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विशेष लेख : धमतरी मॉडल बना देश के लिए प्रेरणा

विशेष लेख : धमतरी मॉडल बना देश के लिए प्रेरणा

छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड द्वारा रायपुर सहित विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में एक विशेष योजना चलाई जा रही है। इसके तहत, अनुपयोगी पड़ी घरों की बाड़ी में महिलाओं को सिंदूरी, सतावर और अश्वगंधा जैसे औषधीय पौधे निरूशुल्क दिए जा रहे हैं, जिससे उन्हें घर पर ही नियमित आय मिल रही है। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले की महिलाओं द्वारा अनुपयोगी भूमि और यहाँ तक कि बेकार नाले के पानी का उपयोग कर औषधीय पौधे उगाने की कई प्रेरक पहलें देखने को मिली हैं। इन प्रयासों से न केवल बंजर जमीन हरी-भरी हो रही है, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भरता और बेहतर स्वास्थ्य का लाभ भी मिल रहा है।
“जहां कभी अनुपयोगी भूमि थी, वहां आज औषधीय पौधों की हरियाली लहरा रही है। जहां महिलाएं केवल पारंपरिक खेती तक सीमित थीं, वहीं आज वे लाखों रुपये की आय अर्जित कर आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रही हैं।” यह केवल एक जिले की सफलता की कहानी नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण, प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग और कृषि नवाचार का ऐसा मॉडल है, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। छत्तीसगढ़ का धमतरी जिला आज औषधीय एवं सुगंधीय फसलों के कृषिकरण का राष्ट्रीय मॉडल बनकर उभरा है। यहां कृषि, आजीविका, पर्यावरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का ऐसा समन्वय देखने को मिलता है, जो विकसित भारत और आत्मनिर्भर गांवों की अवधारणा को साकार करता है।
परंपरागत खेती से नवाचार की ओर

धमतरी कृषि प्रधान जिला है। यहां की अधिकांश आबादी धान आधारित खेती पर निर्भर रही है। हालांकि धान उत्पादन जिले की पहचान है, लेकिन सीमित आय, प्राकृतिक जोखिम और अनुपयोगी भूमि की चुनौती लंबे समय से बनी हुई थी। महानदी के किनारे की रेतीली भूमि, कटाव प्रभावित क्षेत्र और ग्राम पंचायतों की अनुपयोगी जमीन आर्थिक दृष्टि से पर्याप्त उपयोग में नहीं आ पा रही थी। ऐसे समय में जिला प्रशासन ने इन चुनौतियों को अवसर में बदलने का निर्णय लिया। सोच स्पष्ट थीकृयदि अनुपयोगी भूमि पर ऐसी फसलें उगाई जाएं जिनकी बाजार में स्थायी मांग हो, जिनमें लागत कम और लाभ अधिक हो, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में व्यापक परिवर्तन लाया जा सकता है।
दूरदर्शी नेतृत्व और समन्वित प्रयास

वर्ष 2025 में कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) तथा राज्य औषधीय पादप बोर्ड के सहयोग से औषधीय एवं सुगंधीय फसलों के कृषिकरण की अभिनव पहल प्रारंभ की। इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसे केवल कृषि कार्यक्रम नहीं माना गया, बल्कि महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण आजीविका का व्यापक मिशन बनाया गया। योजना के प्रारंभिक चरण में जिले का विस्तृत सर्वेक्षण कराया गया। अनुपयोगी भूमि, रेतीले क्षेत्र और कम उत्पादक भूमि की पहचान कर वहां औषधीय खेती की संभावनाओं का वैज्ञानिक मूल्यांकन किया गया।
खस, ब्राह्मी, बच, लेमनग्रास की गुणवत्तायुक्त पौध सामग्री उपलब्ध

महिला स्व-सहायता समूहों को इस अभियान का केंद्र बनाया गया। राज्य औषधीय पादप बोर्ड के सहयोग से खस, ब्राह्मी, बच, लेमनग्रास, पामारोजा और पचौली जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों की गुणवत्तायुक्त पौध सामग्री उपलब्ध कराई गई। महिलाओं को विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और नियमित फील्ड सपोर्ट दिया गया। सबसे महत्वपूर्ण व्यवस्था रहीकृशत-प्रतिशत बाय-बैक, जिससे किसानों और महिलाओं को अपने उत्पाद के विपणन की चिंता नहीं रही।

150 एकड़ से शुरू हुआ परिवर्तन

प्रथम चरण में लगभग 150 एकड़ क्षेत्र में 200 महिला स्व-सहायता समूह सदस्यों को जोड़ा गया। लगभग 80 एकड़ में खस, 20 एकड़ में ब्राह्मी, 10 एकड़ में बच तथा 40 एकड़ में लेमनग्रास, पामारोजा और पचौली का रोपण किया गया। कुछ ही समय में परिणाम सामने आने लगे। जो भूमि पहले अनुपयोगी मानी जाती थी, वहीं से प्रति एकड़ लगभग एक लाख रुपये तक की आय प्राप्त होने लगी। महिलाओं ने इस आय का उपयोग बच्चों की शिक्षा, परिवार की जरूरतों, कृषि उपकरणों की खरीद और छोटे व्यवसाय शुरू करने में किया। इससे उनकी आर्थिक स्थिति के साथ-साथ सामाजिक आत्मविश्वास में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई।

बदलती जिंदगी, बदलती सोच

आदर्श महिला कृषक समूह कंडेल सत्या ढीमर बताती हैं कि पहले उनकी पूरी निर्भरता धान की खेती पर थी। औषधीय खेती के बारे में जानकारी नहीं थी, लेकिन प्रशिक्षण, पौध सामग्री और खरीद की सुनिश्चित व्यवस्था ने उनका भरोसा बढ़ाया। आज उनकी आय कई गुना बढ़ चुकी है। समूह पूना साहू ,श्रीमती कुंती ढीमर कहती हैं कि इस योजना ने केवल आय ही नहीं बढ़ाई, बल्कि महिलाओं को निर्णय लेने का आत्मविश्वास भी दिया है। अब वे बैंकिंग, समूह प्रबंधन और उद्यमिता में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं तथा अन्य महिलाओं को भी इस दिशा में प्रेरित कर रही हैं।

किसान श्री अशोक नेताम बताते हैं कि कम पानी वाली भूमि में लेमनग्रास और खस जैसी फसलें उम्मीद से कहीं अधिक सफल साबित हुई हैं। अब जिले के अनेक किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ औषधीय खेती को भी अपनाने लगे हैं।

लखपति दीदी’ अभियान को मिली नई गति

छत्तीसगढ़ सरकार की प्राथमिकताओं में महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता को विशेष महत्व दिया गया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार महिला स्व-सहायता समूहों को स्वरोजगार, मूल्य संवर्धन और बाजार से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। राज्य में ‘लखपति दीदी’ अभियान को गति देने के लिए कृषि, वनोपज, पशुपालन और ग्रामीण उद्यमिता को एकीकृत किया जा रहा है।

धमतरी का औषधीय खेती मॉडल इसी सोच का प्रभावी उदाहरण है। इस पहल ने महिलाओं को केवल खेती तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें उद्यमी बनने का अवसर प्रदान किया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का स्पष्ट विजन है कि छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थानीय संसाधनों पर आधारित, टिकाऊ और आत्मनिर्भर बनाया जाए। औषधीय एवं सुगंधीय फसलों का विस्तार इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

केवल खेती नहीं, संपूर्ण मूल्य श्रृंखला का विकास

धमतरी मॉडल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें केवल उत्पादन पर नहीं, बल्कि संपूर्ण वैल्यू चेन विकसित करने पर जोर दिया गया है। कुरूद विकासखंड के कोटगांव और पचपेड़ी में औषधीय पौधों की नर्सरी विकसित की जा रही है, ताकि स्थानीय स्तर पर गुणवत्तायुक्त पौध सामग्री उपलब्ध हो सके। इसके साथ ही भविष्य में औषधीय उत्पादों के प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग), आवश्यक तेल (Essential Oil) निष्कर्षण, पैकेजिंग और मूल्य संवर्धन की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। यदि स्थानीय स्तर पर छोटे-छोटे प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित होते हैं, तो इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, परिवहन लागत घटेगी और किसानों को उनके उत्पाद का बेहतर मूल्य मिलेगा। यह ग्रामीण औद्योगिकीकरण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल होगी।

राष्ट्रीय पहचान बना धमतरी मॉडल

धमतरी के इस नवाचार को राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली। 9 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली में आयोजित महाकुंभ-2025 में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) और कृषि जागरण के संयुक्त मंच पर जिले को औषधीय एवं सुगंधीय पौधों के कृषिकरण में उत्कृष्ट कार्य के लिए राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया गया। इसके बाद हैदराबाद, बिहार, मध्यप्रदेश सहित अनेक राज्यों के किसान, अधिकारी, स्वयंसेवी संस्थाएं और विभिन्न संगठन धमतरी पहुंचकर इस मॉडल का अध्ययन करने लगे। आज धमतरी का मॉडल देश के अनेक जिलों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुका है।

500 एकड़ विस्तार की नई उड़ान

प्रथम चरण की सफलता के बाद अब लक्ष्य इस पहल को 500 एकड़ तक विस्तारित करने का है। इसके माध्यम से 500 से अधिक महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। राज्य औषधीय पादप बोर्ड, कृषि विभाग, उद्यानिकी विभाग, बिहान तथा अन्य विभागों के समन्वय से चारों विकासखंडों में प्रशिक्षण, कार्यशालाएं और तकनीकी सहायता प्रदान की जा रही है, ताकि अधिकाधिक किसान और महिला समूह इस अभियान से जुड़ सकें।

पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य सुरक्षा का माध्यम

औषधीय खेती का महत्व केवल आर्थिक दृष्टि से नहीं है। ब्राह्मी, बच, लेमनग्रास और अन्य औषधीय पौधे स्वास्थ्य परंपरा को भी मजबूत करते हैं। इन फसलों से भूमि संरक्षण, हरित आवरण में वृद्धि, जैव विविधता का संवर्धन तथा जलवायु परिवर्तन के प्रति कृषि की अनुकूलन क्षमता भी बढ़ती है। आज जब पूरी दुनिया टिकाऊ कृषि ( Sustainable Agriculture), प्राकृतिक खेती और जैव विविधता संरक्षण की बात कर रही है, तब धमतरी का यह मॉडल इन सभी उद्देश्यों को व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करता है।

विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में प्रेरक पहल

धमतरी की यह सफलता बताती है कि जब दूरदर्शी नेतृत्व, प्रभावी प्रशासन, वैज्ञानिक तकनीक, महिला शक्ति और स्थानीय संसाधनों का समन्वय होता है, तब विकास की नई संभावनाएं जन्म लेती हैं। यह मॉडल केवल औषधीय खेती का नहीं, बल्कि ग्रामीण नवाचार, महिला उद्यमिता, आत्मनिर्भरता और समावेशी विकास का जीवंत उदाहरण है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार किसानों की आय बढ़ाने, महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने, मूल्य संवर्धन को प्रोत्साहित करने और स्थानीय संसाधनों पर आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था विकसित करने के लिए सतत कार्य कर रही है। धमतरी का औषधीय खेती मॉडल इन प्रयासों का उत्कृष्ट प्रतिफल है।

आज धमतरी जिला ने यह सिद्ध कर दिया है कि विकास केवल बड़े उद्योगों से नहीं, बल्कि गांव की महिलाओं के हाथों में नई संभावनाएं सौंपकर भी संभव है। औषधीय खेती की यह हरियाली केवल खेतों तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह आत्मनिर्भर गांवों, सशक्त महिलाओं, समृद्ध किसानों और विकसित छत्तीसगढ़ की नई पहचान बन चुकी है। आने वाले वर्षों में यह मॉडल निश्चित रूप से देश के अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगा।

धनंजय राठौर, संयुक्त संचालक
शशिरत्न पाराशर, उप संचालक  

विशेष लेख : विश्व युवा कौशल विकास दिवस : कौशल से सशक्त युवा, विकसित छत्तीसगढ़ की ओर मजबूत कदम

विशेष लेख : विश्व युवा कौशल विकास दिवस : कौशल से सशक्त युवा, विकसित छत्तीसगढ़ की ओर मजबूत कदम

"कौशल ही आज के समय की सबसे बड़ी पूंजी है। जिस युवा के पास हुनर है, उसके लिए अवसरों की कोई कमी नहीं है।" इसी सोच को साकार करते हुए छत्तीसगढ़ सरकार मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के माध्यम से प्रदेश के युवाओं को रोजगारोन्मुखी एवं उद्योगों की मांग के अनुरूप आधुनिक कौशल प्रशिक्षण प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की विशा में लगातार कार्य कर रही है।
विश्व युवा कौशल विकास दिवस के अवसर पर यह कहना सार्थक होगा कि छत्तीसगढ़ ने कौशल विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। राज्य में युवाओं को केवल प्रशिक्षण ही नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण के साथ रोजगार सुनिश्चित करने की दिशा में भी प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं।


लगभग पांच लाख युवाओं को मिला कौशल प्रशिक्षण

मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के प्रारंभ से अब तक प्रदेश के 4 लाख 94 हजार 330 युवाओं को विभिन्न रोजगारपरक ट्रेडों में कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। इनमें से 2 लाख 74 हजार 934 युवाओं को रोजगार से जोड़ा जा चुका है। वर्तमान में योजना के अंतर्गत राज्यभर में 375 व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रवाता (199 शासकीय एवं 176 अशासकीय) के माध्यम से राष्ट्रीय कौशल अर्हता फ्रेमवर्क (NSQF) के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाले प्रशिक्षण संचालित किए जा रहे हैं।

वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक 9 हजार 418 युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है, जिनमें से 7 हजार 528 युवाओं को रोजगार प्राप्त हो चुका है, जबकि 6 हजार 679 युवा वर्तमान में विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।
बदलते दौर के अनुरूप आधुनिक पाठ्यक्रम

राज्य सरकार ने युवाओं को भविष्य की तकनीकों से जोड़ने के लिए कौशल प्रशिक्षण में व्यापक बदलाव किए हैं। अब पारंपरिक ट्रेडों के साथ-साथ इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) मेंटेनेंस, ड्रोन ऑपरेटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं मशीन लर्निंग (AI-ML), साइबर सुरक्षा, सूर्यमित्र (सौर ऊर्जा) जैसे 21 वीं सदी के अत्याधुनिक पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।

इस वर्ष विशेष रूप से जल वितरण संचालक (Water Distribution Operator) कोर्स प्रारंभ किया गया है, जिसके अंतर्गत 2,770 युवाओं को मल्टी-स्किल प्रशिक्षण देकर सीधे रोजगार से जोड़ने की कार्ययोजना बनाई गई है।

गुणवत्ता पर विशेष जोर

छत्तीसगढ़ में कौशल विकास केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि उसकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए भी कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।

अब प्रत्येक प्रशिक्षक के लिए शैक्षणिक योग्यता एवं अनुभव के साथ प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण (Training of Trainers-TOT) प्रमाणन अनिवार्य किया गया है। इससे प्रशिक्षण की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार आया है।

प्रत्येक प्रशिक्षणार्थी के लिए मूल्यांकन से पहले कम से कम सात दिवस का ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग (OJT) अनिवार्य किया गया है, जिससे उन्हें उद्योगों की वास्तविक कार्यप्रणाली का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हो सके।

प्रशिक्षण केंद्रों में फेस आधारित ऑनलाइन बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू की गई है। साथ ही सभी प्रशिक्षण केंद्रों में आई.पी. आधारित सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनके माध्यम से प्रशिक्षण गतिविधियों की सतत निगरानी की जा रही है। इन व्यवस्थाओं से पारदर्शिता बढ़ी है तथा प्रशिक्षण की गुणवत्ता और अनुशासन में सुधार हुआ है।

प्रशिक्षण के साथ रोजगार की भी गारंटी

मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि प्रशिक्षण के बाद युवाओं के रोजगार पर विशेष ध्यान दिया जाता है। प्रशिक्षण संचालन की अनुमति देने से पहले प्रत्येक व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदाता द्वारा रोजगार उपलब्ध कराने वाली संस्थाओं का परीक्षण किया जाता है। परीक्षण के बाद ही प्रशिक्षण संचालन की अनुमति प्रदान की जाती है। इसके अतिरिक्त प्रशिक्षण केंद्रों को मिलने वाली राशि का 60 प्रतिशत भुगतान तभी किया जाता है, जब प्रशिक्षित युवाओं का नियोजन सुनिश्चित हो जाता है। यह व्यवस्था प्रशिक्षण संस्थानों को रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण देने के लिए प्रेरित करती है।

