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खुलेआम दबंगई दिखाता रायगढ़ आबकारी का युवराज

खुलेआम दबंगई दिखाता रायगढ़ आबकारी का युवराज
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रायगढ़, भूपेश सरकार के लिए शराब कितना बड़ा राजस्व का सहारा है, इस बात की गंभीरता इसी बात से लगाई जा सकती है कि बीते साल भर से लॉकडाउन में दारू को दवा के बाद सबसे ज्यादा तवज्जो दी गई है। फिर इसी शराब खरीदने वाले को झिड़की, डांट, गाली और अपमान का घूंट पीने के बाद खराब क्वालिटी का शराब खरीदना पड़े तो आबकारी महकमे के रहने पर सवाल खड़ा होता है। जिस विभाग का सिर्फ एक ही काम है निगरानी वो भी नहीं कर पा रही तो क्यों न सरकार ठेकों को फिर से प्राइवेट कर दे। ग्राहकों की सुविधा के लिए इसे बेचने में जो सहूलियत राज्य सरकार ने दी उसका बेजा फायदा आबकारी विभाग के नुमाइंदे कर रहे हैं ऑनलाइन ब्रांड दिखता है आर्डर भी हो जाता है पर मिलता नहीं है। ठीक वैसे जैसे मलाई काटे आबकारी और विवाद हो तो प्लेसमेन्ट एजेंसी जिम्मेदार। नई सरकार में व्यवस्था कुछ ऐसी बनी है कि पुलिस भी इन कमाऊपूतों पर कार्रवाई करने से हिचकती है।
जिले के सबसे बड़े लेकिन सबसे विवादित ठेके से आए दिन ग्राहकों से बदतमीजी ओवररेट, सेठ-सेल्समेन की मनमानी जैसी शिकायतें आ रही हैं। इसी ठेके से प्राइम वन वर्क फ़ोर्स प्राइवेट लिमिटेड के जिला प्रभारी पर वसूली के आरोप लगे एफआईआर दर्ज हुई अधिकारी को बर्खास्त किया गया तो सुपरवाइजर व सेल्समेन को हटा दिया गया। नया सुपरवाइजर लैलूंगा में सरकारी शराब दुकान में शराब में मिलावट करने का दोशी पाए जाने के बाद सस्पेंड हुआ युवराज पटेल बना। जिसने आते ही साथ अपने आकाओं की जेब जबरदस्त ओवरप्राइसिंग से भरना शुरू कर दिया फिर लॉकडाउन में आरोप है कि जब केवल ऑनलाइन शराब देने का नियम बना तब इसने ऑफलाइन खूब शराब सीधे ठेके से बेचा। सूत्र बताते हैं कि 10 लाख रुपये से ज्यादा की शराब ऑफलाइन युवराज ने बेचा है।

चक्रधर नगर के युवाओं ने जिन्होंने हमें अपने साथ हुई बदतमीजी की शिकायत की उन्होंने बताया कि मई के दूसरे सप्ताह में एक सेठ की गाड़ी की आड़ में उन्हें इसी ठेके से 1000 रुपये तक कि शराब 300 रुपये अधिक और उससे ऊपर की 700 रुपये अधिक में दिया गया। हरदिन मारपीट की नौबत चक्रधर नगर के ठेके में यहां के सुपरवाइजर युवराज पटेल से ग्राहकों से बहस हरदम होते ही रहती है। आरोप है कि वह बेहद बतमीजी से ग्राहकों से बात करता है जिससे उसके यहां ऑनलाइन की खपत कम हो और वह ऑफ़लाइन खेल कर सके। दो दिन पहले युवाओं के एक गुट से वह भिड़ गया, युवराज की सुरक्षा के लिए ठेके में प्राइम वन प्लेसमेन्ट एजेंसी के कम-से-कम 4 गुर्गे हमेशा मौजूद रहते हैं। स्थानीय ग्राहकों से ऐसा बर्ताव कहीं किसी बड़ी घटना को न्योता न दे। चक्रधर नगर थाना प्रभारी निरीक्षक अभिनवकांत सिंह कहते हैं अभी तक कोई शिकायत नहीं आई है। शिकायत आएगी तो बेशक कार्रवाई की जाएगी।

