मोदी सरकार के कुप्रबंधन की वजह से भारत कोरोना की सबसे बुरी मार झेल रहा : कांग्रेस
रायपुर। केंद्र की मोदी सरकार के सात साल पूरे होने पर छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने प्रतिक्रिया दी है। कृषि मंत्री रवीन्द्र चौबे, वन एवं परिवहन मंत्री मो. अकबर, आबकारी मंत्री कवासी लखमा, नगरीय प्रशासन एवं श्रम मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया,शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, सांस्कृतिक एवं खाद्य मंत्री अमरजीत भगत, प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष गिरीश देवांगन, प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष शैलश नितिन त्रिवेदी ने पार्टी के प्रदेश कार्यालय पर पत्रकारवार्ता की । पत्रकारवार्ता में नेताओ ने कहा, राष्ट्र सर्वप्रथम के शीर्षक के तहत किए गए वादों में सबसे प्रमुख घुसपैठियों की समस्या का समाधान है। इस समस्या के समाधान के लिए मोदी सरकार ने सीएए भी लागू किया। लेकिन सच यह है कि यूपीए सरकार ने 2005 से 2013 के बीच 82,728 बांग्लादेशी घुसपैठियों को वापस भेजा वहीं दूसरी ओर मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में दो हज़ार से भी कम बांग्लादेशियों को वापस भेजा गया। तो घुसपैठियों को वापस भेजने के वादे का क्या हुआ? घुसपैठ रोकना यदि मोदी सरकार की प्राथमिकता थी तो कैसे चीन भारत की सीमा में घुसपैठ करके बैठ गया और ख़ुद प्रधानमंत्री संसद में ग़लत जानकारियां देते रहे। आज भी मोदी सरकार यह बताने में विफल है कि कैसे चीन अरुणाचल प्रदेश में घुसकर निर्माण कार्य कर रहा है। सैटेलाइट के चित्र सब दिखा रहे हैं लेकिन मोदी सरकार मानने को तैयार नहीं है। वे चीन को लाल लाल आंखें दिखाना चाहते थे लेकिन चीनी नेताओं के साथ झूला झूलते रह गए। कृषि और किसान कल्याण के वादों में नरेंद्र मोदी और भाजपा वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करना चाहते थे। लेकिन सच यह है कि उनकी नीतियों की वजह से देश का किसान और ग़रीब होता जा रहा है। नतीजा यह है कि लाखों किसान पिछले छह महीनों से दिल्ली की सीमा में ठंड, गर्मी और बरसात झेलते धरने पर बैठे हैं। यूपीए सरकार की तुलना में मोदी सरकार ने फसलों का समर्थन मूल्य भी बहुत कम बढ़ाया है। उल्टे खाद और कीटनाशक दवाओं की क़ीमतें आसमान छूने लगी हैं। अभी विपक्षी दलों के दबाव में खाद की क़ीमत घटाई लेकिन सब्सिडी देकर खाद कंपनियों को मालामाल करने का इंतज़ाम कर दिया है।
अर्थव्यवस्था को लेकर जो वादे भाजपा के संकल्प पत्र में किए गए हैं वे सब उल्टे साबित हुए हैं। सच यह है कि नरेंद्र मोदी की अर्थनीति से देश में पहली बार जीडीपी माइनस 23.9 प्रतिशत तक चली गई और डॉलर के मुक़ाबले डॉलर अपने सर्वोच्च स्तर पर है। वे पांच ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था का जुमला फेंक रहे थे और उन्हें एक ट्रिलियन में कितने शून्य होते हैं यह तक पता नहीं था। वे मेक इन इंडिया की बात कर रहे थे और सच यह है कि पहली बार भारत को दवाएं तक बांग्लादेश जैसे छोटे देश से मंगानी पड़ गईं। ऑक्सीजन विदेश से आया और वेंटिलेटर के लिए हम बड़े देशों के दान पर निर्भर होकर रह गए। भारत दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीन निर्माता था पर आज हालत यह है कि भारत के लोगों के लिए भारत में कोरोना वैक्सीन नहीं बन पा रही है और विदेशी कंपनियों की ओर मुंह ताकना पड़ रहा है। नए भारत की बुनियाद’ की बात करने वाले नरेंद्र मोदी जी की स्मार्ट सिटी योजना धराशाई हो रही है। रेलवे, हवाई अड्डे और बंदरगाह तक सब कुछ अडानी और अंबानी के हाथों बेचे जा रहे हैं और सार्वजनिक क्षेत्र की हर इकाई बिकाउ हो गई है। स्वस्थ भारत की बात करने वाली भाजपा को आज इस बात पर शर्मिंदा होना चाहिए कि उनके नेता नरेंद्र मोदी के कुप्रबंधन की वजह से आज भारत कोरोना की सबसे बुरी मार झेल रहा है। कोरोना को लेकर हमारे नेता राहुल गांधी जी चेतावनी दे रहे थे लेकिन नरेंद्र मोदी नमस्ते ट्रंप कर रहे थे और अमित शाह मध्यप्रदेश की चुनी हुई कांग्रेस सरकार को गिराने में लगे हुए थे। फिर अचानक लॉक डाउन लगाकर करोड़ों प्रवासी मज़ूदूरों को बच्चों और बुज़ुर्गों के साथ सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलकर घर पहुंचने के लिए बाध्य किया। दूसरा दौर शुरु हुआ तो न मरीज़ों को अस्पताल मिल रहा है, न ऑक्सीजन और न दवाएं। जो ज़िम्मेदारी नरेंद्र मोदी को अपने कंधे पर उठाना था वह उन्होंने राज्यों के सिर पर धकेल दिया।




