राष्ट्रीय राजमार्गों से लगभग विलुप्त हुए लावारिस पशुओं के झुंड: गौठानों के निर्माण से सड़कों पर कम हुए आवारा जानवर
रायपुर। छत्तीसगढ़ में अनेक व्यस्त राष्ट्रीय राजमार्गों और मुख्य सड़कों पर गाय, बैल, बछड़े आदि घरेलू पशुओं के लावारिस झुंड लगभग विलुप्त हो गए हैं। इसके फलस्वरूप अब सड़क हादसों में भी कमी देखी जा रही है। सड़कों के आसपास के गांवों के पशु पालकों द्वारा अपने अनुपयोगी पशुओं को लावारिस छोड़ देने के कारण इन मार्गों पर पशु भटकते रहते थे। रात्रि में इनकी वजह से कई बार वाहन दुर्घटनाएं भी हो जाती थी। लेकिन अब स्थिति तेजी से बदल रही है।
उच्च पदस्थ सूत्रों ने आज यहां राष्ट्रीय न्यूज सर्विस (आरएनएस) को बताया कि प्रदेश की सड़कों पर लावारिस पशुओं की भीड़ करीब-करीब विलुप्त हो जाने का मुख्य कारण ये है कि प्रदेश सरकार की सुराजी गांव योजना के तहत विभिन्न जिलों के गांवों में गौठानों का निर्माण करवाया जा रहा है, जहां लावारिस पशुओं को चारे-पानी के साथ एक सुकून भरा आसरा भी मिल रहा है। यह मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सर्वाेच्च प्राथमिकता वाली योजना है।
अधिकारियों के अनुसार इस योजना के प्रथम चरण में 1286 तथा दूसरे चरण में 3926 गौठान निर्माण की मंजूरी दी गई थी। प्रदेश भर में अब तक इनमें से एक हजार 996 गौठानों का निर्माण पूरा कर लिया गया है और वर्तमान में लगभग 2800 गौठानों का निर्माण प्रगति पर है। मुख्यमंत्री ने इस योजना की समीक्षा के बाद अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि गौठानों को पशुओं के आश्रयस्थल के साथ-साथ गांवों की रोजगारमूलक आर्थिक गतिविधियों का भी केन्द्र बनाया जाए ताकि ग्रामीणों और विशेषरूप से पशुपालकों तथा किसानों की आर्थिक स्थिति बेहतर हो सके। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्माणाधीन गौठानों का निर्माण भी जल्द पूर्ण करवाने के निर्देश दिए हैं।
अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर इन गौठानों में गौपालन के साथ-साथ मछलीपालन, बकरीपालन और सब्जी उत्पादन जैसी आमदनी मूलक गतिविधियों के संचालन के लिए भी तैयारी की जा रही है। कोरोना महामारी के चलते देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान विभिन्न राज्यों से छत्तीसगढ़ के प्रवासी श्रमिक बड़ी संख्या में अपने गृहराज्य वापस आ गए हैं। राज्य सरकार ने उनके स्वास्थ्य की बेहतरी क लिए जहां क्वारेंटाईन सेंटरों में उचित व्यवस्था की है, वहीं उन्हें मनरेगा के तहत निर्माण कार्यों में रोजगार भी दिया जा रहा है। राज्य शासन की मंशा है कि गौठानों को आर्थिक गतिविधियों का केन्द्र बनाकर स्थानीय ग्रामीणों के साथ-साथ इन प्रवासी श्रमिकों के लिए भी रोजगार के नए अवसर विकसित किए जाएं।
अधिकारियों ने बताया कि कई गौठानों में पशुओं के गोबर से जैविक खाद का भी उत्पादन किया जा रहा है। इन गौठानों के रख-रखाव और सुचारू संचालन के लिए ग्राम पंचायतों के स्तर पर ग्रामीणों की समितियां भी गठित की गई हैं। प्रदेश में लगभग ग्यारह हजार ग्राम पंचायतें हैं। राज्य सरकार की सुराजी गांव योजना के तहत शत-प्रतिशत ग्राम पंचायतों में गौठान निर्माण का लक्ष्य है।




