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शराब बिक्री व खरीदी के मुद्दे पर गरमाया सदन, शासकीय शराब दुकानों में अवैध शराब बिक्री के मामले में भाजपा का वॉकआउट..

शराब बिक्री व खरीदी के मुद्दे पर गरमाया सदन, शासकीय शराब दुकानों में अवैध शराब बिक्री के मामले में भाजपा का वॉकआउट..
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महासमुंद। बजट सत्र के चौथे दिन विधानसभा में आज सरकार द्वारा संचालित शराब दुकानों में अवैध शराब बिक्री और खरीदी का मामला छाया रहा। प्रमुख विपक्षी दल भाजपा ने शासकीय शराब दुकानों में अवैध शराब की बिक्री पर जमकर हंगामा करते हुए सदन से बहिर्गमन किया, वहीं एक अन्य प्रश्र में बसपा विधायक ने भी कंपनियों से खरीदी जाने वाली शराब के मामले में आबकारी मंत्री को घेरा। 


प्रश्रकाल में आज भाजपा सदस्य सौरभ ने जांजगीर-चांपा जिले में अंग्रेजी और देशी शराब की बिक्री का मामला उठाते हुए आरोप लगाया कि जिले के शासकीय शराब दुकानों में बाहर से शराब लाकर अवैध रूप से बेची जा रही है। उन्होंने इसकी जांच की मांग की। विधानसभा अध्यक्ष डा.चरणदास महंत ने इस मामले में आबकारी मंत्री को निर्देशित किया कि वे उडऩदस्ता बनाकर इसकी जांच कराए। इस मामले में नेताप्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने पूरक प्रश्र करते हुए आरोप लगाया कि शासकीय शराब दुकानों में बाहर से शराब लाकर अवैध रूप से सिर्फ बेची नहीं जा रही है, बल्कि शराब दुकानों में अवैध शराब बिक्री के लिए अलग से गल्ला भी रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेशभर में शासकीय दुकानों में ऐसी स्थिति है। उन्होंने कहा कि सरकार के संरक्षण में शराब दुकानों में अवैध रूप से शराब बेची जा रही है। कौशिक ने आसंदी से मांग की कि सभी जिलों में इसकी जांच के लिए विधायकों की समिति गठित की जानी चाहिए जिसमें विपक्षी दल के विधायकों को भी शामिल किया जाना चाहिए। भाजपा सदस्य अजय चंद्राकर ने भी मांग की कि इसकी जांच विधानसभा की संदर्भ समिति से कराई जाए। इसके अलावा नारायण चंदेल, शिवरतन, सौरभ सिंह ने भी विधायक दल समिति से इस मामले की जांच की मांग की। इसके बाद भी जब आसंदी से कोई व्यवस्था नहीं दी गई तो सभी भाजपा सदस्यों ने मंत्री के जवाब से असंतुष्ट होकर सदन से बहिर्गमन किया। 

बसपा विधायक केशव प्रसाद चंद्रा ने भी आज शासकीय शराब दुकानों में बेची जाने वाली शराब की खरीदी का मामला उठाया। उन्होंने आबकारी मंत्री से पूछा कि पिछले दो वषों में शराब की खरीदी के लिए कितनी कंपनियों ने पंजीयन कराया था और कितनी कंपनियों से शराब खरीदा गया। इसके जवाब में आबकारी मंत्री कवासी लखमा के स्थान पर वन मंत्री मोहम्मद अकबर ने बताया कि कुल 77 कंपनियों ने पंजीयन कराया था। इनमें 2018 में 42 एवं 2019 में 47 कंपनियों से शराब खरीदी गई। इन कंपनियों में छत्तीसगढ़ की 10 कंपनियां है। केशव चंद्रा ने पूरक प्रश्र करते हुए मंत्री से पूछा कि क्या कारण है कि पंजीकृत अन्य कंपनियों से शराब खरीदी नहीं गई। इसके जवाब में मंत्री ने बताया कि कंपनियों के पास माल नहीं था और डिमांड के अनुसार शराब मंगाई जाती है। 

विधानसभा अध्यक्ष डा.चरणदास महंत ने सदन में शराब बंदी पर जारी बहस को यह कहते हुए विराम लगा दिया कि सत्ता और विपक्षी दोनों दलों की यहीं मंशा है कि प्रदेश में शराब बंदी होनी चाहिए, जब दोनों की मंशा एक है तो इस मुद्दे पर बहस करने का अर्थ नहीं है।


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