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परिजनों को देखने तरस गए दुर्ग केंद्रीय जेल के बन्दी, कोरोना के चलते चार महीनों से मुलाकात बंद

 परिजनों को देखने तरस गए दुर्ग केंद्रीय जेल के बन्दी, कोरोना के चलते चार महीनों से मुलाकात बंद
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दुर्ग। केंद्रीय जेल दुर्ग में निरुद्ध बंदियो का अपने परिजनों से मुलाकात चार महीनों से बंद है। कोरोना त्रासदी के चलते सैकड़ों परिवार जेल में बंद अपने परिजनों की एक झलक तक नही देख पाएं है। यही हाल जेल में विभिन्न अपराधों में निरुद्ध बंदियों का भी है। उनके चार महीने अपने अजीज रिश्तेदारों को देखे बिना गुजर गए। अलबत्ता जेल प्रशासन बंदियों को मोबाइल फोन के जरिये रिश्तेदारों से बात करने की सुविधा जरूर मुहैया करा रहा है। कुछ शुल्क लेकर बात करने की अवधि 8 मिनट तक तय की गई है। 
 
 
कहते है किसी से बात कर लेने का मतलब आधी मुलाकात कर लेनी होती है। दुर्ग केंद्रीय जेल में बंद हजार के आसपास बंदियों के लिए मोबाइल फोन से अपने रिश्तेदारों से बातचीत ही जीने का सहारा बन गया है। क्योंकि कोरोना काल में बंदियो से मुलाकात पूर्णतय: बंद है। 
 
 
मालूम हो कि विचाराधीन बन्दी सप्ताह मे एक बार व सजायाफ्ता कैदी को महीने में एक दफे अपने परिजनों से मुलाकात की सुविधा जेल नियमो के अनुसार दी जाती है। मगर जब से कोरोना की बीमारी आयी है, सब कुछ बदल सा गया है। सुरक्षा के लिहाज से बंदियो व परिजनों के बीच मुलाकात का सिलसिला रुक गया है, और उसी के साथ समय का पल भी इनके लिए थम से गया है। किसी को अपने माता पिता, पत्नी से मिले चार महीना गुजर गए, तो किसी ने महीनों से अपने मासूम बच्चों का चेहरा नही देखा है। हाँ, नियमानुसार मोबाइल पर बातचीत जरूर करा दी जा रही है|

 
जेल प्रशासन का यह कदम एहतियातन जरूरी भी है। क्योंकि यदि एक दफे जेल में कोरोना पहुंचा, तो स्थिति नियंत्रण से बाहर चले जाने का खतरा उत्पन्न हो जाएगा। क्योंकि पचासों कैदियो को अलग अलग बैरकों में भेड़ बकरियों की तरह ठूस ठूँस कर रखा जाता है। बताते चले कि एक बैरक में 20 लोगो को रखने की औसत क्षमता होती है, किंतु बंदियो की संख्या इससे ढाई गुणी तक अधिक भरी जाती है, क्योकि जेलों में उतनी जगह नही है। इसलिए जेल प्रशासन द्वारा सावधानी बरती जाना लाजिमी है। 


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