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तीसरी श्रेणी के लॉकडाउन का ध्येय है जान बची तो लाख उपाय- लता उसेंडी

तीसरी श्रेणी के लॉकडाउन का ध्येय है जान बची तो लाख उपाय- लता उसेंडी
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कोंडागाव। जिला के भारतीय जनता पार्टी की ओर से पूर्व मंत्री लता उसेंडी एवं कोंडागाव भाजपा जिला संगठन प्रभारी श्रीनिवास राव मद्दी, जिलाध्यक्ष दीपेश अरोरा,गोपाल दीक्षित, की उपस्थिति में लता उसेंडी ने कहा कि अभी हम लोग लॉकडाउन-03 से गुजर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार लॉकडाउन की घोषणा करते हुए कहा था, जान है तो जहान है, फिर दुबारा 'जान भी और जहान भी के ध्येय वाक्य के साथ काम किया। अब इस तीसरी श्रेणी के लॉकडाउन का ध्येय है जान बची तो लाख उपाय। एकमात्र प्राथमिकता जान बचाने की थी। 

उन्होने कहा कि देश-दुनिया ने पहले कभी इस तरह के हालात नही देखे थे। जब पूरा देश बल्कि पूरी दुनिया एक साथ एक ही चुनौती से जूझ रहा था। लेकिन यह मोदी जी के सशक्त नेतृत्व की ताकत थी कि आज दुनिया भर में हमारी क्षति न्यूनतम है। जहां दुनिया के सबसे विकसित और समृद्ध कहे जाते अमेरिका और इटली जैसे देशों में हाहाकार है, भारत अपेक्षाकृत न्यूनतम क्षति के साथ इस महामारी का सामना कर रहा है। अगर कुछ समुदाय विशेष की समस्या नहीं होती तो हालात और बेहतर होते। अब यह उम्मीद की जा रही है कि स्थिति नियंत्रण में होगी।

जान बची तो लाख उपाय, के ध्येय को सामने रख कर देश ने धीरे-धीरे जन जीवन को पटरी पर लाने का सोचा। इसी सन्दर्भ में केंद्र का निर्देश आया कि कुछ खास श्रेणियों के कारोबार को छोड़ कर शेष सभी कारोबार तय शर्तों के अधीन राज्य अपनी-अपनी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए शुरू कर सकते हैं। ऐसा करते समय निश्चय ही यह ध्यान में था कि कोरोना से भी नहीं और भूख से भी नहीं मरें लोग। रोजी-रोजगार आदि शुरू हो।


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