बासिंग मेला और कैम्प की जुगलबंदी से बदलने लगा है अबूझमाड़, जाने पूरी खबर
नारायणपुर । नारायणपुर जिला मुख्यालय से 17 किलोमीटर दूर धुर नक्सल प्रभावित अबूझमाड़ के बासिंग में पांच वर्ष पूर्व 2015 में बासिंग में पुलिस कैम्प खुलने के बाद तत्कालीन कलेक्टर टामन सिंह सोनवानी ने अबूझमाड़ के लोगों में नक्सली खौफ और दहशत को दूर करने व समाज की मुख्यधारा से जोडऩे के लिए बासिंग मेला की शुरुवात की गई थी। 05 वर्ष बाद बासिंग मेला और कैंप की जुगलबंदी से अबूझमाड़ के बदलते स्वरूप को महसूस किया जा सकता है। जिला कलेक्टर पदुमसिंह एल्मा ने ग्रामीणों से कहा कि पारम्परिक बासिंग मेला की शुरुवात हो गई है, मेले के आयोजन का उद्देश्य अबुझमाड़ के लोगों को विकास, शांति बहाली और समाज को मुख्यधारा से जोडऩा है। बासिंग मेला अबूझमाड़ के बदलते स्वरूप और विकास के लिए सबसे मुख्य अंग बनता जा रहा है। अबूझमाड़ नक्सलियों के गढ़ के नाम से जाना जाता था, लेकिन जब से अबूझमाड़ में पुलिस के कैम्प-थाने के खुलने की शुरुवात हुई तो केम्प व थाने के आस-पास के इलाके नक्सलियों के खौफ और दहशत से आजाद होते गए लोग चैन से रहने लगे हैं। इस बदलाव को देखते हुए बासिंग में वर्ष 2014-15 बासिंग केम्प खोला गया। कैम्प के खुलने के बाद लोग नक्सलियों के दहशत के चलते पुलिस और प्रशासन पर विश्वास नहीं करते थे इसको देखते हुए कलेक्टर एसपी ने लोगो को जोडऩे और उनके अंदर बसे नक्सली खौफ को दूर करने बासिंग मेले की शुरुवात की, बासिंग मेले के आयोजन होने से प्रतिवर्ष एक बदलाव देखने को मिलने लगा। आज 5 साल बाद ये बदलाव ग्रामीणों में पुलिस और प्रशासन पर बढ़ते विश्वास को दिखाता है। लोग अब खुलकर मिलते है, और अपनी समस्यों को अवगत करवाकर अपने गांव में विकास की मांग करते है। पांच वर्ष पूर्व की गई बासिंग मेले की शुरुवात के बाद से अबूझमाड़ के लोगो को प्रतिवर्ष मेले का आनन्द उठाने के साथ आसपास के गांवों के लोगों से मेल-मिलाप करने का एक अच्छा मौका मिल जाता है। ग्रामीणों को बासिंग मेले का बेसब्री से इंतजार रहता है।







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