गुटखा, तम्बाकू बंद, नशे के आदी पहुंच रहे नशामुक्ति केन्द्र, जाने पूरी खबर
महासमुंद। बाजार में गुटखा, तम्बाकू, सिगरेट और गुड़ाखु नहीं मिलने के बाद इसके आदी अब नशा मुक्ति केन्द्र पहुंच रहे हैं। पखवाड़ेभर के अंदर जिला अस्पताल स्थित नशा मुक्ति केन्द्र में करीब दो दर्जन से नशा करने वाले लोगों ने संपर्क किया है। इसमें मुख्यालय से लगे आसपास के गांव के अलावा बागबाहरा ब्लॉक के विभिन्न तरह के नशा करने वाले हैं।
जानकारी के मुताबिक 15 अप्रैल के बाद से नशामुक्ति केन्द्र में नशा छोडऩे के लिए कुल 27 नए लोग सामने आए हैं। इनमें सिगरेट, गुटखा के अलावा गुड़ाखु का नशा करने वाले प्रमुख रूप से शामिल हैं। केन्द्र की ओर से ऐसे लोगों की जांच के बाद चिकित्सकों की सलाह पर उन्हें नशे छुड़ाने के लिए निकोटिनयुक्त चुविंगम दिया गया है। बता दें कि जिला प्रशासन ने लॉकडाउन के दूसरे चरण के सप्ताहभर के बाद जिले में गुटखा, तम्बाकू, गुड़ाखू और सिगरेट जैसी नशे संबंधी सामग्रियों की खरीदी-ब्रिकी पर पूर्णत: प्रतिबंध लगा दिया है। नशे की सामग्री नहीं मिलने से अधिक बेचैन नशे के आदी नशा मुक्ति केन्द्र पहुंचने लगे।
केश-1 शहर के नयापारा की गुड़ाखु के नशे की आदी महिला ने नशे से मुक्ति पाने के लिए नशा मुक्ति केन्द्र में संपर्क किया। उन्हें चुविंगम के साथ चिकित्सकों ने नशे छोडऩे की सलाह दी गई है।
केेश-2 बागबाहरा के दो लोगों ने सिगरेट का नशे छुड़ाने के लिए नशा मुक्ति केन्द्र से सलाह ली है। उन्हें भी केन्द्र की ओर से चुविंगम दिया गया है। जिसे नशे की तलब लगने पर खाने के लिए कहा गया है।
केश-3 उमरदा गांव के स्कूलपारा के तम्बाकू एडिक्ट युवक ने भी बाजार में तम्बाकू न मिलने के बाद बेचैन होकर नशामुक्ति में संपर्क किया है। जांच के बाद उन्हें नशा से मुक्ति के लिए सलाह दी गई है।
क्या कहते हैं चिकित्सक-
इस संबंध में राष्ट्रीय नशा मुक्त कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ अनिरूद्ध कसार का कहना है कि अच्छी बात है कि नशे के आदी नशा छोडऩे के लिए स्वमेव सामने आ रहे हैं। उनका कहना है कि नशा छोडऩे का यह अच्छा समय है। मेडिकल साइंस में अगर कोई 21 दिनों तक नशा नहीं करता है तो वह पूरी तरह से नशे मुक्त हो जाता है। लॉकडाउन में यह सुखद पहलु सामने आया है। विभाग की ओर से ऐसे लोगों के लिए हरसंभव मदद की जा रही है।




