BREAKING NEWS : देखिए लाल किले के पास हुए बम धमाके की खौफनाक तस्वीरें, 8 लोगों की मौत    |    Breaking : 1 नवंबर को सभी स्कूल – कॉलेजों में रहेगी छुट्टी, आदेश जारी    |    BIG BREAKING : सी.पी. राधाकृष्णन होंगे भारत के नए उपराष्ट्रपति    |    साय कैबिनेट की बैठक खत्म, लिए गए कई अहम निर्णय    |    CG Accident : अनियंत्रित होकर पेड़ से टकराई तेज रफ्तार कार, युवक-युवती की मौके पर ही मौत, 3 की हालत गंभीर    |    Corona Update : छत्तीसगढ़ में फिर डराने लगा कोरोना, इस जिले में एक ही दिन में मिले इतने पॉजिटिव मरीज    |    प्रदेशवासियों को बड़ा झटका, बिजली दरों में हुई बढ़ोतरी, जाने प्रति युनिट कितने की लगेगी चपत    |    छत्तीसगढ़ में बढ़ा कोरोना का खतरा: 20 दिनों में 3 मौतों के बाद प्रशासन अलर्ट मोड पर    |    Ration Card के बदले रोजगार सहायक की Dirty Deal, बोला- ‘पहले मेरे साथ शारीरिक संबंध बनाओ फिर मिलेगा राशन कार्ड    |    छत्तीसगढ़ में तेजी से पांव पसार रहा कोरोना, रायपुर में सबसे ज्यादा केस, राज्य में कुल 45 एक्टिव केस    |

इस जिले में मनाई जाती है देवी देवता के साथ होली, भारी मात्रा में दूर दूर से आते है लोग

इस जिले में मनाई जाती है देवी देवता के साथ होली, भारी मात्रा में दूर दूर से आते है लोग
Share

कोण्डागांव| आपको बता दे की छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले की अपनी संस्कृति और परंपरा के लिए विश्वविख्यात है। यहॉ अनेक अवसरों पर होने वाली रिति-रिवाज व विधानों के साथ विभिन्न तरह के आयोजन सालभर चलते रहते है। ऐसा ही एक मौका होली के बाद पडऩे वाला पहले शनिवार को जिला मुख्यालय से तकरीबन 12 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत लंजोड़ा के बाजार में देखने के मिला।


पारंपरिक साज-सज्जा और विधि-विधान के साथ खेलते है होली-

जानकारी के मुताबिक होली पर्व के बाद पडऩे वाले पहले शनिवार को आसपास के देवी देवतां इस बाजार परिसर में विशेषरूप से आंमत्रित होते है। इस धुरनी बाजार व होली पर देवी-देवता अपने पूरे पारंमपरिक साज-सज्जा के साथ यहॉ पहुंच विधि-विधान के साथ होली खेलते है।


देवगुड़ी परिसर में होता है आयोजित आयोजित- 

आपको बता दे की इस धुरनी होली को देखने और इस आयोजन में शामिल होने लोग दूर-दूर से भी आते है। और देवताओं के साथ होली खेलते हुए उनका आशीर्वाद लेते है। इसे देवताओं का होली मिलन भी कहा जाता है यह पूरा विधान देवगुड़ी परिसर में आयोजित होता है। वही देवताओं के बाजार परिसर की परिक्रमा के साथ ही इस आयेजन का समापन होता है।

 



Share

Leave a Reply