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आलेख: विपक्ष से अलग केजरीवाल की राह

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आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल विपक्ष के नेताओं से अलग रास्ते पर चलते हैं। भाजपा के खिलाफ उनको भी लडऩा है लेकिन वे भाजपा की रणनीति और भाजपा के सिद्धांतों से ही उससे लड़ते हैं। इस मामले में उनकी राह बाकी विपक्षी नेताओं से अलग है। उन्होंने भड़काऊ भाषण और विभाजनकारी राजनीति को लेकर एक भी बयान नहीं दिया है। अभी देश में रामनवमी के मौके पर कई जगह सांप्रदायिक दंगे हुए। मस्जिदों के ऊपर भगवा फहराए गए। मस्जिदों में अजान के समय उसके बाहर हनुमान चालीसा के पाठ की योजनाएं बन रही हैं और भाजपा के एक नेता लाउडस्पीकर मुफ्त बांट रहे हैं। हिजाब और हलाल मीट का विवाद अलग चल रहा है।
सांप्रदायिक और भड़काऊ भाषणों और विभाजनकारी राजनीति को लेकर विपक्ष की सभी पार्टियों ने बयान दिया है। शरद पवार ने सीधे भाजपा को इसके लिए जिम्मेदार ठहरा कर उस पर निशाना साधा। सोनिया गांधी ने अंग्रेजी अखबार 'इंडियन एक्सप्रेसÓ में लेख लिख कर इस राजनीति की निंदा की है। राहुल गांधी और ममता बनर्जी से लेकर एमके स्टालिन और के चंद्रशेखर राव तक सबने इस पर सवाल उठाया है और चिंता जताई है। लेकिन अरविंद केजरीवाल की ओर से इस पर कोई बयान नहीं दिया गया है। वे हर बार हिंदुत्व के मसले पर इसी तरह से चुप्पी साध लेते हैं और भाजपा के एजेंडे का समर्थन करते हैं। उनको लगता है कि इससे बहुसंख्यक हिंदू समाज उनको भी भाजपा की तरह अपनाएगा। वैसे भी अभी जिन दो राज्यों- हिमाचल प्रदेश और गुजरात में चुनाव होने हैं वहां उनको हिंदू वोटों की ही राजनीति करनी है। इसलिए भी वे चुप्पी साधे हुए हैं। 


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