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बड़ी खबर रायपुर: पत्रकारिता की आड़ में करता था अवैध वसूली, पुलिस ने किया गिरफ्तार

 बड़ी खबर रायपुर: पत्रकारिता की आड़ में करता था अवैध वसूली, पुलिस ने किया गिरफ्तार
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रायपुर। लंबे समय से पत्रकारिता की आड़ में अवैध वसूली, धमकी-चमकी व अन्य अपराध करने वाले फर्जी पत्रकार को आख़िरकार गिरफ्तार कर लिया गया। पत्रकारिता को काली कमाई का जरिया बनाने वाले सुनील नामदेव को लिखित शिकायत के बाद पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इंडिया टुडे के निष्कासित पत्रकार सुनील नामदेव के काले कारनामों के कारण छत्तीसगढ़ जनसंपर्क आयुक्त ने इसका जनसंपर्क से जारी कार्ड भी निरस्त कर दिया है। इस तथाकथित पत्रकार के खिलाफ पहले भी कई शिकायतें आई थी, लेकिन एक रेस्टोरेंट संचालक की लिखित शिकायत के बाद सुनील नामदेव तथा उसके एक साथी शहबाज की गिरफ्तारी हुई है।

गौरतलब है की 6 फ़रवरी को वी आई पी रोड स्थित एक रेस्टोरेंट के मालिक ने नेशन अपडेट के साजिद, शहबाज तथा न्युज टुडे के पत्रकार सुनील नामदेव पर 30 हज़ार फिरौती लेने के साथ साथ रेस्टोरेंट के ग्राहकों के साथ बदतमीजी और गली गलौज का इलज़ाम लगाया था। शिकायत में पीड़ित ने बताया कि उनका 1 वर्ष से व्हीआईपी रोड पीटीएस चौक माना कैम्प मे स्थित रेस्टोरेंट संचालित हो रह है। 6 फरवरी को रेस्टोंरेंट के एक वर्ष पूर्ण होने पर ग्राहको के लिए एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था, जिसमे शासन से विधिवत अनुमति ली गई थी। कार्यक्रम के दौरान 2-3 व्यक्ति अनाधिकृत रूप से कैमरा एवं माईक लेकर रेस्टोंरेंट मे प्रवेश कर विडियोग्राफी एवं फोटोग्राफी करने लगा। उन्होंने कहा कि देर रात्रि तक कैसे रेस्टोंरेंट चला रहे हो एवं लोगो को अवैध रूप से शराब सेवन करा रहे हो मै सुनील नामदेव न्युज टुडे से हू एवं मेरा साथी पत्रकार साजिद, शहबाज नेशनल अपडेट मिडिया से है होना बताकर रेस्टोंरेंट के जीएम (जनरल मैनजर) का विडियो वायरल करने की धमकी देकर अवैध तरीके से 30 हजार रूपये ले लिए। इसके बाद और पैसे की मांग करने पर जनरल मैनजर ने शासन से अनुमति उपरांत कार्यक्रम का आयोजन करने की जानकारी दी तथा पैसे देने से मना करने पर रेस्टोंरेंट स्टाफ के साथ वे तीनो गाली गलौच करने लगे। इसकी एफआईआर माना थाने के दर्ज कराइ गई। 

