जहर खाकर आत्महत्या करने वाले सरजूराम यादव के मामले की दण्डाधिकारी जांच के आदेश
रायपुर। कलेक्टर से खरोरा तहसील के ग्राम मोहरेंगा के निवासी सरजूराम यादव से 12 जून को जहर सेवन कर आत्महत्या किए जाने संबधी मामला प्रकाश में आने और पुलिस से बरामद किए गए सुसाइट नोट में भूमि संबंधी विवाद का उल्लेख होने पर प्रकरण की तत्काल जानकारी प्राप्त की ।
कलेक्टर ने इस संबंध में विस्तृत जांच के लिए दण्डाधिकारी जांच के आदेश दिए गए हैं। जांच दल की अध्यक्ष अपर कलेक्टर रायपुर पदमिनी भोई साहू को बनाया है।
उल्लेखनीय है कि ग्राम मोहरेंगा में ग्राम कोटवार तोरनदास पिता रतनदास द्वारा मोहरेंगा में कोटवारी सेवा भूमि खसरा नं. 417/2 रकबा 1.1980 हे. भूमि धारित है। करीब दो वर्ष पूर्व ग्राम कोटवार से इस भूमि के सीमांकन के लिए नायब तहसीलदार तिल्दा नंदकिशोर सिन्हा के सक्षम सीमांकन के लिए आवेदन पत्र प्रस्तुत किए जाने पर विधिवत किए गए। सीमांकन में रकबा 0.372 हे. भूमि पर मृतक सरजू यादव का अनाधिकृत कब्जा पाया गया था। जिस पर संबंधित राजस्व न्यायालय के पीठासीन अधिकारी नंद किशोर सिन्हा से विधिवत सुनवाई किया जाकर वाद के संबंधित दोनों पक्षों की सुनवाई के पश्चात् 22 मई 2020 को मौके पर भूमि का चिन्हांकन कर दोनों पक्षों को बताया गया।
सीमांकन कार्यवाही के दौरान तैयार पंचनामा में सरजू यादव द्वारा हस्ताक्षर करने से इंकार किया गया। लेख है कि राजस्व न्यायालयों से की गई कार्रवाई के संबंध में असंतुष्ट पक्षकार को विधिवत अपील,पुनरीक्षण करने का अधिकार प्राप्त है, किन्तु मृतक सरजूराम ने अपने जीवनकाल में सक्षम न्यायालय में अपील/पुनरीक्षण प्रस्तुत नहीं किया।
यद्यपि यह विवाद प्रथम दृष्टया दो किसानों के मध्य भूमि संबंधी विवाद प्रतीत होता है, किन्तु इसके बावजूद आत्महत्या के मामले की निष्पक्ष जांच किया जाना आवश्यक है। इसीलिए कलेक्टर रायपुर से तत्काल प्रभाव से नायब तहसीलदार खरोरा नंदकिशोर सिन्हा को जिला कार्यालय रायपुर संलग्न करने का आदेश जारी कर दिया गया है और तत्कालीन पटवारी मोहरेंगा देवेन्द्र कर्ष को निलंबित किया गया है।
जांच दल में अनुविभागीय अधिकारी (रा०) रायपुर प्रणव सिंह, प्रभारी अधिकारी भू-अभिलेख श्रीमती पूनम शर्मा और तहसीलदार खरोरा रीमा मरकाम को सदस्य नामांकित किया गया है। जांच दल को निम्न बिन्दुओं पर तत्काल प्रतिवेदन प्रेषित करने के लिए निर्देशित किया गया है। मृत्यु का कारण क्या था, मृतक की मृत्यु किन परिस्थितियों में हुई, क्या घटना को टाला जा सकता था, मृतक की मृत्यु के लिए यदि कोई जिम्मेदार है तो उत्तरदायित्व का निर्धारण, घटना की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या उपाय होंगे, अन्य बिन्दु जो जांच अधिकारी उचित समझे, क्या किसी लोक सेवक का पक्षपातपूर्ण कृत्य मृत्यु के लिए उत्तरदायी है ।




