मौसम में आए बदलाव के कारण शहर में वायरल फीवर के मरीजों की संख्या में हो रही वृद्धि, हर वायरल फीवर का मरीज कोरोना पाजीटिव नहीं
रायपुर। कोरोना वायरस कोविड 19 नामक विश्वव्यापी बीमारी एवं ऋतु परिवर्तन के चलते वर्षा काल में हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी मौसम में आए बदलाव के कारण शहर में आबादी की बड़ी संख्या वायरल फीवर की चपेट में है। शासकीय एवं अशासकीय चिकित्सा संस्थानों में अधिकतम मरीज सर्दी खांसी एवं वायरल फीवर के ही पहुंच रहे हैं। वहीं बड़े अस्पतालों में सर्दी खांसी एवं वायरल फीवर के मरीज कोरोना टेस्ट से बचने के लिए जाने में घबरा रहे हैं। जनरल प्रेक्टिशनर्स के क्लिनिक में मरीजों की संख्या अच्छी खासी दिखाई दे रही है। मरीजों के अनुसार शासकीय चिकित्सालयों में कोरोना टेस्ट की लंबी कतार लगने के कारण निजी चिकित्सा संस्थानों में भी इलाज के दौरान नि:शुल्क कोरोना टेस्ट की मांग भी स्वास्थ्य मंत्री से की गई है। पिछले वर्षों की तुलना में इस वर्ष मरीज बुखार होने पर भी परिजनों एवं आसपास के लोगों को जानकारी देने से डर रहे हैं। इसका मूल कारण डॉ. मंजू शुक्ला के अनुसार कोरोना टेस्ट कराने के लिए अस्पतालों द्वारा मरीजों पर जोर डाला जाना है। वहीं डॉ. मीनाक्षी तारे ने जानकारी देते हुए आरएनएस प्रतिनिधि को बताया कि इस तरह का हौव्वा खड़ा करना ठीक नहीं है कि हर बुखार का मरीज कोरोना पाजीटिव ही हो। उक्त बीमारी के पूर्व के वर्षों में भी बरसात के समय उनके क्लिनिक में वायरल फीवर के मरीज आते रहे हैं। समय पर इलाज कराने से अधिकांश मरीज ठीक जाते हैं। उन्होंने विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों से जनजागरूकता अभियान के दौरान लोगों से कोरोना के प्रति बेखौफ होने की समझाइश देने की मांग की है। डॉ. तारे ने बताया कि अन्य बीमारियों की तरह उक्त बीमारी भी मरीजों में देखी जा रही है किंतु अभी तक वैक्सिन नहीं बनने से घरेलू उपचार के जरिए यथा तुलसी काढ़ा, गरम पानी का सेवन एवं आयुर्वेदिक दवाईयों के जरिए भी इम्युनिटी पॉवर बढ़ाकर मरीज कोरोना को मात देने की कोशिश में लगातार जुटे हुए हैं।




