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BIG BREAKING : राजधानी के इस अस्पताल में हर दिन मरते है 37 नवजात बच्चे, स्वास्थ्य मंत्री ने कहा 5 साल में 68301 नवजातों की हुई मौत

BIG BREAKING : राजधानी के इस अस्पताल में हर दिन मरते है 37 नवजात बच्चे, स्वास्थ्य मंत्री ने कहा 5 साल में 68301 नवजातों की हुई मौत
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भोपाल | मध्य प्रदेश के हमीदिया अस्पताल के विशेष नवजात देखभाल यूनिट (एसएनसीयू) में पिछले पांच साल के दौरान हर दिन 37 नवजातों ने जान गंवाई है। मध्य प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस विधायक जीतू पटवारी के सवाल के जवाब में स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पिछले पांच साल में कुल 500996 नवजात एसएनसीयू में भर्ती हुए, जिनमें से 68301 की मौत हो गई। सबसे ज्यादा मौतें साल 2019-20 के दौरान हुई हैं, जब 14,759 नवजात बच्चों की जान गई।

कांग्रेस विधायक ने हमीदिया एसएनसीयू को बताया सबसे असुरक्षित
कांग्रेस विधायक जीतू पटवारी ने यह सवाल आठ नवंबर को हमीदिया अस्पताल में चार नवजातों की मौत के संदर्भ में यह सवाल पूछा था। गौरतलब है कि इस दिन अस्पताल के एसएनसीयू में लगी आग में इन बच्चों की मौत हो गई थी। पटवारी ने कहाकि हमीदिया अस्पताल का एसएनसीयू मध्य प्रदेश में सबसे असुरक्षित जगह है। उन्होंने कहाकि राज्य सरकार में किसी को तो इन मौतों की जिम्मेदारी लेनी होगी, क्योंकि 13 फीसदी नवजातों की मौत चिंता का विषय है। सिर्फ इतना ही नहीं, पटवारी ने कहाकि भाजपा शासन के दौरान प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाएं बदहाल होती जा रही हैं।

मध्य प्रदेश में नवजात मृत्यु दर सबसे ज्यादा
गौरतलब है कि नवजात मृत्यु दर के सैंपल रजिस्ट्रेशन सर्वे में मध्य प्रदेश में शिशुओं की मौत का आंकड़ा पूरे भारत में सबसे ज्यादा है। यहां प्रति 1000 के जन्म पर 48 शिशुओं की मौत होती है। वहीं स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी ने कहाकि हमीदिया अस्पताल के एसएनसीयू में अधिकतर बच्चे बेहद गंभीर हालत में रेफर किए जाते हैं। वहीं प्रीमैच्योर डिलीवरी से जन्मे बच्चे भी यहीं भर्ती किए जाते हैं। उन्होंने कहाकि मैं यह नहीं कहता कि सर्वाइवल रेट अच्छा है, लेकिन डॉक्टर शिशुओं को बचाने के लिए अपनी तरफ से पूरी कोशिश करते हैं। नवंबर महीने में अस्पताल में 40 बच्चों को हमीदिया अस्पताल के एसएनसीयू में भर्ती कराया गया था। यहां पर आग लगने की घटना में चार नवजातों की मौत हो गई थी। बाद में 10 और शिशुओं ने 48 घंटे के अंदर जान गंवा दी।


 


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