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प्राकृतिक पेंट से हो रहा सरकारी भवनो का रंग रोगन, जानें क्या है इस पेंट के फायदे

प्राकृतिक पेंट से हो रहा सरकारी भवनो का रंग रोगन, जानें क्या है इस पेंट के फायदे
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 रायपुर। नया घर हो या पर्व की तैयारी हम अपने घरो के रंग रोगन में पीछे नहीं रहते। बदलते परिवेश में केवल शहर नहीं बल्कि कस्बों और गांवों में भी अब लोग अपने घरों में पेंट और डिस्टेंपर लगवाना चाहते हैं। बाजार में उपलब्ध रासायनिक पेंट लोगों के जेब के साथ साथ पर्यावरण और स्वास्थ्य पर भी असर डालती है। इसी बात को ध्यान में रखकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सभी शासकीय विभाग, निगम, मंडल एवं स्थानीय निकायों में भवनों के रंग रोगन के लिए गोबर पेंट का उपयोग करने के निर्देश दिए है। उनके निर्देश का पालन करते हुए रायपुर नगर निगम ने भवनों की पुताई का कार्य आरम्भ कर दिया है।

नगर निगम रायपुर जोन 8 के जोन आयुक्त अरुण बताते है की शासन के आदेशानुसार अपने निगम भवन की पुताई के लिए प्राकृतिक पेंट क्रय किया गया है। इस पेंट की कीमत बाजार में उपलब्ध रासायनिक पेंट से कम है। साथ ही गोबर से निर्मित होने के कारण रासायनिक पेंट की तुलना में इसमें महक भी नहीं की आती जिससे यह पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए अनुकूल है।

रायपुर के जरवाय गौठान में तैयार किया जा रहा प्राकृतिक पेंट

रायपुर के जरवार गौठान में गोवर्धन स्व सहायता समूह की महिलाएं गोबर से प्राकृतिक पेंट बना रही हैं। यहां के गोबर से बने पेंट का उपयोग सबसे पहले रायपुर नगर निगम के भवन की पुताई के लिए किया गया था। नगर निगम की बिल्डिंग की आकर्षक पुताई के लिए 500 किलो पेंट का उपयोग किया गया। सरकारी भवनों के अलावा आम लोगों के बीच भी इस पेंट की मांग बढ़ रही है। रायपुर के अलावा अन्य जिलों में भी स्थानीय लोगों ने इस पेंट का उपयोग किया है वहीं राजधानी में भी बहुत से लोग इस पेंट से अपने घरों की पुताई कर चुके है।

जरवाय गौठान की स्व सहायता समूह की अध्यक्ष धनेश्वरी रात्रे बताती है की उनके समूह में 22 महिलाएं काम करती है। कुछ नया करने की सोच से उन्होंने गोबर से पेंट बनाने का काम शुरू किया। गोबर से पेंट बनाने के लिए महिलाओं ने विधिवत प्रशिक्षण भी प्राप्त किया। पेंट बनाने की शुरुआत अप्रैल 2022 से हुई और अब तक तीन हजार लीटर पेंट बनाकर समूह की महिलाएं बेच चुकी है। गोबर से निर्मित पेंट आधा लीटर, एक, चार, और दस लीटर के डिब्बों में उपलब्ध है।

ऐसे तैयार होता है गोबर से प्राकृतिक पेंट

प्राकृतिक पेंट बनाने के लिये गोबर को पहले मशीन में पानी के साथ अच्छे से मिलाया जाता है फिर इस मिले हुए घोल से गोबर के फाइबर और तरल को डी-वाटरिंग मशीन के मदद से अलग किया जाता है। इस तरल को 100 डिग्री तापमान में गरम करने से बने अर्क को पेंट के बेस की तरह इस्तेमाल किया जाता है। जिसके बाद इसे प्रोसेस कर पेंट तैयार होता है। गोबर से प्राकृतिक पेंट के निर्माण का मुख्य घटक कार्बोक्सी मिथाइल सेल्यूलोज (सीएससी) होता है। सौ किलो गोबर से लगभग 10 किलो सूखा सीएमसी तैयार होता है। कुल निर्मित पेंट में 30 प्रतिशत मात्रा सीएमसी की होती है। गोवर्धन स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा निर्मित यह पेंट महिलाओं की आय का जरिया तो है ही साथ ही महिलाओं की अलग पहचान बना रहा है।

बाजार में मिलने वाले अधिकतर पेंट में ऐसे पदार्थ और हैवी मेटल्स मिले होते है जो हमारे स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते हैं। वहीं गोबर से निर्मित पेंट प्राकृतिक पदार्थों से मिलकर बनता है इसलिए इसे प्राकृतिक पेंट भी कहते है। केमिकल युक्त पेंट की कीमत 350 रुपए प्रति लीटर से शुरू होती है पर गोबर से निर्मित प्राकृतिक पेंट की कीमत 150 रुपए से शुरू है। गोबर से बने होने के कारण इसे बहुत से फायदे भी है जैसे यह पेंट एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल है साथ ही घर के दीवारों को गर्मी में गर्म होने से भी बचाती है और तापमान नियंत्रित करती है।



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