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कुत्तों से फैलने वाला वायरस बना बाघों के लिए खतरा, बचाने के लिए होगा टीकाकरण

 कुत्तों से फैलने वाला वायरस बना बाघों के लिए खतरा, बचाने के लिए होगा टीकाकरण
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देहरादून। बाघ से कुत्तों को खतरा होने की बात तो आम है, लेकिन यह सुनकर आप भी चौंक जाएंगे कि कुत्ते बाघों के लिए जानलेवा हो सकते हैं। हां आप सही समझ रहे हैं। देश में बाघों को कुत्तों से खतरा पैदा हो गया है। यह हम नहीं कर रहे हैं राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) ने इस खतरे को भांपते हुए देश के सभी टाइगर रिजर्व के लिए स्टेंडर्ड आपरेटिंग सिस्टम (एसओपी) जारी कर दिया है। इसमें टाइगर रिजर्व के आसपास के गांव में रह रहे आवारा कुत्तों का बंध्याकरण और टीकाकरण करने समेत कई निर्देश दिए गए हैं।

देश में बाघों के संरक्षण और संवर्धन के लिए बनायी गई एनटीसीए ने टाइगर रिजर्व के आसपास रह रहे कुत्तों से बाघों को खतरा बताया है। इसके साथ ही देश के सभी 50 टाइगर रिजर्व को मामले में एसओपी जारी की है। एसओपी जारी करने के पीछे तीन प्रमुख वजह बतायी जा रही हैं। जिसमें कुत्तों से टाइगर और वन्यजीवों को बीमारी फैलने का खतरा, वन्यजीवों के शिकार का खतरा पैदा हो गया है। यही नहीं कुत्तों के अपनी नस्ल के जंगली जानवरों से प्रजनन का खतरा भी पैदा हो गया है। 

वन्यजीव प्रतिपालक को दी जिम्मेदारी-
एनटीसीए ने सभी राज्यों के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालकों को इस एसओपी को लागू कराने की जिम्मेदारी दी है। एनटीसीए ने एसओपी को लागू कराने के लिए एनजीओ,पंचायतों व जानवरों को बचाने के लिए काम करने वाली संस्थाओं समेत वन अधिकारी आदि की मदद लेने को कहा है। 

इस वायरस से है खतरा-
कुत्तों से फैलने वाला एक वायरस, कैनाइन डिसटेंपर वायरस (सीडीवी) बाघों के लिए खतरा बन गया है। पूर्व में इस वायरस को बाघों में चिन्हित भी किया गया है। जानकारों का मानना है कि यह वायरस इतना खतरनाक है कि अगर ये टाइगर रिजर्व में फैल जाए तो बाघों के संरक्षण पर गंभीर असर पड़ सकता है।

पूर्व में आ चुके हैं मामले सामने-
जानकारों के अनुसार कुत्तों से बाघ तक बीमारी पहुंचने के मामले काफी पहले सामने आ चुके हैं। यूपी के दुधवा नेशनल पार्क और मध्य प्रदेश के पन्ना नेशनल पार्क में कुत्तों से पहुंची बीमारी के चलते बाघ की मौत हो चुकी है।

उत्तराखंड के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक जेएस सुहाग ने जानकारी देते हुए बताया कि एनटीसीए ने टाइगर रिजर्व को लेकर एसओपी जारी की है। इस मामले में एनजीओ व पशुओं के लिए काम करने वाली संस्था आदि का सहयोग लेकर काम किया जा रहा है। 

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