नेपाल-तिब्बत सीमा की बाढ़ में भाजपा नेता की बेटी समेत छत्तीसगढ़ की तीन महिलाएं लापता    |    बहनों का स्नेह और आशीर्वाद मेरे लिए अनमोल : मुख्यमंत्री साय    |    लोकतंत्र सेनानियों का त्याग नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा है : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय    |    BREAKING : बंगाल का नया CM- शुभेंदु अधिकारी होंगे प. बंगाल के नए सीएम- अमित शाह ने किया सीएम का एलान    |    BREAKING NEWS : देखिए लाल किले के पास हुए बम धमाके की खौफनाक तस्वीरें, 8 लोगों की मौत    |    Breaking : 1 नवंबर को सभी स्कूल – कॉलेजों में रहेगी छुट्टी, आदेश जारी    |    BIG BREAKING : सी.पी. राधाकृष्णन होंगे भारत के नए उपराष्ट्रपति    |    साय कैबिनेट की बैठक खत्म, लिए गए कई अहम निर्णय    |    CG Accident : अनियंत्रित होकर पेड़ से टकराई तेज रफ्तार कार, युवक-युवती की मौके पर ही मौत, 3 की हालत गंभीर    |    Corona Update : छत्तीसगढ़ में फिर डराने लगा कोरोना, इस जिले में एक ही दिन में मिले इतने पॉजिटिव मरीज    |

ससुर ने विधवा बहू की दूसरी शादी कराकर समाज के सामने पेश किया मिसाल

 ससुर ने विधवा बहू की दूसरी शादी कराकर समाज के सामने पेश किया मिसाल
Share

भिलाई। जीवन में जवान बेटे की अर्थी को कांधा देने वाले पिता के दुखों को बयान करने के लिए शब्द नहीं मिलते। वैसे ही विवाह के महज डेढ़ साल के भीतर पति के अकास्मिक निधन के बाद पहाड़ जैसी जिंदगी को सहना एक स्त्री के लिए पल-पल मरने के समान है। ऐसे में बहू के प्रति ससुर के उत्तरदायित्व की अनुकरणीय मिसाल ने क्षत्रिय समाज में एक आदर्श को स्थापित किया है।
 

बीएसपी के मशीन शॉप 2 में सीनियर मैनेजर के पद से जनवरी 2018 में सेवानिवृत्त मकान नं. 1184ए, स्ट्रीट 23, शांतिनगर, भिलाई निवासी अनुग्रह नारायण सिंह ने अपनी विधवा बहू का बेटी की तरह दूसरी शादी करवाकर न केवल क्षत्रिय समाज बल्कि अन्य समाजों के समक्ष भी एक अनुकरणीय उदाहरण पेश किया हैं। उन्होंने अपने बहू की शादी में बेटी की तर्ज पर लगभग 8 लाख से अधिक के जेवरात सहित हर वह सामान उपहार में दिया है जो एक गृहस्थी चलाने में जरूरी है।

 
जानकारी के अनुसार अनुग्रह नारायण सिंह के बड़े बेटे मृत्युंजय सिंह का विवाह मई 2017 में कुम्हारी निवासी हरेन्द्र सिंह की बेटी रति सिंह के साथ हुआ था। इस शादी से उन्हें एक पुत्री सगुन (साढ़े तीन वर्ष) है। मृत्युंजय व रति को वैवाहिक जीवन खुशियों से आबाद था पर यह खुशी ज्यादा दिन न रह सकी। नवंबर 2018 में मृत्युंजय सिंह का निधन हो गया। इसके बाद उनकी बिटिया सगुन को चाचा अभिषेक व चाची पूनम सिंह ने विधिवत गोद ले लिया। पति के असमय निधन से रति सिंह टूट सी गई और वह हमेशा उदास रहने लगी। बहू की उदासी ससुर अनुग्रह नारायण सिंह को रह रहकर कचोटने लगती। आखिरकार उन्होंने बहू की दूसरी शादी करवाने का मन बना लिया। परिवार के सदस्यों से मंत्रण करने के बाद बहू के मायके पक्ष से भी चर्चा की गई। दोनों परिवार में सहमति बन जाने के बाद रति के लिए नये रिश्ते की तलाश शुरू हो गई।
 
 
असमय पति के निधन से रंगहीन हो चुकी रति सिंह का जीवन एक बार फिर नये रंग से आबाद हो गया। रेनुगुट्टा तिरूपति के निची कम्पनी में कार्यरत बिहार के आरा जिला पीपरपाटी गाँव के मूल निवासी रमेश सिंह पिता स्व.परशुराम सिंह के साथ सामाजिक रीति रिवाज से 7 दिसम्बर को रति सिंह की शादी सम्पन्न हो गई। शादी का समारोह आरा जिले के द रिगल होटल में आयोजित था जिसमें अनुग्रह नारायण सिंह और रति सिंह को मायका पक्ष सहित अन्य रिश्तेदारों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
 
 
खास बात यह रही कि, अनुग्रह नारायण सिंह ने अपनी बहू की शादी का पूरा खर्चा स्वयं उठाया। रति के माता-पिता को कोई भी खर्च करने नहीं दिया। उन्होंने 8 लाख से उपर के जेवर, मोटरसायकल, टीवी, फ्रिज, पलंग, आलमारी सहित गृहस्थ जीवन के उपयोगी सारे सामान उपहार में नवदम्पत्ति को दिया। शादी तय होने से पहले अनुग्रह नारायण सिंह ने वर पक्ष को रति सिंह के पिछली जिंदगी से जुड़ी हर पहलू से अवगत करा दिया था। वर रमेश के पिता का स्वर्गवास हो चुका है और वह अपनी माँ का एकलौता बेटा है। उसकी माँ ने भी इस शादी पर सहर्ष स्वीकृति प्रदान कर समाज में एक नया संदेश दिया है।


Share

Leave a Reply