खड़े रहो 40 मिनट लाइन में चक्रधर नगर के ठेके में फिलहाल पिक अप के 25 रुपये और होम डिलीवरी के 118 रुपये देने होते हैं। होम डिलीवरी ये जानकर लेट करते हैं ताकि ग्राहक यहां न आए। ऑनलाइन पिक अप का नियम ऐसा है, आप मनपसंद ब्रांड का अग्रिम भुगतान करिए और ठेके से आकर ले जाइए पर शराब को लेने के लिए यहां लंबी लाइन लगानी पड़ती है। लाइन से नंबर भी आ गया तो अंदर वो ब्रांड न देकर दोयम दर्जे की शराब ग्राहकों को दी जा रही है। ऑनलाइन स्टॉक दिखाने की बात पर सेल्समेन सॉफ्टवेयर की दिक्कत बोलता है जो कि कोरा झूठ है। हमेशा कैसे सॉफ्टवेयर की दिक्कत होगी अगर है तो आर्डर कैसे हो रहा और पैसे कैसे कट रहे हैं। अग्रिम 25 रुपये का भुगतान और ब्रांड पसंद करने के बाद भी ग्राहकों को कम-से-कम 40 मिनट तक मशक़्क़त करनी पड़ती है। स्थानीय युवाओं के साथ छल सरकार ने स्थानीय युवाओं को रोजगार मुहैया कराने के उद्देश्य से शराब की बिक्री प्लेसमेन्ट एजेंसी के मार्फत चलाने का निर्णय लिया। कुछ साल एक तो अगले साल दूसरी एजेंसी का नाम आ जाता है पर यह सिंडिकेट है। नाम भले ही अलग हों पर लोग वही रहते हैं। इन प्लेसमेंट एजेंसी में दीगर राज्यों के बदमाश लोगों को जानकर रखा जाता है ताकि ये ग्राहकों से उगाही कर सकें। तभी विवादित कर्मियों को नौकरी से निकालने के बजाय उन्हें प्रोमोशन दिया जाता है। युवराज इसका प्रत्यक्ष उदाहरण हैं जिसे दूसरे अन्य काबिल युवाओं की नौकरी के एवज में प्लेसमेन्ट एजेंसी रख रही है। आरोप है कि इस पर किसी सेठ का वरदहस्त है जो खुद को एजेंसी के मालिक का खास कहता है। शिकायतें मिलने पर बीते साल सहायक आबकारी आयुक्त ने इस सेठ को ठेकों में जाने से मना कर दिया था। जिसका उस पर कोई फर्क नहीं पड़ा। कई सुपरवाइजर नाम न छापे जाने की शर्त पर बताते हैं कि सेठ नौकरी से निकालने की धमकी देता है और दुकान में जबरन घुस जाता है।

विभाग के पास नहीं है जवाब
इस पूरे मामले में जब हमने आबकारी विभाग से बात करनी चाही तो किसी से कोई जवाब नहीं मिला। सहयक आबकारी आयुक्त मंजूश्री कसेर अपने दफ्तर में नहीं मिली, मातहत बताए की वो रायपुर गई हैं। उनसे फ़ोन पर सम्पर्क किया गया पर बात नहीं हो पाई। उनके अनुपस्थिति में कार्यालय का काम देख रहे जिला सहायक आबकारी अधिकारी आईबी सिंह मारकंडेय ने ठेकों को लेकर शिकायत मिलने की बात स्वीकारी पर बिना आदेश के कार्रवाई और बयानबाज़ी से असमर्थता जाहिर कर दी। प्राइम वन वर्क फ़ोर्स प्राइवेट लिमिटेड के रायपुर के एक बड़े अधिकारी अंकित मारवा ने पहले बाहर होने की बात कही और उसके बाद फ़ोन नहीं उठाया। जब आबकारी उपनिरीक्षक आशीष उप्पल पर तथाकथित 10 लाख से अधिक के ऑफलाइन शराब बेचे जाने के मामले को सेठ-युवराज से मिलकर रफा-दफा करने के आरोप लगे तो उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उन्हें इस तरह की कोई जानकारी नहीं है। आरोप बेबुनियाद हैं। ठेके का ऑडिट हुआ है जिसकी रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है। रही सही बात युवराज की तो उसके खिलाफ जैसे मुझे शिकायतें मिली तो मैंने ही उसे डांट लगाई थी और सचेत किया था अन्यथा कानूनी कार्रवाई करना पड़ेगा।

source: VNS
 



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