कश्मीर की गायिका द्वारा छतीसगढ़ी भाषा में गाया नरवा-गरुवा-घुरुवा-बाड़ी पर केन्द्रित गीत का अग्रसेन महाविद्यालय में हुआ विमोचन
चम्पेश्वर गोस्वामी के लिखे गीत को कश्मीरी गायिका नैना सप्रू ने दिया स्वर
रायपुर, अग्रसेन महाविद्यालय पुरानी बस्ती, में आज, छत्तीसगढ़ शासन की प्रमुख योजना “नरवा-गरुवा-घुरुवा-बाड़ी” पर केन्द्रित शीर्षक गीत का विमोचन किया गया. रायपुर के युवा गीतकार और कवि चम्पेश्वर गोस्वामी के लिखे इस गीत को जम्मू-कश्मीर की प्रसिद्ध उप-शास्त्रीय गायिका नैना सपरू ने स्वर दिया है. इसकी रिकार्डिंग हाल ही में रायपुर के एक स्टूडियो की गई. आज महाविद्यालय में आयोजित एक विशेष समारोह में गीत के विमोचन के साथ ही इसकी संगीतमय प्रस्तुति भी की गई.
कार्यक्रम की एक विशेषता यह भी रही कि इसका आरम्भ राज्य शासन द्वारा हाल ही में राज्य-गीत के रूप में घोषित डा नरेंद्रदेव वर्मा के लिखे गीत “अरपा पैरी के धार.....” के गायन से किया गया, जिसे नैना सप्रू ने स्वयं गाकर प्रस्तुत किया. उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित महाविद्यालय के प्राध्यापकों और विद्यार्थियों के विशेष आग्रह पर छत्तीसगढ़ का प्रसिद्ध “सुआ गीत” और एक कश्मीरी गीत भी पेश किया. इस संगीत प्रस्तुति में महाविद्यालय के पत्रकारिता संकाय के प्राध्यापक प्रो. अनिल शर्मा ने हारमोनियम पर और गीतकार चम्पेश्वर गोस्वामी ने स्वयं तबले पर संगति की, जिसका दर्शकों ने भरपूर आनंद लिया.
इस अवसर पर महाविद्यालय के डायरेक्टर डा. वी.के. अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में एक कश्मीरी पंडित समुदाय की गायिका द्वारा आकर छत्तीसगढ़ी भाषा-बोली से परिचित नहीं होने के बावजूद स्थानीय बोली में लिखे गए गीत को स्वर देना निश्चित रूप से एक बड़ी उपलब्धि है. उन्होंने इसके लिए नैना सप्रू की विशेष रूप से सराहना की. कार्यक्रम के दौरान आकाशवाणी की नैमित्तिक उद्घोषिका गीता शर्मा ने गायिका नैना सप्रू का विस्तार से परिचय दिया तथा गायन में भी उनका सहयोग किया. नैना सप्रू ने इस आयोजन के लिए अग्रसेन महाविद्यालय के प्रति आभार जताते हुए कहा उन्हें छत्तीसगढ़ आकर बहुत ही अपनेपन का अहसास होता है. गीतकार चम्पेश्वर गोस्वामी ने भी इस आयोजन को अपने लिए एक यादगार अनुभव बताया







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