एईएमएल ने ‘मेरी संगिनी, मेरी मार्गदर्शिका’ परियोजना लॉन्च की, जाने पूरी खबर
मुंबई | अदाणी इलेक्ट्रिसिटी मुंबई लिमिटेड (एईएमएल) ने मुंबई की आरे कॉलोनी में एक समारोह में ‘मेरी संगिनी, मेरी मार्गदर्शिका’ परियोजना लॉन्च की है। इस परियोजना का लक्ष्य समाज से महिला नेतृत्वकर्ताओं को निर्मित और पोषित करना है, ताकि वे बदलाव की अगुवा बनें।
‘मेरी संगिनी, मेरी मार्गदर्शिका’ को तिलक नगर और आरे कॉलोनी में पायलट आधार पर हकदर्शक के साथ साझेदारी में अदाणी ग्रुप की सीएसआर शाखा -अदाणी फाउंडेशन द्वारा क्रियान्वितकिया जाएगा।
इस अवसर पर अदाणी फाउंडेशन की निदेशक सुश्री सुषमा ओझा ने कहा, ‘‘एक संगिनी के तौर पर सामुदायिक स्वयंसेवियों को प्रशिक्षणों के माध्यम से ज्ञान और कुशलता प्रदान की जाएगी, ताकि वे परामर्शदाता और सलाहकार के रूप में कार्य कर सकें। संगिनियाँ घरेलू हिंसा जैसे सामाजिक मुद्दों पर काम करेंगी और लोगों को सरकारी अभिकरणों तथा योजनाओं से जोड़ने के लिये एकपुल का काम करेंगी।’’
एईएमएल के एकप्रवक्ता ने कहा, ‘‘अदाणी इलेक्ट्रिसिटी ‘मेरी संगिनी-मेरी मार्गदर्शिका’ जैसी उत्कृष्ट परियोजना के लिये अदाणी फाउंडेशन के साथ जुड़कर अत्यंत प्रसन्न है, जो विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभ देने वाले सर्वश्रेष्ठ मंचों में से एक के रूप में काम करेगी। यह महिलाओं के लिये आर्थिक अवसरों का दायरा बढ़ाएगी और उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार करेगी।’’
एईएमएल मुंबई में अदाणी स्किल डेवलपमेन्ट सेंटर के लॉन्च का भी समर्थन कर रहा है, जो वार्षिक आधार पर 1200 लोगों को कुशलता प्रशिक्षण देगा और खासतौर से महिलाओं पर केन्द्रित होगा। अदाणी फाउंडेशन की इस पहल द्वारा प्रस्तुत कोर्सेज महिलाओं को आजीविका अर्जित करने के लिये सशक्त करेंगे और उन्हें उद्यमी बनने के लिये प्रोत्साहित करेंगे।
एईएमएल के सहयोग से अदाणी फाउंडेशन मुंबई में 2200 से अधिक स्कूलों में प्रोजेक्ट स्वच्छाग्रह एवं सुरक्षा(S+S) भी लॉन्च कर रहा है।
स्वच्छाग्रह- स्वच्छता का सत्याग्रह एक आचरण परिवर्तन शिक्षा कार्यक्रम है। स्वच्छाग्रह की प्रेरणा स्वाधीनता संग्राम के दौरान महात्मा गांधी द्वारा किये गये सत्याग्रह से ली गई है, जिसने बड़े धैर्य और दृढ़ता से एक आंदोलन को जन्म दिया और भारतीयों के दिमाग में प्रतिष्ठा और आत्म-सम्मान की भावना डाली। इसका लक्ष्य है लोगों को जोड़ना और बदलाव लाना, भारत के स्वाधीनता आंदोलन की तरह, जिसमें लोग ‘स्वच्छता की संस्कृति निर्मित करने’ के लिये काम करें। बच्चों के लिये सुरक्षा की जरूरत को समझते हुए इस परियोजना में सुरक्षा को भी जोड़ा गया है।
स्वच्छाग्रह का झंडा स्कूली बच्चों के हाथों में होगा और शिक्षक उनके संरक्षक होंगे और यह आंदोलन मुंबई के सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों में चलाया जाएगा, वह भी विभिन्न भाषाओं में, जैसे मराठी, तेलुगू, कन्नड़, उर्दू, हिन्दी, अंग्रेजी और गुजराती।







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