बस्तर के युवाओं तक पहुंच रहा कौशल विकास

प्रदेश के दूरस्थ एवं आदिवासी क्षेत्रों के युवाओं तक कौशल विकास पहुंचाने के लिए बस्तर संभाग के प्रत्येक विकासखंड में स्किल डेवलपमेंट सेंटर (SDC) स्थापित करने की कार्यवाही की जा रही है। जिला बीजापुर में असिस्टेंट मेसन कोर्स प्रारंभ किया जा चुका है। वहीं बस्तर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर, सुकमा, कांकेर एवं बीजापुर सहित छह पुनर्वास केंद्रों का व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदाता के रूप में पंजीयन किया गया है तथा अन्य केंद्रों को भी शीघ्र जोड़ा जा रहा है।

उद्योगों के साथ साझेवारी से बढ़ रही रोजगार क्षमता

राज्य सरकार ने उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के लिए प्रतिष्ठित संस्थाओं के साथ महत्वपूर्ण समझौते किए हैं।
महिंद्रा एंड महिंद्रा के साथ ट्रैक्टर मैकेनिक प्रशिक्षण प्रारंभ किया गया है, जिसके अंतर्गत अब तक 101 युवा प्रशिक्षित हो चुके हैं तथा 60 युवा प्रशिक्षणरत हैं।
साइरोनिक्स टेक्नोलॉजी प्रा. लि. के सहयोग से रायपुर के लाईवलीहुड कॉलेज में इलेक्ट्रिक व्हीकल टेक्नोलॉजी के पांच जॉब रोल में प्रशिक्षण संचालित किया जा रहा है।
नांदी फाउंडेशन के सहयोग से सामाजिक एवं आर्थिक रूप से वंचित महिलाओं को एम्प्लॉयबिलिटी स्किल्स का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिसके अंतर्गत 1,142 युवा प्रशिक्षित हो चुके हैं।
पर्यटन एवं हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र में व लॉन्ड्री बैग के साथ साझेदारी कर लॉन्ड्री सुपरवाइजर एवं अन्य रोजगारपरक प्रशिक्षण प्रारंभ किए गए हैं।
स्वास्थ्य क्षेत्र में श्री सत्य साई हेल्थ एवं एजुकेशन ट्रस्ट के सहयोग से कार्डियक एवं स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित उन्नत कौशल प्रशिक्षण मॉड्यूल विकसित किए जा रहे हैं।

लाईवलीहुड कॉलेज बने कौशल विकास के सशक्त केंद्र

प्रदेश के जिलों में संचालित लाईवलीहुड कॉलेज आज युवाओं के लिए कौशल विकास का प्रमुख माध्यम बन चुके हैं। वर्ष 2013 से अब तक इन कॉलेजों में 68 हजार 552 युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। इनमें से 28 हजार 820 युवाओं को रोजगार तथा 10 हजार 632 युवाओं को स्वरोजगार प्राप्त हुआ है। इस प्रकार कुल 39 हजार 452 युवा आजीविका से जुड़ चुके हैं। वर्तमान में 2 हजार 413 युवा प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। इसी प्रकार पीएम विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत वर्ष 2024 से अब तक 13 हजार 188 युवाओं को लाईवलीहुड कॉलेजों के माध्यम से प्रशिक्षण दिया गया है।

आधुनिक अधोसंरचना का विस्तार

राज्य के 26 जिलों में लाईवलीहुड कॉलेज भवन पूर्ण होकर संचालित हैं। नवीन जिलों में भी भवन निर्माण एवं भूमि आबंटन की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। प्रदेश में 26 बालिका छात्रावास तथा 20 बालक छात्रावास पूर्ण होकर संचालित हैं। शेष छात्रावासों का निर्माण एवं भूमि आबंटन कार्य प्रगति पर है।

नवा रायपुर में बनेगा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस

छत्तीसगढ़ सरकार युवाओं को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठा रही है।

नवा रायपुर में लाईवलीहुड सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की जाएगी, जहां अत्याधुनिक मशीनों, आधुनिक प्रयोगशालाओं, विशेष कार्यशालाओं तथा उद्योगों की मांग के अनुरूप इंजीनियरिंग एवं गैर-इंजीनियरिंग क्षेत्रों में विश्वस्तरीय कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा। वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए भूमि लीज अनुबंध हेतु 2 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है।

कौशल विकास से आत्मनिर्भरता की नई विशा

विश्व युवा कौशल विकास दिवस पर छत्तीसगढ़ का अनुभव यह दर्शाता है कि कौशल विकास केवल प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि युवाओं को आत्मविश्वासी, आत्मनिर्भर और रोजगारयुक्त बनाने का सशक्त अभियान है। नई तकनीकों, गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण, उद्योगों के साथ साझेदारी, रोजगार सुनिश्चित करने की व्यवस्था तथा आधुनिक अधोसंरचना के माध्यम से छत्तीसगढ़ वेश में कौशल विकास का एक प्रभावी मॉडल बनकर उभर रहा है। आने वाले वर्षों में यह पहल न केवल लाखों युवाओं के जीवन में परिवर्तन लाएगी, बल्कि विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ की पहचान

प्रदेश के युवाओं को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिल रहा है। वर्ष 2025-26 में 19 कौशल ट्रेडों में आयोजित जिला एवं राज्य स्तरीय इंडिया स्किल प्रतियोगिता में 3,327 युवाओं ने भाग लिया, जिनमें से 381 प्रतिभागी राज्य स्तर तक पहुंचे। ईस्ट जोन क्षेत्रीय प्रतियोगिता, भुवनेश्वर में छत्तीसगढ़ के 38 प्रतिभागियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए 01 स्वर्ण, 02 रजत, 05 कांस्य एवं 04 मेडल ऑफ एक्सीलेंस सहित कुल 12 पदक अर्जित किए।

वहीं राष्ट्रीय स्तर की इंडिया स्किल प्रतियोगिता में राज्य के 03 प्रतिभागियों ने प्रतिनिधित्व किया, जिनमें से 01 प्रतिभागी ने मेडल ऑफ एक्सीलेंस प्राप्त किया। उत्कृष्ट प्रदर्शन एवं सफल आयोजन के लिए भारत सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ को प्रशस्ति पत्र से भी सम्मानित किया गया।

- लक्ष्मीकांत कोसरिया, उप संचालक 

विशेष लेख : आत्मनिर्भर नारी, समृद्ध छत्तीसगढ़ : महिला सशक्तिकरण का नया अध्याय

विशेष लेख : आत्मनिर्भर नारी, समृद्ध छत्तीसगढ़ : महिला सशक्तिकरण का नया अध्याय

किसी भी राज्य के विकास की वास्तविक पहचान वहां की महिलाओं की सामाजिक स्थिति, आर्थिक भागीदारी और निर्णय प्रक्रिया में उनकी सहभागिता से होती है। जब महिलाएं आत्मनिर्भर बनती हैं तो परिवार सशक्त होता है, समाज प्रगतिशील बनता है और विकास की गति कई गुना बढ़ जाती है। इसी सोच को आधार बनाकर छत्तीसगढ़ सरकार ने महिला सशक्तिकरण को सुशासन का प्रमुख आधार बनाया है। वर्ष 2026 को ष्महतारी गौरव वर्षष् के रूप में मनाते हुए महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए अनेक ऐतिहासिक निर्णय लिए गए हैं।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व तथा महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में संचालित योजनाएं आज लाखों महिलाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रही हैं।
महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि राज्य सरकार की सबसे महत्वपूर्ण पहल महतारी वंदन योजना महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता का सशक्त माध्यम बन चुकी है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा 10 मार्च 2024 को प्रारंभ की गई इस योजना के अंतर्गत प्रदेश की 66 लाख से अधिक महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की राशि सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की जा रही है। अब तक 29 किस्तों के माध्यम से 18 हजार 805 करोड़ रुपये से अधिक की राशि महिलाओं को प्राप्त हो चुकी है। वर्ष 2026-27 के बजट में योजना के लिए 8,200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
बेटियों के भविष्य को सुरक्षित बनाने की दिशा में राज्य सरकार रानी दुर्गावती योजना प्रारंभ कर रही है। इस योजना के तहत बालिका के 18 वर्ष पूर्ण होने पर 1 लाख 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। इसके लिए बजट में 15 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वहीं प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के लिए 120 करोड़ रुपये तथा मिशन वात्सल्य के लिए 80 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।
महिलाओं और बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य एवं पोषण के लिए सरकार ने वर्ष 2026-27 के बजट में आंगनबाड़ी संचालन हेतु 800 करोड़ रुपये, पूरक पोषण आहार के लिए 650 करोड़ रुपये तथा कुपोषण मुक्ति एवं पोषण योजनाओं के लिए 235 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसके साथ ही शहरी क्षेत्रों में 250 और ग्रामीण क्षेत्रों में अभिसरण के माध्यम से 500 नए आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण के लिए 42 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेश में महतारी सदन स्थापित किए जा रहे हैं। अब तक 368 महतारी सदनों को स्वीकृति मिल चुकी है, जिनमें 137 का निर्माण पूर्ण हो चुका है। वर्ष 2026-27 में 250 नए महतारी सदनों के निर्माण के लिए 75 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इन केंद्रों के माध्यम से महिलाओं को प्रशिक्षण, आजीविका और सामाजिक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है।
राज्य सरकार ने महिला सुरक्षा को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रदेश के सभी 33 जिलों में 34 सखी वन-स्टॉप सेंटर संचालित किए हैं। यहां घरेलू हिंसा, उत्पीड़न और संकटग्रस्त महिलाओं को कानूनी सहायता, चिकित्सकीय सुविधा, मनोवैज्ञानिक परामर्श तथा अस्थायी आश्रय एक ही स्थान पर उपलब्ध कराया जा रहा है। महिला हेल्पलाइन 181 और आपातकालीन सेवा 112 के समन्वय से त्वरित सहायता व्यवस्था भी प्रभावी रूप से संचालित हो रही है। छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बना है जिसने सखी वन-स्टॉप सेंटरों के संचालन के लिए डिजिटल एसओपी लागू की है।
महिलाओं की आर्थिक प्रगति को नई गति देने के लिए स्वयं सहायता समूहों को उत्पादन और विपणन से जोड़ा जा रहा है। राज्य सरकार 200 करोड़ रुपये की लागत से यूनिटी मॉल का निर्माण कर रही है, जहां महिला समूहों द्वारा निर्मित उत्पादों को राष्ट्रीय बाजार उपलब्ध होगा। साथ ही उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को प्रतिवर्ष युवा रत्न सम्मान प्रदान किया जाएगा तथा लखपति दीदी भ्रमण योजना के माध्यम से सफल उद्यमियों को देश-विदेश के अध्ययन भ्रमण का अवसर मिलेगा।
बिहान मिशन के अंतर्गत प्रदेश में 2.92 लाख से अधिक महिला स्वयं सहायता समूह गठित किए जा चुके हैं, जिनसे 31.65 लाख से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं। प्रधानमंत्री के तीन करोड़ लखपति दीदी लक्ष्य में छत्तीसगढ़ ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए अब तक 10 लाख 43 हजार से अधिक लखपति दीदी तैयार की हैं। रेडी-टू-ईट निर्माण, कृषि आधारित उद्यम, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण तथा हस्तशिल्प जैसी गतिविधियों ने ग्रामीण महिलाओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की है।
महिला निर्माण श्रमिकों के सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण सहायता योजना के तहत पात्र बेटियों को 20 हजार रुपये, मुख्यमंत्री सिलाई मशीन सहायता योजना के तहत 7,900 रुपये, दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना के तहत अनुदान तथा मिनीमाता महतारी जतन योजना के अंतर्गत गर्भवती महिला श्रमिकों को 20 हजार रुपये की सहायता दी जा रही है।

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत अब तक 24 हजार से अधिक बालिकाओं का सामूहिक विवाह कराया जा चुका है। प्रत्येक जोड़े के विवाह के लिए राज्य सरकार 50 हजार रुपये की सहायता उपलब्ध करा रही है। वहीं महिला समृद्धि योजना के अंतर्गत 42,878 महिला समूहों को 129.46 करोड़ रुपये का रियायती ऋण प्रदान किया गया है। महतारी शक्ति ऋण योजना के माध्यम से महिलाओं को बिना जमानत 25 हजार रुपये तक का ऋण स्वरोजगार के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है।
प्रदेश में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना से 38 लाख से अधिक महिलाएं लाभान्वित हो रही हैं। सुशिक्षा योजना के तहत 2 लाख 18 हजार 139 छात्राओं को प्रतिमाह 500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। शुचिता योजना के माध्यम से 2 हजार विद्यालयों में सेनेटरी नैपकिन वेंडिंग मशीनें स्थापित की गई हैं तथा लाखों किशोरियों को मासिक स्वच्छता सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।
महिला समूहों के उत्पाद आज वैश्विक पहचान भी बना रहे हैं। आदिवासी महिलाओं द्वारा संचालित जशप्योर ब्रांड ‘वोकल फॉर लोकल‘ अभियान का सफल उदाहरण बन चुका है और राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी पहचान स्थापित कर रहा है। वहीं सखी साड़ी-मिलेट कैफे जैसी पहलें स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के साथ महिलाओं की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
आज छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण केवल योजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक परिवर्तन का व्यापक अभियान बन चुका है। आर्थिक सहायता, सामाजिक सुरक्षा, गुणवत्तापूर्ण पोषण, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, कौशल विकास, स्वरोजगार और सम्मानजनक जीवन की दिशा में किए जा रहे सतत प्रयास महिलाओं के जीवन में नए अवसरों के द्वार खोल रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में प्रदेश की महिलाएं आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और नेतृत्व क्षमता के साथ विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में महत्वपूर्ण भागीदारी निभा रही हैं। यही बदलती तस्वीर छत्तीसगढ़ को ‘सुशासन से समृद्धि‘ की ओर निरंतर अग्रसर कर रही है।

डॉ. दानेश्वरी संभाकर, उप संचालक 

विशेष लेख : संपत्ति में बढ़ी महिलाओं की भागीदारी, सशक्त हो रही नारी शक्ति

विशेष लेख : संपत्ति में बढ़ी महिलाओं की भागीदारी, सशक्त हो रही नारी शक्ति

रायपुर, मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और संपत्ति स्वामित्व को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लागू की गई पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत छूट की पहल के उत्साहजनक परिणाम सामने आ रहे हैं। पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग के आंकड़ों के अनुसार महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

विभाग द्वारा 06 मई 2026 से 30 जून 2026 की अवधि का पिछले वर्ष की समान अवधि से तुलनात्मक विश्लेषण करने पर पाया गया कि वर्ष 2025 में महिलाओं के पक्ष में पंजीकृत विक्रय विलेखों की हिस्सेदारी 32 प्रतिशत थी, जो वर्ष 2026 में बढ़कर 41 प्रतिशत हो गई है। इसी अवधि में महिलाओं के नाम पंजीकृत दस्तावेजों की संख्या 14,668 से बढ़कर 21,292 हो गई, जो लगभग 45 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाती है।

राज्य के लगभग 75 प्रतिशत जिलों में महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन में 20 प्रतिशत से अधिक वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है। जांजगीर-चांपा, बलोद, कोरिया, रायपुर तथा कांकेर सहित अनेक जिलों में उल्लेखनीय प्रगति देखने को मिली है।

महिलाओं को प्रदान की गई पंजीयन शुल्क में छूट के परिणामस्वरूप इस अवधि में नागरिकों को लगभग 50.14 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ प्राप्त हुआ है। इससे न केवल महिलाओं के नाम पर संपत्ति स्वामित्व को बढ़ावा मिला है, बल्कि परिवारों को भी आर्थिक राहत मिली है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन को प्रोत्साहित करने के लिए पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट का निर्णय इसी सोच का परिणाम है। संपत्ति पर महिलाओं का स्वामित्व उन्हें आर्थिक सुरक्षा के साथ-साथ परिवार और समाज में अधिक सम्मान एवं निर्णय लेने की क्षमता भी प्रदान करता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस निर्णय से बड़ी संख्या में परिवार लाभान्वित हुए हैं और महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। हमारी सरकार ऐसी नीतियों को लगातार बढ़ावा दे रही है, जो महिलाओं को आत्मनिर्भर, सशक्त और विकास यात्रा की समान भागीदार बनाएं।

वित्त एवं वाणिज्यिक कर (पंजीयन) मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन में हुई यह उल्लेखनीय वृद्धि केवल एक सांख्यिकीय उपलब्धि नहीं है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन का संकेत है। जब किसी महिला के नाम संपत्ति होती है, तो उसका आत्मविश्वास बढ़ता है, परिवार में उसकी निर्णयात्मक भूमिका सुदृढ़ होती है और आर्थिक सुरक्षा भी सुनिश्चित होती है।

मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार महिलाओं को विकास प्रक्रिया के केंद्र में रखकर कार्य कर रही है। पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत छूट का उद्देश्य केवल आर्थिक राहत देना नहीं, बल्कि महिलाओं को संपत्ति स्वामित्व से जोड़कर उन्हें वास्तविक अर्थों में सशक्त बनाना है। प्रारंभिक परिणाम बताते हैं कि यह पहल अपने उद्देश्य की दिशा में प्रभावी सिद्ध हो रही है।


मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार नागरिक-केंद्रित, पारदर्शी एवं समावेशी पंजीयन व्यवस्था के निर्माण के लिए निरंतर सुधार कर रही है। महिलाओं की बढ़ती भागीदारी विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग द्वारा किए जा रहे सुधारों एवं प्रोत्साहनात्मक उपायों का उद्देश्य नागरिकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराना तथा शासन की योजनाओं का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाना है। 

विशेष लेख : सुरक्षा और रोजगार की गारंटी के साथ बढ़ा महिला श्रमिकों का सम्मान

विशेष लेख : सुरक्षा और रोजगार की गारंटी के साथ बढ़ा महिला श्रमिकों का सम्मान

हर वर्ष 1 मई को हम श्रमिक दिवस मनाते हैं। यह एक ऐसा दिन जो श्रमिकों के अथक परिश्रम, संघर्ष और योगदान को सम्मान देने का अवसर प्रदान करता है। छत्तीसगढ़ अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक संपदा के लिए प्रसिद्ध है, राज्य की आर्थिक प्रगति में महिला श्रमिकों की महत्वपूर्ण भूमिका के लिए भी जाना जाता है।
कृषि, खनन, वनों से प्राप्त उत्पादों और छोटे उद्योगों पर आधारित अर्थव्यवस्था वाले छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में महिलाएँ खेती-बाड़ी, तेंदूपत्ता संग्रहण और हस्तशिल्प निर्माण जैसे कार्यों में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं, जबकि शहरी क्षेत्रों में निर्माण कार्य, घरेलू सेवाएँ और छोटे व्यापारों में उनकी भागीदारी तेजी से बढ़ रही है। महिला श्रमिकों की भागीदारी दर राष्ट्रीय औसत से अधिक है, विशेष रूप से असंगठित क्षेत्रों में, फिर भी उनकी मेहनत को अब भी उचित मान्यता और पारिश्रमिक नहीं मिल पाता। महिला श्रमिकों के सामने कई चुनौतियाँ हैं। जिनमें समान वेतन का अभाव, समान कार्य के बावजूद वेतन असमानता, खनन और निर्माण जैसे क्षेत्रों में असुरक्षित परिस्थितियाँ, प्रसूति लाभों और स्वास्थ्य सुविधाओं की सीमित पहुँच, कम पढ़ाई और तकनीकी प्रशिक्षण के कारण सीमित अवसर, पारंपरिक सोच और घरेलू जिम्मेदारियाँ उनकी स्वतंत्रता को सीमित करती हैं।
छत्तीसगढ़ सरकार ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में महिला श्रमिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल की गई है। जिसमें मुख्यमंत्री महिला सशक्तिकरण मिशन के अंतर्गत ग्रामीण और शहरी महिलाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता के लिए विशेष सहायता दी जा रही है। नई श्रमिक नीति द्वारा असंगठित क्षेत्रों में कार्यरत महिला श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी की गारंटी और कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों को अनिवार्य बनाया गया है। महिला शक्ति केंद्रों के विस्तार से प्रत्येक जिले में महिला शक्ति केंद्र स्थापित कर महिला श्रमिकों को कानूनी सहायता, स्वास्थ्य सुविधा और रोजगार परामर्श उपलब्ध कराया जा रहा है। स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा देकर महिला स्वावलंबन के लिए राज्य सरकार द्वारा विशेष वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। सखी वन स्टॉप सेंटर में हिंसा से पीड़ित महिलाओं के लिए त्वरित सहायता और पुनर्वास की व्यवस्था। मनरेगा में महिलाओं के भागीदारी बढ़ाने रोजगार दिवसों में महिलाओं के न्यूनतम 50 प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित करने की पहल शामिल हैं।
छत्तीसगढ़ में महिला श्रमिकों कल्याण के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनमें मुख्य रूप से मिनीमाता महतारी जतन योजना है, जो पंजीकृत महिला निर्माण श्रमिकों को प्रसूति सहायता प्रदान करती है।इस योजना के तहत बच्चे के जन्म के बाद पंजीकृत महिला श्रमिकों को 20 हजार की एकमुश्त राशि मिलती है। इसके अलावा राज्य सरकार विभिन्न कौशल विकास कार्यक्रम और सहायता योजनाएं भी चलाती है, जो महिला श्रमिकों को सशक्त बनाने में मदद करती हैं।
मुख्यमंत्री सिलाई मशीन सहायता योजना अंतर्गत 18 से 50 वर्ष आयु के बीच की पंजीकृत महिला श्रमिकों को सिलाई मशीन के लिए सहायता प्रदान की जाती है। मुख्यमंत्री निर्माण मजदूर सुरक्षा उपकरण सहायता योजना में पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को सुरक्षा उपकरण के लिए सहायता प्रदान करती है।छत्तीसगढ़ महिला कोष महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए विभिन्न योजनाओं का संचालन करता है, जिसमें वित्तीय सहायता प्रशिक्षण और अन्य संसाधन शामिल हैं।घरेलू महिला कामगार कौशल उन्नयन एवं ठेका श्रमिक, हमाल कामगार परिवार सशक्तिकरण योजना,घरेलू महिला श्रमिकों, ठेका श्रमिकों और हमाल श्रमिकों के कौशल विकास और परिवार को सशक्त बनाने के लिए योजना है। सक्षम योजना छत्तीसगढ़ महिला कोष के तहत संचालित एक योजना है जो विधवा, परित्यक्ता, तलाकशुदा और अविवाहित महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में मदद करती है। महतारी वंदन योजना से महिलाओं को 1 हजार रूपए प्रति माह की आर्थिक सहायता प्रदान कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ सरकार महिला श्रमिकों के लिए कौशल विकास कार्यक्रम चला रही है, प्रशिक्षण के बाद उनके रोजगार का प्रबंध भी कर रही है, ताकि उन्हें आर्थिक मजबूती मिल सके, सरकार माताओं-बहनों तक जनहितैषी योजनाओं के शत प्रतिशत लाभ की पहुंच भी सुनिश्चित कर रही है। जबकि स्वयं सहायता समूहों के जरिए आर्थिक स्वतंत्रता और नेतृत्व क्षमता को बढ़ावा दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री साय सरकार में प्रदेश के विकास में महिला श्रमिकों के योगदान को सम्मान मिला है।

डॉ. दानेश्वरी सम्भाकर
सहायक संचालक (जनसंपर्क) 

विशेष लेख : नई औद्योगिक नीति से छत्तीसगढ़ में बेहतर

विशेष लेख : नई औद्योगिक नीति से छत्तीसगढ़ में बेहतर

प्रदेश की नई औद्योगिक नीति 1 नवंबर 2024 से लागू हो गई है, जो 31 मार्च 2030 तक प्रभावशील रहेगी। राज्य के औद्योगिक विकास को गति प्रदान करने के लिए राज्य में औद्योगिक नीतियों की परिकल्पना राज्य गठन के उपरान्त लगातार की जा रही है। छत्तीसगढ़ में अब तक पांच औद्योगिक नीतियां क्रमशः - 2001, 2004-09, 2009-14, 2019-24 प्रवाशील रही एवं अब नई औद्योगिक नीति 2024 लागू की गई है। उपरोक्त औद्योगिक नीति को लागू किये जाने के साथ ही इन नीतियों में तत्कालीन आवश्यकताओं को तथा औद्योगिक विकास के निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए नीतियों में यथा आवश्यकता विभिन्न प्रकार के औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन यथा- ब्याज अनुदान, राज्य लागत पूंजी अनुदान, (अधोसंरचना लागत पूंजी अनुदान), स्टाम्प शुल्क छूट, विद्युत शुल्क छूट, प्रवेश कर छूट, मूल्य संवर्धित कर प्रतिपूर्ति, मंडी शुल्क छूट, परियोजना लागत पूंजी अनुदान इत्यादि प्रदान की जाती रही है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का कहना है कि हमने इस नई नीति को रोजगार परक और विजन-2047 के अनुरूप विकसित भारत के निर्माण की परिकल्पना को ध्यान में रखते हुए विकसित छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माण का लक्ष्य तय किया है। हमारा राज्य देश के मध्य मेें स्थित है, आने वाले वर्षो में हम अपनी भौगोलिक स्थिति आवागमन के आधुनिक साधनों और आप सबकी भागीदारी से प्रदेश को ‘‘हेल्थ हब‘‘ बनाने मे सफल होंगे। जगदलपुर के नजदीक हम लगभग 118 एकड़ भूमि पर औद्योगिक क्षेत्र का निर्माण प्रारभ करने जा रहे है।

प्रदेश के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री लखन लाल देवांगन का कहना है कि निश्चित तौर पर हमारी सरकार की मंशा है कि प्रदेश में ज्यादा से ज्यादा उद्योग कैसे स्थापित हो इसे ध्यान में रखकर यह उद्योग नीति तैयार की गई है। हमने पहली बार इस नीति के माध्यम से राज्य में पर्यटन एवं स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं में निवेश को भी प्रोत्साहित करने का निर्णय लिया है। हाल ही में आयोजित केबिनेट बैठक में पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिया गया है।

इसमें छत्तीसगढ़ सरकार ने भारत सरकार के विजन 2047 की परिकल्पना को साकार करने तथा राज्य के औद्योगिक विकास को गति देने के उद्देश्य से कई प्रावधान किए हैं। राज्य के प्रशिक्षित व्यक्तियों को औपचारिक रोजगार में परिवर्तित करने के लिए उद्योगों हेतु प्रति व्यक्ति 15 हजार रूपए की प्रशिक्षण वृत्ति प्रतिपूर्ति का प्रावधान किया गया है। यह नीति 31 मार्च 2030 तक के लिए होगी। नई औद्योगिक नीति में निवेश प्रोत्साहन में ब्याज अनुदान, लागत पूंजी अनुदान, स्टाम्प शुल्क छूट, विद्युत शुल्क छूट. मूल्य संवर्धित कर प्रतिपूर्ति का प्रावधान है। नई नीति में मंडी शुल्क छूट, दिव्यांग (निःशक्त) रोजगार अनुदान, पर्यावरणीय प्रोजेक्ट अनुदान, परिवहन अनुदान, नेट राज्य वस्तु एवं सेवा कर की प्रतिपूर्ति के भी प्रावधान किये गये हैं।

इस नीति में राज्य के युवाओं के लिये रोजगार सृजन को लक्ष्य में रखकर एक हजार से अधिक स्थानीय रोजगार सृजन के आधार पर बी-स्पोक पैकेज विशिष्ट क्षेत्र के उद्योगों के लिये प्रावधानित है। राज्य के निवासियों विशेषकर अनुसूचित जाति, जनजाति, महिला उद्यमियों, सेवानिवृत्त अग्निवीर सैनिक, भूतपूर्व सैनिकों, जिनमें पैरामिलिट्री भी शामिल है, को नई औद्योगिक नीति के तहत अधिक प्रोत्साहन दिए जाने का प्रावधान है। नक्सल प्रभावित लोगों, कमजोर वर्ग, तृतीय लिंग के उद्यमियों के लिए नई औद्योगिक पॉलिसी के तहत विशेष प्रोत्साहन दिए जाने का प्रावधान किया गया है। नई औद्योगिक नीति में पहली बार सेवा क्षेत्र अंतर्गत एमएसएमई सेवा उद्यम एवं वृहद सेवा उद्यमों के लिये पृथक-पृथक प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है।

छत्तीसगढ़ संभवतः देश में पहला राज्य है, जिसने युवा अग्निवीरों एवं नक्सल पीड़ित परिवारों को स्वयं के रोजगार धन्धे स्थापित करने पर विशेष अनुदान एवं छूट का प्रावधान किया है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति वर्ग के युवाओं को स्वयं का रोजगार उपलब्ध कराने हेतु भी कटिबद्ध हैं। इसके लिए हम इन वर्गों के उद्यमियों को मात्र 1 रूपये प्रति एकड़ की दर पर औद्योगिक क्षेत्रों में भूमि दे रहे है। सरकार का प्रयास होगा कि उद्योग स्थापना एवं संचालन में सरकारी हस्तक्षेप न्यूनतम हो एवं यथासंभव सेल्फ सर्टिफिकेशन अथवा ऑनलाइन माध्यम से हो ताकि आपके उद्योग हेतु आपको सरकार के पास आने की आवश्यकता ना हो।

औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के विशेष प्रावधान

यह नीति उद्योगों को निवेश करने, नये रोजगार सृजन करने और आर्थिक विकास को गति देने के लिये एक मजबूत आधार प्रदान करेगी। इस नीति के माध्यम से राज्य के युवाओं के लिए कौशलयुक्त रोजगारों का सृजन करते हुये अगले 5 वर्षों में 5 लाख नए औपचारिक क्षेत्रों में रोजगार का लक्ष्य रखा गया है। इस नीति मैं स्थानीय श्रमिकों को औपचारिक रोजगार में परिवर्तित करने के लिए प्रशिक्षण कर प्रोत्साहन का प्रावधान करते हुये 1000 से अधिक रोजगार प्रदाय करने वाली इकाईयों को प्रोत्साहन के अतिरिक्त विशेष प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है।

नई औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में आर्थिक एवं सामाजिक उत्थान में सहभागिता के लिए अनुसूचित जाति/जनजाति, महिला उद्यमियों, सेवानिवृत्त अग्निवीर, भूतपूर्व सैनिकों (जिनमें पैरा मिलेट्री फोर्स भी सम्मिलित है), नक्सल प्रभावित, आत्म-समर्पित नक्सलियों एवं तृतीय लिंग के उद्यमों का अतिरिक्त प्रोत्साहन दिये जाने का प्रावधान किया गया है। औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों की परिभाषा को भारत सरकार द्वारा परिभाषित एम.एस.एम.ई. के अनुरुप किया गया है। इसी के अनुसार ही इन उद्यमों को प्राप्त होने वाले प्रोत्साहनों को अन्य राज्यों की तुलना में प्रतिस्पर्धी बनाया गया है।

राज्य सरकार द्वारा देश में सेवा गतिविधियों के बढ़ते हुये। रुझान को दृष्टिगत रखते हुये इस नीति में पहली बार सेवा क्षेत्र अंतर्गत एमएसएमई सेवा उद्यम एवं वृहद सेवा उद्यमों के लिये पृथक-पृथक प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है। सेवा क्षेत्र अंतर्गत इंजीनियरिंग सर्विसेस, रिसर्च एंड डेव्हलपमेंट, स्वास्थ्य सेक्टर, पर्यटन एवं मनोरंजन सेक्टर आदि से संबंधित गतिविधियों को सम्मिलित किया गया है। औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में विशिष्ट श्रेणी के उद्योगों जैसे फार्मास्यूटिकल, टेक्सटाईल, कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण तथा गैर काष्ठ वनोंपज प्रसंस्करण, कम्प्रेस्ड बॉयो गैस, इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक्स, आर्टिफिशियल इंटीलिजेंस (ए.आई), रोबोटिक्स एण्ड कम्प्यूटिंग (जी.पी.यू), आई.टी., आई.टी.ई.एस./डेटा सेंटर जैसे नवीन सेक्टरों के लिए विशेष पैकेज का प्रावधान है।

4 दिसम्बर 2024 को नवा रायपुर में स्टेक होल्डर कनेक्ट वर्कशॉप के दौरान राज्य के 27 बड़े औद्योगिक समूहों को नवीन पूंजी निवेश के प्रस्ताव के संबंध में 32 हजार 225 करोड़ रुपए के निवेश के लिए इंटेंट टू इन्वेस्ट लेटर प्रदान किए। इनमें राज्य के कोर सेक्टर के साथ ही नये निवेश क्षेत्रों जैसे आईटी, एआई, डाटा सेंटर, एथेनॉल, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिकल, कम्प्रेस्ड बायो गैस जैसे क्षेत्रों में निवेश किया जाएगा। इनमें शिवालिक इंजीनियरिंग, मां दुर्गा आयरन एण्ड स्टील, एबीआरईएल ग्रीन एनर्जी, आरएजी फेरो एलायज, रिलायंस बायो एनर्जी, यश फैंस एण्ड एप्लायंसेस, शांति ग्रीन्स बायोफ्यूल, रेक बैंक डाटा सेंटर आदि सम्मिलित हैं।

इसके साथ ही थ्रस्ट सेक्टर के ऐसे उद्योग जहां राज्य का प्रतिस्पर्धात्मक लाभ है और जहां भविष्य के रोजगार आ रहे हैं, उन क्षेत्रों के लिये अतिरिक्त प्रोत्साहन का प्रावधान है। नीति में प्रोत्साहनों की दृष्टि से राज्य के विकासखण्डों को 03 समूहों में रखा गया है। समूह-1 में 10. समूह 2 में 61 एवं समूह 3 में 75 विकासखण्डों को वर्गीकृत किया गया है।

