कोरोना संक्रमण में बीच कल संतान की दीर्घायु के लिए महिलाएं रखेंगी व्रत, पसहर चावल खाकर तोड़ेंगी उपवास
रायपुर। कोरोना काल के बीच 9 अगस्त को महिलाएं अपने बच्चे व कुटुंभ की सुख समृद्धि हलषष्ठी का व्रत रखकर पूजा करेंगी। इस दिन महिलाओं को पूजा करने तक निर्जला व्रत रखेंगी। पूजा खत्म होने के बाद माताएं पूजा के लिए बनाए गए तालाब से अमृत रूपी जल से बच्चों का मुंह धुलवाएंगी। इसके बाद उसमें कपड़ा गीलाकर उनकी पीठ पर आशीर्वाद भरा पोता मारेंगी।
मान्यता है कि ऐसा करने से बच्चे स्वस्थ व दीर्घायु होते हैं। पूजा के बाद महिलाएं इस दिन भैंस के दूध से बने चाय पीकर अपना उपवास तोड़ती है, उसके बाद बिना हल से तैयार हुआ चावल (पसहर चावल) व छह प्रकार की भाजी बनाकर बिना तड़का लगाए भोजन ग्रहण करेंगी। यह पर्व कल मनाया जाएगा। इस बार महिलाओं को तैयारियों की चिंता सताने लगी थी, क्योंकि कोरोना संक्रमण के कारण 6 अगस्त तक शहर बंद था। वहीं घर-घर जाकर पूजा में लगने वाली सामग्री को छोडऩे वाले लोग भी इस बार कोरोना के डर के नहीं निकलें रहें हैं।
इसके अलावा शहर में लॉकडाउन भी था। इधर, महिलाओं को लॉकडाउन खुलेगा या बढ़ेगा इसे लेकर चिंतित थी, लेकिन शुक्रवार को बाजार खुला देख महिलाओं के चेहरे खिल गए। महिलाएं बाजार में पूजा की सारी सामग्रियां खरीदादारी की। ज्ञात हो कि लॉकडाउन के कारण बाजार पिछले 13 दिनों से बंद था। शुक्रवार को बाजार खुल गया है। अब महिलाएं पूजन सामग्री खासकर महुए का पता, कुश आदि की खरीददारी कर रही हैं। पर्व को अब एक दिन ही शेष रहे गए हैं।
बाजार में बिक रहा पसहर चावल-
बाजार में बिना हल से तैयार होने वाला पसहर चावल की बिक्री हो रही है। यह चावल 160 रूपये किलो बिक रहा है। इसके अलावा लाई महुआ, कुश आदि पूजा की सामग्री भी बाजार में बिकने के लिए पहुंच गई है। पूजा अर्चना के बाद महिलाएं यहीं चावल का ग्रहण करेंगी।
छह प्रकार की सामग्री का किया जाता है उपयोग-
भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष का छठवां दिन, छह प्रकार की भाजी, छह प्रकार के खिलौने, छह प्रकार के अन्न वाला प्रसाद तथा छह कहानी की कथ इस व्रत का संयोग है। पूजर के बाद व्रत करने वाली महिलाएं जब भोजन के लिए बैठती है, तो उनके भोज्य पदार्थ में पसहर का भात, छह प्रकार की भाजी जिसमें मुनगा, कुम्हड़ा, सेमी, तरोई, करेला, मिर्च शामिल होता है। इनके साथ ही भैंस का दूध, दहीव घी, सेंधा नमक, महुआ के पत्ते का दोना आदि का उपयोग किया जाएगा।
यह है हलषष्ठी की पौराणिक कथा-
व्रत की पौराणिक कथा के अनुसार वासुदेव-देवकी के छह पुत्रों को कंस ने कारावास में मार डाला। जब सावतें बच्चें के जन्म का समय नजदी आया तो, देवर्षि नारद ने देवकी को हलषष्ठी का व्रत रखने की सलह दी। देवकी ने इस व्रत को सबसे पहले किया, जिससे उनके आने वाले संतान की रक्षा हुई।




