छत्तीसगढ़ के सस्पेंड डीजी मुकेश गुप्ता के खिलाफ एफआईआर दर्ज, लगे ये गंभीर आरोप
रायपुर. छत्तीसगढ़ के चर्चित आईपीएस व ईओडब्ल्यू के पूर्व प्रमुख मुकेश गुप्ता के खिलाफ ईओडब्ल्यू रायपुर में ही जुर्म दर्ज किया गया है. अलग अलग आरोपों के कारण पहले से ही मुकेश गुप्ता को डीजी रहते ही सरकार ने सस्पेंड कर दिया था. अब तक इनकी बहाली नहीं हो सकी है. ईओडब्ल्यू में दर्ज शिकायत में भी सस्पेंड डीजी गुप्ता पर गंभीर आरोप लगे हैं. एमजीएम ट्रस्ट और आईपीएस मुकेश गुप्ता के साथ ही आईपीएस गुप्ता के पिता जयदेव गुप्ता और डॉक्टर दीपशिखा अग्रवाल के खिलाफ भी जुर्म दर्ज किया गया है. ईओडब्ल्यू में दर्ज प्रकरण के मुताबिक एमजीएम ट्रस्ट पर आर्थिक अनियमितता का आरोप लगा है. अनुदान में राशि लेकर बड़ी गड़बड़ी की गई है. 3 करोड़ रुपये का अनुदान लेकर जरूरतमंदों को लाभ देने की बजाय कर्ज चुकाने का काम किया गया है. आरोप लगे हैं कि मुकेश गुप्ता ने अपने का का दुरुपयोग किया है. इससे पहले भी मुकेश गुप्ता पर पद के दुरुपयेग के आरोप लग चुके हैं. कई मामलों में जांच भी चल रही है.
ईओडब्ल्यू ने इस मामले दर्ज की एफआईआर
प्रकरण के मुताबिक 14 जनवरी 2002 को मुकेश गुप्ता के पिता जयदेव गुप्ता द्वारा अपने व मुकेश गुप्ता के अभिन्न परिचितों को ट्रस्टी बनाते हुये मिकी मेमोरियल ट्रस्ट रायपुर का पंजीयन सार्वजनिक न्यास रायपुर से कराया. पंजीयन क्रमांक 247 पर ट्रस्ट का पंजीयन हुआ. मिकी मेमोरियल ट्रस्ट के प्रमुख ट्रस्टी जयदेव गुप्ता स्वयं थे और ट्रस्ट डीड की शर्तों के अनुसार ट्रस्ट का कानूनी उत्तराधिकारी नियुक्त करने का अधिकार केवल ट्रस्ट के प्रमुख ट्रस्टी के अधिकार में था. अन्य ट्रस्टी या बोर्ड को कोई अधिकार नहीं था. इस प्रकार ट्रस्ट एवं ट्रस्ट की संपत्ति को निजी नियंत्रण में रखने एवं ट्रस्ट पर एक निजी परिवार को एकाधिकार रखने व वर्चस्व बनाये रखने की पूर्व नियोजित योजना थी. ट्रस्ट डीड के अनुसार ट्रस्ट के अगले कानूनी उत्तराधिकारी जयदेव गुप्ता के परिवार के ही सदस्य मुकेश गुप्ता को ही रहना था. आईपीएस मुकेश गुप्ता पर आरोप है कि पद का दुरुपयोग करते हुए उन्होंने ट्रस्ट को लाभ पहुंचाया.




