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CG BREAKING: दस लाख के इनामी माओवादी दम्पति ने किया पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण

CG BREAKING: दस लाख के इनामी माओवादी दम्पति ने किया पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण
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दंतेवाड़ा: दन्तेवाड़ा पुलिस द्वारा चलाये जा रहे लोन बर्राटू अभियान को गुरुवार 2 दिसम्बर को एक और बड़ी सफलता मिली है । इस अभियान से प्रभावित होकर दस लाख रुपये के इनामी दुर्दांत माओवादी दम्पति ने डीआईजी सीआरपीएफ विनय कुमार सिंह और दन्तेवाड़ा एसपी अभिषेक पल्लव के समक्ष आत्मसमर्पण करते हुए मुख्य धारा से जुड़ गए है।


पुलिस अधीक्षक कार्यालय में गुरुवार 2 दिसम्बर को डीआईजी सीआरपीएफ विनय कुमार सिंह और दन्तेवाड़ा एसपी के समक्ष टेकुलगुड़ा और मीनपा में सुरक्षा बलों पर हमला करने वाले दुर्दांत माओवादी दम्पति ने आत्मसमर्पण कर दिया है । दोनों माओवादियों पर शासन ने 5-5 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था । आत्मसमर्पित माओवादी पोज्जा उर्फ संजू माड़वी एवं लख्खे उर्फ तुलसी माड़वी पामेड़ एरिया कमेटी के सदस्य के रूप कार्यरत थे ।इसके अलावा पोज्जा प्लाटून नम्बर 9 का कमांडर भी था, वहीं तुलसी डीवीसी सुरक्षा दलम की कमाण्डर थी ।समर्पित इन माओवादी दम्पति पर 100 से अधिक सुरक्षा बलों की हत्या का मामला दर्ज है । इसके अलावा कई दर्जन बड़े हथियार लूटने और आगजनी के मामले भी दर्ज हैं । दन्तेवाड़ा पुलिस द्वारा चलाये जा रहे लोन बर्राटू अभियान के तहत अब तक 119 इनामी सहित 459 माओवादियों ने आत्मसमर्पण कर चुके हैं।


दोनों पति पत्नी ने भास्कर को एनकाउंटर की बताई कहानी...
सवाल- टेकलगुड़ा की घटना की प्लानिंग क्या थी? किस तरह से जवानों को एंबुश में फंसाया गया था?
जवाब- टेकलगुड़ा की घटना को अंजाम देने के लिए पहले से कोई प्लानिंग नहीं बनी थी। DKSZC लीडर हिड़मा और संगठन के कई बड़े लीडर जंगल में बैठे हुए थे। इसी बीच संगठन के मिलिशया सदस्यों ने वॉकी-टॉकी से हिड़मा को जानकारी दी कि भारी संख्या में फोर्स जंगल में घुस रही है। वे टेकलगुड़ा की तरफ ही आ रहे हैं। खबर मिलने के बाद हिड़मा ने वहां मौजूद 450 नक्सलियों को इकट्ठा किया , फिर 10 मिनट तक बात कर सभी से कहा - मौका मिला है सफलता चाहिए। जिसके बाद नक्सली ऊंचाई वाली जगह पर छिप गए थे। सर्चिंग करते हुए जवानों को आगे जंगल मे और अंदर घुसने दिया। जब टेकरी की ओर पहुंचे तो चारों तरफ से घेर लिया गया। फिर जवानों पर गोलियां चलाई गई। फोर्स पूरी तरह से एंबुश में फंस गई थी।


सवाल- इस घटना को CG के नक्सलियों ने अंजाम दिया या फिर तेलगु नक्सली थे? जवाब- टेकलगुड़ा में सभी छत्तीसगढ़ के दंडकारण्य के ही नक्सली थे। इसमें महिला माओवादियों की संख्या भी ज्यादा थी। सभी हथियारों से लैस थे। इस घटना को हिड़मा लीड कर रहा था। सुजाता, रघु समेत और भी कई बड़े नक्सली थे। मुठभेड़ में एक भी तेलगु नक्सली शामिल नहीं था।


सवाल - एनकाउंटर में कुछ नक्सली भी मारे गए थे क्या?
जवाब - एनकाउंटर में स्पॉट में ही 4 नक्सली मारे गए थे। 5 नक्सली घायल हुए थे जिनका बोटेम गांव में इलाज करवाया गया था। जिनमें बाद में 3 नक्सली इलाज के दौरान दम तोड़ दिए थे। इस घटना में कुल 7 नक्सली मारे गए थे।


सवाल - एक जवान को भी पकड़ कर ले गए थे, उनके साथ कैसा बर्ताव किया गया था?
जवाब- एनकाउंटर के बाद जवानों के पास से सारे हथियार लेकर इकठ्ठा कर रहे थे। इस बीच एक जवान भी जिंदा मिला था। दूसरी पार्टी ने उसे पकड़ लिया था। उसके पास से हथियार भी ले लिए थे। जवान को हिड़मा के पास लेकर गए थे। कई दिनों तक हिड़मा, सुजाता और कई बड़े लीडरों ने पूछताछ की थी। बड़े लीडरों ने छोड़ने का निर्णय लिया। जवान से कहा कि फोर्स में मत आओ। घर जाकर परिवार के साथ खेती बाड़ी करो।


सवाल - घटना के बाद शहीद हुए जवानों की वर्दी भी उतारे थे, क्यों?
जवाब- नक्सली दंपती ने बताया कि, माओवादी पार्टी ऐसा काम नहीं करती है। इस घटना में गांव के ही 25 से 30 मिलिशया सदस्य थे। उनमें से कुछ लोगों ने वर्दी उतार ली थी। जिसके बाद उस वर्दी को वे पहन रहे थे।


सवाल- इस घटना में हिड़मा ने भी गोली चलाई थी क्या?
जवाब- नहीं। हिड़मा अब लड़ाई नहीं करता है। वो बंदूक रखता जरूर है लेकिन गोली नहीं चलाता है। टेकलगुड़ा कि घटना में केवल वो प्लानिंग बना रहा था। लड़ाई कैडर के लोग कर रहे थे। वो सिर्फ बताता गया, कहां से जाना है और कहां से आना है। हिड़मा बीमार नहीं है, वो बिल्कुल ठीक है।

 



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