, याचिकाकर्ता पेंशन के हकदार होंगे। कोर्ट ने साफ कहा, यह सहायता स्कूलों के उचित प्रबंधन और सुचारू संचालन के उद्देश्य से दी जाती है।

अनुदान प्राप्त स्कूलों के रिटायर्ड शिक्षकों की याचिकाओं को खारिज करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि यह अदालत विधायिका को कोई खास कानून बनाने का निर्देश नहीं दे सकता। संवैधानिक व्यवस्था के तहत संसद को कानून बनाने की संप्रभु शक्ति प्राप्त है। बता दें कि अनुदान प्राप्त स्कूलों से सेवानिवृत हुए शिक्षकों ने सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के समान पेंशन की मांग को लेकर याचिका दायर की थी। शिक्षकों ने अपनी याचिका में कहा था कि अनुदान प्राप्त स्कूलों के शिक्षक व कर्मचारी सरकारी स्कूल के शिक्षक व कर्मचारियों के सामने पेंशन पाने का हकदार है। इसके बाद भी राज्य सरकार द्वारा नहीं दिया जा रहा है।

याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका अनुदान प्राप्त निजी महाविद्यालयों के रिटायर्ड प्राध्यापकों व कर्मचारियों को सरकारी काॅलेजों के प्राध्यापकों व कमचारियों की तरह पेंशन का मुद्दा भी उठाया। याचिकाकर्ताओं ने संविधान प्रदत्त शक्तियों और अधिकारों का हवाला देते हुए कहा कि जब वैधानिक योजना समानता का आदेश देती है, और सर्कुलर इसकी पुष्टि करता है, तो राज्य ऐसे आधारों पर समान व्यवहार से पीछे नहीं हट सकता जो न तो तर्कसंगत हैं और न ही कानूनी रूप से उचित हैं। वरिष्ठ नागरिकों को पेंशन देने से इंकार करना याचिकाकर्ताओं के गरिमा के साथ जीने के अधिकार पर हमला करता है, जिससे अनुच्छेद 21 का उल्लंघन होता है। याचिकाकर्ता शिक्षकों ने कहा कि दशकों तक सेवा करने और वैधानिक दायित्वों को पूरा करने के बावजूद, सेवानिवृत्ति के बाद बिना किसी सहायता के रह गए हैं। राज्य सरकार द्वारा पेंशन देने से इंकार करना समानता, निष्पक्षता और सुशासन के सिद्धांतों का उल्लंघन करता है।

मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि, याचिकाकर्ता शिक्षकों द्वारा की जा रही पेंशन की मांग स्वीकार्य नहीं है, क्योंकि उक्त स्कूल न तो सरकारी स्कूल है और न ही याचिकाकर्ता सरकारी कर्मचारी हैं। लिहाजा पेंशन की मांग करने वाली याचिकाकर्ताओं का दावा निराधार है। कोर्ट ने कहा, राज्य सरकार याचिकाकर्ताओं के स्कूल को 100 प्रतिशत ग्रांट-इन-एड दे रहा है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि, याचिकाकर्ता पेंशन के हकदार होंगे। यह सहायता स्कूलों के उचित प्रबंधन और सुचारू संचालन के उद्देश्य से दी जाती है। ग्रांट-इन-एड की आड़ में, याचिकाकर्ता शिक्षक पेंशन की मांग नहीं कर सकते। बता दें कि स्कूल शिक्षा विभाग ने 7 जनवरी 2009 और 5 फरवरी 2009 के माध्यम से ऐसी मांगों को खारिज कर दिया था क्योंकि ऐसे निजी सहायता प्राप्त स्कूलों को पेंशन देने का कोई प्रावधान नहीं है। कोर्ट ने कहा कि, याचिकाकर्ता यह साबित करने में विफल रहे कि पेंशन लाभ देने के संबंध में कोई नियम हैं। राज्य को सहायता प्राप्त स्कूलों के सेवानिवृत्त शिक्षकों-कर्मचारियों को राज्य सरकार के शिक्षकों, कर्मचारियों के बराबर पेंशन लाभ देने के लिए नियम बनाने का निर्देश नहीं दिया जा सकता है। हाई कोर्ट ने शिक्षकों की याचिका को खारिज कर दिया है।
CG – शराब के नशे में घर से निकली महिला, फिर इस हाल में मिली, देख कर परिजनों के उड़े होश

CG – शराब के नशे में घर से निकली महिला, फिर इस हाल में मिली, देख कर परिजनों के उड़े होश

