BREAKING NEWS : देखिए लाल किले के पास हुए बम धमाके की खौफनाक तस्वीरें, 8 लोगों की मौत    |    Breaking : 1 नवंबर को सभी स्कूल – कॉलेजों में रहेगी छुट्टी, आदेश जारी    |    BIG BREAKING : सी.पी. राधाकृष्णन होंगे भारत के नए उपराष्ट्रपति    |    साय कैबिनेट की बैठक खत्म, लिए गए कई अहम निर्णय    |    CG Accident : अनियंत्रित होकर पेड़ से टकराई तेज रफ्तार कार, युवक-युवती की मौके पर ही मौत, 3 की हालत गंभीर    |    Corona Update : छत्तीसगढ़ में फिर डराने लगा कोरोना, इस जिले में एक ही दिन में मिले इतने पॉजिटिव मरीज    |    प्रदेशवासियों को बड़ा झटका, बिजली दरों में हुई बढ़ोतरी, जाने प्रति युनिट कितने की लगेगी चपत    |    छत्तीसगढ़ में बढ़ा कोरोना का खतरा: 20 दिनों में 3 मौतों के बाद प्रशासन अलर्ट मोड पर    |    Ration Card के बदले रोजगार सहायक की Dirty Deal, बोला- ‘पहले मेरे साथ शारीरिक संबंध बनाओ फिर मिलेगा राशन कार्ड    |    छत्तीसगढ़ में तेजी से पांव पसार रहा कोरोना, रायपुर में सबसे ज्यादा केस, राज्य में कुल 45 एक्टिव केस    |

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने लोकसभा में छत्तीसगढ़ से जुड़े वन एवं पर्यावरण के ज्वलंत मुद्दों को उठाया

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने लोकसभा में छत्तीसगढ़ से जुड़े वन एवं पर्यावरण के ज्वलंत मुद्दों को उठाया
Share

 रायपुर। लोकसभा के मानसून सत्र के पहले दिन रायपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता श्री बृजमोहन अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ राज्य में वन एवं पर्यावरण से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दों को आतरांकित प्रश्न के माध्यम से लोकसभा में जोरदार ढंग से उठाया।

अग्रवाल ने सरकार से जानना चाहा कि, क्या छत्तीसगढ़ में विगत एक दशक में 18 करोड़ पौधे लगाने का दावा किया गया है, और यदि हां, तो उनमें से कितने पौधे जीवित बचे हैं? क्या बस्तर, कोरबा और दंतेवाड़ा जैसे क्षेत्रों में खनन परियोजनाओं के चलते वनाच्छादित क्षेत्र में कमी आई है, और क्या संबंधित ग्राम सभाओं की सहमति इन परियोजनाओं हेतु ली गई थी? क्या राज्य में कई विकास परियोजनाएं पर्यावरणीय मंजूरी के अभाव में वर्षों से लंबित हैं? क्या अप्रयुक्त भूमि पर वृक्षारोपण हेतु कोई ठोस कार्य योजना तैयार की गई है? और क्या इन योजनाओं की निगरानी उपग्रह मानचित्रण, जियो टैगिंग एवं सामाजिक लेखा परीक्षा के माध्यम से की जा रही है

सांसद बृजमोहन अग्रवाल के सवालों का जवाब देते हुए पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री श्री कीर्तिवर्धन सिंह ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2010-11 से 2019-20 के बीच छत्तीसगढ़ में लगभग 18 करोड़ पौधे लगाए गए हैं, जिनमें से अधिकांश स्थानों पर पौधों की उत्तरजीविता दर संतोषजनक (लगभग 90%) रही है।

भारतीय वन सर्वेक्षण की रिपोर्ट के अनुसार 2013 से 2023 के बीच छत्तीसगढ़ में वन क्षेत्र में कोई उल्लेखनीय कमी नहीं आई है, बल्कि अति सघन वन क्षेत्र में वृद्धि दर्ज की गई है। खनन परियोजनाओं के लिए सभी अनुमति प्रक्रियाएं वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 एवं वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत की जाती हैं, और ग्राम सभाओं से विधिवत सहमति प्राप्त की जाती है। राज्य में कोई भी विकास परियोजना 105 दिनों की निर्धारित सीमा से अधिक पर्यावरणीय स्वीकृति के लिए लंबित नहीं है। वृक्षारोपण कार्य स्वीकृत योजनाओं और राजस्व विभाग द्वारा प्रदत्त भूमि पर किए जाते हैं। ई-ग्रीन वॉच पोर्टल एवं जीआईएस आधारित निगरानी, जियो-टैगिंग, और तृतीय पक्ष सत्यापन जैसे आधुनिक उपायों से इन कार्यों की निगरानी की जा रही है।

श्री बृजमोहन अग्रवाल ने सरकार द्वारा दिए गए उत्तर पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि, “छत्तीसगढ़ में पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना आज की प्राथमिक आवश्यकता है। वृक्षारोपण केवल आंकड़ों का खेल नहीं होना चाहिए, बल्कि उसका जमीनी सत्यापन भी जरूरी है। खनन गतिविधियों के चलते जनजातीय क्षेत्रों के वन और जनजीवन प्रभावित न हों, यह सुनिश्चित करना हम सबकी जिम्मेदारी है।” उन्होंने आगे कहा कि वे आने वाले समय में भी छत्तीसगढ़ के वन, पर्यावरण और जनहित से जुड़े हर मुद्दे को संसद में पूरी ताकत से उठाते रहेंगे।

 
 


Share

Leave a Reply