कोरोना की एंट्री के बाद कुछ ऐसा रहा 2020 का हाल, पढ़िए पूरी स्टोरी
2019 में जिंदगी की रफ्तार एक दम तेजी से चल रही थी। जैसे प्रकृति को पता है कि 2020 में जीवन के साथ साथ, आर्थिक विकास एक दम रुक सी जाएगी। किसी को कोई अंदाज ही नही थी कि 2019 में सब इतना तेजी से कैसे हो रहा है दिमाग भी बहुत तेजी से काम कर रहा था दिन भी बहुत जल्दी से गुजर रहे थे। फिर एक दिन ये सब थम सा गया। सड़को पर जानवर के सिवा और कोई नही* ना कहि दुकान खुले, ना कहि बाजार* ना कहि बच्चों का शोर ना कहि गाड़ियों का वो हॉर्न। 2020 में महामारी के रूप में कोरोना वायरस ने एंट्री मारी। कोरोना के एंट्री लेते ही सभी के जीवन अस्थ-व्यस्त से हो गए। इस कोरोना वायरस के कारण पूरे देश मे हड़कंप सा मच गया। एक दिन फिर सरकार ने कोरोना से लोगों को बचाने के लिए प्रदेश भर में लॉकडाउन का ऐलान कर दिया। लॉकडाउन से लोगों में महामारी का दौर आ गया। लोग दुकानों की ओर रासन का समान लेने भाग रहे थे। तो इन्ही को देख कर जंगली-जानवर भी सोच रहे थे की ये इंसानो को हुआ क्या ना कहि लोग है ना कहि कोई शोर है। प्रकृति भी लॉकडाउन में चमक उठी। प्रकृति का वातावरण बहुत ही साफ व सुंदर हो गया। लेकिन लोगों की सुरक्षा के लिए लगाएं गए लॉक डाउन में किसी के लिए मौत का फरमान लेकर आया वो थे सड़को पर रहने वाले जंगली जानवर जो लोगों के द्वारा दिये गए फेंके गए खाना वगेरा को खाकर अपना पेट भरते थे लॉक डाउन में लोगो ने घर से बाहर निकलना बंद कर दिया जानवरो को खाना मिलना मुश्किल हो गया जिससे कई जानवरों की मौते भी हो गई। फिर भी इस लॉक डाउन में कुछ अच्छे लोग या कई समाज सड़को पर भूखी प्यासी जंगली जानवरों को खाना खिलाने का काम कर रही थी। इस मुहिम को देखकर कई लोग सामने आए और उन्होंने भी जानवरो को खाना देने का काम शरू किया।
फिर एक दौर ऐसा आया जब सरकार ने लॉकडाउन खत्म करने का फैसला लिया। लोगों के चेहरें में एक ओर जहां खुशी थी तो वही दुसरी ओर कोरोना का खौफ। इस लॉक डाउन में कई लोगों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा, कहि दुकान,घर का किराया देना लोगों के लिए दुर्बल हो गया। 4-5 महीने बाद लोग अपने घरों से बाहर आये।
फिर वो दिन भी आया जब 2020 को जाने में कुछ ही घण्टे थे सब बेसब्री से साल 2021 का इंतजार कर रहे थे। सब यही सोच रहे थे कि 2021 में कोरोना हमेशा के लिए खत्म हो जाये और लोग पहले की तरह खुल कर जी सके।







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