उप संचालक: छगनलाल लोन्हारे  

पीएम जनमन से बैगा परिवारों की बदल रही तस्वीर और तकदीर

पीएम जनमन से बैगा परिवारों की बदल रही तस्वीर और तकदीर

रायपुर, 18 सितंबर 2024/ प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा विशेष रूप से पिछड़ी जनजातियों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के लिए संचालित पीएम जनमन योजना (प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाभियान) के चलते छत्तीसगढ़ राज्य के अति पिछड़े जनजातीय समुदाय तकदीर और इनकी बसाहटों की तस्वीर तेजी से बदलने लगी है। विशेष पिछड़ी जनजातियों के रहवासी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का तेजी से विकास होने लगा है। बरसों-बरस से आवास, स्वच्छ पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित इन जनजातीय समूहों को अब मिशन मोड में यह बुनियादी सुविधाएं सुभल होने लगी है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा पीएम जनमन योजना के सफल क्रियान्वयन से राज्य के सभी विशेष पिछड़ी जनजातीय इलाकों में बुनियादी विकास एवं निर्माण के कार्य तेजी से कराये जा रहे है। राज्य में पीएम जनमन योजना को शुरू हुए अभी एक साल का भी अरसा पूरा नहीं हुआ है, फिर भी छत्तीसगढ़ सरकार की प्रतिबद्धता के चलते इसके सार्थक परिणाम दिखाई देने लगे है। कबीरधाम जिले में प्रधानमंत्री जनमन योजना के चलते बैगा समुदाय की तकदीर और इनकी बसाहटों की तस्वीर बदलने लगी है।

छत्तीसगढ़ राज्य के उत्तर-पश्चिम भाग में स्थित कबीरधाम, राजनांदगांव, मुंगेली, बिलासपुर और कोरिया जिले में विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा समुदाय के लोग निवास करते है। जनसंख्यात्मक दृष्टिकोण से बैगा, छत्तीसगढ़ राज्य की विशेष पिछड़ी जनजातियों में सर्वाधिक आबादी वाला जनजाति समुदाय है। छत्तीसगढ़ राज्य में उक्त 5 जिलों में बैगा समुदाय के 24 हजार 589 परिवार निवासरत है, जिसमें से लगभग 46 प्रतिशत यानि 11 हजार 261 परिवार कबीरधाम जिले में रहते हैं।

कबीरधाम जिले के बोड़ला एवं पंडरिया में बैगा समुदाय के लोग निवास करते हैं। इस समुदाय की 38 बसाहटों में निवासरत 255 परिवारों के घरों में विद्युत सुविधा से रौशन किया जा चुका है, जबकि 56 बैगा बसाहटों को जोड़ने के लिए 186.20 किलोमीटर लम्बाई वाली 47 सड़कों के निर्माण के लिए 135.72 करोड़ रूपए की स्वीकृति दी गई है। इनमें से 42 सड़कों के निर्माण प्रारंभ हो चुका है, जिसके अंतर्गत पक्की डामरीकृत सड़क एवं नदी-नालों पर पुल-पुलियों का निर्माण जारी है।

कबीरधाम के पंडरिया विकासखंड के ग्राम भागड़ा, जामुनपानी, कामठी, कुई, मंगली सारपानी टाकटाईयां, बदना, गुडा, छिरहा, मुनमुना, नेउर और लालपुर में विशेष शिविर लगाकर बैगा समुदाय के लोगों के स्वास्थ्य एवं सिकलसेल की जांच के साथ ही 1870 बैगा परिवारों को आयुष्मान कार्ड प्रदान किए गए हैं। इन गांवों के 86 गर्भवती माताओं का सुरक्षित प्रसव कराया गया। स्वास्थ के प्रति जन-जागरूकता का विशेष अभियान संचालित करने का यह परिणाम है कि अब बैगा समुदाय की महिलाएं भी प्रसव के लिए सरकारी अस्पतालों एवं स्वास्थ्य केन्द्रों में बिना झिझक आने लगी है।

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा खेती-किसानी के लिए दी जा रही मदद के चलते अब बैगा समुदाय के लोग बेवर खेती को छोड़ परंपरागत तौर-तरीकों से खेती-किसानी करने लगे है। बेवर खेती दरअसल झूम खेती है। बैगा समुदाय के लोग एक स्थान पर स्थायी तौर पर निवास न करने के कारण बेवर यानी झूम खेती किया करते थे। बिना ब्याज के कृषि ऋण, अनुदान पर कृषि यंत्रों सहित अन्य सुविधाएं मिलने की वजह से बैगा समुदाय के लोग अब बेवर खेती को छोड़ स्थायी खेती करने लगे है। कबीरधाम जिले में शासन द्वारा बैगा समुदाय के लोगों को किसान क्रेडिट कार्ड एवं खेती-किसानी के लिए इस वर्ष 11.70 लाख रूपए का कृषि ऋण दिया जा चुका है।

ग्राम दमगढ़ निवासी समेलाल बैगा के पास 5.5 एकड़ कृषि भूमि है। प्रधानमंत्री जनमन येाजना के तहत उन्होंने एक लाख रूपए ऋण लेकर अपनी कृषि भूमि पर धान की खेती के लायक बना दिया है। समेलाल का कहना है कि धान की समर्थन मूल्य पर खरीदी और राशि का तत्काल भुगतान होने से उन्हें कृषि से लाभ होने लगा है। ग्राम रोखनी के राजकुमार बैगा के पास 02 एकड़ कृषि भूमि है। प्रधानमंत्री जनमन योजना से ऋण लेकर उन्होंने खेत का सुधार कराया है और धान की खेती की है। फसल अच्छी होने की वजह से उन्हें, इससे लाभ होने की उम्मीद है। नवीन क्रेडिट कार्ड से ऋण मिलने से खेती की जरूरतें पूरी होने लगी है।

पीएम-जनमन योजना के चलते कबीरधाम जिले की 260 बैगा बसाहटों में सोलर पंप, पानी टंकी, पाईप लाईन के माध्यम से बैगा परिवारों के घरों में नल से जल की आपूर्ति का काम तेजी से कराया जा रहा है। वर्तमान में विकासखंड बोड़ला के 181 बसाहटों में से 62 बसाहटों में सोलर पंप, पानी टंकी, पाईप लाईन के माध्यम से जलापूर्ति शुरू कर दी गई है, शेष 119 बसाहटों में नल कनेक्शन दिए जाने का काम जारी है। पंडरिया ब्लॉक अंतर्गत 78 बैगा बसाहटों में से 18 बसाहटों में नल से जल प्रदाय करने का काम पूरा हो चुका है, जबकि शेष बसाहटों में पानी टंकी निर्माण कार्य, पाईप लाईन बिछाने का काम जारी है। बैगा बसाहटों में पेयजल के लिए पहले से हैण्डपंप स्थापित है।

प्रधानमंत्री जनमन योजना अंतर्गत कबीरधाम जिले में 8 हजार 596 विशेष पिछड़ी जनजाति के तहत बैगा समुदाय के परिवारों का सर्वे में 8 हजार 440 परिवार बैगा परिवार आवास के लिए पात्र पाए गए है, जिनमें से 7853 का परिवारों का पंजीयन आवास पोर्टल में किया गया है एवं 7394 परिवारों को आवास की स्वीकृति प्रदान की गई है। स्वीकृत परिवारों में से 6 हजार 678 हितग्राहियों को प्रथम किश्त, 3031 हितग्राहियों को द्वितीय किश्त एवं 1081 हितग्राहियों को तृतीय किश्त की राशि ऑनलाईन डी.बी.टी. के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर की जा चुकी है। बैगा समुदाय के रहवासी इलाकों में 4 छात्रावास, 39 आंगनबाड़ी केन्द्र, 2 वनधन केन्द्र, 13 बहुद्देशीय केन्द्र सहित कुल 370 कार्यों की स्वीकृति दी गई हैं, जिन्हें तेजी से पूरा कराया जा रहा है। 

-नसीम अहमद खान, उप संचालक, जनसंपर्क

विशेष लेख : विष्णु सरकार के प्रयासों से सशक्त होती महिलाएं

विशेष लेख : विष्णु सरकार के प्रयासों से सशक्त होती महिलाएं

रायपुर, 14 अगस्त 2024

महिलाओं के विकास से ही समाज का विकास संभव है। छत्तीसगढ़ की महिलाएं भी अपने प्रदेश के चहुंमुखी और तेज विकास में पुरूषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी हुई हैं। घर-परिवार की देखभाल में तो महिलाएं अव्वल हैं ही,आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका, पर्यवेक्षक, महिला समूह सहित अनेक रूपों में महिलाएं राज्य के भविष्य नन्हें-मुन्हें बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण की देखभाल के साथ उन्हें प्रारंभिक शिक्षा प्रदान करने का काम कर रही हैं।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने हमेशा राज्य के विकास में महिलाओं की भूमिका की सराहना की है। वे महिलाओं की शिक्षा और सशक्तिकरण के पक्षधर हैं। उन्होंने महिलाओं की काबिलियत को समझा और उन्हें हर क्षेत्र में आगे आने का मौका दिया है। उनके नेतृत्व में प्रदेश में महिला शिक्षा और सशक्तिकरण के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही है। वैसे तो पहले से ही छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था में महिलाओं की बराबर हिस्सेदारी रही है। खेती-किसानी के कार्यों में यहां की महिलाएं निपुण हैं ही, अब महिलाएं सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाकर उद्यम एवं व्यवसाय भी तेजी से कदम बढ़ा रही हैं।
प्रदेश में राशन दुकान, कपड़ा दुकान, सिलाई दुकान, श्रृंगार दुकान, होटल, थोक में बड़ी, पापड़, अचार और छत्तीसगढ़ी व्यंजनों की बिक्री तथा ब्यूटी पार्लर जैसे लाभकारी व्यवसाय उनकेे लिए आत्मनिर्भरता की सीढ़ी बन चुके हैं। छत्तीसगढ़ में शासकीय उचित मूल्य की दुकानों के संचालन और स्कूलों में मध्यान्ह भोजन तैयार करने का कार्य भी महिलाओं को ही दिया गया है। प्रदेश के आंगनबाड़ी केन्द्रों और मिनी आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों के लिए नाश्ता और गर्म पके हुए भोजन तैयार करने का काम भी महिला समूह की महिलाएं कर रही हैं। राज्य सरकार ने पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं को 50 प्रतिशत सीटों में आरक्षण प्रदान कर प्रदेश के विकास में उनकी भूमिका सुनिश्चित कर दी है। कुपोषण मुक्ति अभियान में महिलाओं की सक्रियता से ही आज राज्य में कुपोषण दर में लगातार कमी आ रही है।

 


प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की नीतियों की वजह से आज भारत देश विश्व की पांचवी बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देशों में एक है। प्रधानमंत्री के संकल्प के अनुरूप विकसित भारत के निर्माण में महिलाओं का बराबर का योगदान जरूरी है। इसको ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य की महिलाओं की आत्मनिर्भरता एवं स्वावलंबन के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। महिलाओं के स्वाभिमान और सम्मान के प्रतीक के रूप में महतारी वंदन योजना छत्तीसगढ़ सरकार ने शुरू की है। इससे महिलाओं में एक नया आत्मविश्वास जगा है और उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा भी बढ़ी है।
महतारी वंदन योजना के तहत राज्य में विवाहित महिलाओं को 1,000 रुपए प्रतिमाह (कुल 12,000 रुपए सालाना) वित्तीय सहायता दी जा रही है, जो प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में जमा की जा रही है। महिलाएं खुश है कि वो महतारी वंदन योजना से मिली राशि से अपने बच्चों और परिवार की छोटी-छोटी जरूरतें पूरी कर पा रहीं हैं।
महिलाएं घर-परिवार की देखभाल, प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। अपनी छोटी-मोटी बचत का उपयोग ज्यादातर परिवार और बच्चों के पोषण में खर्च करती हैं। इसके बावजूद भी आर्थिक मामलों में उनकी सहभागिता अभी भी बहुत कम है। इसे देखते हुए राज्य सरकार महिलाओं की आर्थिक सहभागिता बढ़ाने के लिए काम कर रही है। महिलाओं के स्वास्थ्य की बात की जाए तो 2020-21 में हुए राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-5 के अनुसार 23.10 प्रतिशत महिलाएं मानक बॉडी मास इंडेक्स से कम स्तर पर हैं। 15 से 49 वर्ष के आयु की महिलाओं में एनीमिया का स्तर 60.8 प्रतिशत और गर्भवती महिलाओं में यह 51.8 प्रतिशत है। इस स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार उनके स्वास्थ्य और सुपोषण को बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रही है।
राज्य में बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की सरकार ने सरस्वती सायकल योजना को वृहद स्तर पर फिर से शुरू किया गया है। इससे बेटियों को आगे की पढ़ाई करने के लिए प्रोत्साहन और मदद मिल रही है। असंगठित क्षेत्र की महिला श्रमिकों को भी निःशुल्क सायकल और सिलाई मशीन वितरित किया जा रहा है। सायकल मिलने से उन्हें कार्यस्थल तक जाने में सुविधा हो रही है, वहीं सिलाई सीखकर वे चाहें तो सिलाई-बुनाई को आमदनी का जरिया बना सकती हैं।
महिलाओं और बालिकाओं की आपातकालीन सहायता के लिए प्रदेश में दूरभाष हेल्पलाइन-1091 की सेवा संचालित है। गर्भवती और शिशुवती महिलाओं के बेहतर स्वास्थ्य के लिए आंगनबाड़ी केन्द्रों के माध्यम से स्वादिष्ट और पौष्टिक पूरक पोषण आहार वितरण किया जा रहा है। गरीब परिवार की विवाह योग्य बेटियों के सम्मानपूर्वक विवाह के लिए वर्ष 2005-06 से प्रदेश में मुख्यमंत्री कन्यादान योजना संचालित है। प्रदेश की महिलाएं राज्य शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाकर आगे बढ़ ही रही हैं। इसके अलावा वे अपनी मेहनत और खुद की योग्यता के बल पर प्रदेश की अर्थव्यवस्था, सामाजिक व्यवस्था और राज्य के खेल जगत में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। 

डॉ. दानेश्वरी संभाकर, सहायक संचालक

 विशेष लेख : महतारी वंदन योजना महिलाओं को बनाएगी आर्थिक रूप से मजबूत

विशेष लेख : महतारी वंदन योजना महिलाओं को बनाएगी आर्थिक रूप से मजबूत

महिलाओं की आत्मनिर्भरता वास्तव में देश और समाज दोनों की विकास से जुड़ी हुई है। जब एक महिला आर्थिक रूप से सशक्त होती है तो एक परिवार और समाज भी सशक्त होता है। इसका सकारात्मक परिणाम बच्चों की शिक्षा-दीक्षा के साथ परिवार की आर्थिक उन्नति के रूप में होता है। राज्य सरकार द्वारा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सार्थक प्रयास किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की सरकार राज्य में मोदी जी की गारंटी को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। छत्तीसगढ़ की महिलाएं हर दिशा में आगे बढ़ रही है। इसी का परिणाम है कि महतारी वंदन योजना के तहत अंतिम दिनों तक फॉर्म भरने के लिए महिलाओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। केन्द्र में फॉर्म भरने वाली महिलाओं ने बताया कि हर महीने योजना के तहत एक हजार रूपए उनके खाते में दिए जाएंगे, एक वर्ष में उन्हें 12 हजार रूपए मिलेगा। इस योजना के माध्यम से महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त और मजबूत बनने वाली है। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार द्वारा महतारी वंदन योजना के तहत् 72 लाख 74 हजार से अधिक महिलाओं ने आवेदन भरा है।

नारायणपुर जिले के ग्राम पुसवाल निवासी 28 वर्षीय श्रीमती रामदई कचलाम, 40 वर्षीय श्रीमती बतीबाई कचलाम, 35 वर्षीय श्रीमती सुलबती नाग और 55 वर्षीय श्रीमती मानकी बाई कचलाम ने बताया कि वे महतारी वंदन योजना का फार्म भरकर बहुत उत्साहित हैं। उन्हांेने बताया कि प्रदेश के हमारे जैसे लाखों गरीब महिलाओं के लिए यह योजना वरदान साबित होगा। उन्होंने खुशी का इजहार करते हुए कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की यह योजना महिलाओं के विकास में मददगार साबित होकर जीवन को खुशहाली देने में सहयोग मिलेगा। मानकी बाई कचलाम ने बताया कि प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के निर्णय अनुसार प्रदेश के सभी पात्र विवाहित महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रूपये देने के निर्णय से हम लोग बेहद खुश हैं। उन्होंने देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय को महतारी वंदन योजना प्रारंभ करने के लिए धन्यवाद देते हुए आभार जताया है।

श्रीमती सुलबती नाग ने कहा कि महतारी वंदन योजना प्रारंभ होने से हम लोग बहुत खुश है उन्होंने प्राप्त राशि का उपयोग घरेलू जरूरतों एवं बच्चों की पढ़ाई में करने की बात कही। ग्राम बागोडार निवासी श्रीमती चित्ररेखा नेताम ने भी महतारी वंदन योजना का आवेदन भरते हुए बताया कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवार की महिलाओं के लिए यह योजना बहुत ही राहत देने वाली है।