 बिलासपुर। शराब ने एक और महिला की जान ले ली है। दरसअल शराब के नशे में महिला घर से निकल गई। देर रात पता चला कि महिला तालाब में डूब गई है। परिजनों ने इसकी सूचना पुलिस को देकर तड़के लाश निकाल ली है। पीएम के बाद शव स्वजन को सौंप दिया गया है। मामला सकरी थाना क्षेत्र का है।

अमेरी के सतनाम नगर में रहने वाले चंद्रकुमार कुर्रे ने पुलिस को बताया कि उसकी बहन चंद्रकली कुर्रे(40) घर से निकली थी। तब वह शराब के नशे में थी। इसके बाद वह घर के पास ही तालाब के किनारे बैठी थी। इसके बाद उसका कुछ पता नहीं चला। रात करीब 10 बजे उन्हें किसी ने मोबाइल पर काल कर बताया कि चंद्रकली तालाब में डूब गई है। तब चंद्रकुमार अपने भांजे अरविंद को साथ लेकर तालाब के पास पहुंचे। साथ ही इसकी सूचना सकरी पुलिस को दी। इसके बाद रात में ही परिजनों की मदद से पुलिस ने तालाब में महिला की तलाश शुरू कर दी। तड़के करीब तीन बजे परिजनों की मदद से महिला का शव निकाल लिया गया।

पुलिस ने शव का पीएम कराया। परिजनों ने पूछताछ में बताया कि चंद्रकली आए दिन शराब पीती थी। इसके कारण उसके पति और बच्चे अलग रहते थे। महिला अकेले रहकर रोजी मजदूरी करती थी। रात वह शराब के नशे में तालाब के पास बैठी थी। ढलान से वह नशे के कारण पानी में चली गई। पूछताछ के बाद पुलिस इस मामले की आगे जांच कर रही है।

Accident : बिलासपुर रेल हादसा अपडेट; एक और घायल ने तोड़ा दम… मौतों का आंकड़ा पहुंचा 14

Accident : बिलासपुर रेल हादसा अपडेट; एक और घायल ने तोड़ा दम… मौतों का आंकड़ा पहुंचा 14

 बिलासपुर :-  बिलासपुर न्यायधानी से एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। 4 नवंबर को हुई गतौरा–लालखदान रेल हादसे में आज एक और घायल ने दम तोड़ दिया है। इसके साथ ही इस दर्दनाक हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 14 हो गई है। आज जिस व्यक्ति की मौत हुई है, उनका नाम तुलाराम अग्रवाल है। उनकी उम्र 62 वर्ष थी और वे आज़ाद नगर, बिल्हा, जिला बिलासपुर के निवासी थे। हादसे के बाद से ही वे एलाइट हॉस्पिटल में भर्ती थे, जहां आज इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।

इलाज के दौरान मौत

परिजनों के मुताबिक, तुलाराम अग्रवाल 4 नवंबर से लगातार अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे थे। लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। जैसे ही मौत की खबर सामने आई, परिवार में कोहराम मच गया।मृतक के परिजनों ने रेलवे प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि इस हादसे में रेलवे की घोर लापरवाही सामने आई है। उनका आरोप है कि हादसे के दिन ही उनके परिवार के एक सदस्य की मौत हो गई थी और तुलाराम अग्रवाल को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन रेलवे की ओर से न तो समुचित इलाज की व्यवस्था की गई और न ही सही तरीके से देखरेख हुई।

रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल

परिजनों ने साफ शब्दों में कहा है कि अगर समय पर बेहतर इलाज और जिम्मेदारी निभाई जाती, तो आज तुलाराम अग्रवाल की जान बच सकती थी। उन्होंने रेलवे से मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा, इलाज का खर्च और परिवार के भरण-पोषण के लिए आर्थिक सहायता देने की मांग की है। पुलिस का कहना है कि इलाज के दौरान मौत हुई है और मामले की जांच जारी है। वहीं, हादसे के इतने दिनों बाद भी लगातार मौतें होना रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है।क्या पीड़ित परिवारों को न्याय मिलेगा? क्या जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी?और क्या भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे?फिलहाल, पूरे इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल है।

