मौसम में हो रहे बदलाव के चलते अस्पतालों में लगी मरीजों की कतार, निजी अस्पतालों में पांव रखने की जगह नहीं
रायपुर। क्वांर के महीने में उमस के बीच समय समय पर हो रही खंड वर्षा के चलते मौसम में आए बदलाव के कारण नमी एवं उमस के चलते आए दिन लोग बीमार पड़ रहे हैं। कोरोना वायरस कोविड 19 की महामारी के चलते शहर के अधिकतम हास्पिटल इन दिनों फुल चल रहे हैं।
निजी चिकित्सा संस्थानों में भी कोरोना के अलावा अन्य बीमारियों के इलाज के लिए न तो वहां के चिकित्सकों के पास समय है और न ही पर्याप्त मात्रा में भर्ती के लिए वार्ड में स्थान रिक्त है। ऐसी स्थिति में मेकाहारा जिला अस्पताल एम्स सहित शहर के सभी छोटे-बड़े चिकित्सा संस्थानों में ग्रामीण क्षेत्रों से आ रहे मरीज वापस किये जा रहे हैं। संक्रामक बीमारी के दौर में दिल्ली से एक स्वयंसेवी स्वास्थ्य संगठन से मिली जानकारी के अनुसार ये स्थिति लंबे समय तक जारी रहेगी।
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वहीं एम्स हास्पिटल दिल्ली ने राज्यों को कोरोना के खतरे के साथ ही आने वाली शीत ऋतु में डेंगू और मलेरिया के प्रकोप से चिकित्सकों के मार्गदर्शन में आवश्यक सावधानी बरतने का आग्रह किया है। अन्य बीमारियों में हड्डियों में दर्द, डायरिया, उल्टी, दस्त एवं मस्तिष्क एवं दिल से संबंधित बीमारियों के साथ ही हृदय रोग के मरीजों को मौसम में आए बदलाव के कारण जहां तकलीफों का सामना करना पड़ रहा है वहीं आरटीआई कार्यकर्ता डॉ. चंद्रमणी तिवारी ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से कोविड 19 वार्ड के अलावा अन्य मरीजों की चिकित्सा के लिए भी तत्काल प्रभाव से उचित व्यवस्था करने का आग्रह किया है।
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निजी चिकित्सा संस्थानों में भी मिली जानकारी के अनुसार पूरे अस्पताल को कोविड 19 में परिवर्तित करने में मेडिकल संचालकों को कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। डॉ. आरडी अग्रवाल के अनुसार शहर के सभी अस्पतालों को शासन द्वारा कोविड 19 के संक्रमण को रोकने के लिए अधिग्रहित किया जाता है तो अन्य मरीजों को बीमारियों के गंभीर खतरे का सामना करना पड़ेगा। डॉ. मंजू शुक्ला एवं डॉ. मीनाक्षी तारे के अनुसार निजी चिकित्सा संस्थानों के कुछ वार्डों को ही कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए आइसोलेटेड किया जाना चाहिए ताकि अन्य मरीजों को भी विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा उनकी बीमारी का त्वरित उपचार मिल सके।




