एक्सक्लूसिव : चहेते को फायदा पहुंचाने तोड़ दी निविदा की शर्तें
रायपुर। छत्तीसगढ़ में कई तरह के नियमों की अनदेखी की खबरें तो सामने आती ही रहती हैं, लेकिन इस बार अफसरों ने चहेते को फायदा पहुंचाने नियमों की सारी हदें ही पार कर दी। बात समाज कल्याण विभाग से 21 जून अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के लिए ट्रैकसूट, टी-शर्ट और योगामेट की समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण सप्लाई के निविदा की है। इस पर विभागीय अधिकारियों ने न तो निविदा के नियमों का ख्याल रखा और न ही सामानों की गुणवत्ता का।
अफसरों की निविदा खोलने की जल्दबाजी इतनी कि निविदा के खुलते ही अगले दिन कार्यादेश भी जारी कर दिया। कार्यादेश जारी करने में हड़बड़ी इतनी कि कोई दूसरा टेंडर प्रक्रिया पर आपत्ति भी न ले सके। शायद ही कोई सरकारी काम इतनी फुर्ती से होती हो। गौर करने वाली बात यह है कि विभागीय अफसर यदि जनता से जुड़े कार्यों को भी इतनी ही फुर्ती से करने लगे तो कार्यालयों में फाइलों के अंबार ही न लगे।
विभाग की तरफ से बुलाए गए निविदा में 8 फर्मों ने हिस्सा लिया। सभी फर्मों ने निविदा के नियमों के अनुसार सामानों के सैम्पल निविदा के साथ विभाग में जमा भी कराए, लेकिन विभागीय अफसरों ने चहेते वेंडर को फायदा पहुंचाने गुणवत्ता का ख्याल न रखते हुए एक ही फर्म को टी-शर्ट और टै्रकसूट सप्लाई के लिए चिन्हांकित कर लिया। यहां पर विभाग ने नियमों में कहा था कि सामग्री की गुणवत्ता के आधार पर दर का चयन होगा, लेकिन जहां मनमानी करनी हो वहां कुछ काम सिर्फ दस्तावेजी ही होते हैं।
बात यहीं नहीं थमी इस टेंडर में सबसे कम कीमत के बाद दूसरे सबसे कम कीमत वाले फर्म के बीच लगभग 16 रुपए का अंतर है। विभाग ने जिस सामग्री क्रय के लिए निविदा निकाली है उसकी हजारों की तादाद में सप्लाई दो दिन के भीतर करनी है यानि एक ही सामान की सप्लाई में सरकार को लाखों रुपए का नुकसान उठाना होगा।
उल्लेखनीय है कि एक तरफ राज्य सरकार के मुखिया सभी विभागों को मितव्ययता का पाठ पढ़ा रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ सरकार के ही समाज कल्याण विभाग में मुख्यमंत्री के आदर्शों को तार-तार किया जा रहा है। सोर्स:- वीएनएस