शास्त्री बाजार में रहने वाली श्रीमती अनुराधा समुंद्रे ने बताया कि हर महीने एक हजार रुपए देने वाली राज्य सरकार की यह योजना सराहनीय है। उनकी एक छोटी सी दुकान है और महतारी वंदन योजना से मिलने वाली राशि का उपयोग अपनी दुकान में ज्यादा से ज्यादा समान भरने के लिए कर सकेंगी, जिससे कि उनके व्यवसाय को बढ़त मिलेगी। इस राशि से महिलाएं अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत बना सकेंगी।

राजीव आवास में रहने वाली कु. त्रिशला बघेल ने बताया कि उन्होंने अपनी बड़ी मां श्रीमती रश्मि सेंद्रे के लिए महतारी वंदन योजना का फॉर्म भरी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की महतारी वंदन योजना उनके लिए मददगार साबित होगी क्योंकि वह इस राशि से सिलाई मशीन खरीदेंगी और अपनी आमदनी बढ़ाएंगी। 

विशेष लेख : ग्रामीणों के लिए वरदान साबित हो रही नरवा, गरवा, घुरवा ,बारी योजना

विशेष लेख : ग्रामीणों के लिए वरदान साबित हो रही नरवा, गरवा, घुरवा ,बारी योजना

रायपुर, छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार के 4 साल पूरे हो चुकें हैैं। इन चार सालों के दौरान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए अनेक कदम उठाए हैं। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के सपनों को पूरा करने का संकल्प मुख्यमंत्री ने लिया और इसका क्रियान्वयन करने ऐसी अनेक जनहितकारी योजनाएं बनाई गई जिससे किसानों, महिलाओ और युवाओं को जोड़ा गया। राज्य में चल रही अनेक योजनाओं के क्रियान्वयन का बीड़ा तो महिलाओं द्वारा संचालित स्वसहायता समूहों ने उठाया है और वो बड़े ही संगठित रूप से कार्य कर अपनी ज़िम्मेदारी निभा रही है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए गौठानों में वर्मी कम्पोस्ट के उत्पादन के साथ-साथ अन्य आर्थिक गतिविधियां प्रारंभ की गई। गौठानों में ग्रामीण औद्योगिक पार्क बनाए जा रहे इन सभी गतिविधियों में गांवों के महिला समूह और युवाओं को जोड़ा जा रहा है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री ने रंक्षा बंधन के दिन महिला समूहों के ऋणों को माफ करने की घोषणा की। इन सब कार्यो से 4 सालों के कार्यकाल के दौरान कृषि स्वास्थ्य,उद्योग,महिला सशक्तिकरण,ऊर्जा वन अधिकार सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य किये जा रहे है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत बनाने की पहल से महिलाओं और युवाओं को उनके ग्रामों के आसपास ही रोज़गार के अवसर उपलब्ध हो रहे हैं। इससे बाहरी राज्यो में जाकर रोजगार तलाशने की समस्या से भी निजात खेतिहर श्रमिकों को मिली है।
छत्तीसगढ़ सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं से सभी वर्गों के जीवन स्तर में आर्थिक, सामाजिक बदलाव लाया जा रहा है। जल संरक्षण, पशु संवर्धन, मृदा स्वास्थ्य और पोषण प्रबंधन को आमजन की सहभागिता से सफल बनाने के लिए सुराजी गांव योजना 2 अक्टूबर 2019 से शुरू की गई है। इस योजना के तहत नरवा (बरसाती नाले), गरवा (पशुधन), घुरवा (कम्पोस्ट खाद निर्माण) और बाड़ी (सब्जी और फलोद्यान) के संरक्षण एवं संवर्धन का अभियान प्रारंभ किया गया है।
सरकार की ऐसे ही फ्लैगशिप योजनाओं में शामिल है, सुराजी गाव योजना। किसानों को चारागाह के लिए भूमि उपलब्ध कराई जा रही है, नालों का निर्माण कर सिंचाई और निस्तारी जल की सुविधा दी जा रही है। मवेशियों को रखने और चारे का बंदोबस्त किया जा रहा है साथ ही बाड़ी में सब्जी लगा कर जैविक कृषि की ओर उन्हें अग्रसर किया जा रहा है। इस योजना से खुले में पशुओं की चराई प्रथा पर रोक लगी है। सिंचित क्षेत्रों में किसान दोहरी फसल लेने लगे हैैं। खेती किसानी में वर्मी कम्पोस्ट के उपयोग से रासायनिक खादों के उपयोग से होने वाले हानिकारक तत्वों से मुक्ति मिल रही है। खेत भी वर्मी कम्पोस्ट के उपयोग से उपजाऊ बनते जा रहे है।
नरवा कार्यक्रम- राज्य के लगभग 29000 बरसाती नालों को चिन्हित कर इस कार्यक्रम के तहत उनका ट्रीटमेंट कराया जा रहा है। इससे वर्षाजल का संरक्षण होने के साथ-साथ संबंधित क्षेत्रों का भू-जलस्तर सुधर रहा है। प्रदेश में नरवा बनाने का कार्य भी द्रुतगति से चल रहा है। इन नालों के जरिए ग्रामीणों को कृषि के लिए सिंचाई का पानी मिल रहा, मवेशियों को पीने के पानी की समस्या से निजात मिल रही साथ ही गर्मी के दिनों में भी ग्रामीणों को निस्तारी के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। साथ ही वन्य प्राणियों के लिए भी गर्मी के दिनों में पेयजल की किल्लत नहीं होती और उनके लिए हर वक्त पानी मिल रहा है।
गरवा कार्यक्रम - इस कार्यक्रम के तहत पशुधन के संरक्षण और संवर्धन के लिए गांवों में गौठान बनाकर वहा पशुओं को रखने की व्यवस्था की गई हैं। प्रदेश में करीब 11,288 गौठान स्वीकृत हुए है, अब तक 9631 गौठान बन गए है। जिनमे से 4372 गौठान पूरी तरह से स्वावलंबी है। गौठानों में पशुओं के लिए डे-केयर की व्यवस्था है। इसके तहत चारे और पानी का निःशुल्क प्रबंध किया गया है। इससे मवेशियों को चारे के लिये भी भटकना नही पड़ रहा है। मुख्यमंत्री ने किसानों को पैरा दान करने की अपील की इसका असर यह हुआ कि किसान स्वमेव आगे आये और इन गौठानों में 4 लाख 513 हज़ार क्विंटल से अधिक का पैरा दान किया गया है।
घुरवा कार्यक्रम - इसके माध्यम से जैविक खाद का उत्पादन कर इसके उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। फिलहाल इन गौठान में 20 लाख क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट, साढ़े 5 लाख क्विंटल सुपर कम्पोस्ट तथा 19 लाख क्विंटल सुपर कम्पोस्ट प्लस का निर्माण किया गया है। घुरवा के लिये 92 हजार पक्के टांके स्वीकृत किये गए हैं इनमें, 81 हज़ार टांके बनकर तैयार है। वहीं 16 लाख क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट बिक्री सहकारी समीतियों के माध्यम से की जा चुकी है।
बारी कार्यक्रम- छत्तीसगढ़ में बाड़ी को बारी कहा जाता है। ग्रामीणों के घरों से लगी भूमि में 3 लाख से अधिक व्यक्तिगत बाडियों को विकसित किया गया है। साथ ही गौठनो में बनाई गई करीब 4429 सामुदायिक बाड़ियों के जरिये फल साग-सब्जियों के उत्पादन से कृषकों को आमदनी के साथ-साथ पोषण सुरक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। इस योजना के जरिये ग्रामों औऱ बसाहटों में बाड़ियों को विकसित कर लोगों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने प्रोत्साहित किया जा रहा है।
न्याय योजनाः खेती किसानी को मजबूत बनाने के लिए किसानों को इनपुट सब्सिडी देने के लिए चलाई जा रही राजीव गांधी किसान न्याय योजना से किसानों के मनोबल में वृद्धि हुई है इससे लगातार खेती किसानी का रकबा बढ़ता चला जा रहा है। किसानांे को साहूकारों के उचे ब्याज दर पर ऋण लेने से मुक्ति मिली है। इस योजना के तहत खरीफ और उद्यानिकी फसलों के उत्पादक किसानों को प्रति एकड़ की दर से इनपुट सब्सिडी दी जाती है। धान के बदले दूसरी फसल लगाने या वृक्षारोपण करने पर 10 हजार रुपए इनपुट सब्सिडी दी जाती है। अब तक राज्य में 22 लाख किसानों को 16 हजार 401 करोड़ 45 लाख रुपए इनपुट सब्सिडी दी गई है।
गोधन न्याय योजना में गोबर बेचकर किसानों को अतिरिक्त आमदनी मिल रही है। 20 जुलाई 2020 को हरेली पर्व के दिन गोधन न्याय शुरू की गई है। योजना के तहत दो रुपए किलो में गोबर खरीदी और 4 रूप लीटर की दर पर गोमूत्र की खरीदी की जा रही है। इस योजना के तहत ग्रामीणों और गोबर संग्राहकों को और गौठान समितियो के समूहों को 169.41 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है।
शुरू होने के साथ ही गोधन न्याय योजना काफी लोकप्रिय हुई है। अब इसकी चर्चा देश-दुनिया में होने लगी है और देश के अन्य राज्य इसे अपने यहां लागू करने जा रहे है। गांवों में गौठानों का और निर्माण होने से पशुधन को निःशुल्क चारा-पानी का प्रबंध सुनिश्चित हुआ है। इससे स्वच्छता के साथ ही पर्यावरण संरक्षण, दोहरी फसलों के रकबे में वृद्धि, कम्पोस्ट उत्पादन से खेती की लागत में कमी और जैविक खेती को बढ़ावा मिला है।
गौठानों में महिला समूहों द्वारा गोधन न्याय योजना के तहत क्रय गोबर से बड़े पैमाने पर वर्मी कम्पोस्ट, सुपर कम्पोस्ट, सुपर कम्पोस्ट और अन्य उत्पाद तैयार किया जा रहा है। महिला समूह गोबर से खाद के अलावा गो-कास्ट, दीया, अगरबत्ती, मूर्तियां और अन्य सामग्री का निर्माण एवं विक्रय कर लाभ अर्जित कर रही हैं। गौठानों में क्रय गोबर से विद्युत उत्पादन, की शुरुआत की जा चुकी है। गोबर से बिजली और प्राकृतिक पेंट बनाए जा रहे है।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने हाल ही 300 ग्रामीण औद्योगिक पार्क की शुरुआत की है। जिसके तहत आजीविका गुड़ी गौठनो में बनाई जाएगी। ग्रामीण युवा उद्यमियों को सशक्त बनाने के लिए नई तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा । इस तरह ये गौठान ग्रामीण अर्थवयवस्था को ज्यादा सशक्त बना कर रोजगार उपलब्ध कराने वाले केंद्र बनेंगे।
छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में चार सालों के दौरान किसानों, महिलाओ और निम्न आय वर्ग के हित में चलाई जा रही योजनाओं का ज़िक्र देश दुनिया में हो रहा है। लोगों को आर्थिक स्वावलंबी बनाने वाले विकास के छत्तीसगढ़ मॉडल को अपनाने में अन्य राज्य दिलचस्पी दिखा रहे है। यह इस बात का प्रतीक है कि चार सालों में छत्तीसगढ़ ने सफलता के कई सोपान तय किए है और आगे भी यह सिलसिला जारी रहेगा।

- शगुफ्ता शीरीन  

विशेष लेख : सूक्ष्म पोषक तत्वों विटामिन ठ 12, फोलिक एसिड और आयरन से भरपूर है फोर्टिफाइड चावल...

विशेष लेख : सूक्ष्म पोषक तत्वों विटामिन ठ 12, फोलिक एसिड और आयरन से भरपूर है फोर्टिफाइड चावल...

प्रत्येक माता-पिता की ख्वाइश होती है कि उनके बच्चे स्वस्थ्य रहें। लेकिन उनकी चिंता तब बढ़ जाती है जब बच्चे खाने-पीने में आनाकानी करते हैं। इससे बच्चों के शरीर में पोषक तत्वों की कमी होने लगती है और उनकी वृद्धि प्रभावित होती है। इसके साथ कुछ बच्चे जन्म से ही कुपोषित होते हैं। बच्चों का बेहतर स्वास्थ्य और सुपोषण स्तर बना रहे इसके लिये मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के निर्देश पर मध्याह्न भोजन में फोर्टिफाइड चावल का वितरण शुरू किया गया है। फोर्टिफाइड चावल वितरण की शुरूआत कोण्डागांव जिले से हुई थी। फोर्टिफाईड चावल क्या होता है..ये कैसे बनाया जाता है और बच्चों के लिये ये कैसे उपयोगी है..इस लेख में आपको बताते हैं।
फूड या खाद्य पदार्थों के फोर्टीफिकेशन का क्या मतलब होता है...?
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक फूड फोर्टीफिकेशन का मतलब होता है टेक्नोलॉजी के माध्यम से खाने में विटामिन और मिनरल के स्तर को बढ़ाना। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि आहार में पोषक तत्वों की कमी को दूर किया जा सके और इससे लोगों के स्वास्थ्य को भी लाभ मिले।
चावल में पहले से ही पोषक तत्व होते है फिर उसके फोर्टीफिकेशन की क्या जरूरत है?
आम तौर पर चावल की मिलिंग और पॉलिशिंग के समय फैट और सूक्ष्म पोषक तत्वों से भरपूर चोकर की परतें हट जाती है। चावल की पॉलिश करने से 75-90 प्रतिशत विटामिन भी निकल जाते है जिसके वजह से चावल के अपने पोषक तत्व खत्म हो जाते है। इसलिए चावल को फोर्टिफाई करने से उनमें सूक्ष्म पोषक तत्व न सिर्फ फिर से जुड़ जाते है बल्कि और ज्यादा मात्रा में मिलाये जाते है जिससे चावल और ज्यादा पौष्टिक बन जाता है।
कुपोषण से लड़ने के लिए जरूरी है चावल का फोर्टीफिकेशन
छत्तीसगढ़ देश का प्रमुख चावल उत्पादक राज्य है। विश्व में 22 प्रतिशत चावल का उत्पादन भारत करता है और हमारे देश में 65 प्रतिशत आबादी रोज़ चावल का सेवन करती है। इतना ही नहीं, भारत में प्रति व्यक्ति चावल की खपत प्रति माह 6.8 किलोग्राम है। भारत में खाद्य सुरक्षा कार्यक्रमों में चावल का वितरण भी बहुत ज्यादा मात्रा में होता है। इसलिए देश की ज्यादातर आबादी के लिए चावल ऊर्जा और पोषण का एक बड़ा स्रोत है और कुपोषण से लड़ने के लिए चावल का फोर्टीफिकेशन एक कारगर रणनीति है। सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के कई देश चावल के फोर्टीफिकेशन की रणनीति को लागू कर रहे है।
चावल को ऐसे करते हैं फोर्टीफाई ...
चावल को फोर्टीफाई करने के लिए सबसे पहले सामान्य चावल का पाउडर बनाया जाता है और उसमे सूक्ष्म पोषक तत्व जैसे विटामिन B 12, फोलिक एसिड और आयरन, FSSAI के मानकों के अनुसार मिलाये जाते है। चावल के पाउडर और विटामिन/मिनरल के मिश्रण को मशीनों द्वारा गूंथा जाता है और एक्सट्रूजन नामक मशीन से चावल के दानों फोर्टिफाइड राइस कर्नेल FRK को निकाला जाता है। इस FRK के एक दाने (ग्राम) को सामान्य चावल के 100 दानों (ग्राम) के अनुपात में मिलाया जाता है जिसे फोर्टीफाइड चावल कहते है।
फोर्टीफाइड चावल खाने के फायदे...
फोर्टीफाइड चावल में कई पोषक गुण है क्यूंकि इसमें आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन B 12 जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व या माइक्रोन्युट्रिएंट्स मिलाये जाते है। ये पोषक तत्व अनीमिया और सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी से बचाता है।
आयरन अनीमिया से बचाव करता है, फोलिक एसिड खून बनाने में सहायक होता है और विटामिन B 12 नर्वस सिस्टम के सामान्य कामकाज में सहायक होता है। फोर्टीफाइड चावल के नियमित सेवन से बेहतर पोषण और स्वास्थ्य सुनिश्चित होता है।
ऐसे पकाया जाता है फोर्टीफाइड चावल
अधिकतम पौष्टिक लाभ के लिए फोर्टीफाइड चावल को पर्याप्त पानी में पकाना चाहिए और बचे हुए पानी को फेंकना नहीं चाहिए। अगर चावल को बनाने से पहले पानी में भिगोया गया हो तो चावल को उसी पानी में पकाना चाहिए। फोर्टीफाइड चावल को हर बार इस्तेमाल करने के बाद साफ और सूखे हवा-बंद डब्बे में रखना चाहिए।
फोर्टीफाइड चावल कहाँ मिलता है?
फोर्टीफाइड चावल सरकारी राशन की दुकानों पर मिलता है। यह चावल आंगनवाड़ी केंद्रों पर दिए जाने वाले पूरक पोषण आहार और स्कूलों में मध्यान्ह भोजन में भी दिया जाता है।
फोर्टीफाइड चावल से संबंधित कुछ भ्रांतियां और तथ्य
भ्रान्ति: फोर्टीफाइड चावल प्लास्टिक चावल है ।
तथ्यः चावल को थ्त्ज्ञ के साथ 100ः1 के अनुपात में मिलाकर फोर्टीफाइड चावल तैयार किया जाता है। थ्त्ज्ञ को चावल के आटे और प्रीमिक्स से तैयार किया जाता है जिसमें आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन बी 12 होता है जिसे एक साथ मिश्रित किया जाता है। इसमें प्लास्टिक जैसा कुछ भी नहीं होता और यह उपभोग करने के लिए पूरी तरह से सुरक्षित और स्वास्थ्यवर्धक है।
भ्रान्तिः फोर्टीफाइड चावल के स्वाद, सुगंध और पकाने की विधि में परिवर्तन होता है।
तथ्यः स्वाद, सुगंध और दिखने में फोर्टीफाइड चावल सामान्य चावल के जैसा ही होता है। इसे सामान्य चावल की तरह ही पकाकर सेवन करना चाहिए।
भ्रान्तिः फोर्टीफाइड चावल में पोषक तत्व खाना पकाने के दौरान नष्ट हो जाते हैं।
तथ्यः फोर्टीफाइड चावल पकाने के दौरान अपने पोषक तत्वों को बरकरार रखता है। अत्यधिक पानी में धोने और पकाने के दौरान भी पोषक तत्व अवशेष बरकरार रहते हैं। 

