सरकारी स्कूल के सात शिक्षकों की छात्राओं से अश्लील हरकत, पास्को एक्ट के तहत मामला दर्ज, जाने पूरी खबर
सातों शिक्षकों को निलंबित कर दिया गया है। साथ ही विभागीय जांच के निर्देश भी दिए गए हैं। जिला शिक्षा अधिकारी से मिली रिपोर्ट के बाद लोक शिक्षण संचालक एस. प्रकाश के निर्देश पर निलंबन की कार्रवाई की गई है।
छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार में सरकारी स्कूल के सात शिक्षकों को पुलिस ने शर्मनाक हरकत के आरोप में गिरफ्तार किया है। इन शिक्षकों पर कक्षा नौ की दो छात्राओं से छेड़छाड़ का आरोप है। पुलिस ने पॉक्सो अधिनियम में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इस मामले के बाद पूरे गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है।
सातों शिक्षक निलंबित
खुलासे के बाद सातों शिक्षकों को निलंबित कर दिया गया है। साथ ही विभागीय जांच के निर्देश भी दिए गए हैं। जिला शिक्षा अधिकारी से मिली रिपोर्ट के बाद लोक शिक्षण संचालक एस. प्रकाश के निर्देश पर निलंबन की कार्रवाई की गई है।
शिक्षकों द्वारा धमकी, छात्राओं ने दिखाई साहस, किया खुलासा
छात्राओं ने इस बात का खुलासा किया था कि स्कूल के सात पुरुष शिक्षक उनके साथ लंबे समय से गलत हरकतें कर रहे हैं। छात्राओं पर दबाव बनाया जा रहा था और बात न मानने पर परीक्षा में फेल किए जाने की धमकी दी जा रही थी, जिसकी वजह से छात्राएं अब तक चुप थीं।
इन सातों शिक्षकों को किया गया गिरफ्तार
खुलासे के बाद कसडोल पुलिस ने शुक्रवार को देवेन्द्र खुंटे (38), रामेश्वर प्रसाद साहू (44), रूपनारायण साहू (36), महेश कुमार वर्मा (37), दिनेश कुमार साहू (38), चंदन दास बघेल (39) और लालमन बेरवंश को गिरफ्तार किया है। एसएचओ कसडोल दीनबंधु उइके ने बताया कि यह सभी शिक्षक मरदा गांव के सरकारी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में तैनात हैं।
इस तरह करते थे अश्लील हरकत
एसएचओ उइके ने कहा कि जनवरी 2018 में खुंटे स्कूल की छात्राओं को पिकनिक पर ले गया था। आरोप है कि इसके बाद वह कथित रूप से इनमें से एक छात्रा को वह अपने घर ले गया और छेड़छाड़ की। उन्होंने बताया कि दर्ज कराई गई शिकायत में रामेश्वर प्रसाद पर कथित तौर पर एक अन्य छात्रा के साथ फोन पर अश्लील बात करने, जबकि पांच अन्य आरोपियों पर कथित रूप से लड़कियों पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप है।
अलग-अलग धाराओं में एफआईआर दर्ज
एसएचओ उइके कहा कि आरोप लगाया गया है कि जब भी पीडि़त छात्राओं ने इनके बारे में शिकायत करने की कोशिश की तो आरोपियों ने उन्हें परीक्षा में फेल करने की धमकी देकर चुप करा दिया। बीते गुरुवार दो पीडि़त छात्राओं के माता-पिता ने स्कूल प्रबंधन समिति की बैठक में इस मुद्दे को उठाया और प्रिंसिपल को इस बारे में सूचित किया। उइके ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता, यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचारों की रोकथाम) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं।
छात्राओं ने थाने में की सामूहिक शिकायत
बता दें कि बुधवार को छात्राओं से स्कूल में हो रही इस घटना की शिकायत परिजनों से की थी। मामले में कई पीडि़त छात्रों ने बाद में एक सामूहिक शिकायत पुलिस थाने में दर्ज कराई। इसके बाद शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू हो सकी।
ग्रामीणों ने शिक्षकों को बनाया बंधक
जब ग्रामीणों को इस बात की जानकारी मिली तो वे एक साथ स्कूल पहुंचे और शिक्षकों को बंधक बना लिया था। गांव में पुलिस बल भेजा गया और ग्रामीणों को समझाइश दी गई। इसके बाद ग्रामीणों ने बंधक बनाए गए आरोपित शिक्षकों को पुलिस को सौंप दिया था। इस शर्मनाक घटना के सामने आने के बाद अब आरोपित शिक्षकों को बर्खास्त किए जाने की मांग तेज हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि चारित्रिक रूप से गिरे हुए लोगों की शिक्षा जगत में कोई जगह नहीं है। इन्हें तुरंत नौकरी से बाहर निकाल देना चाहिए और कड़ी सजा होनी चाहिए।







.jpeg)












