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लोकतंत्र में हिंसा खूनखराबा और अराजकता का कोई स्थान नहीं है: शैलेश

 लोकतंत्र में हिंसा खूनखराबा और अराजकता का कोई स्थान नहीं है: शैलेश
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रायपुर। दिल्ली की घटना पर प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष ने कहा है कि दिल्ली में हुई हिंसक व अराजक घटनाओं से कांग्रेस पार्टी व पूरा देश क्षुब्ध है। लोकतंत्र में इस प्रकार की घटनाओं के लिए कोई स्थान नहीं। आंदोलनरत किसान संगठनों द्वारा खुद को इस अस्वीकार्य घटनाक्रम से अलग कर लेने का स्पष्ट वक्तव्य एक सही दिशा में उठाया कदम है। आंदोलनकारियों को अपने ध्येय को ध्यान में रखना होगा। अहिंसा और सत्याग्रह ही इस किसान-मजदूर आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत रही है। पूरी उम्मीद है कि किसान, मजदूर, गरीब का ये गठजोड़ शांतिपूर्ण व अहिंसक आंदोलन के रास्ते पर चल तीनों खेती विरोधी काले कानूनों की वापसी के लिए दृढ़ संकल्प रहेंगे।

कांग्रेस पार्टी का साफ मानना है कि ‘गण’ और ‘तंत्र’ के बीच पिछले 61 दिनों से जारी टकराव की स्थिति लोकतंत्र के लिए कतई सही नहीं है। संदेश साफ है कि देश का गण यानि जनता, शासनतंत्र से बहुत क्षुब्ध है। ऐसे में मोदी सरकार को भी अहंकार के सिंहासन से उतर किसान और मजदूर की न्याय की गुहार सुननी चाहिये।

प्रधानमंत्री और भाजपा सरकार को ये सोचना पड़ेगा कि 61 दिन से बातचीत का मुखौटा पहन किसानों को दस बार बातचीत के लिए बुलाना, लेकिन मांग नहीं स्वीकारना और कोई ठोस उपाय करना, उचित नहीं है।

देश को भ्रमित करना और किसान को विचलित करना उचित नहीं है।

175 किसानों की मृत्यु के बावजूद ख़ुद प्रधानमंत्री द्वारा भी सांत्वना का मरहम तक न लगाना ठीक है।

मोदी सरकार द्वारा किसानों के प्रति अपनायी गयी ‘थकाओ और भगाओ’ की नीति देश हित में नहीं है।

प्रधानमंत्री, नरेन्द्र मोदी को ‘राजहठ’ छोड़ ‘राजधर्म’ के मार्ग पर चलना होगा। बगैर किसी देरी तीनों खेती विरोधी काले कानून वापस लेने होंगे। यही देश के 62 करोड़ अन्नदाताओं की पुकार भी है और हुंकार भी।

दिल्ली किसान आंदोलन में हिंसा की घटनाओं को प्रायोजित बताते हुये प्रदेश कांग्रेस के संचार प्रमुख शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि लोकतंत्र में हिंसा खून खराबा और तोड़फोड़ का कोई स्थान नहीं है। दिल्ली की घटना प्रायोजित लगती है क्योंकि लाल किले में सामान्य दिनों में भी कोई भी नहीं जा सकता। उस दिन तो गणतंत्र दिवस था। लाल किला इतना सुरक्षित एरिया है यहां परिंदा भी पर नहीं मार सकता है। वहां भारतीय जनता के किसी सांसद का सबसे करीबी व्यक्ति झंडा लेकर लाल किला के प्राचीर पर चढ़ जाए और झंडा फहराये। स्पष्ट है कि यह प्रायोजित घटना है।

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि दिल्ली में किसान आंदोलन में जिस तरीके से हिंसा की गयी है, किसानों के साथ मारपीट की गयी है और आंदोलन को कुचलने की कोशिश की गयी है। यह मोदी सरकार का अलोकतांत्रिक आचरण है। केन्द्र सरकार द्वारा अपनाये गये किसान विरोधी, लोकतंत्र विरोधी, आमआदमी विरोधी रवैय्ये और चंद बिजनेस समूहो के सरपरस्ती की कड़ी निंदा है।
 


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