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अपनी गलती छिपाने मिलर्स को ब्लैक लिस्ट करने की तैयारी में प्रशासन

अपनी गलती छिपाने मिलर्स को ब्लैक लिस्ट करने की तैयारी में प्रशासन
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रायपुर। छत्तीसगढ़ में सरकार की तरफ से धान की समर्थन मूल्य पर खरीद किये हुए अब लगभग 100 दिन पूरे होने वाले हैं, लेकिन 48 से 72 घंटे पर होने वाला धान का उठाव अब तक प्रशासन के गले की हड्डी बना हुआ है। दरअसल, इसका मुख्य कारण प्रशासन की लापरवाही ही है, जिस प्रशासन ने मिलर्स को धान की कस्टम मिलिंग के लिए अधिकृत किया उन तक धान समय पर पहुंचा कर देने की जिम्मेदारी धान संग्रहण केंद्र की होती है। इसके लिए पहले ही ट्रांसपोर्टिंग की व्यवस्था भी की जाती है, लेकिन छत्तीसगढ़ में पिछले दो सालों से धान की कस्टम मिलिंग में सरकार विफल साबित हो रही है।
धान की कस्टम मिलिंग के लिए खरीद केंद्र की तरफ से समय पर ट्रांसपोर्टिंग की व्यस्था नहीं होने से आज लगभग 100 दिन बाद भी संग्रहण केंद्रों पर धान जाम हैं। इन धान की बोरियों में बे-मौसम बरसात के कारण सीलन भी आने लगी है। यानि जो सीलन देखकर किसानों से धान की खरीदी सरकार नहीं करती अब प्रशासन वही सीलन धान का समय पर उठाव नहीं कर पैदा कर रहा है। यानि दूसरे नजर से देखें तो किसानों को सीलन के नाम पर सिर्फ परेशान किया गया।
अब लगभग 100 दिन बाद यदि रशासन ने सुध भी ली है तो, समिति प्रबंधन पर उठाव की समय पर व्यवस्था नहीं करने के नाम पर कार्रवाई करना छोड़ मिलर्स पर कार्रवाई क्र रहे हैं। कलेक्टर ने समय पर मिलिंग नहीं करने के नाम पर नोटिस भी थमाया था, जिसके जवाब के लिए 25 मई की तारीख को अंतिम घोषित किया गया था, लेकिन 23 मई तक एक भी मिलर्स ने जवाब प्रस्तुत नहीं किया, जिससे तिलमिलाए कलेक्टर ने 25 मई तक जवाब प्रस्तुत नहीं करने वाले मिलर्स को एक बार फिर ब्लैक लिस्टेड करने की बात कही है।
 



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