 विशेष लेख : विश्व पर्यटन दिवस :देश के पर्यटन नक्शे में तेजी से उभर रहा है छत्तीसगढ़

विशेष लेख : विश्व पर्यटन दिवस :देश के पर्यटन नक्शे में तेजी से उभर रहा है छत्तीसगढ़

पर्यटन की दृष्टि से छत्तीसगढ़ अत्यंत समृद्ध राज्य है। छत्तीसगढ़ की धरती वन और खनिज संपदा से भरपूर तो है ही इसके साथ ही यहां की कला, संस्कृति और पर्यटन स्थल भी आकर्षण के केन्द्र है। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के नेतृत्व और छत्तीसगढ़ के पर्यटन मंत्री श्री ताम्रध्वज साहू के मार्गनिर्देशन में छत्तीसगढ़ पर्यटन मण्डल द्वारा प्रदेश में पर्यटन विकास एवं पर्यटकों की गतिविधियों के लिए राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य सरकार के प्रयासों का ही नतीजा है कि कोविड महामारी के दौर से उबरने के बाद छत्तीसगढ़ में पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2021 में भारतीय और विदेशी मिलाकर 1 करोड़ 15 लाख 32 हजार सैलानियों ने छत्तीसगढ़ का भ्रमण किया है।
छत्तीसगढ़ एक ऐसी पवित्र भूमि है, जहां वनवास काल में भगवान राम के चरण उत्तर में कोरिया जिले के सीतामढ़ी हरचौका से दक्षिण में सुकमा जिले के कोंटा तक पड़े। उत्तर से दक्षिण तक सात सौ किलोमीटर के विशाल क्षेत्र में फैला विविध प्रकार के प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक धरोहरों को समेटे हुए हैं। यहां की धरती वन, वन्यजीव, नदी, पर्वत-पहाड़ और झरनों जैसी प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण है। उत्तर के पाट क्षेत्र से दक्षिण की पहाडियों तक प्रकृति द्वारा उकेरे अनेक रमणीय प्राकृतिक स्थल और अनुपम सौंदर्य इस राज्य को प्रकृति का वरदान है।
भौगोलिक खूबसूरती और सांस्कृतिक विरासत को धारण किये इस छत्तीसगढ़ में पर्यटन विकास की असीम संभावनाएं हैं, यहां के प्राचीन विरासत ,धार्मिक स्थल और प्राकृतिक सुंदरता पर्यटकों को सुखद अनूभूति देते हैं। छत्तीसगढ़ में सिरपुर ,भोरमदेव जैसे कई ऐसे पुरातात्विक एवं धार्मिक महत्व के स्थल है जो वास्तुकौशल की कला का अनुपम उदाहरण है। यहां के वास्तु सौंदर्य अपनी अद्भुत रचनात्मकता के कारण घरेलू एवं विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करते रहे हैं।

छत्तीसगढ़ में अनगिनत ऐसे रमणीय प्राकृतिक स्थल विद्यमान हैं जो पर्यटकों को बरबस ही अपनी ओर आकर्षित करते हैं। इसके अलावा बीते कुछ समय में राज्य के दुर्गम ईलाकों में कुछ नये प्राकृतिक स्थलों की पहचान भी की गई है जिनके विकास के प्रयास किये जा रहे हैं।इन पर्यटन स्थलों में पर्यटन की दृष्टि से नई सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।

राज्य में पर्यटन की विकास की असीम संभावनाओं को देखते हुए मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के दिशा निर्देश पर राज्य भर के प्राकृतिक और सांस्कृतिक महत्व के स्थलों का विकास किया जा रहा है। यहां के पर्यटन क्षेत्रों को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति दिलाने बहुआयामी विकास की दिशा में कार्य किये जा रहे हैं। जनजातीय अंचल की प्राकृतिक एवं कला-संस्कृति कों विश्वपटल पर लाने के लिए राज्य सरकार द्वारा विशेष प्रयास किये जा रहे हैं। रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा से ग्रामीण पर्यटन का विकास किया जा रहा है। इन स्थलों में खान-पान एवं आवास की सुविधा युक्त होटल, मोटल ,रिसार्ट एवं रेस्टोरेंट की सुविधा विकसित की जा रही है।
भगवान राम का ननिहाल छत्तीसगढ़, राम नाम की महिमा यहां की संस्कृति में रची बसी हुई है। छत्तीसगढ़ की संस्कृति में जब किसी से मिला जाता है तो राम नाम से संबोधन किया जाता है। यहां के कण-कण में राम का नाम बसा है। यहीं भगवान राम की माता ‘‘ माता कौशल्या‘‘ का पूरे विश्व का एकमात्र मंदिर स्थित है। राजधानी रायपुर के निकट चंदखुरी स्थान पर यह मंदिर स्थित है। इस स्थान की महिमा और जनमानस में बसी भगवान राम की आस्था को देखकर राज्य सरकार द्वारा चंदखुरी का विकास पौराणिक कथाओं में दर्शाए गए वातावरण के अनुसार किया जा रहा है। वनवास के दौरान भगवान का राम के चरण जिस-जिस स्थान पर पड़े उन राममय क्षेत्र का विकास ‘‘ राम वनगमन पर्यटन परिपथ विकास परियोजना‘‘ के माध्यम से किया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल द्वारा राम वनगमन पर्यटन परिपथ के 75 स्थलों को चिन्हित किया गया है। प्रथम चरण में 9 स्थलों सीतामढ़ी-हरचौका (कोरिया), रामगढ़ (सरगुजा), शिवरीनारायण (जांजगीर-चांपा), तुरतुरिया (बलौदाबाजार), चंदखुरी (रायपुर), राजिम (गरियाबंद), सिहावा-सप्तऋषि आश्रम (धमतरी), जगदलपुर (बस्तर) और रामाराम (सुकमा) में ‘राम वनगमन पर्यटन परिपथ‘ के रूप में नई सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। पूरे परिसर का सैांदर्यीकरण भी किया जा रहा है। राम वन गमन पर्यटन परिपथ लम्बाई लगभग 2260 किलोमीटर है जिसका निर्माण, चौड़ीकरण एवं मरम्मत का कार्य किया जा रहा है। यहां पर्यटकों के ठहरने, भोजन, पानी, पार्किंग आदि की व्यवस्था के लिए छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल द्वारा कार्य किया जा रहा है।

राज्य के डोंगरगढ़ पहाड़ी पर माता बम्लेश्वरी देवी विराजमान है। यह पहाड़ी राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ नगर में स्थित है। माँ बम्लेश्वरी की इस नगरी डोंगरगढ़ को भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय ने प्रसाद योजना में शामिल किया है। इस योजना के तहत् डोंगरगढ़ का महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल के रूप में व्यवस्थित विकास का काम हाथ में लिया गया है। यहां श्राद्धालुओं के लिए ‘‘श्रीयंत्र‘‘ के बनावट के अनुरूप पिलग्रिम एक्टिविटी सेंटर (श्रद्धालुओं के लिए सुविधा केन्द्र) का निर्माण किया जा रहा है।

स्वदेश दर्शन योजना के तहत् छत्तीसगढ़ के 13 स्थानों पर ‘ट्राइबल टूरिज्म सर्किट' विकसित की जा रही है। इस परियोजना के तहत् जशपुर ,कुनकुरी ,मैनपाट, कमलेश्वरपुर, महेशपुर, कुरदर, सरोधादादर, गंगरेल, नथियानवागांव, कोण्डागांव, जगदलपुर, चित्रकोट और तीरथगढ़ को विकसित किया जा रहा है। इनमें से कुरदर हिल ईको रिसॉर्ट कुरदर (बिलासपुर), बैगा एथनिक रिसॉर्ट सरोधादादर (कबीरधाम), धनकुल एथनिक रिसॉर्ट (कोण्डागांव), सरना एथनिक रिसॉर्ट बालाछापर (जशपुर), कोईनार हाइवे ट्रीट कुनकुरी (जशपुर), हिल मैना हाईवे ट्रीट नथियानवागांव (कांकेर), सतरेंगा बोट क्लब एंड रिसॉर्ट सतरेंगा (कोरबा) और वे साइड अमेनिटी महेशपुर (सरगुजा) में पर्यटन सुविधाएं विकसित की गई हैं।
पर्यटकों की सुविधा के लिए उच्च स्तरीय पर्यटन सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। राज्य के प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर स्थानों पर एथनिक रिसॉर्ट, कॉटेज,वॉटर स्पोर्ट्स जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। यहां राष्ट्रीय उद्यान एवं वन्य प्राणी अभ्यारण्यों के साथ-साथ गौरवशाली लोक संस्कृति का अद्वितीय उदाहरण भी है। बस्तर क्षेत्र में कुटुमसर गुफा एवं कांगेर घाटी, राष्ट्रीय उद्यान, चित्रकोट जलप्रपात महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल है जो अपनी अद्भुत छटा के कारण पर्यटकों का दिल जीत रहे हैं। छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों के बारे में पर्यटकों को सुलभ जानकारी उपलब्घ कराने तथा पर्यटन स्थलों के भ्रमण के लिए व्यक्तिगत एवं टूर पैकेज के अन्तर्गत आरक्षण की सुविधा प्रदान करने के लिए छत्तीसगढ़ पर्यटन मण्डल द्वारा नई दिल्ली, गुजरात मध्य प्रदेश के अतिरिक्त प्रदेश में 11 स्थानों पर पर्यटन सूचना केन्द्र स्थापित किया गया है। 

आलेख:- अग्निपथ क्यों बना कीचड़पथ?

आलेख:- अग्निपथ क्यों बना कीचड़पथ?

अग्निपथ को हमारे नेताओं ने कीचड़पथ बना दिया है। सरकार की अग्निपथ योजना पर पक्ष-विपक्ष के नेता कोई गंभीर बहस चलाते, उसमें सुधार के सुझाव देते और उसकी कमजोरियों को दूर करने के उपाय बताते तो माना जाता कि वे अपने नेता होने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं लेकिन सत्तारुढ़ भाजपा के नेता आंख मींचकर अग्निपथ का समर्थन कर रहे हैं और सारे विपक्षी नेता उस पर कीचड़ उछाल रहे हैं।
सरकार और फौज अपनी मूल योजना पर रोज ही कुछ न कुछ रियायतों की घोषणा कर रही है ताकि हमारे भावी फौजियों की निराशा दूर हो और उनमें थोड़े उत्साह का संचार हो लेकिन लगभग सभी विपक्षी दलों को यह एक ऐसा मुद्दा मिल गया है, जिसे भुनाने में वे कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। यह तथ्य है कि अग्निपथ योजना के खिलाफ जो जबर्दस्त तोड़-फोड़ देश में हुई है, उसकी पहल स्वत: स्फूर्त थी। उसके पीछे किसी विपक्षी नेता या दल का हाथ नहीं था लेकिन अब आप टीवी चैनलों पर देख सकते हैं कि विभिन्न पार्टियों के कार्यकर्त्ता और नेता हाथ में अपने झंडे लिए हुए नारे लगाते घूम रहे हैं।
ये वे लोग हैं, जिन्हें न तो खुद फौज में भर्ती होना है और न ही इनके बच्चों को फौजी नौकरी पाना है। जिन नौजवानों को फौजी नौकरी पाना है, उनका गुस्सा स्वाभाविक था। हर आदमी अपने जीवन में स्थायी सुरक्षा और सुविधा की कामना करता है। कोई भी नौजवान चार साल फौज में बिताने के बाद क्या करेगा, यह प्रश्न उसे विचलित किए बिना नहीं रहेगा। फौज में जाने को ग्रामीण, गरीब और अल्पशिक्षित नौजवान इसलिए भी प्राथमिकता देते हैं कि उन्हें युद्ध तो यदा-कदा लडऩा पड़ता है लेकिन उनका शेष समय पूरी सुविधाओं और सुरक्षा में बीतता है और सेवा-निवृत्त होने पर 30-40 साल तक पेंशन और मुफ्त इलाज आदि की सुविधाएं भी मिलती रहती हैं और वे चाहें तो दूसरी नौकरी भी कर सकते हैं।
लेकिन यह परंपरागत व्यवस्था दुनिया के सभी प्रमुख देशों में बदल रही है, क्योंकि फौज में कम उम्र के नौजवानों की ज्यादा जरुरत है। सारी फौज के शस्त्रास्त्रों की खरीद पर जितना पैसा खर्च होता है, उससे ज्यादा पेंशन पर हो जाता है। फौज का आधुनिकीकरण बेहद जरुरी है। सरकार के ये तर्क तो समझ में आते हैं लेकिन कितना अच्छा होता कि अग्निपथ की ज्वाला अचानक भड़काने की बजाय वह इस मुद्दे पर संसद और खबरपालिका में पहले सर्वांगीण बहस करवा देती।
अब उसकी इस घोषणा का असर जरुर पड़ेगा कि इस आंदोलन में भाग लेनेवाले जवानों को अग्निपथ की नौकरी नहीं मिलेगी। यह आंदोलन ठप्प भी हो सकता है। लेकिर बेहतर तो यह होता कि फौजी अफसर इस योजना को तुरंत लागू करने की घोषणा करने की बजाय इस पर सांगोपांग बहस होने देते और जो भी उत्तम सुझाव आते, उन्हें स्वीकार कर लिया जाता। अग्निपथ को कीचड़पथ होने से बचाना बहुत जरुरी है।
- वेद प्रताप वैदिक

 

आलेख: सैन्य सुधार में कारगर अग्निपथ?

आलेख: सैन्य सुधार में कारगर अग्निपथ?

