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राज्य में बीज प्रदायकर्ता बरत रहे लापरवाही: कौशिक

 राज्य में बीज प्रदायकर्ता बरत रहे लापरवाही: कौशिक
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रायपुर। विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान आज नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक एवं सौरभ सिंह ने ध्यानाकर्षण के माध्यम से प्रदेश में बीज प्रदायकर्ताओं द्वारा अनियमितता बरते जाने का मामला सदन में लाया। 

कौशिक व सौरभ सिंह ने ध्यानाकर्षण में बताया कि-प्रदेश में धान का बीज वैरायटी जेकेआरएच 3333 एवं मक्का के बीज वैरायटी जेकेएमएच 2222 का क्रय आदेश बीज निगम के द्वारा प्रदायकर्ता को देने के पश्चात भी प्रदायकर्ता द्वारा बीजों की आपूर्ति न करना व निगम के द्वारा इनके विरुद्ध कोई कार्यवाही न करना भारी अनियमितता को इंगित करता है। बीीज निगम के द्वारा जो रेट कॉन्टै्रक्ट, हाइब्रिड धान व क्का के बीज हेतु विगत व इस वित्तीय वर्ष में किए गए हैं, उनमें नोटिफाइड प्रयोगशाला से निविदाकर्ताओं को टेस्टिंग रिपोर्ट दिया जाना अनिवार्य था। निविदाकर्ताओं के द्वारा नोटिफाइड प्रयोगशाला के स्थान पर अन्य प्रयोगशालाओं से टेस्टिंग रिपोर्ट प्राप्त कर दी गई है तथा इसी प्रकार त्रिमूर्ति प्लांट साइंस लिमिटेड द्वारा हाईब्रिड धान बीज कि किस्म का डीएनए व मार्कर अभी तक टेस्टिंग हेतु उपलब्ध नहीं कराया गया है। लगातार इस हेतु इन्हें स्मरण पत्र दिए गए हैं, इसके बिना ही उन्हें लगातार आदेश दिए जा रहे हैं। बीज निगम के क्रय आदेश में व रेट कान्टे्रक्ट में स्पष्ट है कि 15 दिवस के अंदर यदि बीज प्रदाय नहीं किया जाता है तो संबंधित फर्म को ब्लैड लिस्ट किया जाएगा व उसकी अमानती राशि जब्त की जाएगी। लेकिन समस्त जिलों में 15 दिवस के अंदर बीज नहीं देकर 15 दिवस के बाद बीज प्रदान किया गया है और बीज निगम के द्वारा इस पर कोई कार्यवाही नहीं करना अनियमितता किए जाने की ओर इंगित करता है। इस वर्ष सोयाबीन व स्वर्णा धान के गुणवत्ताहीन बीजों के वितरण से किसानों को भारी आर्थिक हानि हुई व इससे जनता में भारी रोष व्याप्त है। 

इसके जवाब में प्रदेश के कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे ने अपने वक्तव्य में बताया कि-छग राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम द्वारा धान बीज वैरायटी जेकेआरएच 3333 एवं मक्का बीज की वैरायटी जेकेएमच 2222 के प्रदाय एवं आपूर्ति में किसी भी प्रकार की अनियमितता नहीं बरती गई है। वर्ष 2019-20 में हायब्रीड धान एवं मक्का बीज की आपूर्ति हेतु आमंत्रित निविदा में सभी इच्छुक कंपनियों अथवा प्रदायकर्ताओं को प्रजातिवार मॉल्युक्युलर टेस्ट रिपोर्ट ऑनलाइन निविदा में अपलोड करने के निर्देश दिए गए थे। निविदा हेतु तकनीकी समिति द्वारा निर्धारित की गई शर्तों में निविदाकर्ताओं को नोटिफाईड प्रयोगशाला से टेस्ट रिपोर्ट प्रस्तुत करने संबंधी कथन आधारहीन है। सभी निविदाकर्ताओं द्वारा भारत सरकार विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के विज्ञान एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग नई दिल्ली द्वारा मान्यता प्राप्त स्वयं के अनुसंधान एवं विकास इकाई (आर एंड डी यूनिट) के प्रयोगशाला का टेस्ट रिपोर्ट आनलाइन निविदा में अपलोड किया गया था। त्रिमूर्ति प्लांट साइंस लिमिटेड द्वारा हाइब्रिज बीज हेतु डीएनए मार्करर उपलबध नहीं कराने के संबंध में संबंधित प्रदायकर्ता को निविदा अनुबंध शर्तों के प्रावधान अनुसार आरसीओ निरस्त करने के संबंध में कारण बताओ सूचना भी जारी किया गया है। छग राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम द्वारा निविदा के माध्यम से निर्धारित दर पर अनुबंध में प्रदाय आदेश जारी होने के 15 दिवस के भीतर सामग्री आपूर्ति करने का प्रावधान रहता है। समयावधि में साग्री की आपूर्ति असपुल रहने पर प्रदाय आदेश निरसत करने सुरक्ष्ज्ञा निधि राजसात करने एवं प्रदायक संस्था को काली सूची में डालने संबंधी प्रावधान किया गया है। बीज निगम द्वारा हायब्रिड बीजों की आूपर्ति हेतु अनुबंधित फर्मों द्वारा समयावधि के भीतर सामग्रियों की आपूर्ति की गई है अत: कार्यवाही संबंधी प्रश्र उपस्थित नहीं होता। 

चौबे ने सदन में बताया कि इस वर्ष बीज निगम के माध्यम से कृषकों को विपरीत स्वर्णा धान एवं सोयाबीन बीज के गुणवत्ताहीन होने संबंधी जानकारी प्राप्त नहीं हुई है। बल्कि प्रदेश के कुछ जिलों में कृषकों के खेतों में जलभराव होने के कारण धान बीज का अंकुरण नहीं होने की जानकारी प्राप्त हुई है। प्रदेश के पांच जिलों में सोसाबीन बीज में कम अंकुरण संबंधी मामला प्रकाश में आने पर 538 कृषकों को कुल 42, 56, 976 रूपए का मुआवजा प्रदान किया गया है। प्रदेश के किसान भाईयों को उच्च गुणवत्ता युक्त कृषि आदान सामग्रियां समय सीमा में प्रदान करने हेतु छग राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम लिमिटेड प्रतिबद्ध है। बीज निगम द्वारा अपनाई जा रही प्रक्रिया से जनता में किसी भी प्रकार का रोष एवं आक्रोश व्याप्त नहीं है। 


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