शासकीय अभियान्त्रिकी महाविद्यालय रायपुर में नवप्रवेषित छात्रों हेतु सात दिवसीय ऑनलाइन इंडक्शन प्रोग्राम का आयोजन
रायपुर। शासकीय अभियान्त्रिकी महाविद्यालय रायपुर में नवप्रवेषित छात्रों हेतु सात दिवसीय ऑनलाइन इंडक्शन प्रोग्राम का आयोजन किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत नवप्रवेषित छात्रों को प्रोत्साहन देने और उन्हें किताबी ज्ञान के अलावा मौलिक और ज़रूरी गूढ़ विद्या सिखाने के लिए विभिन्न क्षेत्रों के विषय विशेषज्ञ अपने अनुभव उनसे साझा कर उन्हें भविष्य के लिए तैयार करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
कार्यक्रम के दूसरे दिन की शुरुआत, माँ सरस्वती के आवाह्न के पश्चात कार्यक्रम समन्वयक प्रो. डॉ. श्वेता चौबे, विभागाध्यक्ष, बेसिक साइंस विभाग और इंडक्शन कार्यक्रम समन्वयक के स्वागत उदबोधन से हुई। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि, हम छात्रों और विशेषज्ञों को जोड़ने वाले पुल हैं, हम आपको मानसिक,बौद्धिक और सांसारिक आदि परिस्तिथियों से डटकर मुकाबला कर जीतने के योग्य बनाना चाहते हैं । अतः यह सब आपको मानसिक जकड़न से निकाल कर खुले तौर पर निर्णय लेने में सक्षम बनाएंगे, सभी छात्र इसका फ़ायदा ज़रूर उठाएं। कार्यक्रम के पहले वक्ता, श्री अमितेष कुमार झा, सहा. प्राध्यापक, गुरु घासी दास विश्विद्यालय रहे ,उन्होंने प्रेरणादायक कहानियों के माध्यम से छात्रों को स्ट्रेस प्रबंधन, मेडिटेशन आदि की सीख दी, उन्होंने कहा कि खाली गिलास का ज्यादा वजन नहीं होता, लेकिन उसको पूरे दिन पकड़ कर रखने से हाथ स्ट्रेस और दर्द महसूस करेगा, ऐसा ही मन के साथ है, आप मन में चीजों को जितनी देर रखेंगे, मानसिक पीड़ा उतनी ही बढ़ती जाएगी । इसलिए जहाँ की बात है उसको वहीं तक रखें, मन-मष्तिष्क में कैरी करके ना रखें ।
कार्यक्रम के अगले वक्ता श्री मनीष मिश्रा, संयुक्त संचालक, मानव अधिकार आयोग, छत्तीसगढ़ रहे, उन्होंने छात्रों से कहा कि, एक अच्छा व्यक्ति बनने हेतु हमें ख़ुद और समाज के प्रति ईमानदार होना चाहिए, उन्होंने कार्य-योजना, उसका संचालन, समन्वयीकरण, रिपोर्टिंग इत्यादि पर विस्तृत चर्चा कर सटीक क्रियान्वयन कर मनचाहा परिणाम पाने पर बल दिया।
कार्यक्रम के अगले वक्ता के रूप में श्री शशांक शर्मा, पूर्व निर्देशक, छत्तीसगढ़ राज्य ग्रंथ अकादमी, एवं पत्रकार उपस्थित रहे, उन्होंने अपने वक्तव्य में अपने अनुभवों को साझा किया और छात्रों को कबीर दास जी का दोहा
" कबीरा जब हम पैदा हुए, जग हँसे हम रोये |
ऐसी करनी कर चलो, हम हँसे जग रोये || " उद्धरित कर उनसे कहा कि, मनुष्य कर्म प्रधान है, लेकिन कर्म ऐसे होने चाहिए कि, आपके काम और आपकी कार्यशैली की कमी सभी को खले । जीवन मे यह कर पाना हर कर्म-प्रधान मनुष्य के बस की बात नहीं, अपने इसी सीमा को खींच कर हमें आगे ले जाना है । कार्यक्रम के अन्तिम चरण में छात्रों के लिए एक्टिविटीज़ कराया गया, जिसमें छात्रों ने सहर्ष बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया ।




