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कोविड-19 ने श्वसन संबंधी विकारों में अकादमिक रुचि और श्वसन चिकित्सा में प्रगति को पुनर्जीवित किया है: डॉ. जितेंद्र सिंह

कोविड-19 ने श्वसन संबंधी विकारों में अकादमिक रुचि और श्वसन चिकित्सा में प्रगति को पुनर्जीवित किया है: डॉ. जितेंद्र सिंह
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नईदिल्ली। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह, जो खुद एक मेडिकल प्रफेशनल और प्रख्यात मुधमेय चिकित्सक हैं, उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी का दुनिया भर के विभिन्न हिस्सों और जिंदगी के विभिन्न पहलुओं पर अलग अलग प्रभाव पड़ा है। वहीं मेडिकल बिरादरी में इस महामारी ने श्वसन विकारों में अकादमिक रूचि को जगाया है। वहीं मधुमेय चिकित्सा और कैंसर विज्ञान जैसे विशेषज्ञता वाले विभागों में भी श्वसन चिकित्सा से जुड़ी मेडिकल प्रगति के बारे में चिकित्सकों की जिज्ञासा बढ़ी है क्योंकि  एक आम इंसान भी इन रोगों के प्रति ज्यादा जागरूक होने की कोशिश कर रहा है। 5-दिवसीय अखिल भारतीय सम्मेलन 'नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन पल्मोनरी डिजीजेज' (एनएपीसीओएन) में उद्घाटन भाषण देते हुए, डॉ. सिंह ने कहा कि पहले तो पल्मोनरी मेडिसिन मुख्य रूप से तपेदिक यानी टीबी की बीमारी से ही सबंधित माना जाता था। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने अपने करियर की शुरुआत बतौर डॉक्टर की थी तो समाज में एक गलत धारणा थी कि छाती रोगों का विशेषज्ञ होने का मतलब था सिर्फ टीबी का डॉक्टर. मगर ज्ञान और अनुसंधान अध्ययन के विस्फोट के साथ विशिष्टता और संवेदनशीलता के साथ निदान के मॉर्डन साधनों और समाज में स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता ने श्वसन चिकित्सा का दायरा काफी बढ़ा दिया। अब इसमें वायु प्रदूषण के चलते होने वाले अन्य रोग, किसी खास व्यवसाय से फेफेड़ों के रोग, निद्रा विकार, ऑब्स्ट्रक्टिव फेफड़े के रोग और अन्य कई फेफड़े संबंधी रोग भी आते है। कोविड-19 के इस दौर में पनपी जटिलताओं से इन रोगों को और भी अहमियत मिली है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने आयोजकों को इस विशाल सम्मेलन के आयोजन के लिए बधाई दी। लगभग 100 अंतर्राष्ट्रीय संकायों और 19 अंतर्राष्ट्रीय चेस्ट एसोसिएशनों को इस कार्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है। उन्होंने कहा कि सम्मेलन का आयोजन  भी एक बेहद महत्वपूर्ण समय पर हो रहा है क्योंकि यह वो दौर है जब दुनिया कोविड-19 की तबाही से गुजर रही है और इससे उत्पन्न श्वसन और फेफड़ों की जटिलताओं से भी जूझ रही है। इसी बीच चिकित्सा बिरादरी दिन-रात इस महामारी पर नियंत्रण पाने और रोकथाम करने में जुटी हुई है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत श्वसन चिकित्सा पर सम्मेलन होने का भी महत्व है क्योंकि भारत ने अपनी 130 करोड़ की आबादी के बावजूद कोविड-19 के खिलाफ दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान को सफलतापूर्वक चलाया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पूर्वनिर्धारित और निर्णायक दृष्टिकोण के चलते भारत छोटी आबादी वाले कई पश्चिमी देशों की तुलना में इस महामारी की चुनौती का अधिक सफलतापूर्वक और निर्णायक रूप से सामना करने में सक्षम रहा है।


डॉ. सिंह ने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि कोविड ​​और टीबी के अलावा, सम्मेलन की कार्यक्रम सूची में समकालीन चिंता के विषयों जैसे श्वसन रोग देखभाल, पल्मोनरी इमेजिंग, हवाई यात्रा से संबंधित समस्याओं और छाती एवं शल्य चिकित्सा आदि को भी जगह दी गई है। मंत्री ने इस बात पर विशेष रूप से प्रसन्नता जाहिर की कि पर्यावरण प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के लिए समर्पित सत्र भी इस सम्मेलन में होने जा रहे हैं। ये वे मुद्दे हैं जिनके बारे में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने विचार लगातार व्यक्त कर रहे हैं और दुनिया भर में इन्हें गंभीरता से लिया जा रहा है। 


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