सरकार को करोड़ों का चूना लगाने वाले प्रगति टेक्नो, रामराजा प्रिंटर्स पर एफआईआर की अनुशंसा के बाद भी मेहरबान हैं सरकारी प्रेस के अफसर
रायपुर। छत्तीसगढ़ में राज्य के मुख्यमंत्री की मितव्ययता की धज्जियां उड़ाने और एफआईआर की अनुशंसा वाले प्रगति टेक्नो और रामराजा प्रिंटर्स को सरकारी प्रेस फिर से करोड़ों रुपयों का काम देने की तैयारी में है। जबकि प्रदेश के तात्कालीन मुख्य सचिव सुनील कुजुर ने एक पत्र जारी कर सभी प्रिटिंग कार्य छत्तीसगढ़ संवाद के माध्यम से कराने के निर्देश सभी विभागों को दिए हैं। इसके बाद भी कई अफसर सरकार को करोड़ों रुपयों का चूना लगाने वाले इन दो फर्मों को काम देकर उनसे लाखों ऐंठने में व्यस्त हैं।
उल्लेखनीय है कि कांग्रेस नेता विनोद तिवारी की शिकायत पर प्रगति टेक्नो एवं रामराजा प्रिंटर्स के संचालक विकास कपूर और उनके परिवार के सदस्यों ने कूटरचित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर तत्कालीन महाप्रबंधक अशोक चतुर्वेदी और अन्य के साथ मिलकर षड्यंत्रपूर्वक शासन को क्षति पहुंचाई है। उपरोक्त मामले में विनोद तिवारी ने शिकायत में बताया था कि तत्कालीन महाप्रबंधक अशोक चतुर्वेदी ने दागी फर्म के संचालक विकास कपूर और अन्य के साथ लेनदेन सांठ-गांठ कर अपने रिश्तेदार अंकित तिवारी भानुप्रतापपुर को प्रगति में विधिवत पार्टनर बना सप्रमाण शिकायत को नोटशीट में झूठा लिखकर नस्तीबद्ध कर दिया था। इस जांच की पूरी नस्ती को निकालने पर तत्कालीन महाप्रबंधक चतुर्वेदी के झूठे लेख का काला कारनामा करने का खेल सामने आया।


विनोद तिवारी ने बताया कि तब उपरोक्त घटनाक्रम से अवगत करते हुए पुन: प्रमुख सचिव शिक्षा आलोक शुक्ला को सप्रमाण 17 बिंदु की शिकायत की, उनके आदेश पर हुई जांच रिपोर्ट में समिति ने तत्कालीन महाप्रबंधक अशोक चतुर्वेदी और प्रगति टेक्नो रामराजा के संचालक विकास कपूर एवं अन्य को गंभीर अपराध का दोषी पाया है। जांच समिति ने 1 माह पूर्व अपनी रिपोर्ट प्रबंध संचालक को सौंपी है। रिपोर्ट में दोषियों खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की अनुशंसा की गई है।
विनोद तिवारी ने बताया कि तात्कालिक महाप्रबंधक अशोक चतुर्वेदी ने भ्रष्टाचार कर प्रगति टेक्नो और रामराजा के संचालकों के साथ मिल इन दागी फ़र्मों को 12 करोड़ का 8000 मैट्रिक टन छपाई का कार्य दिया, जबकि इन फर्जी फर्मों के खिलाफ सप्रमाण शिकायत की गई थी। इन दागी फर्मों को जितना कार्य दिया गया, कुछ जगहों पर वह कार्य भी पूरा ना करते हुए सांठ-गांठ कर सिर्फ बिल लगाकर राशि आहरण कर ली गई।
बता दें कि छत्तीसगढ़ में शासकीय प्रेस में प्रिंटर्स की सम्बद्धता वर्ष 2016 में ही समाप्त हो गई है, लेकिन विभागों से मिलने वाले कार्यों से भारी कमाई की आस रखे हुए अफसर नए टेंडर न बुलाकर 2016 में टेंडरावधि पूर्ण कर चुके प्रिंटर्स को ही एक्सटेंशन देकर कार्यों को सम्पादित कर रहे हैं। शासकीय प्रेस के इस कृत्य से एक ओर जहां राज्य सरकार की छवि धूमिल हो रही है वहीं यहां के अफसर इन फर्मों से मोटी रकम लेकर काली कमाई करने में व्यस्त हैं।
सूत्रों के अनुसार छत्तीसगढ़ राज्य ओपन स्कूल की किताबों का मुद्रण सरकारी मुद्रणालय से मुद्रित कराने स्कूल शिक्षा विभाग ने प्रेषित किया है, लेकिन सरकारी मुद्रणालय में आज की स्थिति तक नया टेंडर नहीं होने की वजह से लगभग 65 करोड़ का कार्य एक्टेंशन देकर तीन फर्मों के बीच विभाजित कर दिया गया है, जिसमें ये दागी प्रिंटिंग प्रेस भी शामिल हैं। यहां पर यह बताना जरुरी है कि इसके पूर्व में जारी कार्य को कुछ समय के लिए लंबित कर दिया गया था, फिर पुन: बगैर नए प्रिंटर्स की सम्बद्धता के यह कार्य प्रगति टेक्नो और रामराजा को भी शामिल करर विभाजित कर दिया गया।
बता दें कि मुख्य सचिव के पत्र के अनुसार यह कार्य शासकीय प्रिंटिंगप्रेस को जाने के बाद सम्बद्धता नहीं होने पर छत्तीसगढ़ संवाद को जान था, लेकिन अफसरों ने यहां पर मिली भगत कर कार्यों का विभाजन सीधे कर दिया।
जबकि विनोद तिवारी ने प्रमुख सचिव शिक्षा आलोक शुक्ला से प्रगति टेक्नो और रामराजा प्रिंटर्स को तत्काल ब्लैक लिस्ट कर तत्कालीन महाप्रबंधक अशोक चतुर्वेदी समेत उपरोक्त प्रिंटर्स संचालक के खिलाफ तत्काल एफआईआर कराने की मांग की है।




