धर्मांतरण की बढ़ती घटनाओं पर कड़ाई से रोक लगाने राज्यपाल से मिला भाजपा का प्रतिनिधि मंडल
रायपुर: छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार आने के बाद से ही यहां धर्मांतरण की घटनाएं लगातार बढ़ रही है। राजधानी रायपुर से लेकर सुदूर आदिवासी इलाकों तक में ऐसी घटनाएं बड़ी तादाद में हो रही हैं। पिछले दिनों सुकमा के पुलिस अधीक्षक ने तो बाकायदा पत्र जारी कर इस गंभीर समस्या के प्रति पुलिस अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराया था, लेकिन बजाय इसके रोकथाम के शासन पूरी तरह पेशेवर प्रचारकों के पक्ष में खड़ी और उसका बचाव करती नज़र आती है। ऐसे असामाजिक और विधर्मी तत्वों के हौसले बुलंद हैं। दुखद यह है कि इसके खिलाफ आवाज़ उठाने वाले सनातन समाज के लोगों को उलटे प्रताड़ित किया जा रहा है।
इन तत्वों के शासन द्वारा बढाए इसी मनोबल का दुष्परिणाम है कि ऐसी गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। राजधानी रायपुर से सटे भाटागांव में भी पिछले दिनों हिन्दू समाज के लोगों द्वारा एसपी रायपुर को शिकायत करने के बावजूद भी प्रशासन आंख मूंदें रहा। दुबारा कार्यकर्ताओं द्वारा फिर थाने में शिकायत किये जाने पर उलटे शिकायतकर्ताओं को ही जेल में डाल दिया गया है। वहां आरोपी दुसरे पक्ष पेशेवर मत प्रचारकों को पुलिस थाने में बैठा कर आवभगत की जा रही थी। इस कारण वहां काफी अप्रिय स्थिति भी उत्त्पन्न हो गयी थी।
आश्चर्य यह है कि जहां बार-बार आवेदन देने पर भी दूसरे पक्ष पर कारवाई नहीं की गयी, वहीं दुसरे पक्ष की शिकायत पर तुरंत प्राथमिकी दर्ज कर, अपराध पंजीबद्ध कर दिया गया. बाद में अन्य अनेक गंभीर धाराएं भी उन पर लगा दी गयी। प्राइवेट पक्ष द्वारा दर्ज करायी शिकायत में ‘शासकीय कार्य में बाधा डालने’ की धारा लगा देना यह साबित करता है कि प्रशासन किस तरह दबाव में एकपक्षीय कारवाई कर रहा है. संबंधित अधिकारियों का तुरंत तबादला कर देना भी इस मामले में ‘काफी ऊंचे स्तर’ के दखल की आशंका को भी पुष्ट करता है।
इसी बीच विशेष समुदाय के नेताओं का एक काफी भड़काउ वीडियो भी वायरल हुआ, जिसमें वह संविधान के अनुच्छेद 25 का हवाला देकर लगातार लोगों को उकसा रहा है, मतांतरण करते रहने की बात वह कर रहा है। ऐसे में क़ानून-व्यवस्था पर गंभीर संकट पैदा हो गया है, अब महामहिम का दखल ऐसे में अनिवार्य है। दुखद यह है कि न केवल वह धर्म परिवर्तन कराने की बात कर रहा है अपितु संविधान को जलाने तक की बात की जा रही है। बावजूद इसके पुलिस के द्वारा उनके विरुद्ध किसी प्रकार की कार्यवाही नहीं की गई।
भाजपा का कहना है कि धर्मांतरण वास्तव में ‘राष्ट्रांतरण’ ही होता है। महान भारतवर्ष की अखंडता को सबसे अधिक चोट ऐसे ही धर्मांतरण से पहुंचा है.भारतवर्ष काफी बड़े स्तर पर मतांतरण के दुतरफा षड्यंत्र का शिकार हो रहा है। छत्तीसगढ़ भी उनकी प्रयोगस्थली के रूप में एक सॉफ्ट टार्गेट है। पिछले दिनों खुद एक वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री ने प्रदेश के सरगुजा संभाग में रोहिंग्याओं को बसाए जाने की बात कही थी। ऐसे में हमें अतिरिक्त सावधान रहना होगा. प्रदेश में संविधान के अंतिम रक्षक होने के नाते भाजपा आपसे इस गंभीर मामले पर ध्यान आकृष्ट कराते हुए मांग करती है
शासन को स्पष्ट निर्देशित कर जबरन धर्मांतरण की कारवाई पर अंकुश लगाए।
संविधान जलाने जैसी घोर आपतिजनक बात तक कहने वाले पास्टर और उनके लोगों के विरुद्ध राजद्रोह और धार्मिक भावनाएं भड़काने का अपराध दर्ज हो।
जबरन धर्मांतरण का विरोध करने वाले कार्यकर्ताओं की तुरंत रिहाई हो. उनके विरुद्ध की गयी सभी एकपक्षीय कारवाई निरस्त हो।
छत्तीसगढ़ के विभिन्न थानों में जिन लोगों के खिलाफ भय-लोभ से धर्मांतरण कराये जाने की शिकायत दर्ज है, उन पर शीघ्र कारवाई हो। ऐसे तमाम लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की सुसंगत धाराओं के तहत त्वरित कारवाई हो।
ऐसे सभी शिकायतों का निराकरण सर्वोच्च प्राथमिकता देकर किये जाएं।







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