 
रतनपुर-कोरबा हाईवे पर खड़े ट्रेलर से भिड़ी यात्री बस, 12 घायल, 5 गंभीर

रतनपुर-कोरबा हाईवे पर खड़े ट्रेलर से भिड़ी यात्री बस, 12 घायल, 5 गंभीर

 बिलासपुर| सुबह-सुबह हाईवे पर जरा सी चूक कितनी भारी पड़ सकती है, इसका उदाहरण रतनपुर-कोरबा नेशनल हाईवे पर देखने को मिला। अंधेरे और कम विजिबिलिटी के बीच सड़क किनारे खड़े एक ब्रेकडाउन ट्रेलर ने चलते यात्री बस को हादसे का शिकार बना दिया। इस टक्कर में बस सवार 12 यात्री घायल हो गए, जिनमें 5 की हालत गंभीर बताई जा रही है। बिलासपुर जिले के रतनपुर थाना क्षेत्र में मंगलवार (16 दिसंबर) सुबह करीब साढ़े 5 बजे दर्री पारा बाईपास के पास यह सड़क हादसा हुआ।

बिहार से रायपुर जा रही रॉयल बस (CG 06 GY 8153) सड़क किनारे ब्रेकडाउन की स्थिति में खड़े ट्रेलर (CG 12 AW 3236) से पीछे से जा टकराई। हादसे के समय बस में 25 से अधिक यात्री सवार थे। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बस के ड्राइवर सुरेंद्र विश्वकर्मा के दोनों पैर फ्रैक्चर हो गए। हादसे में कुल 12 यात्रियों को चोटें आई हैं, जिनमें 5 यात्रियों की हालत गंभीर बताई जा रही है। एक यात्री को कमर में गंभीर चोट आई है।

घटना की सूचना मिलते ही रतनपुर पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को एंबुलेंस से रतनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर रूप से घायल सुरेंद्र विश्वकर्मा, मंजय कुमार, कमालुद्दीन अंसारी, राकेश कुमार सिंह और कु. सलोनी सिंह को बेहतर इलाज के लिए सिम्स बिलासपुर रेफर किया गया है।

हादसे की जानकारी मिलते ही रतनपुर तहसीलदार शिल्पा भगत और थाना प्रभारी भी अस्पताल और घटनास्थल पहुंचे। पुलिस ने मौके से आवश्यक साक्ष्य जुटाकर मामले की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में ब्रेकडाउन ट्रेलर पर पर्याप्त संकेतक और सुरक्षा इंतजाम न होने की आशंका जताई जा रही है।

इस हादसे में सुरेंद्र विश्वकर्मा (ड्राइवर), मंजय कुमार, राजेश्वर राम, दीपक कुमार, सनोज यादव, कमालुद्दीन अंसारी (चालक), राकेश कुमार सिंह, कु. सलोनी सिंह, सुनीता सिंह, शाहजहां खातून, चिंता कुमारी और अशरफी सिंह घायल हो गए हैं। एसएसपी रजनेश सिंह ने बताया कि हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई है। घायलों को समय पर इलाज उपलब्ध कराया गया है। बस चालक के दोनों पैर फ्रैक्चर हुए हैं, जबकि एक यात्री को कमर में गंभीर चोट आई है। मामले की जांच जारी है।

CRPF के रिटायर्ड कर्मचारी से 6.30 लाख की ठगी…लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम पर इस तरह से वसूले पैसे

CRPF के रिटायर्ड कर्मचारी से 6.30 लाख की ठगी…लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम पर इस तरह से वसूले पैसे

 बिलासपुर। लॉरेंस बिस्नोई गैंग से जुडऩे की धमकी देकर फर्जी क्राइम ब्रांच अधिकारी ने सीआरपीएफ के रिटायर्ड कर्मचारी से धोखाधड़ी कर ली। ठग ने फोन से धमकाकर 6 लाख 30 हजार रूपए वसूल लिया। अनजान व्यक्ति का फोन बंद बताया। तब पीड़ित को ठगी का अहसास हुआ। इस मामले में पुलिस अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामला सकरी थाना क्षेत्र का है।

सकरी पुलिस ने बताया कि आसमा सिटी फेस-2 सकरी निवासी दिवाकर मण्डल पिता भुतनाथ मण्डल (61) सीआपीएफ से रिटायर कर्मचारी है। 2 नवंबर 2025 को दिवाकर को एक अनजान नंबर से व्यक्ति ने फोन किया। उसने कहा कि टेलीकाम आफिस से बोल रहा हूं। आपकी आईडी से मुंबई व कनाडा बैंक में एक खाता चल रहा है।