घर को रिसोर्ट समझ कर वापस लौटने लगी रायपुर पुलिस-
पत्रकार सुनील नामदेव के पाप का घड़ा आज आखिरकार भर ही गया जब रायपुर पुलिस ने उसको फिरौती के मामले में धर दबोचा। पुलिस के लिए हास्यास्पद स्तिथि तब पैदा हो गयी जब वो छापा मारने के लिए सुनील के घर पर पहुंची। 4 एकड़ में बना इस पत्रकार का घर इतना आलीशान था की सही जगह पर भी पहुंच कर पुलिस टीम को यही लगा की वो गलत पते पर आ गए है, क्योकि मकान की रुपरेखा एक रिसोर्ट जैसी थी। पुलिस की टीम इस बात पर भरोसा नहीं कर पायी की पत्रकार का घर इतना आलीशान हो सकता है जो वर्तमान में किसी चैनल या पोर्टल में काम भी नही करता और जिसे आज से कुछ समय पूर्व वसूली करने के कारण ही देश के एक नामी मीडिया चैनल ने अपने यहां से काम से निकाल दिया था। घर पर छापे के दौरान अंदर डिस्कोथेक, स्विमिंग पूल जैसे सारी सुविधाएं मिली। जिससे देखकर आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस पत्रकार ने जो की छत्तीसगढ़ का रहने वाला भी नही है कैसे वसूली और भयादोहन से करोड़ों की संपत्ति जमा कर रखी है। इतना ही नहीं गिरफ्तारी के लिए पहुंचे माना के थाना प्रभारी नामदेव ने गालीगलौच करते हुए उनके साथ हाथापाई भी की। उनका कॉलर पकड़कर उन्हें जातिसूचक गाली भी दी। इस बीच उनके साथ गए थाना प्रभारी तेलीबांधा तथा उप निरीक्षकों ने बीच बचाव किया। सुनील नामदेव के विरुद्ध धारा 186, 189, 353, 294, 506, भा0द0स0 तथा एक्ट्रोसिटी एक्ट की धारा 3(1)द,ध का अपराध घटित करना पाये जाने से अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया ।

ऐसे ही तथाकथित पत्रकार ही पत्रकारिता जैसे सूचित प्रॉफेशन को बदनाम करने में लगे हुए है। बहरहाल सुनील की गिरफ्तारी से छत्तीसगढ़ के पत्रकार समुदाय ने एक तरह से राहत की सांस ली है और कइयों का मानना है की इस बदनाम पत्रकार की गिरफ्तारी की के बाद छत्तीसगढ़ की पत्रकारिता में जिस तरह की कालिख लग गयी थी वो अब दूर हो जाएगी।

न्यूज़ टुडे पोर्टल के पत्रकार सुनील नामदेव विगत कुछ महीनो से छत्तीसगढ़ के पत्रकारों के बीच सुर्खियों मे थे और इसकी वजह इनकी शानदार पत्रकारिता नहीं बल्कि उनके अवैध फिरौती के किस्से थे जिसने लोकतंत्र के इस चौथे स्तम्भ पर कालिख पोत दी थी। आये दिन सुनील के फिरौती के किस्से प्रेस क्लब और नुक्कड़ कैफ़े में पत्रकारों के बीच सुनने को मिलते थे। पत्रकारों के बीच की ये बातचीत गॉसिप न होकर एक गहन चिंता का विषय थी क्योंकि एक पत्रकार की वजह से उनका पेशा बदनाम हो रहा था। लेकिन रायपुर के एक रेस्टोरेंट मालिक के एफ आई आर के बाद जब पुलिस ने सुनील को अवैध फिरौती के लिए धर दबोचा तब उनको राहत की सांस मिली है। 

आजतक में बतौर स्ट्रिंगर सुनील ने मध्य प्रदेश से जुड़े कई कहानियां ब्रेक की जिसकी वजह से इस पत्रकार ने अपनी एक जगह बनाई। लेकिन पैसे का मोह उनको रायपुर खींच लाया, जहां पर एक बड़े ही सुनियोजित ढंग से उसने अपने काले करतूतों को जामा पहनाया। पैसे की लालच ने सुनील को अवैध फिरौती के रास्ते पर धकेल दिया। सरकारी महकमों से गुप्त सुचना निकाल कर उससे जुड़े अफसरों को ब्लैकमेल करना उसका दूसरा धंधा बन गया। उसकी इन हरकतों का शिकार सरकार के कई अफसर बने, जिसमे बड़े पुलिस अधिकारी भी शामिल थे। विगत कुछ महीनो से सुनील की शिकायतें पुलिस के पास अक्सर आने लगी थी। लेकिन ठोस सबूत ना होने की वजह से इसके ऊपर किसी तरह का एक्शन नहीं लिया जा सका। बहरहाल सुनील की गिरफ़्तारी के बाद रायपुर के पत्रकार समुदाय में ख़ुशी की लहर है और उनकी यही मानना है की सुनील की गिरफ़्तारी से पत्रकारिता बदनाम होने से बच गयी है।
 


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