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35 साल चले केस में आया फैसला : राजा मानसिंह हत्याकांड में 11 पुलिसकर्मियोंं को उम्रकैद की सजा

35 साल चले केस में आया फैसला : राजा मानसिंह हत्याकांड में 11 पुलिसकर्मियोंं को उम्रकैद की सजा
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मथुरा | राजस्थान के भरतपुर के राजा मानसिंह हत्याकांड में 35 साल बाद फैसला आ गया है। जिन 11 आरोपियों को कल जिला एवं सत्र न्यायालय ने दोषी करार दिया था उन सभी को उम्रकैद की सजा सुना दी गई है। ये सभी पुलिसमुलाजिम हैं। हालांकि इस केस में तीन आरोपियों को बरी कर दिया गया है। आज कोर्ट ने डीएसपी कानसिंह भाटी, थानाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह, राजस्थान सशस्त्र बल के हेड कांस्टेबल जीवन राम, हेड कॉन्स्टेबल भंवर सिंह, सिपाही हरी सिंह, शेर सिंह, छतर सिंह, पदमा राम, जगमोहन व डीग थाने के दूसरे अफसर इंस्पेक्टर रविशेखर मिश्रा और सिपाही सुखराम को उम्रकैद की सजा सुनाई है। पुलिस अधीक्षक कार्यालय में तैनात अपराध सहायक निरीक्षक कानसिंह सीरवी, हेड कॉन्स्टेबल हरिकिशन व सिपाही गोविंद प्रसाद को निर्दोष करार दिया गया है।

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जिला एवं सत्र न्यायाधीश साधना रानी ठाकुर ने मामले की सुनवाई पूरी करने के बाद पुलिस उपाधीक्षक कानसिंह भाटी सहित 11 आरोपियों को दोषी करार दिया गया था। चार्जशीट में आरोपी बनाए गए 18 पुलिसकर्मियों में से डीएसपी कानसिंह भाटी के चालक कॉन्स्टेबल महेंद्र सिंह को पूर्व में ही बरी किया जा चुका था तथा तीन अन्य आरोपी सिपाही नेकीराम, सीताराम व कुलदीप सिंह की मुकदमे की सुनवाई के दौरान ही मृत्यु हो चुकी है।
 
 
वर्ष 1990 में यह केस मथुरा जिला जज की अदालत में स्थानांतरित किया गया था। 35 साल बाद 21 जुलाई 2020 (मंगलवार) को राजा मानसिंह हत्याकांड में निर्णय हो सका था। वादी पक्ष के अधिवक्ता नारायन सिंह विप्लवी ने बताया कि अब तक आठ दफा फाइनल बहस हुई और कुल 78 गवाह पेश हुए, जिनमें से 61 गवाह वादी पक्ष ने तो 17 गवाह बचाव पक्ष ने पेश किए।
 
 
21 फरवरी 1985 को तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवचरन माथुर अपने प्रत्याशी के समर्थन में डीग में चुनावी सभा को संबोधित करने आए थे। मानसिंह ने अपनी जीप से टक्कर मारकर मंच को धराशायी कर दिया था। इसके बाद मुख्यमंत्री को सभा बीच में ही छोड़कर जाना पड़ा था। तत्कालीन पुलिस उपाधीक्षक कानसिंह भाटी सहित डेढ़ दर्जन पुलिसकर्मियों ने राजा मानसिंह को घेर कर अंधाधुंध गोलियां बरसा दी थीं। इस घटना में राजा मानसिंह एवं उनके दो अन्य साथी सुम्मेर सिंह और हरी सिंह की मौत हो गई थी। घटना के बाद तीनों के शव जोंगा जीप में पड़े मिले थे।  इस हत्याकांड में 18 पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। सुनवाई के दौरान एएसआई नेकीराम, कांस्टेबल कुलदीप और सीताराम की मौत हो चुकी है।
 

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