वह दूसरे व्यक्ति से बात कराया। उसने अपने आप को क्राइम ब्रांच मुम्बई से बाल सिंह राजपुत बताया। उसने कहा कि आपका खाता मनी लॉन्ड्रिंग केस में जुड़ा हुआ है। साथ ही लॉरेंस बिस्नोई केस में नाम जुड़ा है। कुछ समय बाद व्हाटसएप के माध्यम से व्हाट्सएप कॉल किया और अधार कार्ड, पैन कार्ड़ दिखाया। जिससे दिवाकर को भरोसा हो गया।

वारंट कैंसिल करने के नाम से मांगे रुपए:

अज्ञात व्यक्ति ने बोला कि आपके नाम से वारण्ट निकला है। इसके एवज में पैसे की मांग की। साथ ही किसी अन्य लोगों को जानकारी देने से मना किया। झांसे में फंसकर दिवाकर ने आरटीजीएस के माध्यम से 6 लाख 30 हजार रूपए ट्रांसफर कर दिए। जब पीड़ित ने उक्त नंबर पर दोबारा कॉल किया तो स्वीच ऑफ बताया। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने मोबाइल नंबर धारक के खिलाफ अपराध दर्ज किया है।

625 प्ले स्कूल संचालकों को DEO ने थमाई नोटिस, हाई कोर्ट में PILपर चल रही है सुनवाई

625 प्ले स्कूल संचालकों को DEO ने थमाई नोटिस, हाई कोर्ट में PILपर चल रही है सुनवाई

 बिलासपुर। हाई कोर्ट की सख्ती का असर अब दिखाई देने लगा है। बिलासपुर जिले के 625 प्ले स्कूल संचालकों को डीईओ ने नियमानुसार पंजीयन कराने के लिए नोटिस जारी किया है। जारी नोटिस में चेतावनी दी है कि आदेश का पालन नहीं करने वाले स्कूलों पर कड़ी कार्रवाई की की जाएगी। बता दें कि प्रदेश के अलग अलग जिलों में बिना रजिस्ट्रेशन के प्ले स्कूल का संचालन किया जा रहा है। हाई कोर्ट में दायर जनहित याचिका में आरोप लगाया है कि प्ले स्कूल संचालक मनमाने फीस वसूल रहे हैं और इन पर राज्य सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है।

डीईओ विजय टांडे ने जिले के चारों ब्लॉक के बीईओ को अपने-अपने कार्यक्षेत्र के अंर्तगत संचालित निजी स्कूलों से संपर्क कर प्ले स्कूलों का पंजीयन सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया है। शिक्षा विभाग द्वारा पहले भी निजी स्कूल संचालकों को प्ले स्कूल के रजिस्ट्रेशन के निर्देश दिए गए थे, लेकिन सिर्फ 10 स्कूलों ने ही पंजीयन कराने आवेदन जमा किया था। जनहित याचिका में मांग की गई है, प्ले स्कूलों को नियंत्रित करने के लिए सरकार को कड़े नियम बनाने चाहिए, जिनमें पंजीयन की सख्त शर्तें और फीस नियंत्रण शामिल हों।

ये है जरूरी शर्तें

3 साल से कम उम्र के बच्चे को प्ले स्कूल में दाखिला नहीं दिया जाएगा। प्ले स्कूल की फीस सरकार तय करेगी या उसके अनुसार नियंत्रित होगी। फीस केवल महीने या तीन महीने के आधार पर ही ली जा सकती है। एक साथ पूरे सालभर की फीस लेने की मनाही है। यह भी शर्त है कि बच्चे के एडमिशन के समय प्ले स्कूल कोई अतिरिक्त पैसा (कैपिटेशन फीस) पालककन से नहीं ले सकता। बच्चे या उसके माता-पिता से कोई टेस्ट, इंटरव्यू या स्क्रीनिंग भी नहीं लीजा सकती।

कार्रवाई को लेकर अब भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। राज्य सरकार ने यह तो तय किया है कि मापदंड और शर्तो को पूरा ना करने वाले प्ले स्कूल संचालकों के खिलाफ प्ले स्कूल नियम (2) या (3) का पालन नहीं करने पर कार्रवाई की जाएगी। यब कार्रवाई कैसी होगी और किस तरह की जाएगी इसका जिक्र नही किया गया है।

