आखिर क्यों सरोज पांडेय एक महिला होने के बावजूद कभी झीरम के शहीदों के परिवारजनों की पीड़ा को नहीं समझा: कांग्रेस
रायपुर। भाजपा नेता सरोज पांडे ने जीरम मामले में बयान पर दुख और पीड़ा व्यक्त करते हुये प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि महिलायें तो ममता की मूर्ति होती है, सरोज पांडे एक महिला होने के बावजूद कभी जीरम के शहीदों के परिवारजनों की पीड़ा को क्यों नहीं समझा? सरोज पांडे के केन्द्र सरकार में बड़े पदों में बैठे लोगों से अच्छे संबंध है। सरोज पांडे ने छत्तीसगढ़ की बड़ी नेता होने के बावजूद कभी भी जीरम के आपराधिक राजनैतिक षडय़ंत्र की जांच के लिये प्रयास क्यों नहीं किया? जीरम पर बयान देने के बाद सरोज पांडेय को पूरी जिम्मेदारी से बताना चाहिये कि आत्मसमर्पित माओवादी नेता गुंडाधुर से एनआईए ने जीरम की साजिश पर पूछताछ क्यों नहीं की? एनआईए ने जीरम के आपराधिक राजनैतिक षडय़ंत्र की जांच क्यों नहीं की? रमन्ना और गणपति के नाम एनआईए की पहली चार्जशीट में थे, फ ाइनल चार्जशीट में क्यों और किसके कहने पर हटा दिये गये? देश के सबसे बड़े और घातक नक्सली हमले में नक्सलियों के शीर्ष नेताओं को बरी कर दिया गया और दंडकारण्य अंचल के नक्सली नेताओं को ही आरोपी बनाया गया जबकि कोई भी साजिश शीर्ष नेताओं की सहमति, अनुमति और भागीदारी के बिना संभव ही नहीं होती। साजिश करने वालों की जांच, गिरफ्तारी और पूछताछ के बजाय उनके नाम हटाकर केन्द्र सरकार की एजेंसी एनआईए ने क्या संदेश दिया है। गूढ़ राजनीति को समझने वाली और करने वाली सरोज पांडे इन बातों को नहीं समझती, ऐसी बात नहीं है।




