दो साल बाद पीएम आवास लिए राज्यांश देने को तैयार हुई छत्तीसगढ़ सरकार
रायपुर। छत्तीसगढ़ में बीते दो साल से प्रधानमंत्री आवास (पीएम आवास) योजना का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सका है। बीते साल सात लाख 81 हजार पीएम आवास नहीं बन पाए थे क्योंकि राज्य ने अपना अंश नहीं दिया। इससे असंतुष्ट होकर केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने लक्ष्य वापस ले लिया था। अब वित्तीय सत्र 2022-23 के लिए केंद्र सरकार ने फिर से 10 हजार करोड़ के पीएम आवास का लक्ष्य दिया है।
इसमें छह हजार करोड़ केंद्र देगा और चार हजार करोड़ राज्य को देना है। राज्य ने इस बार भी अब तक कोई राशि नहीं दी है। हालांकि अब सरकार कह रही है कि लोन लेकर राज्यांश देंगे। दरअसल, राज्य में अगले साल चुनाव हैं इसलिए सरकार को जनहित का काम करने की सूझी है। जानकार कह रहे हैं कि वित्तीय अनुशासन होता तो हर साल बजट में इसके लिए राशि रखते और लोन लेने की नौबत न आती।
इस तरह लक्ष्य रह गया अधूरा
.वित्तीय सत्र 2019-20 में राज्य में पीएम आवास के लिए एक लाख 51 हजार लोगों को आशियाना देने का लक्ष्य रखा गया था। इसमें कुल दो हजार करोड़ रुपये खर्च होने थे। केंद्र से 1200 करोड़ रुपये और राज्यांश से 800 करोड़ रुपये देना था। इस वित्तीय सत्र में 762 करोड़ रुपये राज्यांश नहीं मिल सका। इसी तरह वित्तीय सत्र 2020-21 में एक लाख 57 हजार मकान बनाने के लिए दो हजार करोड़ रुपये बजट रखा गया।
इसमें भी केंद्र से 1200 करोड़ रुपये और राज्यांश से 800 करोड़ रुपये देना था। सत्र 2021-22 में विवाद उठा कि राज्यांश नहीं मिलने से पीएम आवास योजना में संतोषजनक काम नहीं हो रहा है। इसलिए केंद्र सरकार ने लक्ष्य ही वापस ले लिया।
अभी यह है चुनौती
राज्य सरकार के अफसरों के सामने अभी पीएम आवास को लेकर कई चुनौतियां हैं। सबसे पहले पुराने एक लाख 51 हजार का निराकरण करने के लिए 762 करोड़ रुपये चाहिए। इसके बाद पूरे लक्ष्य को पूरा करने के लिए मैचिंग ग्रांट के लिए प्रविधान कराना पड़ेगा।