समिति का करना होगा गठन

यह भी शर्त है कि स्कूल संचालकों को विद्यालय पालक शिक्षण समिति का गठन करना होगा। समिति का गठन स्कूल प्रारंभ होने के एक महीने के भीतर करना होगा। समिति एक साल के लिए मान्य होगी। इसमें 75 प्रतिशत पालक और 25 प्रतिशत शिक्षक होंगे। सदस्यों की संख्या 12 निर्धारित की गई है। समिति का अध्यक्ष कोई पालक ही होंगे। पालक में से 75% महिलाओं को रखना अनिवार्य किया गया है। यह भी शर्त है कि प्रत्येक कक्षा से पालक को रखना अनिवार्य किया गया है। समिति की हर तीन महीने में बैठक होगी।

मनी लॉन्ड्रिंग केस में पूर्व सीएम के बेटे चैतन्य बघेल की जमानत याचिका पर बहस पूरी, हाईकोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला

मनी लॉन्ड्रिंग केस में पूर्व सीएम के बेटे चैतन्य बघेल की जमानत याचिका पर बहस पूरी, हाईकोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला

  बिलासपुर। छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की याचिका पर हाईकोर्ट में बहस पूरी हो गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और चैतन्य बघेल के पक्षों की सुनवाई करने के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

शराब घोटाला केस में गिरफ्तार चैतन्य बघेल 18 जुलाई से रायपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं। चैतन्य की ओर से अदालत में ईडी की गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए राहत की मांग की गई थी। वहीं ईडी ने अपने पक्ष रखते हुए चैतन्य के खिलाफ दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों पर विस्तार से तर्क दिया। इस अहम मामले की सुनवाई जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की सिंगल बेंच में हुई। न्यायालय की तरफ से फैसला सुरक्षित रखने के बाद अब राजनीतिक और प्रशासनिक हल्कों में फैसले को लकर कई तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं।

चैतन्य को 16.70 करोड़ रुपए मिले: ईडी

शराब घोटाला और मनी लॉन्ड्रिंग केस में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने चैतन्य बघेल को भी आरोपी बनाया है। आरोप है कि शराब घोटाले की रकम से चैतन्य को 16.70 करोड़ रुपए मिले हैं। शराब घोटाले से मिले ब्लैक मनी को रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में इन्वेस्ट किया गया। साथ ही 1000 करोड़ रुपए की हैंडलिंग (हेराफेरी) की गई है।

खर्च के बारे में गलत जानकारी दी

ईडी ने अपनी जांच में पाया कि चैतन्य बघेल के विल ग्रीन प्रोजेक्ट (बघेल डेवलपर्स) में घोटाले के पैसे को इन्वेस्ट किया गया है। इस प्रोजेक्ट से जुड़े अकाउंटेंट के ठिकानों पर छापेमारी कर ईडी ने रिकॉर्ड जब्त किए थे। प्रोजेक्ट के कंसल्टेंट राजेन्द्र जैन ने बताया कि इस प्रोजेक्ट में वास्तविक खर्च 13-15 करोड़ था। जबकि रिकॉर्ड में 7.14 करोड़ ही दिखाया गया। जब्त डिजिटल डिवाइसेस से पता चला कि बघेल की कंपनी ने एक ठेकेदार को 4.2 करोड़ कैश पेमेंट किया, जो रिकॉर्ड में नहीं दिखाया गया।

अलग-अलग लोगों के माध्यम से चैतन्य तक पहुंचाया पैसा

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के वकील सौरभ पाण्डेय ने बताया था कि शराब घोटाले का जो इन्वेस्टिगेशन चल रहा था उसमें एविडेंस मिले हैं, जिसमें चैतन्य बघेल ने बहुत सारे पैसे को लेयरिंग की है। 1000 करोड़ का लेनदेन किया है। पप्पू बंसल ने अपने बयान में खुलासा किया है। शराब के घोटालों के पैसों को चैनलाइज्ड करके चैतन्य बघेल तक पहुंचाया जाता था। लिकर स्कैम का पैसा अनवर ढेबर के जरिए दीपेंद्र चावड़ा फिर वह पैसा केके श्रीवास्तव और कांग्रेस के कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल औ उसके बाद चैतन्य बघेल के पास यह पैसा पहुंचता था। सौरभ पाण्डेय ने बताया था कि शराब घोटाले में जिन लोगों का इन्वॉल्वमेंट है उन लोगों के आपस में कनेक्शन है। अनवर ढेबर से मोबाइल चैट और रिकॉर्डिंग मिली है। चैतन्य बघेल तक पैसा पहुंचाया गया है।

