शासकीय दूधाधारी बजरंग महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय में आज किया गया चेंजिंग जेंडर रोलस इन कंटेंपरेरी सोसाइटी का आयोजन
रायपुर। आज दिनांक 25 जून 2021 को शासकीय दूधाधारी बजरंग महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय में स्टेट लेवल वेबीनार चेंजिंग जेंडर रोलस इन कंटेंपरेरी सोसाइटी का आयोजन किया गया, महाविद्यालय की प्राचार्य डॉक्टर श्रद्धा गिरोलकर के आशीर्वचन के साथ कार्यक्रम प्रारंभ हुआ।
महाविद्यालय की IQAC प्रभारी ने कार्यक्रम का परिचय दिया क्रायक्रम का संचालन डॉ नंदा गुरूवारा ने किया। कार्यक्रम की प्रमुख वक्ता डॉ अरुणा पलटा -माननीय कुलपति जी हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग थी ,कुलपति जी ने बताया कि महात्मा गांधी ने कहा था स्त्री और पुरुष फीयरलेस PAIR हैं समाज किसी एक से नहीं चल सकता अर्थात दोनों ही बराबर है।,
इंटरनेशनल विमेंस डे का यह थीम था CHOOSE टू चैलेंज अर्थात स्त्री स्वयं अपनी वैल्यू पहचाने, समानता के बारे में भी आदरणीय कुलपति जी ने विस्तृत रूप से चर्चा की अगर सेक्सुअल वायलेंस की। बात करें तो 3 में से एक महिला भारत में सेक्सुअल वायलेंस की शिकार है कार्यस्थल में भी यह देखा जाता है कि कुछ स्थानों पर महिला का वेतन पुरुष से कम होता है फुल टाइम जॉब में 10% ऐसे इंसीडेंस मिले हैं जहां स्त्रियों को वेतन कम मिलता है, पार्ट टाइम जॉब्स में 30 4% स्त्रियों को कम वेतन मिलता है जेंडर डायवर्सिटी के बारे में बातचीत करते हुए उन्होंने 2 थीम्स की चर्चा की और वह थीम थी जेंडर इक्विटी एवं जेंडर इक्वलिटी महिलाओं को पुरुष के समकक्ष लाना अत्यंत आवश्यक है विकसित राष्ट्र में भी लैंगिक भेद-भाव दिखाई देती है पिता के प्रॉपर्टी का 99% हिस्सा पुत्रों को दे दिया जाता है यही नहीं अनेक महत्वपूर्ण जगहों पर स्त्री को कम स्थान मिलता है।
जेंडर इक्वलिटी का अर्थ है SAMENESS वही जेंडर इक्विटी का अर्थ है 'फेयरनेस' कुलपति जी ने बताया कि विवाह से पहले महिला को भाई या पिता के द्वारा कंट्रोल किया जाता है तथा विवाह के पश्चात महिला को उसके पति और संतान के द्वारा नियंत्रित किया जाता है ,यही नहीं लिंगानुपात में भी निरंतर गिरावट देखी जा रही है महिलाओं के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करना हमारी प्रमुख जिम्मेदारी होनी चाहिए अनेक प्रेरणादायी रोल मॉडल्स के द्वारा उन्होंने अपने बातों को समझाया जैसे टेसी थॉमस फूलबासन बाई यादव मौमिता अधिकारी चारू खुराना तनुश्री पारीक रोशनी नादर मल्होत्रा सीमा कुशवाहा, बाला देवी ,लेफ्टिनेंट जनरल माधुरी कानिटकर कल्पना चावला मैरीकॉम इत्यादि।
कुलपति जी ने एक शानदार मैसेज के द्वारा अपनी बातों को समाप्त किया कि केवल और केवल सकारात्मक सोच से ही लैंगिक भेदभाव को दूर किया जा सकता है कार्यक्रम की संयोजक डॉ नंदा गुरुवारा एवं सह संयोजक डॉ शिप्रा बनर्जी थी कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय की प्राचार्य डॉक्टर श्रद्धा गिरोल कर रही थी, कार्यक्रम में महाविद्यालय के लगभग सभी प्राध्यापक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे कार्यक्रम की के तकनीकी पक्ष को डॉ नीतू हरमुख डॉ गौतमी भतपहरी एवं डॉ भूपेंद्र सेन ने संभाला




