छत्तीसगढ़ में भाजपा आंदोलन करने के बजाय किसानों को हिसाब दे: शैलेश
रायपुर। छत्तीसगढ़ में भाजपा द्वारा 22 जनवरी को प्रस्तावित किसान आंदोलन को लेकर सियासी जंग तेज हो गयी है। गुरुवार 21 जनवरी को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में कांग्रेस संचार विभाग के चेयरमैन शैलेश नितिन त्रिवेदी ने प्रवक्ताओं की टीम के साथ प्रेसवार्ता की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में भाजपा आंदोलन करने के बजाय किसानों को हिसाब दे। श्री त्रिवेदी ने पांच बिन्दुओं पर फोकस करते हुए भाजपा से हिसाब मांगा।
1. केन्द्र की भाजपा सरकार के किसान विरोधी कानूनों पर हिसाब दे।
2. भाजपा के लोकसभा चुनाव के घोषणा पत्रों में 2022 में आय दुगनी करने और स्वामिनाथन कमेटी की रिपोर्ट लागू करने जैसे वादों का हिसाब दे।
3. राज्य में 15 साल किसानों के साथ हुये अन्याय एवं भेदभाव का हिसाब दे।
4. 15 साल में हुयी किसान आत्महत्याओं का हिसाब दे।
5. 15 सालों में छत्तीसगढ़ में हुयी किसानों से धोखाधड़ी और वादाखिलाफी का हिसाब दे।
उन्होंने कहा कि भाजपा प्रभारी डी पुरंदेश्वरी से कांग्रेस की चुनौती भाजपा शासित राज्यों में किसानों को धान का दाम और धान खरीदी की स्थिति की जानकारी सार्वजनिक करें। आंदोलन करने का इतना ही शौक है तो भाजपा नेता दिल्ली जाये। छत्तीसगढ़ की धान खरीदी में धान बेचने वाले भाजपा नेताओं को धान खरीदी पर आंदोलन में शामिल होने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार ने किया है किसानों का सही सम्मान
कांग्रेस नेता श्री त्रिवेदी ने कहा कि छत्तीसगढ़ की सरकार किसानों की हितैषी है। यहां की कांग्रेस सरकार ने किसानों का सम्मान किया है। किसानों के 11270 करोड़ रूपये की ऋण की माफी की गयी है। धान खरीदी रिकार्ड 80 लाख टन से अधिक हुई है। 2500/रूपये प्रति क्विंटल की दर से/समर्थन मूल्य 1750/- प्रति क्विंटल से 750 प्रति क्विंटल अधिक कुल लाभ - 8 करोड़ क्विंटल ग 750/- 6000 करोड़ का अतिरिक्त लाभ दिया गया है। उन्होंने कहा कि किसानों को 6000 रूपये का सम्मान देकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी किसानों के परिवार का माखौल उडा रहे है। किसान दाम्पति सहित अपने 3 बच्चों को जोडते है तो परिवार के एक सदस्य को प्रति दिन 3 रूपये का सम्मान राशि मिल रहा है जो किसानों के लिये शर्मनाक स्थिति है। इस मौके पर खनिज निगम के अध्यक्ष गिरीश देवांगन, नितिन भंसाली, आरपी सिंह, विकास तिवारी, धनंजय सिंह समेत अन्य लोग मौजूद रहे।