सेना में जवानों की बहाली के लिए बनाई गई अग्निपथ योजना पर दो अतिरेक वाले विचार हैं। जैसा इस सरकार की हर योजना के मामले में होता है- एक पक्ष इसका खुल कर समर्थन कर रहा है तो दूसरा पक्ष इसे पूरी तरह से खारिज कर रहा है। कोई मिडिल ग्राउंड नहीं दिख रहा है। लेकिन इसका समर्थन करने या इसे खारिज करने से पहले इस बात की प्रतीक्षा की जानी चाहिए कि यह योजना किस तरह से लागू होती है, देश का नौजवान इस पर कैसी प्रतिक्रिया देता है, सेना में पहले बैच की बहाली के बाद क्या माहौल होता है, इससे देश की सामरिक स्थिति कैसे प्रभावित होती है और सबसे ऊपर यह कि इससे सेना का बजट कैसे प्रभावित होता है।
हालांकि इस योजना की घोषणा करते हुए एक सवाल के जवाब में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि उनकी सरकार सेना के मामले में पैसे का ध्यान नहीं रखती है। उनके कहने का मतलब यह था कि इस योजना का मकसद सैनिकों के वेतन, भत्ते और पेंशन में होने वाले खर्च को कम करना नहीं है। हालांकि इस योजना का सैनिकों के वेतन, भत्ते और पेंशन पर बड़ा असर होगा। सरकार को इस मद में बड़ी बचत होगी, जिसका इस्तेमाल सेना के आधुनिकीकरण में किया जा सकेगा। ध्यान रहे सेना के लिए आवंटित कुल बजट में आधे से ज्यादा हिस्सा सैनिकों के वेतन, भत्ते और पेंशन पर खर्च होता है। पिछले वित्त वर्ष के चार लाख 78 हजार करोड़ रुपए के रक्षा बजट में 2.55 लाख करोड़ रुपए वेतन, भत्ते और पेंशन के मद में खर्च हो गए, जबकि सैन्य तैयारियों और आधुनिकीकरण के लिए 2.38 लाख करोड़ रुपए बचे।
एक आकलन के मुताबिक अगर अग्निपथ योजना सही तरीके से लागू होती है और सेना में नियुक्ति का स्थायी तरीका बनती है तो एक सैनिक के पूरे कार्यकाल और उसके जीवन पर होने वाले सरकारी खर्च में साढ़े 11 करोड़ रुपए की बचत होगी। यह आकलन 17 साल तक सेवा की मौजूदा व्यवस्था बनाम चार साल की अग्निपथ योजना के आधार पर किया गया है। जाहिर है एक सैनिक पर साढ़े 11 करोड़ रुपए की बचत बहुत बड़ी है। ध्यान रहे भारत की तीनों सेनाओं को मिला कर 13 लाख सैनिक हैं। सो, भले सरकार और रक्षा मंत्री कुछ भी कहें लेकिन अग्निपथ योजना लागू होने का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि स्थापना पर खर्च होने वाली रकम में बड़ी कमी आएगी। इसका इस्तेमाल सेना के लिए आधुनिक तकनीक, हथियार, युद्धपोत, लड़ाकू विमान आदि खरीदने में होगा।
अग्निपथ योजना के तहत बहाली के लिए न्यूनतम उम्र सीमा साढ़े 17 साल तय की गई है। इसके बाद सैनिक का कार्यकाल चार साल का होगा, जिसमें छह महीने की प्रशिक्षण अवधि भी शामिल है। इस चार साल की अवधि में सैनिकों को 12 लाख रुपए के करीब वेतन के मद में मिलेंगे। इसमें से 30 फीसदी हिस्सा सेवा निधि में डाला जाएगा और उतने ही रुपए सरकार भी उस निधि में डालेगी। इससे चार साल बाद रिटायर होने पर हर जवान को करीब 12 लाख रुपए मिलेंगे। सोचें, जिस उम्र में आजकल युवाओं की पढ़ाई पूरी होती है और वे नौकरी की तलाश में निकलते हैं, उस उम्र में अगर वे सेना में चार साल प्रशिक्षण और सैन्य ड्यूटी निभा कर रिटायर हो रहे हैं और उनके हाथ में अच्छी खासी रकम होती है तो वह उनके लिए कितनी उपयोगी हो सकती है! उनके सामने पूरा जीवन होगा, जिसे वे अपनी पसंद से दिशा दे सकते हैं। चार साल की नौकरी के दौरान सरकार उनका 48 लाख रुपए का जीवन बीमा भी कराएगी और सेवा के दौरान शहीद होने पर 44 लाख रुपए की अनुग्रह राशि अलग से मिलेगी। सौ फीसदी विकलांगता के लिए भी 44 लाख रुपए की अनुग्रह राशि तय की गई है।
दूसरी ओर इस योजना से सेना में सैनिकों की औसत आयु मौजूदा 32 साल से घट कर अगले छह-सात साल में 26 साल तक आ जाएगी। यानी भारतीय सेना का स्वरूप पूरी तरह से बदल जाएगा। वह युवाओं की फौज होगी, जिसको आधुनिक प्रशिक्षण मिला होगा। वे आधुनिक तकनीक और हथियारों से लैस होंगे। ध्यान रहे दुनिया भर के देशों में इन दिनों सैन्य सुधार चल रहे हैं। सैन्य सुधार में मुख्य रूप से इस बात पर जोर है कि सैनिकों की संख्या कम की जाए और उसे आधुनिक तकनीक व हथियारों से लैस किया जाए। सबको पता है कि भविष्य की लड़ाई आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से लड़ी जाएगी, साइबर स्पेस में लड़ी जाएगी, रोबोटिक सैनिकों और स्वचालित हथियारों से लड़ी जाएगी। निगरानी और पेट्रोलिंग का काम स्पेस बेस्ड इंटेलीजेंस सर्विलांस सिस्टम से किया जाएगा। इस हकीकत को समझते हुए चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी यानी चीनी सेना ने सैनिकों की संख्या 45 लाख से घटा कर 20 लाख कर दी है और दूसरी ओर आधुनिक उपकरणों पर खर्च बढ़ा दिया है। दुनिया भर की बड़ी सैन्य ताकतें अपने यहां इस तरह के बदलाव कर रही हैं।
इस योजना के तहत हर बैच के 25 फीसदी सैनिकों को सेना में स्थायी जगह मिलेगी। इसका मतलब है कि चार साल के प्रशिक्षण और सैन्य सेवा में जो सबसे अच्छे होंगे उन्हें सेना में ही रखा जाएगा। इससे अंतत: सेना की ताकत बढ़ेगी। इसलिए यह आलोचना बहुत दमदार नहीं है कि चार-चार साल की सेवा के लिए बहाली से सेना कमजोर होगी। अब रही बात इस योजना पर उठाए जा रहे सवालों की तो दो-तीन सवाल मुख्य हैं। जैसे पहला सवाल है कि चार साल की सेवा के बाद 22-23 साल के जो युवा बेरोजगार होंगे वे क्या करेंगे? वे कुछ भी कर सकते हैं। बेरोजगार होने से पहले उनके पास चार साल का अनुभव होगा, सेना का प्रशिक्षण होगा और एक निश्चित रकम भी हाथ में होगी। वे स्वरोजगार कर सकते हैं या आगे की पढ़ाई कर सकते हैं या दूसरी नौकरी के लिए आवेदन कर सकते हैं। ध्यान रहे इन दिनों सुरक्षा का काम धीरे धीरे निजी हाथों में जा रहा है। वहां उनके लिए बेहतर अवसर होंगे। बिना सोचे-विचारे यह आलोचना की जा रही है कि सैन्य प्रशिक्षण के बाद क्या रिटायर युवा निजी मिलिशिया में जाएंगे। यह बेसिर-पैर की बात है। सेना का प्रशिक्षण और अनुशासन उन्हें बेहतर नागरिक बना सकता है।
इस योजना में 'ऑल इंडिया ऑल क्लासÓ की नियुक्ति का प्रावधान किया गया है। कुछ सैन्य अधिकारियों ने इसकी आलोचना की है। लेकिन वह भी बहुत मजबूत आलोचना नहीं है। भारत में रेजिमेंट आदि का गठन अंग्रेजों ने अपनी सुविधा के लिहाज से किया था, जिसे जारी रखा गया। इसका यह मतलब नहीं है कि कोई नई व्यवस्था कारगर नहीं होगी। ध्यान रहे राष्ट्रीय राइफल्स में पहले से 'ऑल इंडिया ऑल क्लासÓ का नियम लागू है और वहां यह व्यवस्था बहुत सही तरीके से काम कर रही है। इस योजना का विरोध करने वाले कुछ लोग सेवा अवधि को चार से बढ़ा कर सात साल करने की जरूरत बता रहे हैं। इसका मतलब है कि उन्हें बुनियादी सिद्धांत से दिक्कत नहीं है, सिर्फ सेवा अवधि से दिक्कत है। इसके बारे में आगे चल कर फैसला हो सकता है। अगर सरकार को लगता है कि चार साल की अवधि कम है तो वह उसे बढ़ा सकती है। इसमें ज्यादा दिक्कत नहीं होगी। ध्यान रहे अमेरिका सहित दुनिया भर के देशों में इस तरह की योजना लागू है। सैनिक थोड़े समय के प्रशिक्षण के बाद सेना में काम करते हैं और रिटायर होकर दूसरी नौकरी करते हैं।
- अजीत द्विवेदी
 

कल मनाया जाएगा विश्व प्रेस आजादी दिवस, जानिए क्या है खास

कल मनाया जाएगा विश्व प्रेस आजादी दिवस, जानिए क्या है खास

भारत प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर अकसर हमने चर्चा को होते देखा है. फिलहाल दुनियाभर में हर साल तीन मई को विश्व प्रेस आजादी दिवस  मनाया जाता है. भारत के साथ ही दुनियाभर में मीडिया की ताकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसे लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है. लोकतंत्र को और भी ज्यादा मजबूत करने के लिए ही हर साल वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम डे सेलिब्रेट किया जाता है. आइए जानते हैं यह पहली बार कब मनाया और क्यों मनाया गया.
पहली बार इस दिन मनाया गया
प्रेस की आजादी के लिए पहली बार साल 1991 में अफ्रीका के पत्रकारों ने मुहिम छेड़ी थी. इन पत्रकारों ने तीन मई को प्रेस की आजादी के सिद्धांतों को लेकर बयान जारी किया था जिसे डिक्लेरेशन ऑफ विंडहोक के नाम से भी जानते हैं. इसके ठीक दो साल बाद यानी साल 1993 में संयुक्त राष्ट्र की महासभा ने पहली बार विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस मनाने का फैसला किया था. उस दिन से लेकर आज तक हर साल तीन मई को विश्व प्रेस आजादी दिवस मनाया जाता है.
क्यों मनाया जाता है?
दुनियाभर से आए दिन पत्रकारों पर हुए उत्पीड़न की खबरें आती रहती हैं. पत्रकारिता एक जोखिमभरा काम भी है. पत्रकारिता के दौरान पत्रकारों पर कई बार हमले भी कर दिए जाते हैं. फिर चाहे सऊदी अरब के जमाल खगोशी हों या फिर भारत की गौरी लंकेश. समय-समय पर पत्रकारों पर हमले या फिर उनकी हत्या की खबर सामने आ ही जाती है. ऐसे में पत्रकारों पर हो रहे उत्पीड़न और उनकी आवाज को अलग-अलग ताकतों द्वारा दबाया नहीं जाए इसीलिए भी विश्व प्रेस आजादी दिवस मनाया जाता है.
ऐसे मनाया जाता है ये खास दिन
सन 1997 से हर साल तीन मई यानी विश्व प्रेस आजादी दिवस पर यूनेस्को गिलेरमो कानो वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम प्राइज देता है. ये उस संस्थान या फिर व्यक्ति को दिया जाता है, जिसने प्रेस की आजादी के लिए कुछ बड़ा काम किया होता है. साथ ही इस दिन स्कूल-कॉलेज में इस पर चर्चा और वाद-विवाद किया जाता है. इसके अलावा इस खास दिन के बारे में लोगों को जागरुक करने के लिए सेमीनार आयोजित किए जाते हैं.
 

"भाजपा मतलब भगवा नहीं है", अपने नेताओं के सेल्फ गोल से परेशान है भाजपा

"भाजपा मतलब भगवा नहीं है", अपने नेताओं के सेल्फ गोल से परेशान है भाजपा

इन दिनों देश में बुलडोजर की चर्चा खूब हो रही है। टीवी पर,सड़क पर,चौक चौराहे, पान की दुकान, चाय की गुमटियों में लोग बहस करते पाए जा रहे हैं कि गुनाहगारों के घरों पर बुलडोजर का चलना सही है या नहीं। हालांकि ऐसी बहस बेनतीजा ही खत्म हो रही है।
वही बुलडोजर के बहाने केंद्र व राज्य की भाजपा सरकारों को पूर्णता मुस्लिम विरोधी साबित करने का कोई भी मौका उनके विरोधी नहीं छोड़ रहे । जबकि घटनाक्रमों को बिना पूर्वाग्रह के नज़र डालें तो कार्रवाई बिना धर्म देखें सिर्फ अपराधियों पर हुई है। लेकिन अतिउत्साही भाजपाई सीना ठोक कर कहते दिख रहे है कि मुसलमानों पर हमारी सरकार का बुलडोजर चला है। पर उन्हें कौन कहे कि ऐसा कहकर वे अपनी ही पार्टी की राह में कांटे बिछा रहे है।

बुलडोजर के विशेष उपयोग की शुरुआत उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की। उन्हें समझ आया कि अपराधियों, माफियाओं और दंगाईयों को जेल में बिठाकर खाना खिलाने से वे सुधरने वाले नहीं हैं।इसलिए उन्होंने ऐसे लोगों की आर्थिक रीढ़ तोड़ने का तरीका आजमाया और बुलडोजर लेकर निकल पड़े। बाबा ने जाति और धर्म देखे बगैर देश व समाज के लिए खतरा बनने वाले लोगो की अवैध संपत्तियों को अपने बुलडोजर के नीचे रौंदा। बाबा के कहर से ना माफिया मुख्तार अंसारी बच पाए और ना ही खूंखार अपराधी विकास दुबे। आत्मसमर्पण के बाद विकास दुबे की मौत भी गाड़ी पलटने से हुई थी। लोग इसे साधारण घटना नही अपितु समाज देश के लिए खतरा बन चुके अपराधी को बाबा की सजा के रूप में ही देखते है।

योगी आदित्यनाथ ने सीएए- एनआरसी आंदोलन के दौरान भी राज्य संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले पत्थरबाजों दंगाइयों पर भी इसी तरह की कड़ी कार्रवाई की थी। बाबा योगी आदित्यनाथ की देखा देखी मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार भी इसी तरह की कार्रवाई करते हुए अपराधियों के ठिकानों पर बुलडोजर चला रही है।

अब बात करते हैं नए घटनाक्रमों की। रामनवमी के अवसर पर निकली विभिन्न शोभायात्रा में कर्नाटक, मध्य प्रदेश के खरगोन और दिल्ली के जांहगीररपुरी में मुसलमानों ने पथराव किया। इस वजह से वहां दंगों सा माहौल बना। जिसके बाद हरकत में आए प्रशासन ने योगी फार्मूले के तहत अपराधियों की धरपकड़ की और दोषियों के अवैध ठिकानों पर बुलडोजर चलाया।
परंतु जब दिल्ली एमसीडी ने जांहगीरपुरी बुलडोजर की कार्रवाई शुरू हुई तो कथित सेकुलर गिरोह के कांग्रेस नेता व सुप्रीम कोर्ट के वकील कपिल सिब्बल ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। जस्टिस एल नागेश्वर राव और पीआर गंवई के समक्ष इस तरह कार्रवाई को मुस्लिम विरोधी बताते हुए देश भर में रोक लगाने की मांग की।

इस मुद्दे पर दिल्ली एमसीडी की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सरकार मुस्लिमों के ऊपर ही कार्रवाई कर रही है यह कहना गलत है। उन्होंने खरगोन हिंसा का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां 26 मुस्लिमों और 88 हिंदुओं के अवैध मकानों पर सरकारी बुलडोजर चढ़े है। दिल्ली में भी कार्रवाई अतिक्रमण को लेकर है न किसी धर्म निशाने पर है। हालांकि अदालत ने देश भर में चल रही कार्रवाईयों पर सुनवाई न करते हुए सिंर्फ जहांगीरपुरी मैं हो रही कार्रवाई को 15 दिनों के लिए टालने के आदेश दिए।

बुलडोजर की कार्रवाई कानून के दायरे में ही है। परंतु इन मामलों में भाजपा सरकार की मंशा पर जो सवाल खड़े किए जा रहे हैं उसका सीधा जवाब भाजपा के नेता ही नहीं दे रहे हैं।उल्टे कुछ तो सीधे हा मुसलमानों पर करवाई हम कर रहे है ऐसा कहते दिखे।

शायद इसीलिए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को आकर कहना पड़ा कि भगवा यानी भाजपा नहीं है। भाजपा का मतलब सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास है। नड्डा जी के इस बयान का साफ मतलब है कि संगठन के नेता वही कहे जो संगठन की लाइन है। लाइन से बाहर जाकर नमक मिर्च लगाकर बातों को प्रस्तुत करना अनुचित है। इससे पार्टी को नुकसान होगा और जनता में गलतफहमियां बढ़ेंगी।
(देवेंद्र गुप्ता - 9039010330)

 

आलेख: विपक्ष से अलग केजरीवाल की राह

आलेख: विपक्ष से अलग केजरीवाल की राह

आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल विपक्ष के नेताओं से अलग रास्ते पर चलते हैं। भाजपा के खिलाफ उनको भी लडऩा है लेकिन वे भाजपा की रणनीति और भाजपा के सिद्धांतों से ही उससे लड़ते हैं। इस मामले में उनकी राह बाकी विपक्षी नेताओं से अलग है। उन्होंने भड़काऊ भाषण और विभाजनकारी राजनीति को लेकर एक भी बयान नहीं दिया है। अभी देश में रामनवमी के मौके पर कई जगह सांप्रदायिक दंगे हुए। मस्जिदों के ऊपर भगवा फहराए गए। मस्जिदों में अजान के समय उसके बाहर हनुमान चालीसा के पाठ की योजनाएं बन रही हैं और भाजपा के एक नेता लाउडस्पीकर मुफ्त बांट रहे हैं। हिजाब और हलाल मीट का विवाद अलग चल रहा है।
सांप्रदायिक और भड़काऊ भाषणों और विभाजनकारी राजनीति को लेकर विपक्ष की सभी पार्टियों ने बयान दिया है। शरद पवार ने सीधे भाजपा को इसके लिए जिम्मेदार ठहरा कर उस पर निशाना साधा। सोनिया गांधी ने अंग्रेजी अखबार 'इंडियन एक्सप्रेसÓ में लेख लिख कर इस राजनीति की निंदा की है। राहुल गांधी और ममता बनर्जी से लेकर एमके स्टालिन और के चंद्रशेखर राव तक सबने इस पर सवाल उठाया है और चिंता जताई है। लेकिन अरविंद केजरीवाल की ओर से इस पर कोई बयान नहीं दिया गया है। वे हर बार हिंदुत्व के मसले पर इसी तरह से चुप्पी साध लेते हैं और भाजपा के एजेंडे का समर्थन करते हैं। उनको लगता है कि इससे बहुसंख्यक हिंदू समाज उनको भी भाजपा की तरह अपनाएगा। वैसे भी अभी जिन दो राज्यों- हिमाचल प्रदेश और गुजरात में चुनाव होने हैं वहां उनको हिंदू वोटों की ही राजनीति करनी है। इसलिए भी वे चुप्पी साधे हुए हैं। 

आलेख: विधायको को सिर्फ एक पेंशन का ऐतिहासिक कदम!