पूर्व सीएम के बेटे इसलिए हुई गिरफ्तारी: वकील

बचाव पक्ष के वकील फैजल रिजवी ने बताया था कि पप्पू बंसल के बयान को आधार मानते हुए चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी की गई है जो सही नहीं है। पप्पू बंसल के खिलाफ नॉन बेलेबल वारंट है और वह बाहर घूम रहे हैं। किसके दबाव में उन्होंने इस तरह का बयान दिया है यह आप समझ सकते हैं। रिजवी ने कहा था कि 2022 से शराब घोटाले मामले में जांच चल रही है, और आज चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी तक एक भी समन चैतन्य बघेल को नहीं दिया गया है। मार्च में जब उनके घर में रेड की गई थी, तब उनके सभी डिजिटल डिवाइस जब्त कर लिए थे, जो डॉक्यूमेंट एजेंसी ने मांगी थी, उन्हें सभी डॉक्यूमेंट को चैतन्य के जरिए दिया गया है।

वकील ने कहा था कि ईडी की जांच में चैतन्य बघेल ने लगातार सपोर्ट किया है, जांच में भी शामिल हुए हैं लेकिन एक बार भी उनका बयान नहीं लिया गया। सीधे उनकी अरेस्टिंग की गई है। कानून को ताक पर रखकर चैतन्य बघेल को गिरफ्तार किया गया है, उनका अपराध सिर्फ यही है कि वह पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे हैं।

जेल नियमों में होंगे बदलाव, 20 जिला जेलों में नियुक्त होंगे वेलफेयर ऑफिसर

जेल नियमों में होंगे बदलाव, 20 जिला जेलों में नियुक्त होंगे वेलफेयर ऑफिसर

 बिलासपुर। बिलासपुर हाई कोर्ट ने राज्य की जेलों में बढ़ती भीड़ और कल्याण अधिकारियों की कमी पर गंभीर चिंता जताई है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बी.डी. गुरु की डिवीजन बेंच ने सोमवार को राज्य सरकार और जेल महानिदेशक को जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए।

राज्य सरकार की ओर से जवाब देते हुए कहा गया है कि भर्ती प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इसके लिए सीजीपीएससी के माध्यम से परीक्षा ली जाएगी। यह भी कहा गया कि पहले वेलफेयर ऑफिसर और प्रोबेशन ऑफिसर के नाम से दो अलग-अलग पोस्ट थीं। अब दोनों पदों को एक साथ मिलाकर प्रोबेशन और वेलफेयर ऑफिसर के नाम से एक सिंगल पोस्ट बनाया गया है। सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि छत्तीसगढ़ जेल नॉन-गजटेड III मिनिस्टीरियल और नॉन-मिनिस्टीरियल) सर्विस (क्लास रिक्रूटमेंट) रूल्स, 2022 में बदलाव भी किए गए।

सरकार ने कोर्ट में जवाब देते हुए कहा कि राज्य में कुल 20 जिला जेल हैं। इन 20 जिला जेलों में नियुक्ति करने के लिए प्रोबेशन एंड वेलफेयर ऑफिसर के 20 नए पद बनाने की ज़रूरत है।लिहाजा इसका प्रस्ताव तैयार किया गया है। वित्तीय वर्ष 2026-2027 के आने वाले मुख्य बजट में शामिल किए जाने के बाद, इस पोस्ट को भरने की कार्रवाई शुरू होगी। इस पर याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि राज्य भर में नई जेल बिल्डिंग बनाते समय, अधिकारियों को मॉडल प्रिज़न मैनुअल, 2016 का पालन अनिवार्य किया जाना चाहिए। यह मैनुअल कैदियों के अधिकारों की सुरक्षा करता है। कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेने कहा है। साथ ही डीजीपी प्रिज़न्स एंड करेक्शनल सर्विसेज़ को विस्तृत शपथ पत्र दाखिल करने कहा है। कोर्ट ने मार्च 2026 में सुनवाई तय की है।

जेलों में क्षमता से 40 प्रतिशत ज्यादा कैदी

हाई कोर्ट ने राज्य की 33 जेलों में क्षमता से करीब 40 प्रतिशत ज्यादा कैदियों की मौजूदगी और कल्याण अधिकारियों की कमी पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि हर जिला जेल में वेलफेयर आफिसर की नियुक्ति और अतिरिक्त बैरक का समय पर निर्माण आवश्यक है, ताकि कैदियों को मानक सुविधाएं मिल सकें और भीड़भाड़ की समस्या कम हो। डीजी, जेल एवं सुधार सेवाएं ने अपने शपथपत्र में बताया कि 9 सितंबर 2025 तक 33 जेलों में 14,883 की क्षमता के मुकाबले 21,335 कैदी हैं। भीड़ कम करने के लिए कई जगह अतिरिक्त बैरक का निर्माण जारी है।

सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां

याचिका में कोर्ट को बताया गया है कि वर्तमान में छत्तीसगढ़ की विभिन्न केंद्रीय और जिला जेलों की कुल क्षमता करीब 15 हजार कैदियों की है, लेकिन इनमें 20 हजार 500 से अधिक कैदी बंद हैं। यह स्थिति न केवल जेलों में भीड़भाड़ बढ़ा रही है, बल्कि कैदियों और जेल प्रशासन दोनों के लिए गंभीर सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां भी उत्पन्न कर रही है। शासन की ओर से अदालत को अवगत कराया गया कि भीड़ कम करने के लिए नए जेलों का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। हाल ही में बेमेतरा जिले में एक नई जेल का निर्माण पूरा कर लिया गया है.

बदहाल मुक्तिधामों पर सभी जिलों के कलेक्टर को फोटोग्राफ सहित रिपोर्ट पेश करने हाई कोर्ट का आदेश

बदहाल मुक्तिधामों पर सभी जिलों के कलेक्टर को फोटोग्राफ सहित रिपोर्ट पेश करने हाई कोर्ट का आदेश

  बिलासपुर। बिलासपुर हाईकोर्ट ने प्रदेश भर के बदहाल मुक्तिधामों पर सभी जिलों के कलेक्टर से फोटोग्राफ सहित रिपोर्ट मांगा था। यह रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश कर दी गई है। अब कोर्ट ने चीफ सिकरेट्री को अपने आदेश का कंप्लायंस रिपोर्ट की मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही बिलासपुर निगम कमिश्नर को शपथ पत्र में जवाब पेश करने कहा गया है। अगली सुनवाई जनवरी में रखी गई है।

राज्य शासन की ओर से कहा गया है कि मुक्तिधामों के रखरखाव के लिए विस्तृत दिशा- निर्देश जारी कर दिए हैं।

इनमें साफ-सफाई, ग्रीन फेंसिंग या कंटीले तार से बाउंड्री, शेड की मरम्मत, बिजली, पानी और पुरुष-महिला के लिए अलग शौचालय जैसी सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

सोमवार को सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस एके प्रसाद की डिवीजन बेंच ने कहा कि गरिमापूर्ण अंतिम संस्कार संविधान के तहत जीने के अधिकार का हिस्सा है, इसलिए सरकार की जिम्मेदारी है कि हर मुक्तिधाम में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाए।

दरअसल हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा 29 सितंबर को बिल्हा के मुक्तिधाम पहुंचे थे। जहां उन्होंने चारों तरफ अव्यवस्था और गंदगी देखी। वे किसी न्यायिक अधिकारी के पिता के निधन पर पहुंचे थे। जिसके बाद उन्होंने इस बदहाली पर संज्ञान लिया। बीते सुनवाई में मुख्य सचिव, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव और कलेक्टर बिलासपुर ने इस मामले में अपने-अपने शपथपत्र (हलफनामा) प्रस्तुत किया था। साथ ही, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग और शहरी प्रशासन विभाग ने 6 अक्टूबर और 8 अक्टूबर 2025 को इस संबंध में राज्यव्यापी निर्देश जारी किए हैं। इस पर डिवीजन बेंच ने कहा कि केवल निर्देश जारी करने से काम नहीं चलेगा।

मुक्तिधाम में बुनियादी सुविधाएं तक नहीं

ध्यान रहे कि चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा 29 सितंबर को रहंगी में एक अंतिम संस्कार में शामिल हुए थे। इस दौरान उन्होंने मुक्तिधाम की अव्यवस्था देखकर हैरानी जताई थी। मुक्तिधाम में बुनियादी सुविधाएं तक नहीं थी। यहां पहुंचने कोई रास्ता भी नहीं था। पानी, बैठने के कोई इंतजाम भी नहीं दिखे। जिस पर हाईकोर्ट ने इस अव्यवस्था को जनहित याचिका मानकर राज्य सरकार, जिला प्रशासन और ग्राम पंचायत को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बाद रहंगी मुक्तिधाम की दशा पर बिलासपुर कलेक्टर ने शपथ पत्र दिया। इसमें बताया गया कि रहंगी मुक्तिधाम में तुरंत सुधार कार्य किया गया है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत बने हॉल को खाली कर प्रतीक्षालय में बदला गया है। पीने के पानी की व्यवस्था की गई है और अंतिम संस्कार प्लेटफॉर्म की मरम्मत कराई गई। इसके अलावा मुख्य सड़क से मुक्तिधाम तक सीसी रोड बनाने के लिए 10 लाख रुपए की प्रशासनिक स्वीकृति भी दी गई है।

