BREAKING NEWS : देखिए लाल किले के पास हुए बम धमाके की खौफनाक तस्वीरें, 8 लोगों की मौत    |    Breaking : 1 नवंबर को सभी स्कूल – कॉलेजों में रहेगी छुट्टी, आदेश जारी    |    BIG BREAKING : सी.पी. राधाकृष्णन होंगे भारत के नए उपराष्ट्रपति    |    साय कैबिनेट की बैठक खत्म, लिए गए कई अहम निर्णय    |    CG Accident : अनियंत्रित होकर पेड़ से टकराई तेज रफ्तार कार, युवक-युवती की मौके पर ही मौत, 3 की हालत गंभीर    |    Corona Update : छत्तीसगढ़ में फिर डराने लगा कोरोना, इस जिले में एक ही दिन में मिले इतने पॉजिटिव मरीज    |    प्रदेशवासियों को बड़ा झटका, बिजली दरों में हुई बढ़ोतरी, जाने प्रति युनिट कितने की लगेगी चपत    |    छत्तीसगढ़ में बढ़ा कोरोना का खतरा: 20 दिनों में 3 मौतों के बाद प्रशासन अलर्ट मोड पर    |    Ration Card के बदले रोजगार सहायक की Dirty Deal, बोला- ‘पहले मेरे साथ शारीरिक संबंध बनाओ फिर मिलेगा राशन कार्ड    |    छत्तीसगढ़ में तेजी से पांव पसार रहा कोरोना, रायपुर में सबसे ज्यादा केस, राज्य में कुल 45 एक्टिव केस    |

पाठ्य पुस्तक निगम के महाप्रबंधक अशोक चतुवेर्दी को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत, पढ़ें पूरी खबर

पाठ्य पुस्तक निगम के महाप्रबंधक अशोक चतुवेर्दी को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत, पढ़ें पूरी खबर
Share

रायपुर।  सर्वोच्च न्यायालय से आज पाठ्य पुस्तक निगम के महाप्रबंधक अशोक चतुर्वेदी को थोड़ी राहत मिली है। सर्वोच्च न्यायालय ने अशोक चतुर्वेदी पर ईओडब्ल्यू एसीबी रायपुर में हुई एफआईआर के विरूद्ध याचिका पर सुनवाई हुई। एफआईआर पर स्टे लगाते हुए छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में सुनवाई तक अशोक चतुर्वेदी को परेशान ना करने कहा गया। बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों न्यायमूर्ति एएम खानविलकर, न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना के समक्ष सुनवाई हुई। मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एफआईआर 16/2019 और 19/2020 में स्थगन आदेश दिया है। कहा गया कि छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में मामले की सुनवाई तक किसी भी प्रकार से याचिका कर्ता को परेशान ना किया जाए।

पढ़िए पूरी खबर-
सर्वोच्च न्यायालय की खंडपीठ ने निर्देश दिया है कि छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में मामले की सुनवाई तक किसी भी प्रकार से याचिकाकर्ता को परेशान ना किया जाए। याचिकाकर्ता के वकीलों ने बताया कि राज्य के बड़े उच्चाधिकारियों के दबाव में दुर्भावनावश बार बार एफआईआर की जा रही है। इसे सर्वोच्च न्यायालय ने गंभीरता से लेते हुए स्थगन आदेश जारी किया है। सर्वोच्च न्यायालय की खंडपीठ को यह भी बताया गया कि तीन मामलों में पूर्व में उच्च न्यायालय से अंतरिम राहत दिए जाने के बावजूद अवमानना करते हुए एफआईआर पंजीबद्ध किया गया जिस पर सर्वोच्च न्यायालय ने अवमानना याचिका की बात भी कही है। याचिकाकर्ता ने प्रदेश के तीन अफसरों को उत्तरवादी बनाते हुए गम्भीर आरोप लगाए हैं। मामले की पैरवी सुप्रीम कोर्ट के सीनियर अधिवक्ता मुकुल रोहोतगी एवं उनके साथी अधिवक्ता अभिनव श्रीवास्तव , आशुतोष पाण्डेय, शशांक ठाकुर, ए.व्ही.श्रीधर एवं हिमांशु सिन्हा ने की।

Share

Leave a Reply