नक्सल प्रभावित क्षेत्र में परीक्षा के लिए फ्लाईट की सुविधा दी जाती थी, अब सफल हुए विद्यार्थी अपने हक के लिए लड़ाई लड़ रहे- ओपी चौधरी
रायगढ़। पूर्व कलेक्टर ओपी चौधरी ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि प्रदेश के मुखिया होने के नाते संवेदनहीनता से ऊपर उठकर संवेदनशीलता का परिचय दें। ऐसे क्षेत्र से निकल रही प्रतिभाओं को समझने का प्रयास करें। ये सभी बेटियां परीक्षा में उत्तीर्ण हुईं हैं, ऐसे में ये सभी बच्चियाँ पहले राउंड की काउंसलिंग की हकदार हैं। जल्द से जल्द उनके फस्र्ट राउंड के काउंसलिंग में प्रवेश की व्यवस्था कराएं।
दंतेवाड़ा में छू लो आसमान प्रोजेक्ट की 25 से अधिक अनुसूचित जनजाति की छात्राओं ने मेडिकल की परीक्षा में क्वालीफाई किया है। लेकिन सरकार के निकम्मेपन और संवेदनहीनता के कारण इन बच्चियों का रजिस्ट्रेशन तक नहीं हुआ है। ऐसे में वे कॉउंसलिंग में भाग नहीं ले पा रही हैं।
उन्हें क्वालीफाई करने के बावजूद डॉक्टर बनने से वंचित किया जा रहा है। इसके दर्द को कम्पटीशन परीक्षा की तैयारी करने वाले युवा समझ सकते हैं, उनके माता-पिता समझ सकते हैं। सोचिए कि बस्तर की उन बेटियों और उनके माता-पिता पर क्या गुजर रही होगी।
आदिवासी क्षेत्र दंतेवाड़ा के बच्चे जो नक्सल प्रभावित हुआ करता था, जिसको शिक्षा रूपी प्रहार से बदलने का प्रयास किया गया। यूथ आइकॉन और दंतेवाड़ा में कलेक्टर रह चुके ओपी चौधरी ने छू लो आसमान नाम का एक शिक्षा के क्षेत्र में प्रोजेक्ट वहां बनाया। ताकि वहां के बच्चे शिक्षा के स्तर को बढ़ा सकें। वहां के बच्चे अब वास्तव में आसमान छूने लगे हैं। पर उन बच्चों के समक्ष एक बहुत बड़ी चुनौती खड़ी हो चुकी है। छू लो आसमान के बच्चे कभी परीक्षा के लिए लेट हो जाते थे तो उन्हें हवाई मार्ग के से परीक्षा देने भेजा जाता था, परन्तु आज वहीं के बच्चे परीक्षा में सफल होने पर भी अपने हक के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं, वो भी शासन और प्रशासन से, कितनी बड़ी लापरवाही कहनी चाहिए इसे ।




