BREAKING NEWS : देखिए लाल किले के पास हुए बम धमाके की खौफनाक तस्वीरें, 8 लोगों की मौत    |    Breaking : 1 नवंबर को सभी स्कूल – कॉलेजों में रहेगी छुट्टी, आदेश जारी    |    BIG BREAKING : सी.पी. राधाकृष्णन होंगे भारत के नए उपराष्ट्रपति    |    साय कैबिनेट की बैठक खत्म, लिए गए कई अहम निर्णय    |    CG Accident : अनियंत्रित होकर पेड़ से टकराई तेज रफ्तार कार, युवक-युवती की मौके पर ही मौत, 3 की हालत गंभीर    |    Corona Update : छत्तीसगढ़ में फिर डराने लगा कोरोना, इस जिले में एक ही दिन में मिले इतने पॉजिटिव मरीज    |    प्रदेशवासियों को बड़ा झटका, बिजली दरों में हुई बढ़ोतरी, जाने प्रति युनिट कितने की लगेगी चपत    |    छत्तीसगढ़ में बढ़ा कोरोना का खतरा: 20 दिनों में 3 मौतों के बाद प्रशासन अलर्ट मोड पर    |    Ration Card के बदले रोजगार सहायक की Dirty Deal, बोला- ‘पहले मेरे साथ शारीरिक संबंध बनाओ फिर मिलेगा राशन कार्ड    |    छत्तीसगढ़ में तेजी से पांव पसार रहा कोरोना, रायपुर में सबसे ज्यादा केस, राज्य में कुल 45 एक्टिव केस    |

9 वीं कक्षा की छात्रा ने स्कूल के टॉयलेट में बच्चे को दिया जन्म, मचा हड़कंप; प्रशासन पर उठे सवाल

9 वीं कक्षा की छात्रा ने स्कूल के टॉयलेट में बच्चे को दिया जन्म, मचा हड़कंप; प्रशासन पर उठे सवाल
Share

 कर्नाटक :- कर्नाटक के यादगीर जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। जहां के एक सरकारी आवासीय विद्यालय की कक्षा 9वीं की छात्रा ने स्कूल के शौचालय में एक बच्चे को जन्म दिया। यह घटना बुधवार को हुई, लेकिन इसका खुलासा गुरुवार को हुआ। छात्रा और नवजात दोनों की हालत स्थिर बताई जा रही है और उनका इलाज शाहपुर के सरकारी अस्पताल में चल रहा है।

प्रशासनिक लापरवाही पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों और अधिकारियों ने सवाल उठाए हैं कि आखिर इतनी बड़ी बात स्कूल स्टाफ और स्वास्थ्य विभाग की नजरों से कैसे छिपी रही। इस पर कर्नाटक राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य शशिधर कोसाम्बे ने कड़ा रुख अपनाया है।

प्रिंसिपल व स्टाफ पर होगी कार्रवाई
कोसाम्बे ने कहा कि आयोग को सूचना न देने पर प्रिंसिपल और स्टाफ के खिलाफ स्वतः संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज किया जाएगा। उन्होंने डीसीपी यादगीर को मौके पर जाकर रिपोर्ट दर्ज करने और आयोग को शाम तक विस्तृत रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं।

स्वास्थ्य विभाग की भी होगी जांच
कोसाम्बे ने कहा कि स्कूलों में लड़कियों की मासिक जांच होनी चाहिए थी, लेकिन इसमें स्वास्थ्य अधिकारियों की लापरवाही नजर आ रही है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की सिफारिश की है।


Share

Leave a Reply