आलेख: विधायको को सिर्फ एक पेंशन का ऐतिहासिक कदम!

देश की जनता लंबे समय से यह मांग करती रही है कि विधायको व सांसदों की पेंशन या तो पूरी तरह से बंद हो या फिर उन्हें सिर्फ एक ही पेंशन मिले ,लेकिन आमजन की इस मांग को अनसुना कर जितनी बार भी सांसद या विधायक रहे उतनी ही पेंशन लेकर देश पर आर्थिक बोझ जारी है।इस बोझ को पहली बार पंजाब में हाल ही में बनी आम आदमी पार्टी की सरकार ने समझा है।इस सरकार ने हर कार्यकाल के लिए पूर्व विधायकों की पेंशन की प्रथा खत्म करते हुए, अब सिर्फ एक कार्यकाल के लिए पेंशन जारी रखने का ऐलान किया है। पूर्व विधायकों को पंजाब में 75 हजार रुपये पेंशन मिलेगी।पंजाब सरकार ने विधायकों की पेंशन को लेकर यह बड़ा फैसला लिया है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने घोषणा की है कि पूर्व विधायकों को केवल एक कार्यकाल के लिए पेंशन मिलेगी। पंजाब ही नही देशभर में अभी तक प्रत्येक कार्यकाल के लिए पेंशन मिलती रही है। पंजाब सरकार के अधिकारियों को 'एक विधायक-एक पेंशनÓ योजना को लागू करने का निर्देश दिया गया है।अभी तक कई बार चुने गए विधायकों को पेंशन के रूप में कई बार की ही पेंशन के रूप में लाखों रुपये मिल रहे थे। उनमें से कुछ जो सांसद भी रहे हैं, उन्हें केंद्र और राज्य दोनों तरह की पेंशन मिल रही है। इस फैसले से राज्य सरकार के करीब 80 करोड़ रुपये बचेंगे।भगवंत मान ने कहा कि, लोगों की सेवा के वादे के साथ वोट मांगने वाले विधायकों को 3.5 लाख रुपये, 4.5 लाख रुपये और यहां तक कि 5.25 लाख रुपये मासिक पेंशन मिल रही थी। नए फैसले के साथ सरकार की योजना पांच साल में 80 करोड़ रुपये बचाने की है।बचाए गए धन का उपयोग कल्याणकारी योजनाओं के लिए किया जाएगा।उदाहरण के तौर पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राजिंदर कौर भट्टल, लाल सिंह और पूर्व अकाली दल नेता सरवन सिंह फिल्लौर को 3.25 लाख रुपये जबकि रवि इंदर सिंह और बलविंदर सिंह भिंडर को हर महीने 2.75 लाख रुपये पेंशन के रूप में मिलते हैं।पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने सरकार को पत्र लिखा था कि वह सरकार से किसी भी तरह की पेंशन का दावा नहीं करेंगे और न ही उन्हें कोई पेंशन दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा था कि पैसे का इस्तेमाल लोक कल्याण की योजनाओं के लिए किया जाना चाहिए।हरियाणा सरकार ने कुछ साल पहले पूर्व विधायकों के लिए एक साथ कई पेंशन खत्म कर दी थी। पंजाब में अमरिंदर सिंह की सरकार ने उस वक्त पड़ोसी राज्य से संकेत लेते हुए पेंशन नीति को बदलने पर चर्चा की थी। लेकिन कभी कोई निर्णय उनके द्वारा नहीं लिया गया।
पंजाब सरकार के नियमों के अनुसार विधायक को पहले कार्यकाल के लिए 75 हजार रुपये और उसके बाद हर अन्य कार्यकाल के लिए 50 हजार रुपये पेंशन दिए जाने का प्रावधान है।पंजाब में इस समय र 275 पूर्व विधायक अपने अलग-अलग कार्यकाल के लिए पेंशन ले रहे हैं। इसमें राज्य के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों समेत एक दर्जन पूर्व विधायक शामिल हैं जिन्हें कार्यकाल के हिसाब से 5-6 पेंशन तक एक साथ मिल रहीं हैं।पंजाब में मुख्यमंत्री का मासिक वेतन (भत्तों समेत) डेढ़ लाख रुपये बनता है। पूर्व विधायकों में पांच बार मु्ख्यमंत्री रहे प्रकाश सिंह बादल इस समय 11 पेंशन के हकदार हैं और उन्हें पेंशन की कुल राशि 5,76,150 रुपये मिलती थी। हालांकि उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर पेंशन न लेने की घोषणा की है। पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री राजिंदर कौर भ_ल, पूर्व मंत्री मनप्रीत सिंह बादल, लाल सिंह और परमिंदर सिंह ढींढसा समेत पंजाब के कई पूर्व विधायक ऐसे हैं जिन्हें उनके कार्यकाल के हिसाब से 5-6 पेंशन मिलती हैं। इसकी कुल रकम 2,75,550 रुपये से 3,25,650 रुपये बनती है।पंजाब राज्य विधान मंडल सदस्य (पेंशन व मेडिकल सुविधा) एक्ट 1977 और पंजाब राज्य विधान मंडल सदस्य (पेंशन व मेडिकल सुविधा) एक्ट 1984 में संशोधन के साथ पंजाब एक्ट नंबर 30 ऑफ 2016 के तहत नोटिफिकेशन जारी करके ऐसा प्रावधान कर दिया गया कि पूर्व विधायक को उनके पहले कार्यकाल के लिए पेंशन के रूप में 15000 रुपये और अगली प्रत्येक टर्म के लिए 1०० रुपये से आगाज होगा। इस रकम में पहले 50 फीसदी डीए मर्ज होगा और उसके बाद बनने वाली कुल रकम में फिर से 234 फीसदी महंगाई भत्ता जुड़ जाएगा। इस तरह पूर्व विधायकों को जबरदस्त लाभ हुआ, क्योंकि 15000 + 7500 (50 फीसदी डीए)= 22500 रुपये रकम बनी। 22500+52650 (234 फीसदी डीए) रुपये यानी कुल 75150 रुपये पेंशन बनती हैं। सूबे के 275 पूर्व विधायकों को वर्ष 2017 से हर साल 37 करोड़ और पांच वर्ष में 186 करोड़ रुपये पेंशन के तौर पर दिए जा रहे थे लेकिन जिस एक्ट के आधार पर यह पेंशन तय की गई, ऐसा कोई प्रावधान किसी भी एक्ट में था ही नहीं। पंजाब की अकाली-भाजपा सरकार ने अक्तूबर 2016 में पूर्व विधायकों की पेंशन को पहले कार्यकाल में 15000 रुपये और बाद के कार्यकाल के लिए 10-10 हजार रुपये का प्रावधान करते हुए साफ कर दिया था कि इस राशि में महंगाई भत्ता अन्य सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाले महंगाई भत्ते के अनुसार ही जुड़ेगा। अगर इस तरीके से पेंशन तैयार होती तो 15000 रुपये और 28 फीसदी डीए को मिलाकर 19200 रुपये ही पूर्व विधायको को मिल पाते। लेकिन शासन स्तर की गई इस त्रुटि का नतीजा यह हुआ कि पूर्व विधायकों को 19200 रुपये की जगह 75150 रुपये पेंशन मिलती रही। इस तरह पांच साल के दौरान सरकारी खजाने से लगभग 192 करोड़ रुपये अधिक निकाल लिए गए। जिससे पंजाब सरकार पर आर्थिक बोझ बढ़ता चला गया।
- डॉ श्रीगोपाल नारसन एडवोकेट
नोट: उपरोक्त लेख में वर्णित बाते लेखक की व्यक्तिगत विचार है ।
 

गोरखनाथ मंदिर के संत से सत्ताधीश तक, कैसे यूपी की राजनीति के शिखर तक पहुंचे योगी आदित्यनाथ

गोरखनाथ मंदिर के संत से सत्ताधीश तक, कैसे यूपी की राजनीति के शिखर तक पहुंचे योगी आदित्यनाथ

साल 2017 के विधानसभा चुनाव के नतीजे जब आए तो बीजेपी ने 300 प्लस सीटों के साथ जीत हासिल की. हालांकि शुरुआत में मनोज सिन्हा का सामने सीएम की रेस में आया था लेकिन बीजेपी ने अप्रत्याशित फैसला लेते हुए योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री पद सौंप दिया. उस वक्त योगी आदित्यनाथ की छवि हिंदुत्व के 'पोस्टर बॉय', भगवा वस्त्र पहनने वाले और तेज-तर्रार नेता के तौर पर थी. उनका ये स्टाइल आज भी कायम है.
योगी आदित्यनाथ के आलोचक मानते हैं कि देश की सबसे बड़ी आबादी वाले राज्य को संभालने के दौरान उनकी फायर ब्रांड छवि में थोड़ा संतुलन भले आया हो लेकिन उनमें बहुत ज्यादा बदलाव आया हो, ऐसा नहीं है.
पौड़ी में जन्म, सात भाई-बहन और फिर बने संन्यासी
तारीख थी 5 जून 1972 और जगह थी उत्तराखंड का पौड़ी गढ़वाल जिले के यमकेश्वर तहसील का पंचुर गांव. आनंद सिंह बिष्ट के घर एक लड़के का जन्म हुआ. नाम रखा गया अजय सिंह बिष्ट. माता-पिता के सात बच्चों में सबसे तेज-तर्रार. जानकारों का कहना है कि ग्रेजुएशन की पढ़ाई करते हुए योगी आदित्यनाथ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानी एबीवीपी से जुड़ गए और 1992 में उन्होंथने हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल यूनिवर्सिटी से बीएससी की.
राम मंदिर आंदोलन के दौर में उनका रुझान आंदोलन की ओर हुआ और इसी बीच वह गुरु गोरखनाथ पर रिसर्च करने के लिए साल 1993 में गोरखपुर आए. गोरखपुर में वह महंत और राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण आंदोलन के अगुवा महंत अवैद्यनाथ के संपर्क में आए और 1994 में योगी पूर्ण रूप से संन्यासी हो गए.
महंत अवैद्यनाथ के बने उत्तराधिकारी
योगी को महंत अवैद्यनाथ ने अपना उत्तराधिकारी घोषित किया और दीक्षा लेने के बाद अजय सिंह बिष्ट योगी आदित्यनाथ हो गए. 12 सितंबर 2014 को महंत अवैद्यनाथ के ब्रह्मलीन होने के बाद योगी गोरक्षपीठ के महंत घोषित किए गए. उस वक्त वह बीजेपी से टकराव के भी गुरेज नहीं रखते थे और उन्होंने हिंदू युवा वाहिनी नामक स्वयंसेवकों के अपने एक संगठन की स्थापना भी की थी.
राजनीति में योगी गोरक्षपीठ की तीसरी पीढ़ी
योगी का राजनीतिक सफर उपलब्धियों से भरा है. राजनीति में योगी गोरक्षपीठ की तीसरी पीढ़ी हैं. ब्रह्मलीन महंत दिग्विजय नाथ भी गोरखपुर से विधायक और सांसद रहे. इसके बाद महंत अवैद्यनाथ ने भी विधानसभा और लोकसभा दोनों में प्रतिनिधित्व किया.
योगी आदित्यनाथ गोरक्षपीठ की विरासत को आगे बढ़ाते हुए 1998 में महज 26 वर्ष की उम्र में पहली बार गोरखपुर से बीजेपी के सांसद बने और लगातार पांच बार उनकी जीत का सिलसिला बना रहा. योगी आदित्यनाथ ने इस बार भी करीब ढाई दशक के अपने राजनीतिक जीवन में पहली बार गोरखपुर से ही विधानसभा का चुनाव लड़ा.
जब चुने गए थे विधायक दल के नेता
मार्च 2017 में लखनऊ में बीजेपी विधायक दल की बैठक में योगी को विधायक दल का नेता चुना गया था. इसके बाद योगी ने लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया और विधान परिषद के सदस्य बने और 19 मार्च 2017 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली.
ये फैसले रहे चर्चित
- अपने कार्यकाल की शुरुआत में उन्होंने अवैध बूचड़खानों पर बैन लगा दिया.
- पुलिस ने गोहत्या पर नकेल कस दी.
- उनकी सरकार बाद में जबरन या धोखे से धर्मांतरण के खिलाफ पहले अध्यादेश और फिर विधेयक लेकर आई.
37 साल बाद बना कीर्तिमान
यूपी में करीब 37 वर्ष बाद बीजेपी लगातार दोबारा पूर्ण बहुमत की सरकार बनाकर कीर्तिमान बनाती नजर आ रही है. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इससे योगी आदित्यनाथ का कद और बढ़ा है. इसके पहले साल 1985 में लगातार दूसरी बार पूर्ण बहुमत से कांग्रेस पार्टी ने सरकार बनाई थी.
माना जाता है कि योगी ने मौजूदा विधानसभा चुनाव में 80 बनाम 20 प्रतिशत का नारा देकर वोटों के ध्रुवीकरण की पहल की. विश्लेषकों ने 20 प्रतिशत को मुस्लिम आबादी और 80 प्रतिशत को हिंदू आबादी के रूप में देखा. इसके योगी ने माफिया और अपराधियों के खिलाफ की गई कार्रवाई को भी पूरे चुनाव में मुद्दा बनाया.
बीजेपी के शीर्ष नेताओं के चुनाव प्रचार में 'योगी का बुलडोजर' छाया रहा. सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी अक्सर अपनी सभाओं में बुलडोजर और बुल (सांड) का नाम लेकर योगी पर तंज कसते थे. यादव ने चुनाव में छुट्टा पशुओं पर नियंत्रण न लगा पाने को मुद्दा बनाया था.

 

चुनाव खत्म होते ही आ जायेंगे एग्जिटपोल के नतीजे! आखिर क्या है एग्जिट पोल ...

चुनाव खत्म होते ही आ जायेंगे एग्जिटपोल के नतीजे! आखिर क्या है एग्जिट पोल ...

उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में किसकी सरकार बनेगी? इस सवाल का सही जवाब तो 10 मार्च 2022 को मिलेगा। भारत का निर्वाचन आयोग (ECI) 10 मार्च को उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर विधानसभा चुनाव के परिणाम घोषित करेगा। यूपी में 7 मार्च को आखिरी चरण का मतदान है। मतदान खत्म होते ही एग्जिट पोल के आंकड़े आ जाएंगे।
सबसे पहले एग्जिट पोल को समझ लीजिए
मतदान कर पोलिंग बूथ से निकल रहे वोटर्स से पूछकर कि उन्होंने किसको वोट दिया है, एग्जिट पोल तैयार किए जाते हैं। चूंकि वोटर्स से सवाल पोलिंग स्टे‍शन से बाहर निकलते समय होता है इसलिए ऐसे सर्वे Exit Poll कहलाते हैं।
एग्जिट पोल से क्या पता चलता है?
एग्जिट पोल के पीछे यह धारणा होती है कि फौरन वोट डालकर निकले वोटर के सच बताने की संभावना ज्यादा है। सभी जवाबों को एक जगह इकट्ठा करके चुनाव के नतीजों का अनुमान लगाया जाता है।
एग्जिट पोल/ओपिनियन पोल कौन कराता है?
वोटर्स को ध्यान रखने वाली सबसे जरूरी बात यह है कि कोई सरकारी एजेंसी एग्जिट पोल/ओपिनियन पोल नहीं कराती। आमतौर पर न्यूज मीडिया संस्थान और निजी सर्वे फर्म मिलकर एग्जिट पोल/ओपिनियन पोल कराते हैं।
क्या एग्जिट पोल के आंकड़े ही नतीजों में बदलते हैं?
बिल्कुल नहीं। एग्जिट पोल नतीजों का अनुमान लगाते हैं। चुनाव के नतीजे आधिकारिक रूप से भारत का निर्वाचन आयोग जारी करता है, वहीं इकलौते और अंतिम परिणाम होते हैं।
 

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