बड़ी खबर: राज्य में 3000 जूनियर डॉक्टर्स ने दिया सामूहिक इस्तीफा, जाने क्या है वजह
ग्वालियर। कोरोनाकाल में जूनियर डॉक्टरों ने अपनी मांगों को लेकर सामूहिक इस्तीफा दिया है। मीडिया खबरों के मुताबिक मध्य प्रदेश में सभी 3000 जूनियर डॉक्टरों ने सामूहिक इस्तीफा दिया है। ये हमारी मजबूरी है। उन्होंने कहा कि हमारी मांगे मानी जाएं।
कोरोना और ब्लैक फंगस के कहर के बीच मध्यप्रदेश में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल 3 दिन से जारी है। प्रदेश के करीब 3 हजार डॉक्टरों ने अपनी मांगों को लेकर काम से किनारा कर लिया है।
जूनियर डॉक्टर सरकार से मुख्य तौर पर मानदेय बढ़ाने और कोरोना वायरस से संक्रमित होने पर उन्हें और उनके परिवार के लिए मुफ्त इलाज की मांग कर रहे हैं। हालांकि प्रदेश सरकार ने जूनियर डॉक्टरों को हड़ताल जारी रखने पर सख्त कार्रवाई करने की चेतावनी दी है।
मध्य प्रदेश: ग्वालियर में जूनियर डॉक्टरों ने अपनी मांगों को लेकर सामूहिक इस्तीफा दिया है।
— ANI_HindiNews (@AHindinews) June 3, 2021
एक जूनियर डॉक्टर ने बताया, "आज मध्य प्रदेश में सभी 3000 जूनियर डॉक्टरों ने सामुहिक इस्तीफा दिया है। ये हमारी मजबूरी है। हम अपने माननीय से अनुरोध करते हैं कि हमारी मांगे मानी जाएं।" pic.twitter.com/RhbAQFSzla
हाईकोर्ट ने हड़ताल को बताया अवैधानिक :
मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने जूनियर डॉक्टर की हड़ताल को अवैधानिक करार देते हुए सभी जूनियर डॉक्टरों को 24 घंटों में काम लौटने के आदेश दिए । मुख्य न्यायाधीश मोहम्मद रफीक तथा न्यायाधीश सुजय पॉल की युगलपीठ ने प्रदेशव्यापी जूनियर डॉक्टरों की हडताल को अवैध करार दिया है।
युगलपीठ ने जूनियर डॉक्टरों को 24 घंटो में काम पर लौटने के आदेश दिये हैं। निर्धारित समय सीमा पर जूनियर डॉक्टर हड़ताल समाप्त कर काम पर नहीं लौटते है तो सरकार उनके खिलाफ सख्त कार्यवाही करें। युगलपीठ ने कोरोना महामारी काल में जूनियर डॉक्टर के हड़ताल पर कहा है कि विपत्तिकाल में हड़ताल को किसी प्रकार से प्रोत्साहित नहीं किया जा सकता है।







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