 साइबर ब्लैकमेल का खौफनाक रूप: नाबालिग का वीडियो बनाकर किया शोषण, आरोपी गिरफ्तार

साइबर ब्लैकमेल का खौफनाक रूप: नाबालिग का वीडियो बनाकर किया शोषण, आरोपी गिरफ्तार

  बिलासपुर| छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में साइबर ब्लैकमेल का एक गंभीर मामला उजागर हुआ है, जिसमें 19 वर्षीय युवक ने तकनीक और दोस्ती—दोनों का गलत इस्तेमाल करते हुए 16 साल की नाबालिग छात्रा का शोषण किया। आरोपी ने पहले जबरन उसकी निजी वीडियो रिकॉर्ड की, फिर उसे हथियार बनाकर दुष्कर्म किया और बाद में सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।

मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी ने निजी वीडियो को वायरल कर पीड़िता को मानसिक प्रताड़ना भी दी, जो आज के समय में सोशल मीडिया के दुरुपयोग के खतरनाक स्तर को दर्शाती है। पुलिस के अनुसार, घटना सिर्फ शारीरिक शोषण तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह साइबर अपराध का भी गंभीर केस है।

वीडियो वायरल होने पर टूटी चुप्पी, परिवार पहुंचा थाने
जैसे ही वीडियो सोशल मीडिया पर फैलने लगे, पीड़िता के परिवार को पूरे प्रकरण की जानकारी हुई। परिजन तुरंत सिविल लाइन थाने पहुंचे और लिखित शिकायत दर्ज कराई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की और आरोपी राजबीर दास उर्फ राज मानिकपुरी (19) को जरहाभाठा मिनी बस्ती से गिरफ्तार कर लिया।

अक्तूबर से चल रहा था शोषण का सिलसिला
जांच में पता चला कि आरोपी अक्टूबर में जब पीड़िता घर पर अकेली थी, तब उसके घर पहुंचा और जबरन KISS कर वीडियो बना लिया। इसी वीडियो के नाम पर वह लड़की पर दबाव बनाता रहा। 17 अक्टूबर को उसने उसे नया बस स्टैंड, सिरगिट्टी ले जाकर दुष्कर्म किया और उसकी भी रिकॉर्डिंग कर ली।

पंचायत विभाग को हाईकोर्ट ने लगाई फटकार, डायरेक्टर को व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने का आदेश

पंचायत विभाग को हाईकोर्ट ने लगाई फटकार, डायरेक्टर को व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने का आदेश

 बिलासपुर।  छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने ग्राम पंचायत सचिव की नियुक्ति में देरी करने पर राज्य के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को फटकार लगाई है। जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की सिंगल बेंच ने विभाग की निदेशक प्रियंका थवाईत को कल 8 दिसंबर को सुबह 10:30 बजे व्यक्तिगत रूप से हाजिर होकर स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया है।

इस मामले में आसिफ रजा ने याचिका दायर की है। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने 22 फरवरी 2024 को रिट अपील में आदेश दिया था कि आसिफ रजा की ग्राम पंचायत सचिव पद पर नियुक्ति पर विचार किया जाए, बिना यह प्रभावित किए कि पहले से नियुक्त और जॉइन कर चुके उम्मीदवारों की नौकरी पर कोई असर न पड़े।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सुशोभित सिंह ने कोर्ट को बताया कि इस स्पष्ट आदेश के बावजूद राज्य सरकार वित्त विभाग की स्वीकृति का इंतजार कर रही है और बार-बार आसिफ रजा को रायपुर से बैकुंठपुर दौड़ाया जा रहा है।

कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि जब हाईकोर्ट का आदेश मौजूद है, तो वित्त विभाग की स्वीकृति की जरूरत क्यों है? और अगर जरूरत है भी तो 22 फरवरी 2024 के आदेश के बाद अब तक क्यों नहीं ली गई?

कोर्ट ने मामले को कल 8 दिसंबर  के लिए लिस्ट किया है और आदेश की प्रति सूचना के लिए मुख्य सचिव, छत्तीसगढ़ शासन को भी भेजने के निर्देश दिए हैं, ताकि वे देख सकें कि सिस्टम कैसे काम कर रहा है।

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