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राजीव अग्रवाल ने मुख्यमंत्री से की स्कूल खोलने पूर्व पालकों से भी सुझाव लेने के साथ इन बातो पर भी विचार करने की मांग की

राजीव अग्रवाल ने मुख्यमंत्री से की स्कूल खोलने पूर्व पालकों से भी सुझाव लेने के साथ इन बातो पर भी विचार करने की मांग की
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बिलासपुर, सद्भावना सर्व वैश्य समाज छत्तीसगढ़ के संस्थापक संयोजक राजीव अग्रवाल द्वारा श्री भूपेश बघेल जी मुख्य मंत्री छत्तीसगढ़ शासन रायपुर को पत्र लिखकर राज्य में स्कूल खोलने के निर्णय पूर्व बच्चो के पालकों से भी सुझाव लेने की मांग की है।
श्री राजीव अग्रवाल ने सद्भावना सर्व वैश्य समाज की तरफ से सुझाव देते हुए लिखा है कि छतीसगढ़ प्रदेश में नौ निहालो की प्राथमिक स्कूल शिक्षा आरम्भ करने के पूर्व इसे अत्यन्त ही संवेदनशील विषय मानकर सत्र आरम्भ के समयावधि की घोषणा पूर्व राज्य शासन के सार्वजनिक हेल्प लाइन नंबर एवं अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से तथा ग्राम पंचायतों में पालकों की बैठक अथवा लिखित सुझाव मंगाकर विस्तृत वैज्ञानिक एवम् चिकित्सा के दृष्टकोण के आधार पर निर्णय लिए जाने की मांग करती है।
सद्भावना सर्व वैश्य समाज द्वारा कुछ सुझावों एवम् बिंदुओं को भी आपके निर्णय पूर्व विचार हेतु भेजा गया है। जिसमे कहा गया है कि

1 . करोना आपदा विश्वव्यापी है विभिन्न देश एवम् राज्यो के दावे, प्रयास व कड़ाई के बाद भी वर्तमान समय जनजीवन के प्रतिकूल है।

2 देश के अंदर विभिन्न राज्यों में आरक्षण के मुद्दे पर योग्यताओं को लेकर लचीलापन अपनाए रखने की व्यवस्था है। क्या इसी दृष्टिकोण को व्यापक मानकर कुछ अरसे के लिए शिक्षा प्राप्त करने की वार्षिक योजना को आधी घोषित कर पूर्णांक दिया जाना उचित नहीं रहेगा। शाला में आधी उपस्थिति को इसी सन्दर्भ में पूर्ण मान लिया जाए।

2 मासूम बच्चो को कोरोना के विकराल होती परिस्थितियों मे सरकार इन बच्चों की जान की सुरक्षा की जिम्मेदारी होने के व्यवस्थाओं से संतुष्ट है।

3 क्या स्कूल प्रबन्धन इन बच्चों को मास्क (वह भी ठीक से) पहनाकर रखेगा?? साबुन सैनिटाइजर का उपयोग बार बार करवाऐगा?? कोरोना के केसेस बढ़ने पर स्कूल बंद तो नहीं होगे।

4 वर्तमान समय में विभिन्न गाइड लाइन बनाकर जनजीवन सामान्य करने का प्रयास से क्या शासन प्रशासन संतुष्ट है। सब इस समय कोरोना इन्फेक्शन के पीक की प्रतीक्षा कर रहे हैं, तब नौनिहालों को कोरोना से रोके रहने घर में रहने की सलाह अधिक बुद्धिमानी नहीं होगी।

5 बच्चे यदि 4-6 महीने बाद स्कूल जायेंगे तो उनके बौद्घिक स्तर पर एवम् स्कूल प्रबन्धन को आर्थिक स्तर पर पड़ने वाले असर का कोई और रास्ता निकालना उचित नहीं रहेगा।


6 क्या स्कूली व्यवस्था इतना संतोषप्रद है कि वायरस स्कूली बच्चों में एक से दूसरे में ,फिर बच्चा के घर के दूसरे बच्चों, माता पिता, फिर बुजुर्गों में इन्फेक्शन फैलने की संभावनाओं से ज्यादा प्रभावी है।

7 जुलाई का महीना बरसात के मौसम का प्रारंभ है, बारिश और उमस के कारण वायरस और बैक्टीरिया बड़ी तेजी से फैलते हैं, कोरोना का ये वायरस का इस सीजन में फैलाव नहीं होने का कोई तैयारी संतोषप्रद है।

8 हर माता पिता अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित रहते हैं, लेकिन पहले वे सुरक्षित रहे। कोरोना लहर के सामने
क्या ऑटो, टेंपो पर बच्चों में फिजिकल डिस्टेंसिंग रह पायेगी?
क्या स्कूल बस कोरोना संक्रमण से अछूती रह सकती है?
क्या स्कूल के टीचर, आया बाई, चपरासी, बस ड्राइवर, कंडक्टर, गार्ड सभी कोरोना टेस्ट में नेगेटिव साबित होने के बाद ही बच्चों के सामने लाए जायेंगे?

9 एक एक कक्षा में जहां 40-50-60 बच्चे होते हैं वहां क्या 1-1 मीटर की दूरी बनाए रखी जाएगी?
क्या बच्चे इस दूरी का 8-9 घंटे पालन कर पाऐंगे??
प्रार्थना स्थल पर तथा छुट्टी के समय जब बच्चे आपस में टकराते हुए निकलते हैं तब क्या यह दूरी बनाए रखी जा सकेगी?
लगातार मास्क पहनने से शरीर में ऑक्सीजन की कमी (17%तक) देखी गई है, बच्चों को ऑक्सीजन की ज़रूरत हमसे ज़्यादा होती है, क्या बच्चे 8-9 घंटे मास्क लगा कर रह पाऐंगे??

10 समय समय पर मास्क कैसे उतारना, पुन: कैसे पहनना, पानी पीने व टिफिन खाते समय मास्क कैसे हटाना, उसके बाद हाथ सैनिटाइजर से या सोप से कितनी देर तक कैसे धोना (रगड़ना) यह सब की तैयारी संतोषप्रद है?

11 क्या पहले से काम के बोझ में दबा शिक्षक/शिक्षिका या स्कूल प्रबंधन अतिरिक्त पैसे के बगैर कोई नया कोरोना सुपरवाइजर नियुक्त करेगा?

12 क्या बच्चों में कोरोना मॉरटालिटि कम होना आपके हिसाब से काफी है?
13 क्या बच्चे के इन्फेक्शन होने की अवस्था में स्कूल या शासन कोई जिम्मेदारी लेगा ?
14 इलाज के लाखों रूपए में कितना हिस्सा स्कूल या शासन वहन करेगा ?


कल को जब केसेस बढ़ेंगे, जो लगातार बढ़ रहें हैं, तब आपके गली मुहल्ले में होने वाली मौत आपको बच्चों समेत सेल्फ क्वाराईन्टिन को विवश कर देगी तब बच्चे की पढ़ाई का साल और स्कूल में पटाई जा चुकी फीस का क्या होगा।


आदरणीय संवेदनशील मुद्दों पर आपके सभी निर्णय अन्य राज्यो के लिए भी अनुकरणीय होते है।आशा है प्राथमिक व पूर्व माध्मिक स्तर की सभी निजी एवम् शासकीय शालाओं में आपका निर्णय समस्त पालक एवं अन्य राज्यो को भी प्रेरित करेगा।
 



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